राजस्थान के देसी खेल आज की पीढ़ी भूल गई है।आज के डिजिटल युग में जहाँ बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर ‘पबजी’ और ‘फ्री फायर’ में व्यस्त हैं, वहीं राजस्थान के गाँवों की गलियों से वो ‘देसी’ खेल गायब हो गए हैं जो कभी बचपन की जान हुआ करते थे। इन पारंपरिक खेलों के लिए किसी महंगे गैजेट या मैदान की जरूरत नहीं होती थी, बल्कि सिर्फ कुछ दोस्तों और थोड़ी सी माटी की जरूरत होती थी।आइए याद करते हैं राजस्थान के ऐसे ही 5 विलुप्त होते खेल और जानते हैं उन्हें खेलने के नियम:
सतोलिया (पिट्ठू गरम) – गजब का निशाना और फुर्ती
सतोलिया (पिट्ठू गरम) राजस्थान के ग्रामीण इलाकों का सबसे लोकप्रिय और रोमांचक खेल है। इसमें दो टीमें होती हैं, जहाँ जमीन पर सात चपटे पत्थरों (ठीकड़ों) को एक के ऊपर एक सजाया जाता है। एक टीम का खिलाड़ी निश्चित दूरी से रबर की गेंद मारकर पत्थरों की इस ढेरी को गिराता है, और फिर उसकी टीम गेंद से बचते हुए उन पत्थरों को वापस जमाने की कोशिश करती है। इस बीच विरोधी टीम गेंद से मारकर खिलाड़ियों को आउट करने का प्रयास करती है; यदि पत्थर पहले जम जाएं तो टीम को ‘सतोलिया’ पॉइंट मिल जाता है।
गिल्ली-डंडा – मारवाड़ का क्रिकेट
गिल्ली-डंडा क्रिकेट के दौर से पहले राजस्थान का राजा खेल माना जाता था, जिसे एक लंबे डंडे और दोनों तरफ से नुकीली छोटी गिल्ली से खेला जाता है। इसमें खिलाड़ी जमीन के छोटे गड्ढे (‘गुत्ती’) पर रखी गिल्ली को डंडे से हवा में उछालकर पूरी ताकत से दूर मारता है। यदि विरोधी टीम गिल्ली को हवा में लपक ले तो खिलाड़ी आउट हो जाता है, अन्यथा गिल्ली गिरने की दूरी को डंडे से नापकर अंक (पॉइंट्स) तय किए जाते हैं।
रूमाल झपट्टा – चीते जैसी रफ्तार का खेल
रूमाल झपट्टा बच्चों की रफ्तार और मानसिक सजगता को परखने वाला एक मैदानी खेल है। इसमें दो टीमों के खिलाड़ी आमने-सामने खड़े होते हैं और जमीन के बीचों-बीच बने गोले में एक रूमाल रख दिया जाता है। रेफरी द्वारा कोई एक नंबर पुकारते ही दोनों टीमों के समान नंबर वाले खिलाड़ी तेजी से झपटते हैं; नियम यह है कि विरोधी खिलाड़ी के छूने (टच करने) से पहले रूमाल उठाकर अपनी टीम की रेखा के पार भागना होता है।
कंचे (अण्टी / मारबल्स का खेल) – एकाग्रता की पाठशाला
कंचे (अण्टी) राजस्थान के बच्चों का पसंदीदा खेल था, जहाँ रंग-बिरंगी काँच की गोलियाँ जीतना एक बड़ा स्टेटस सिंबल माना जाता था। इसमें जमीन पर एक छोटा गड्ढा (‘गली’) बनाया जाता है, जहाँ दो या दो से अधिक खिलाड़ी एक निश्चित दूरी से उंगली के सहारे निशाना लगाकर दूसरों के कंचों पर स्ट्राइक करते हैं या उन्हें गड्ढे में डालते हैं। सटीक निशाना लगाने वाला खिलाड़ी सामने वाले का कंचा जीत जाता है।
लोमड़ी कूद (या लंगड़ी टांग) – संतुलन और स्टेमिना
लोमड़ी कूद (लंगड़ी टांग) शारीरिक सहनशक्ति और संतुलन बढ़ाने वाला एक बेहतरीन खेल है। इसमें जमीन पर एक बड़ा चौकोर बॉक्स बनाकर उसे कई खानों (‘घर’) में बांटा जाता है। खिलाड़ी को एक पैर मोड़कर (लंगड़ी टांग से) कूदते हुए बिना किसी रेखा को छुए सभी खानों को पार करना होता है। खेल का सबसे कठिन चरण एक चपटे पत्थर (ठीकरी) को खाने में फेंककर, उसे बिना छुए लंगड़ी टांग से ही बाहर निकालना होता है।
राजस्थान के देसी खेल प्राचीन ग्रामीण जीवन के मनोरंजन का आधार था और जीवन को गति प्रदान करते थे।


