खाटू धाम का अद्भुत इतिहास: गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा और ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की रचना की दिव्य कहानी

जानिए खाटू धाम के परम भक्त गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा की वह दिव्य कहानी, जिन्होंने 45 दिनों की कठिन साधना के बाद बाबा श्याम की प्रेरणा से ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की रचना की।

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कौन थे गुरुदेव पंडित श्री चंद्र जी शर्मा खाटू श्याम जी?

श्री चंद्र जी शर्मा खाटू नरेश के एक परम और अनन्य भक्त थे। वे एक उच्च कोटि के साधक, कवि और आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन बाबा श्याम की भक्ति और उनकी महिमा के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दिया। श्याम जगत में उन्हें ‘गुरुदेव’ के नाम से बड़े ही आदर के साथ याद किया जाता है ।

कैसे हुई ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की रचना? (The Divine Story)

इस महाग्रंथ की रचना कोई साधारण साहित्यिक कार्य नहीं था, बल्कि यह बाबा श्याम की सीधी प्रेरणा और एक कड़े आध्यात्मिक अनुष्ठान का परिणाम था।

गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा और अखंड ज्योति पाठ की कहानी

माना जाता है कि कलयुग के अवतारी बाबा श्याम ने स्वयं गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा को स्वप्न में दर्शन दिए थे। बाबा की इच्छा थी कि उनके संपूर्ण जीवन चरित्र, महाभारत काल के महान बलिदान (शीश दान) और भगवान श्री कृष्ण द्वारा उन्हें मिले कलयुग के महावरदान की गाथा को सरल शब्दों में पिरोया जाए, ताकि कलयुग का आम मानव भी इसे पढ़कर अक्षय पुण्य का भागी बन सके।

45 दिनों की निराहार कठिन साधना और श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ का लेखन

बाबा की प्रेरणा से गुरुदेव 45 दिनों की कठिन निराहार साधना में लीन हो गए। लेखन के दौरान उनके सम्मुख बाबा श्याम की अखंड ज्योति प्रज्वलित रही। मान्यता है कि चौपाइयां लिखते समय स्वयं बाबा श्याम उनके हाथ को संचालित कर शब्द पिरोते थे। यही कारण है कि इस महापाठ की एक-एक दिव्य पंक्ति आज भी किसी सिद्ध मंत्र के समान शक्तिशाली और चमत्कारी असर दिखाती है।

क्या है श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ के भीतर? (Inside the Text)

पंडित चंद्र जी शर्मा द्वारा रचित इस ग्रंथ में बाबा श्याम (बर्बरीक) के जीवन के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को बेहद मार्मिक और संगीतमय तरीके से लिखा गया है:

बर्बरीक का जन्म और बाल्यकाल: कैसे महाबली भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र के रूप में उनका जन्म हुआ।

शस्त्र और वरदान की प्राप्ति: माता अहिलवती से मिले संस्कार और शिवजी की तपस्या कर तीन अमोघ बाण प्राप्त करने की कथा।

महाभारत युद्ध और श्री कृष्ण का छल: युद्ध भूमि की ओर प्रस्थान, मार्ग में भगवान कृष्ण से संवाद और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपने ‘शीश का दान’ देना।

श्याम नाम का वरदान: श्री कृष्ण द्वारा रीझकर बर्बरीक को अपना स्वयं का नाम ‘श्याम’ देना और कलयुग में खाटू धाम में प्रकट होने का वरदान।

श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ का महत्व और प्रभाव

कहा जाता है कि जहाँ भी श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ पूरी मर्यादा और शुद्धता के साथ किया जाता है, वहाँ साक्षात बाबा श्याम मोरछड़ी लेकर पहरा देते हैं। गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा ने जन-जन के कल्याण के लिए इस अमृतवाणी को समाज को सौंपा ताकि कलयुग के कष्टों से जूझ रहा मनुष्य मानसिक शांति और संकटों से मुक्ति पा सके। आज संजय मित्तल जैसे देश के बड़े-बड़े भजन गायकों ने गुरुदेव द्वारा रचित इसी पाठ को गाकर घर-घर तक पहुँचाया है।

गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा का जीवन परिचय और बाबा श्याम से संबंध

परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्री चंद्र जी शर्मा (Pt. Chandra Ji Sharma) खाटू नरेश के एक अनन्य साधक और सिद्ध कवि थे। वे मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले थे, जिनका पूरा जीवन बाबा श्याम की भक्ति और उनकी महिमा के प्रचार-प्रसार में बीता।

धार्मिक इतिहास के अनुसार, गुरुदेव ने 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (Mid-20th Century) में अपने गुरु श्री सोहन लाल लोहाकार जी के दिव्य मार्गदर्शन में इस महाग्रंथ को शब्दों में पिरोया था।

बाबा श्याम से उनका संबंध एक सच्चे भक्त और भगवान जैसा था। उनकी निश्छल भक्ति से रीझकर स्वयं खाटू नरेश ने उन्हें स्वप्न में प्रेरणा दी थी, जिसके बाद उन्होंने 45 दिनों की निराहार कठिन साधना करके इस जाग्रत पाठ की रचना पूरी की।

क्या गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा ने अखंड ज्योति पाठ के अलावा भी कुछ लिखा है?

गुरुदेव का सबसे मुख्य, प्रामाणिक और एकमात्र सिद्ध महाग्रंथ ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ ही है, जिसे दिल्ली के प्रसिद्ध ‘पूजा प्रकाशन’ द्वारा मूल रूप से प्रकाशित किया गया है। इस ग्रंथ की खास बात यह है कि यह केवल एक सामान्य पाठ नहीं है, बल्कि इसके भीतर गुरुदेव ने बाबा श्याम की स्तुति के लिए कई अद्भुत स्तोत्र, आरती, प्रार्थनाएं और विशेष भजनों (Bhajans & Stutis) को भी पिरोया है।

आज जब आप मंचों पर संगीतकारों द्वारा गाए जाने वाले कई लोकप्रिय भजनों की मूल पंक्तियाँ सुनते हैं, तो उनमें से अधिकांश स्तुतियां इसी मूल ग्रंथ ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ के अलग-अलग अध्यायों से ली गई हैं। इसलिए, यदि आप गुरुदेव द्वारा रचित बाबा श्याम का संपूर्ण साहित्य पढ़ना चाहते हैं, तो उनकी मूल पुस्तक श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ (अमेज़न या पूजा प्रकाशन) ही सबसे सर्वोत्तम माध्यम है, जिसमें बाबा को रिझाने के सारे गुप्त मंत्र और स्तुतियां एक साथ मौजूद हैं।

श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ के रचयिता और इसके मूल 8 भाग (Chapters)

इस जाग्रत पाठ के एकमात्र प्रामाणिक रचयिता श्री चंद्र जी शर्मा ही हैं। उन्होंने बाबा श्याम के पूरे चरित्र को कुल 8 मूल भागों (अध्यायों) में विभाजित किया है, जिसे पूर्ण करने में लगभग 4 से 5 घंटे का समय लगता है। इसके प्रामाणिक भाग इस प्रकार हैं:

• भाग 1 (मंगलाचरण एवं परिचय): इसमें भगवान गणेश, सरस्वती और गुरु वंदना के साथ बाबा श्याम की महिमा की शुरुआत होती है।

• भाग 2 (महाबली बर्बरीक का जन्म): पांडव पुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच-अहिलवती के पुत्र के रूप में बर्बरीक के जन्म की कथा।

भाग 3 (कठिन तपस्या और तीन बाण): बर्बरीक द्वारा भगवान शिव और आदिशक्ति की आराधना कर ‘तीन अमोघ बाण’ प्राप्त करने का वर्णन।

भाग 4 (महाभारत युद्ध की ओर प्रस्थान): माता को ‘हारे का सहारा’ बनने का वचन देकर कुरुक्षेत्र के मैदान की ओर कूच करना।

• भाग 5 (श्री कृष्ण और बर्बरीक संवाद): ब्राह्मण भेष में भगवान श्री कृष्ण द्वारा बर्बरीक के बाणों की परीक्षा लेना और पीपल के वृक्ष के पत्तों को एक ही बाण से भेदना।

• भाग 6 (शीश का महादान): धर्म की रक्षा के लिए फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को बर्बरीक द्वारा हंसते-हंसते अपने शीश का दान करना।

भाग 7 (महाभारत युद्ध का साक्षी): श्री कृष्ण द्वारा शीश को ऊंचे स्थान पर स्थापित करना और बर्बरीक द्वारा पूरे युद्ध को अपनी आंखों से देखना।

• भाग 8 (श्याम नाम का वरदान और खाटू प्राकट्य): श्री कृष्ण द्वारा बर्बरीक को अपना नाम ‘श्याम’ देना और कलयुग में खाटू धाम में पूजे जाने का अमर वरदान।

श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ पुस्तक ऑनलाइन कहाँ से खरीदें?

इस सिद्ध ग्रंथ का मूल प्रकाशन दिल्ली के प्रसिद्ध ‘पूजा प्रकाशन’ (Pooja Prakashan) द्वारा किया गया है। वर्तमान में भक्त इसे घर बैठे आसानी से मंगवाने के लिए इन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं:• अमेज़न इंडिया (Amazon India): आप ऑनलाइन अमेज़न स्टोर पर जाकर ‘Shri Shyam Akhand Jyoti Path Book by Pooja Prakashan’ सर्च करके इसे आसानी से ऑर्डर कर सकते हैं।• स्थानीय खाटू धाम बाजार: यदि आप खाटू श्याम जी जा रहे हैं, तो मुख्य मंदिर के आस-पास की प्रामाणिक धार्मिक पुस्तकों की दुकानों पर यह पॉकेट-साइज़ गुटका पुस्तक मात्र ₹30 से ₹50 के बीच मिल जाती है।

श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की मुख्य चौपाइयों (लिरिक्स)

ब्रह्मलीन पूज्यनीय श्री चन्द्र शर्मा जी महाराज हैं) खाटू श्याम जी की महिमा, बरबरीक के जीवन, और उनके शीश दान की कथा पर आधारित एक बेहद मंगलकारी और अलौकिक पाठ है।

इस पाठ के हर अध्याय या भाग के बीच में एक मुख्य स्थाई चौपाई (धून) बार-बार दोहराई जाती है, जो इस प्रकार है:

अखण्ड ज्योति है अपार माया, श्याम देव की परबल छाया।श्याम श्री श्याम श्री श्याम, जय जय श्याम।।

पाठ का प्रारंभ और मंगलाचरण चौपाई

अखण्ड ज्योति है अपार माया, श्याम देव की परबल छाया।जिसने मंगल पाठ कराया, श्याम धणी की किरपा पाया।।दुःख संकट भय पास ना आते, पल में सब कलेश मिट जाते।हारे के साथी कहलाते, सारे बिगड़े काम बनाते।।

श्याम कुंड की महिमा

  • श्याम कुंड की महिमा प्यारी, प्रकट हुए यहां लख दातारी।निर्मल जल की उज्जवल धारा, इक्कीस पैड़ी नीचे किनारा।।जो कोई जल में नहावेगा, श्याम की शरण चला आवेगा।पख में नहावे रोग कटेगा, हृदय का भय दूर हटेगा।।नारी चढ़ावे जल यहां नहा कर, मन वांछित फल निश्चय पावे।अखंड ज्योति यह भेद बतावे, ब्रह्म मुहूर्त में हर समय गावे।।

बरबरीक का रणभूमि प्रस्थान और माता का वचन

  • चला वीर रण देख निताई, माता कही वो पकड़ी राही।तीन बाण कंधे पे सोहते, तन का बाना मन को मोहते।।लाल तिलक माथे अति चमके, मात के रक्त को उजलो दमके।आगे कदम बढ़ावे वीरा, मुख पर चमके तेज गंभीरा।।जिस रण पक्ष में हार हो उसका, दे वो साथ अमर तुम्हारा।नाम हो कहलाओगे नाथ, कहलाओगे नाथ।।

खाटू नगरी और राजा-रानी का प्रसंग

  • पहुंचे दूत खाटू नगरी में, श्रृंगार भरा पेटी सगरी में।राजा आंख मूंद के बोले, जहर पहुंचाओ रानी खोले।।देख रानी श्रृंगार सुहाना, मस्त होय गाने लगी गाना।बाल बाल में मोती पोए, गले का तन पर सोहे।।चम चम चम चमकीली बनकर, महिला उतरी छन छन कर।।

श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ के रचयिता पंडित श्री चंद्र जी शर्मा कहाँ के थे?

पंडित श्री चंद्र जी शर्मा मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले (शेखवाटी क्षेत्र) के रहने वाले थे। शेखवाटी की यह पावन भूमि खाटू श्याम जी के मुख्य धाम के बेहद करीब स्थित है।वे एक उच्च कोटि के सारस्वत ब्राह्मण और सिद्ध कवि थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन खाटू नरेश की अनन्य भक्ति और ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की रचना में समर्पित कर दिया।

यदि अनजाने में खाटू श्याम जी की अखंड ज्योत शांत (बुझ) जाए तो क्या करें? क्या यह अपशकुन है?

अखंड ज्योत बुझने पर घबराएं नहीं और न इसे अपशकुन समझें। बाबा श्याम अनजानी भूल के बजाय हमारे मन के भाव देखते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें। इसके बाद दीपक को साफ कर, नया घी डालें और बाबा का नाम लेकर ज्योति पुनः प्रज्वलित करें। दोष निवारण के लिए सम्मुख कपूर जलाएं या 108 बार “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करें। प्रायश्चित स्वरूप अगले दिन किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं अथवा मंदिर में गाय का शुद्ध घी दान करें।

घर पर श्याम बाबा की अखंड ज्योति जलाने के क्या नियम हैं?

घर पर बाबा श्याम की अखंड ज्योति स्थापित करने के ५ कड़े नियम हैं। सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अक्षत या रोली से ‘अष्टदल कमल’ की वेदी बनाएं और दीपक को उसके बीच में स्थापित करें। ज्योति के लिए हमेशा शुद्ध गाय के देसी घी और कच्चे सूत (कलावा) की मजबूत बत्ती का ही उपयोग करें। बत्ती साफ करते समय मुख्य लौ बुझने से बचाने के लिए पास में एक ‘सहयोगी ज्योति’ अवश्य जलाकर रखें। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि अखंड ज्योति की अवधि के दौरान घर को कभी भी ताला लगाकर खाली न छोड़ें।

खाटू श्याम बाबा की ज्योति में घी डालें या तेल?”

श्याम बाबा की अखंड ज्योति में हमेशा शुद्ध गाय के देसी घी का इस्तेमाल करना ही सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, देवताओं को प्रसन्न करने और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए घी की ज्योत सर्वश्रेष्ठ है। यदि किसी विशेष कारणवश गाय का शुद्ध घी उपलब्ध न हो, तभी आप तिल के तेल का प्रयोग कर सकते हैं। ध्यान रहे, बाबा श्याम की पूजा या अखंड ज्योति में सरसों के तेल का उपयोग पूरी तरह वर्जित है। हमेशा घी की ज्योत ही जलाएं।

घर पर श्याम बाबा की अखंड ज्योति जलाने के 5 कड़े नियम

घर पर बाबा श्याम की अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के पांच कड़े नियम हैं। सबसे पहले लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर अक्षत या रोली से ‘अष्टदल कमल’ की वेदी बनाएं और दीपक को उसके मध्य स्थापित करें। ज्योति के लिए हमेशा शुद्ध गाय के देसी घी और कच्चे सूत या कलावे की मजबूत बत्ती का ही उपयोग करें। कार्बन साफ करते समय या बत्ती आगे बढ़ाते समय मुख्य लौ बुझने से बचाने के लिए पास में एक ‘सहयोगी ज्योति’ अवश्य जलाकर रखें। सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि अखंड ज्योति की अवधि के दौरान घर को कभी भी ताला लगाकर खाली न छोड़ें तथा तामसिक भोजन और सूतक-पातक के नियमों का पूरी पवित्रता से पालन करें।

गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा और ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ की रचना की दिव्य कहानी पढ़कर आपको कैसा लगा?

पंडित श्री चंद्र जी शर्मा खाटू श्याम इतिहास

पंडित श्री चंद्र जी शर्मा मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के खाटू धाम (कस्बे) के ही निवासी थे। वे एक उच्च कोटि के सारस्वत ब्राह्मण, परम साधक और सिद्ध कवि थे। उनका पूरा जीवन बाबा श्याम की भक्ति, उनके चमत्कारों के दस्तावेजीकरण और अलौकिक भजनों की रचना में बीता।

धार्मिक इतिहास के अनुसार, 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (Mid-20th Century) में गुरुदेव श्री चंद्र जी शर्मा ने अपने गुरु श्री सोहन लाल लोहाकार जी के दिव्य मार्गदर्शन में एक कड़ा आध्यात्मिक अनुष्ठान शुरू किया था। मान्यता है कि स्वयं खाटू नरेश ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर अपने संपूर्ण जीवन चरित्र को शब्दों में पिरोने की प्रेरणा दी थी।

इसके बाद गुरुदेव ने लगातार 45 दिनों तक बिना कुछ खाए-पिए (निराहार रहकर) एकांत में एक अखंड दीपक के सम्मुख बैठकर ‘श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ’ महाग्रंथ की रचना की थी। उनके द्वारा रचित इस महापाठ के कुल 8 भाग (अध्याय) हैं, जिसमें बाबा बर्बरीक के जन्म से लेकर शीश दान और खाटू में प्राकट्य तक का संपूर्ण इतिहास संगीमय रूप में दर्ज है। आज देश के बड़े-बड़े भजन गायक (जैसे संजय मित्तल) उन्हीं के लिखे पाठ का गान कर घर-घर में अलख जगा रहे हैं।

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