सेवंत्री राम दरबार राजसमंद: राजसमंद का वो ऐतिहासिक स्थल जहाँ प्रभु श्रीराम का पुष्पक विमान उतरा था। जानिए इस रामायण कालीन गाँव, सीता रसोई और यहाँ पहुँचने की पूरी जानकारी।
फैक्ट फाइल: सेवंत्री राम दरबार राजसमंद (Fact File: Sevantri Ram Darbar)
- स्थान का नाम (Place Name)सेवंत्री (Sevant
- संबंधित जिला (District)राजसमंद, राजस्थान (Rajsamand, Rajasthan)
- मुख्य ऐतिहासिक काल (Historical Era)रामायण काल / त्रेतायुग (Ramayana Era / Treta Yuga)
- प्रमुख मान्यता (Main Legend)लंका विजय के बाद भगवान राम के पुष्पक विमान का यहाँ विश्राम
- मुख्य आकर्षण (Key Attractions)राम दरबार मंदिर, श्रृंगी ऋषि आश्रम, सीता रसोई, राम कुइया
- पवित्र नदी (Sacred River)गोमती नदी (Gomti River)
- मंदिर की वास्तुकला (Architecture)पारंपरिक राजस्थानी और नागर शैली (Nagara Style)
- प्रमुख त्योहार (Major Festivals)रामनवमी (Rama Navami) और सावन मास (Shravan Month)
- निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport)महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, उदयपुर (लगभग 100 किमी)
- निकटतम प्रसिद्ध स्थल (Nearby Place)कुंभलगढ़ किला (Kumbhalgarh Fort) और नाथद्वारा
- दर्शन का समय (Temple Timings)सुबह 06:00 बजे से शाम 08:00 बजे तक (दैनिक)
- प्रवेश शुल्क (Entry Fee)बिल्कुल मुफ्त (Free Entry – धार्मिक स्थल)
सेवंत्री राम दरबार राजसमंद का पौराणिक इतिहास (Mythological History of Sevantri Ram Darbar)
इस पावन भूमि का इतिहास हजारों साल पुराना है। स्थानीय लोक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं (Mythological Stories) के अनुसार, यह स्थान भगवान श्रीराम के जीवन की एक बहुत महत्वपूर्ण घटना का गवाह रहा है।
भगवान श्रीराम का पुष्पक विमान से सेवंत्री आगमन
रामायण के अनुसार, लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद जब भगवान श्रीराम, माता सीता, भ्राता लक्ष्मण और वानर सेना के साथ पुष्पक विमान (Pushpak Vimana) में सवार होकर अयोध्या लौट रहे थे, तब उन्होंने मेवाड़ के इस शांत और घने वन क्षेत्र को देखा। इस तपोभूमि की आध्यात्मिक ऊर्जा और प्राकृतिक सुंदरता से आकर्षित होकर उन्होंने अपने विमान को यहाँ उतारा और कुछ समय के लिए यहाँ विश्राम (Rest) किया। इसी विश्राम के दौरान भगवान राम ने यहाँ एक दिव्य सभा बुलाई थी, जिसे आज भी स्थानीय लोग ‘राम दरबार’ के नाम से पूजते हैं।
त्रेतायुग में राजा दशरथ के पुत्रकामेष्टि यज्ञ और श्रृंगी ऋषि का संबंध
सेवंत्री का संबंध भगवान राम के जन्म से भी पहले का है। इस क्षेत्र की पहाड़ियों में त्रेतायुग के महान संत श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली (Penance Site) है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि श्रृंगी वही प्रतापी संत हैं जिन्हें अयोध्या के राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ (Putrakamesti Yajna) संपन्न कराने का आमंत्रण दिया था। इस यज्ञ के पुण्य प्रताप से ही भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का अवतरण हुआ था। यज्ञ के पश्चात ऋषि श्रृंगी पुनः इसी वन क्षेत्र में लौट आए और यहाँ की गुफाओं (Natural Caves) में गहरी तपस्या की।
सेवंत्री वन क्षेत्र के मुख्य रामायण-कालीन साक्ष्य और स्थल
सेवंत्री के चारों तरफ फैली अरावली की पहाड़ियों (Aravalli Hills) और जंगलों में आज भी ऐसे कई स्थान हैं, जिनके नाम और पहचान सीधे रामायण के पात्रों से मेल खाते हैं।
सीता रसोई (Sita Rasoi) – माता सीता का विश्राम स्थल
जंगल के भीतर एक प्राचीन चट्टानी संरचना है, जिसे स्थानीय लोग ‘सीता रसोई’ कहते हैं। माना जाता है कि पुष्पक विमान से उतरने के बाद माता सीता ने यहाँ कुछ समय बिताया था और विश्राम के दौरान कंद-मूल व कंदूरी तैयार की थी। आज भी यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस स्थान को बड़े आदर के साथ नमन करते हैं।
राम कुइया (Ram Kuniya) – प्राचीन जल स्रोत
पहाड़ी के रास्ते में एक छोटा और गहरा जल स्रोत है जिसे ‘राम कुइया’ कहा जाता है। मान्यता है कि वन क्षेत्र में विश्राम के समय जब माता सीता को प्यास लगी, तब भगवान राम ने अपने बाण से भूमि को भेदकर स्वच्छ जल की यह कुइया तैयार की थी। अचरज की बात यह है कि घने पत्थरों के बीच स्थित इस कुइया का पानी कभी नहीं सूखता।
लक्ष्मण झूला और गोमती नदी का किनारा
यहाँ से होकर बहने वाली पवित्र गोमती नदी (Gomti River) के किनारे कई ऐसी दुर्गम चट्टानें हैं, जिन्हें ‘लक्ष्मण झूला’ और लक्ष्मण जी की गतिविधियों से जोड़ा जाता है। पहाड़ी रास्तों पर बने पत्थरों के कटाव को स्थानीय लोग लक्ष्मण जी के पैरों के निशान (Footprints) मानते हैं।
सेवंत्री मंदिर की वर्तमान वास्तुकला और धार्मिक महत्व
सेवंत्री का राम दरबार और श्रृंगी ऋषि मंदिर पारंपरिक राजस्थानी और नगर शैली (Nagara Style) की वास्तुकला का बेहतरीन मिश्रण पेश करते हैं। मंदिर परिसर का निर्माण मुख्य रूप से स्थानीय अरावली पत्थरों और संगमरमर (Marble) से किया गया है।
गर्भगृह में स्थापित राम दरबार की दिव्य मूर्तियाँ
मंदिर के मुख्य गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में प्रवेश करते ही आपको एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है। यहाँ भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और उनके परम भक्त हनुमान जी की अत्यंत सुंदर प्रतिमाएँ स्थापित हैं। इन मूर्तियों पर की गई बारीक नक्काशी (Exquisite Carving) प्राचीन भारतीय शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर के खंभों (Pillars) और दीवारों पर देवी-देवताओं और रामायण के प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है।
सावन और रामनवमी (Rama Navami) पर आयोजित होने वाले विशेष उत्सव
यूं तो यहाँ साल भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन रामनवमी (Rama Navami) के त्योहार पर यहाँ का नजारा अलौकिक होता है। इस दिन पूरे मंदिर को फूलों और दीपकों से सजाया जाता है। इसके अलावा, सावन के महीने में जब अरावली की पहाड़ियाँ हरी चादर ओढ़ लेती हैं, तब प्रकृति और आध्यात्म का यह मिलन देखने हजारों की संख्या में दूर-दराज से भक्त (Devotees) यहाँ पहुँचते हैं।
सेवंत्री राम दरबार राजसमंद कैसे पहुँचें? (How to Reach Sevantri Rajsamand)
सड़क मार्ग द्वारा (By Road): यह स्थान राजसमंद जिला मुख्यालय से लगभग 35-40 किलोमीटर दूर है। उदयपुर, जोधपुर या अजमेर से आप निजी कैब या राजस्थान रोडवेज की बसों द्वारा सीधे राजसमंद आकर वहाँ से स्थानीय वाहन ले सकते हैं।
रेल मार्ग द्वारा (By Train): सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन उदयपुर सिटी (Udaipur City Railway Station) या फालना (Falna) है, जहाँ से आप आसानी से टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।
हवाई मार्ग द्वारा (By Air): यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर का महाराणा प्रताप एयरपोर्ट (Maharana Pratap Airport) है, जो सेवंत्री से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
उदयपुर से सेवंत्री राजसमंद की कुल दूरी कितनी है और वहाँ सड़क मार्ग से कैसे पहुँच सकते हैं?
उदयपुर से सेवंत्री गाँव की कुल दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। यदि आप कार या निजी कैब से यात्रा कर रहे हैं, तो राष्ट्रीय राजमार्ग 58 (NH-58) के रास्ते यहाँ पहुँचने में करीब 2 घंटे का समय लगता है। यह मार्ग बेहद खूबसूरत है, जो अरावली की सुंदर पहाड़ियों से होकर गुजरता है। आप उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन या महाराणा प्रताप एयरपोर्ट से सीधे टैक्सी किराए पर लेकर राजसमंद (Rajsamand) होते हुए आसानी से सेवंत्री पहुँच सकते हैं। वीकेंड की छोटी और शांत यात्रा के लिए यह एक बेहतरीन और सुगम विकल्प है।
सेवंत्री राजसमंद राम दरबार मंदिर का मुख्य धार्मिक महत्व क्या है और श्रद्धालु यहाँ क्यों आते हैं?
सेवंत्री राजसमंद का राम दरबार मंदिर (Ram Darbar Temple) मेवाड़ क्षेत्र का एक अत्यंत पवित्र और चमत्कारी स्थान माना जाता है। मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम ने स्वयं इस पावन भूमि पर कुछ समय विश्राम किया था। मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मण जी, माता सीता और हनुमान जी के साथ प्रभु श्री राम की अत्यंत दिव्य प्रतिमा स्थापित है। इस तपोभूमि की असीम आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण यहाँ आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। विशेष रूप से रामनवमी और सावन में यहाँ भव्य उत्सव मनाया जाता है।
श्रृंगी ऋषि आश्रम (Shrungi Rishi Ashram) का इतिहास क्या है और इसका रामायण से क्या संबंध है?
सेवंत्री की पहाड़ियों में स्थित श्रृंगी ऋषि आश्रम सीधे रामायण काल (Ramayana Era) से संबंध रखता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि श्रृंगी वही महान प्रतापी संत हैं जिन्होंने राजा दशरथ के लिए अयोध्या में पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया था, जिसके फलस्वरूप भगवान राम का जन्म हुआ। यज्ञ संपन्न कराने के बाद ऋषि श्रृंगी इसी वन क्षेत्र में लौट आए थे और यहाँ की प्राकृतिक गुफाओं में वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। आज भी यह शांत और आध्यात्मिक स्थल ऋषियों की प्राचीन तपोस्थली और ऐतिहासिक गुफा के रूप में बेहद पूजनीय है।
सेवंत्री गाँव राजसमंद के प्राचीन इतिहास (History of Sevantri Village) की मुख्य बातें क्या हैं?
राजसमंद जिले के चारभुजा क्षेत्र में स्थित सेवंत्री गाँव का इतिहास गौरवशाली और प्राचीन है। यह गाँव त्रेतायुग से लेकर मध्यकालीन मेवाड़ के इतिहास का साक्षी रहा है। जहाँ एक तरफ इसका संबंध रामायण कालीन घटनाओं, पुष्पक विमान के आगमन और महान श्रृंगी ऋषि की तपस्या से जुड़ा है, वहीं दूसरी तरफ यह अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा होने के कारण राजपूताना काल में भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। वर्तमान में यह गाँव अपनी समृद्ध धार्मिक विरासत, लोक कलाओं और प्राचीन संस्कृति को बखूबी संजोए हुए है।
सेवंत्री राजसमंद से बहने वाली गोमती नदी (Gomti River) का क्या पौराणिक और भौगोलिक महत्व है?
सेवंत्री गाँव के पास से बहने वाली पवित्र गोमती नदी इस पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा (Lifeline) है। अरावली की पहाड़ियों से निकलने वाली यह नदी सेवंत्री के प्राकृतिक सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम की वानर सेना और माता सीता ने इसी नदी के किनारों पर विश्राम किया था। आगे चलकर इसी नदी के पानी को रोककर ऐतिहासिक राजसमंद झील (Rajsamand Lake) का निर्माण किया गया था। मानसून के मौसम में इस नदी का प्रवाह और इसके आस-पास के नजारे पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को बेहद आकर्षित करते हैं।
मेवाड़ के इतिहास में महाराणा हमीर सिंह और सेवंत्री राम दरबार का क्या ऐतिहासिक संबंध रहा है?
सेवंत्री का राम दरबार (Ram Darbar) न केवल त्रेतायुग बल्कि मध्यकालीन मेवाड़ इतिहास (Mewar History) से भी जुड़ा है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, करीब 700 साल पहले मेवाड़ के पराक्रमी शासक महाराणा हमीर सिंह इस क्षेत्र से गुजर रहे थे। युद्ध अभियानों और यात्रा के दौरान उन्होंने अपनी सेना के साथ इसी पवित्र राम दरबार वन क्षेत्र में रात्रि विश्राम (Night Stay) किया था। महाराणा हमीर सिंह भगवान राम के परम भक्त थे और इस तपोभूमि की आध्यात्मिक ऊर्जा से बेहद प्रभावित हुए थे। यही कारण है कि राजपूत काल में भी इस धार्मिक स्थल को विशेष संरक्षण और सम्मान मिला।
सेवंत्री वन क्षेत्र में स्थित गोमती रामेश्वर महादेव मंदिर और भगवान राम के बाण का क्या रहस्य है?
सेवंत्री क्षेत्र में स्थित गोमती रामेश्वर महादेव मंदिर (Gomti Rameshwar Mahadev Temple) का इतिहास बेहद चमत्कारी है। मंदिर के स्थानीय पुजारियों के अनुसार, त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने स्वयं इस स्थान पर भगवान शिव के दिव्य स्वरूप की स्थापना की थी। स्थापना के पश्चात शिवजी के अभिषेक और वानर सेना के पीने के पानी के लिए कोई स्रोत नहीं था, तब प्रभु श्री राम ने भूमि पर अपने बाण से प्रहार कर एक पवित्र जलस्रोत प्रकट किया था। यह पवित्र जल कुंड आज भी मंदिर परिसर में मौजूद है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता और श्रद्धालु इसे अमृत मानते हैं।
सेवंत्री का महाभारत और पांडवों से कनेक्शन (Sevantri’s Connection with Mahabharata and Pandavas)
जी हाँ, सेवंत्री का यह घना वन क्षेत्र अद्भुत है क्योंकि इसका संबंध रामायण के साथ-साथ महाभारत काल (Mahabharata Era) से भी माना जाता है। स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, द्वापरयुग में जब पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला था, तब उन्होंने अपने वनवास काल का कुछ समय राजसमंद (Rajsamand) के इसी दुर्गम और सुरक्षित अरावली वन क्षेत्र में व्यतीत किया था। पांडवों ने यहाँ रहकर श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली पर पूजा-अर्चना की थी। इस तरह यह पावन भूमि त्रेतायुग और द्वापरयुग दोनों महाकाव्यों के इतिहास को खुद में समेटे हुए है।
सेवंत्री क्षेत्र में तपस्या करने वाले अन्य ऋषि-मुनि (Other Sages Who Meditated in Sevantri Area)
सेवंत्री का यह पूरा पहाड़ी इलाका प्राचीन काल से ही उच्च कोटि के संतों की गुप्त तपोभूमि रहा है。 यहाँ के मुख्य मंदिर और गुफाओं के इतिहास से पता चलता है कि त्रेतायुग में महान श्रृंगी ऋषि के कठिन एकांत वास के अलावा, द्वापर और मध्यकाल में हारित ऋषि (Harit Rishi) जैसे महान दिव्य मुनियों ने भी इस स्थान पर लंबे समय तक गहरी तपस्या (Penance) की थी। इन सिद्ध संतों के ध्यान और मंत्रोच्चारण के कारण ही इस पूरे क्षेत्र के वातावरण में आज भी एक अनोखी शांति और सकारात्मक आध्यात्मिक तरंगें महसूस की जाती हैं, जो ध्यान लगाने के लिए उत्तम हैं।
रोकड़िया हनुमान जी मंदिर सेवंत्री (Rokadiya Hanuman Ji Temple Sevantri)
सेवंत्री के घने जंगलों के बीच राम दरबार के नजदीक ही रोकड़िया हनुमान जी (Rokadiya Hanuman Ji) का एक प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। रामायण कालीन मान्यताओं के अनुसार, जहाँ राम दरबार लगा था, वहीं पहरेदारी के लिए संकटमोचन हनुमान जी भी विराजमान हुए थे। ‘रोकड़िया’ शब्द का स्थानीय अर्थ ‘तुरंत संकट रोकने वाले’ या ‘मनोकामना पूरी करने वाले’ से है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु राम दरबार के दर्शन करने के बाद रोकड़िया हनुमान जी के चरणों में शीश ज़रूर नवाते हैं। मान्यता है कि इनके दर्शन के बिना सेवंत्री की यह धार्मिक यात्रा अधूरी मानी जाती है।
श्री रूपनारायण जी मंदिर सेवंत्री की अनूठी वास्तुकला (Unique Architecture of Shree Roopnarayan Ji Temple Sevantri)
सेवंत्री स्थित श्री रूपनारायण जी मंदिर भारतीय शिल्पकला और इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह दो मंजिला संरचना (Two-Story Structure) है। प्राचीन काल में बने मूल मंदिर को बिना कोई नुकसान पहुँचाए या तोड़े, उसके ठीक ऊपर एक नए भव्य सफेद संगमरमर (White Marble) के मंदिर का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, मंदिर की सुरक्षा के लिए इसके चारों तरफ 25 फीट ऊँची मजबूत दीवार (परकोटा) बनाई गई है, जिसके भीतर एक रहस्यमयी प्राचीन गुप्त सुरंग (Secret Tunnel) भी बनी हुई है
रूपनारायण मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ (Deities Installed in Roopnarayan Temple)
इस ऐतिहासिक मंदिर के मुख्य गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में भगवान विष्णु के अत्यंत मनमोहक चतुर्भुज रूप (कृष्ण स्वरूप) की पूजा की जाती है। इस दिव्य प्रतिमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान यहाँ अपनी दोनों रानियों—माता श्रीदेवी (लक्ष्मी जी) और माता भूदेवी (पृथ्वी माँ) के साथ साक्षात विराजमान हैं। काले संगमरमर से निर्मित इस विग्रह में भगवान अपने चारों हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए हैं। मूर्ति की प्राचीन शिल्पकला और उस पर की गई बारीक नक्काशी भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
रूपनारायण मंदिर और मधुमक्खियों का चमत्कार (Roopnarayan Temple and the Miracle of Honeybees)
स्थानीय लोक मान्यताओं और मेवाड़ के इतिहास के अनुसार, मध्यकाल में जब विदेशी आक्रांताओं और मुगलों ने इस समृद्ध मंदिर को लूटने और मूर्तियों को खंडित करने का प्रयास किया, तब एक अद्भुत चमत्कार हुआ। आक्रमण के दौरान अचानक मंदिर के कोनों से हजारों बड़ी मधुमक्खियों (भंवरों) का झुंड निकल आया। इन मधुमक्खियों ने शत्रुओं की विशाल सेना पर जोरदार हमला कर दिया, जिससे भयभीत होकर मुगल सैनिक अपनी जान बचाकर भाग खड़े हुए। इस घटना के बाद से इस मंदिर की चमत्कारी शक्ति पर लोगों का विश्वास और दृढ़ हो गया।
रूपनारायण मंदिर का पांडव और महाभारत कनेक्शन (Pandava Connection with Roopnarayan Temple)
सेवंत्री के इस पावन मंदिर का इतिहास 5,000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, द्वापरयुग में जब पांडव भाई द्रौपदी के साथ अपने 12 वर्ष के कठिन वनवास और अज्ञातवास पर थे, तब उन्होंने अरावली की इन सुरक्षित पहाड़ियों को अपना आश्रय स्थल बनाया था। इसी वनवास काल के दौरान पांडवों ने स्वयं इस गुप्त स्थान पर भगवान विष्णु के इस स्वरूप की स्थापना की और नियमित रूप से उनकी पूजा-अर्चना की थी। यही कारण है कि इसे मेवाड़ के सबसे प्राचीन पौराणिक तीर्थों में गिना जाता है।
रूपनारायण जी मंदिर के आस-पास की पहाड़ियों का आयुर्वेदिक और प्राकृतिक महत्व क्या है?
रूपनारायण जी मंदिर गोमती नदी के तट और ‘हिंगा-हिंगि’ नामक दो प्राचीन व पवित्र पहाड़ों के बीच स्थित है। यह पूरा वन क्षेत्र अपनी अद्वितीय जैव-विविधता (Biodiversity) के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इन पहाड़ियों पर ऐसी दुर्लभ और चमत्कारी औषधीय जड़ी-बूटियाँ व वनस्पतियाँ पाई जाती हैं, जो भारत में केवल हिमालय पर्वत श्रृंखला (Himalayan Range) के अलावा पूरी दुनिया में और कहीं नहीं मिलतीं। प्राचीन काल में यहाँ के ऋषि-मुनि इन्हीं वनस्पतियों से असाध्य रोगों का इलाज करते थे, जिससे इसका प्राकृतिक महत्व बहुत बढ़ जाता
सेवंत्री राम दरबार राजसमंद में क्या देखें?
राम दरबार मंदिर (Ram Darbar Temple)यहाँ का मुख्य आकर्षण भगवान राम का भव्य दरबार है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्री राम और माता सीता सिंहासन पर विराजमान हैं। उनके एक तरफ लक्ष्मण जी और दूसरी तरफ भरत जी खड़े हैं, जबकि नीचे की ओर शत्रुघ्न जी और परम भक्त हनुमान जी बैठे हुए हैं। यह दृश्य बेहद अलौकिक और शांतिपूर्ण है।
लक्ष्मण झूला (Lakshman Jhula)राम दरबार मंदिर के पास ही गोमती नदी पर बना एक मजबूत लोहे के तारों का झूला (सस्पेंशन ब्रिज) है, जिसे स्थानीय लोग लक्ष्मण झूला कहते हैं।जब आप इस पुल के बीच में जाते हैं, तो यह हल्का सा झूलता हुआ महसूस होता है।यहाँ से चारों तरफ का नजारा बेहद खूबसूरत दिखता है। खासकर बारिश के मौसम में, जब चारों तरफ अरावली की हरी-भरी पहाड़ियाँ और नीचे बहती गोमती नदी दिखाई देती है, तो यह दृश्य देखते ही बनता है।
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