क्या आप जानते हैं बीकानेर के लाइफलाइन कहे जाने वाले पीबीएम हॉस्पिटल (Prince Bijay Singh Memorial Hospital) का इतिहास एक पिता के आंसुओं से लिखा गया है? जानिए कैसे महाराजा गंगा सिंह जी (Maharaja Ganga Singh Ji) ने अपने जवान बेटे प्रिंस बिजय सिंह (Prince Bijay Singh) की अकाल मृत्यु के वियोग को प्रजा-कल्याण में बदल दिया। ‘Desi Rajasthan’ के इस विशेष लेख में पढ़ें अस्पताल के निर्माण की भावुक कहानी, इसके नाम के पीछे का असली सच (Bijay vs Vijay), उत्तर भारत के पहले रेडियम संस्थान का इतिहास और स्थानीय लोगों की अटूट श्रद्धा से जुड़े 5 जादुई एंगल्स (5 unique historical angles)। हमारी टीम के जमीनी अनुभव और लोकल गाइड की जुबानी सुनिए बीकानेर की इस ऐतिहासिक धरोहर की पूरी गाथा।
कौन थे प्रिंस बिजय सिंह? (Who was Prince Bijay Singh?)
बीकानेर के आधुनिक निर्माता महाराजा गंगा सिंह जी के छोटे सुपुत्र और महाराजा सार्दूल सिंह जी के अनुज प्रिंस बिजय सिंह (1909–1932) बीकानेर रियासत के ‘छत्तरगढ़’ के महाराज थे। वे बेहद प्रतिभावान, कैप्टन रैंक के सैन्य अधिकारी और घुड़सवारी व शिकार के बेहद शौकीन थे।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में (11 फरवरी 1932 को) प्रिंस बिजय सिंह का अचानक आकस्मिक निधन (sudden demise) हो गया। जवान बेटे की इस अकाल मृत्यु ने महाराजा गंगा सिंह जी को अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था।
पीबीएम हॉस्पिटल से जुड़े 5 अनूठे और जादुई एंगल्स (5 Unique Facts About PBM Bikaner)
एक राजा का अपने बेटे के लिए सबसे बड़ा तर्पण :पीबीएम हॉस्पिटल
जब एक आम पिता का जवान बेटा गुजरता है, तो वह शोक में डूब जाता है। लेकिन महाराजा गंगा सिंह जी ने अपने व्यक्तिगत वियोग (personal grief) को प्रजा-कल्याण (public welfare) की शक्ति में बदल दिया। उन्होंने बेटे की याद को अमर बनाने और बीकानेर की जनता को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं (world class healthcare) देने के लिए इस अस्पताल की नींव रखी। सबसे खास बात यह है कि इस भव्य अस्पताल को बनाने के लिए महाराजा ने सरकारी खजाने (state treasury) से एक भी रुपया नहीं लिया, बल्कि अपने निजी पर्स (Personal Wealth) से भारी धन आवंटित किया।
विजय सिंह नहीं, ‘बिजय सिंह’ है सही नाम (Bijay vs Vijay)
अक्सर लोग अनजाने में इसे ‘विजय सिंह’ लिख देते हैं, लेकिन ऐतिहासिक और आधिकारिक (official history) रूप से सही नाम ‘बिजय सिंह’ है। इसी कारण इस अस्पताल का शॉर्ट फॉर्म VBM नहीं बल्कि PBM है।
महत्वपूर्ण जानकारी: हाल ही में राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan) ने कड़े आदेश जारी किए हैं कि सभी सरकारी दस्तावेजों और बोर्ड पर केवल ‘प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल’ (Prince Bijay Singh Memorial) ही लिखा जाए।
उत्तर भारत का पहला रेडियम/कोबाल्ट संस्थान (First Radium Institute)
क्या आप जानते हैं कि 1930 के दशक में ही पीबीएम में उत्तर भारत का पहला ‘गंगा एक्स-रे और रेडियम संस्थान’ स्थापित कर दिया गया था? महाराजा गंगा सिंह जी खुद अस्थमा और कैंसर (cancer treatment) जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। वे नहीं चाहते थे कि बीकानेर के गरीब लोगों को इलाज के लिए मुंबई या विदेशों के चक्कर काटने पड़ें। उनकी इसी दूरदर्शिता (visionary approach) के कारण बीकानेर चिकित्सा के क्षेत्र में दशकों आगे निकल गया।
बीकानेर की अटूट श्रद्धा और विश्वास
हमारी टीम ने जब अस्पताल के मुख्य द्वार के पास स्थानीय लोगों से बातचीत की, तो एक बेहद दिलचस्प लोक-मान्यता (local belief) सामने आई। बीकानेर में आज भी यह गहरी श्रद्धा है कि अस्पताल के मुख्य गेट पर स्थित प्रिंस बिजय सिंह की आदमकद प्रतिमा (Statue of Prince Bijay Singh) को नमन करके जो भी मरीज अंदर जाता है, वह चमत्कारी रूप से ठीक होकर ही घर लौटता है। इसे आप अंधविश्वास कहें या अटूट श्रद्धा, लेकिन यह बीकानेर के लोगों का अपने राजकुमार के प्रति प्रेम दिखाता है।
सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मजबूत नींव (Foundation of SPMC)
1930 के दशक में महाराजा गंगा सिंह जी ने इस अस्पताल का जो लेआउट और नक्शा तैयार करवाया था, वह इतना आधुनिक और सुव्यवस्थित था कि आगे चलकर इसी परिसर ने राजस्थान के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में से एक, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज (SPMC) का रूप लिया।
पीबीएम हॉस्पिटल को बनाने में कितना समय लगा था? (How much time did it take to build PBM Hospital?)
PBM हॉस्पिटल को पूरी तरह तैयार होने में लगभग 2 वर्ष (2 Years) का समय लगा था। इस भव्य चिकित्सालय का निर्माण कार्य 1935 में शुरू हुआ था और यह 1937 में बनकर पूरी तरह तैयार हो गया, जिसके बाद इसे आम जनता के इलाज के लिए समर्पित (dedicated to the public) कर दिया गया।
क्या महाराजा गंगा सिंह ने पीबीएम हॉस्पिटल के लिए अपनी निजी संपत्ति दान की थी? (Did Maharaja Ganga Singh donate his personal wealth for PBM Hospital?)
हाँ, बिल्कुल! महाराजा गंगा सिंह जी अपने छोटे बेटे प्रिंस बिजय सिंह की अकाल मृत्यु से बेहद आहत थे। वे अपने बेटे की स्मृति को प्रजा की सेवा से जोड़कर अमर करना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने इस विशाल अस्पताल के निर्माण के लिए बीकानेर रियासत के सरकारी खजाने (State Treasury) से धन नहीं लिया, बल्कि अपनी निजी संपत्ति और निजी कोष (Personal Wealth/Privy Purse) से भारी धनराशि आवंटित की थी।
प्रिंस बिजय सिंह की मूर्ति को लेकर बीकानेर में क्या मान्यता है? (What is the belief regarding the statue of Prince Bijay Singh?)
बीकानेर के स्थानीय लोगों और मरीजों के बीच यह गहरी और अटूट श्रद्धा (deep faith/local belief) है कि अस्पताल के मुख्य द्वार पर स्थापित प्रिंस बिजय सिंह की आदमकद प्रतिमा (statue) के आगे जो भी मरीज या उसका परिवार पूरी श्रद्धा से शीश नवाकर (नमन करके) अंदर जाता है, वह अस्पताल से पूरी तरह स्वस्थ और ठीक होकर ही अपने घर लौटता है। लोग इसे राजकुमार का अपनी प्रजा के प्रति आज भी बना हुआ स्नेह और आशीर्वाद मानते हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में इसका नाम विजय सिंह है या बिजय सिंह? (Is the official name Vijay Singh or Bijay Singh?)
आधिकारिक और ऐतिहासिक सरकारी रिकॉर्ड (Official Government Records) में इसका सही नाम ‘बिजय सिंह’ (Bijay Singh) ही है, न कि विजय सिंह (Vijay Singh)। इसी कारण इस अस्पताल का संक्षिप्त नाम PBM (Prince Bijay Singh Memorial) है।
प्रिंस बिजय सिंह बीकानेर की जीवनी क्या है? (Prince Bijay Singh Bikaner biography
: प्रिंस बिजय सिंह (1909-1932) बीकानेर के आधुनिक निर्माता महाराजा गंगा सिंह जी के छोटे पुत्र और महाराजा सार्दूल सिंह जी के अनुज थे। वे बीकानेर रियासत के तहत ‘छत्तरगढ़’ के महाराज थे। वे एक प्रतिभावान युवा, कैप्टन रैंक के सैन्य अधिकारी और बेहतरीन घुड़सवार व शिकारी थे।
भारत का पहला रेडियम संस्थान कहाँ खुला था? (First Radium Institute in North India
भारत का पहला रेडियम और एक्स-रे संस्थान बीकानेर के पीबीएम अस्पताल परिसर में ही महाराजा गंगा सिंह जी द्वारा 1930 के दशक में स्थापित किया गया था, जिसे ‘गंगा एक्स-रे और रेडियम संस्थान’ (Ganga X-ray and Radium Institute) कहा जाता था।
प्रिंस बिजय सिंह कौन थे और उनका पीबीएम हॉस्पिटल से क्या संबंध है? (Who was Prince Bijay Singh
प्रिंस बिजय सिंह बीकानेर के राजकुमार थे। उन्हीं की याद और स्मृति को अमर बनाए रखने के लिए उनके पिता महाराजा गंगा सिंह जी ने अपने निजी कोष (personal wealth) से इस भव्य चिकित्सालय का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर इसका नाम ‘प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल’ (PBM) रखा गया।
पीबीएम हॉस्पिटल बीकानेर का इतिहास क्या है? (PBM Hospital Bikaner history
पीबीएम हॉस्पिटल का इतिहास एक राजा के अपने पुत्र के प्रति गहरे पारिवारिक वियोग (family bonding) और प्रजा-कल्याण की अनूठी मिसाल है। 1937 में बना यह अस्पताल शुरुआत में मर्दाना और जनाना विंग के साथ शुरू हुआ था, जो आज राजस्थान का एक बेहद प्रतिष्ठित चिकित्सा केंद्र और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज (SPMC) का मुख्य हिस्सा है।
आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर संस्थान (Acharya Tulsi Regional Cancer Center)
पीबीएम हॉस्पिटल की देशव्यापी प्रसिद्धि का सबसे बड़ा कारण यहाँ का कैंसर विंग (Cancer Wing) है। यह केंद्र भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त देश के चुनिंदा क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों (Regional Cancer Centres) में से एक है। यहाँ बेहद आधुनिक मशीनों द्वारा ₹0 के खर्च (Zero Cost Cancer Treatment) यानी मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कीमोथेरेपी, रेडिएशन और जटिल कैंसर सर्जरी की जाती है। दूर-दूर से मरीज यहाँ उम्मीद लेकर आते हैं।
- पूरा नाम (Full Name): प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल हॉस्पिटल (Prince Bijay Singh Memorial Hospital)
- स्थापना वर्ष (Establishment Year): 1930 के दशक में (बीकानेर के तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह जी द्वारा निर्मित)
- संबद्धता (Affiliation): सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर (S.P. Medical College, Bikaner)
- कुल बेड क्षमता (Total Bed Capacity): 1500+ से अधिक स्वीकृत बेड (विभिन्न सुपर-स्पेशियलिटी विंग्स को मिलाकर)
- दैनिक मरीज संख्या (Daily Patient Footfall): ओपीडी (OPD) में प्रतिदिन औसतन 4,000 से 6,000 मरीज परामर्श के लिए आते हैं।
- कवरेज क्षेत्र (Coverage Area): बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, जैसलमेर और पंजाब-हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्र।
- आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र (Acharya Tulsi Regional Cancer Trust & Research Centre): यह भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त देश के चुनिंदा क्षेत्रीय कैंसर केंद्रों में से एक है। यहाँ कैंसर का संपूर्ण इलाज (कीमो, रेडिएशन, सर्जरी) अत्याधुनिक मशीनों द्वारा किया जाता है।
- हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल (Haldiram Moolchand Heart Hospital): हृदय रोगों के इलाज, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाने के लिए यह एक समर्पित सुपर-स्पेशियलिटी विंग है।
- बाल रोग चिकित्सालय (Children Hospital / Pediatric Wing): नवजात शिशुओं और बच्चों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए संभाग का सबसे बड़ा केंद्र।
- मथुरादास माथुर आई हॉस्पिटल (Eye Hospital): आंखों के जटिल ऑपरेशनों और मोतियाबिंद सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध
- ट्रौमा सेंटर (Trauma Centre): राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़े होने के कारण, सड़क दुर्घटनाओं और आपातकालीन मामलों के त्वरित इलाज के लिए 24×7 सक्रिय एडवांस ट्रौमा यूनिट।
- सुरक्षा व्यवस्था (Security Setup) 24/7 होमगार्ड्स, निजी सुरक्षा गार्ड और प्रमुख पॉइंट पर सीसीटीवी (CCTV) निगरानी
- बिजली बैकअप (Power Backup) ग्रिड फेल होने की स्थिति में जीवन रक्षक उपकरणों के लिए हाई-कैपेसिटी जनरेटर सेट
- ऑक्सीजन प्लांट (Oxygen Plant Capacity) कोविड काल के बाद स्थापित स्वयं का लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) जनरेशन प्लांट
- शिकायत निवारण (Grievance Redressal) हेल्पडेस्क और राजस्थान संपर्क पोर्टल (181) के माध्यम से डिजिटल शिकायत केंद्र
- फार्मेसी काउंटर्स (Pharmacy Counters) अस्पताल परिसर के भीतर ही 10 से अधिक अलग-अलग दवा वितरण केंद्र
गंगा सिंह जी की दूरदर्शिता: ‘सैल्यूट गन’ की धातु से बनी ऐतिहासिक चीजेंएक बेहद दिलचस्प स्थानीय लोककथा और ऐतिहासिक तथ्य यह है कि महाराजा गंगा सिंह जी ने जब इस अस्पताल की नींव रखी, तो उन्होंने इसकी मजबूती और चिकित्सा उपकरणों की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया था। पुराने दौर के जानकारों का कहना है कि अस्पताल के कुछ पुराने वार्डों के मुख्य द्वारों पर लगी ऐतिहासिक फिटिंग्स और मजबूत बीम के लिए विशेष धातु का इस्तेमाल किया गया था, ताकि रेतीली हवाओं और मौसम के प्रभाव से अस्पताल की इमारत को कोई नुकसान न पहुँचे।
‘दवाइयों का महासागर‘: हर दिन बंटती हैं लाखों मुफ्त दवाइयांपीबीएम हॉस्पिटल का दवा वितरण तंत्र (Medicine Distribution System) किसी चमत्कार से कम नहीं है। राजस्थान सरकार की निशुल्क दवा योजना के तहत यहाँ बने काउंटर्स से प्रतिदिन लाखों की संख्या में दवाइयों की गोलियां और सीरप पूरी तरह निशुल्क बांटे जाते हैं। एक ही परिसर में इतने बड़े पैमाने पर मुफ्त दवा वितरण का यह रिकॉर्ड अपने आप में चिकित्सा प्रबंधन की एक अद्भुत मिसाल है।
. ‘मरुस्थल का मसीहा‘: रेगिस्तानी मरीजों के लिए विशेष ‘सैंड-प्रूफ’ व्यवस्थाएंबीकानेर और उसके आस-पास के जैसलमेर, बाड़मेर जैसे थार मरुस्थल (Thar Desert) के इलाकों में गर्मियों के दिनों में भीषण धूलभरी आंधियां (लू) चलती हैं। पीबीएम अस्पताल के पुराने वार्डों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उनकी मोटी दीवारें और ऊंचे वेंटिलेटर्स बाहर की झुलसाने वाली गर्मी को अंदर आने से रोकते हैं। यह राजस्थानी पारंपरिक वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो बिना भारी-भरकम बिजली खर्च के भी मरीजों को राहत देता है।
हल्दीराम हार्ट हॉस्पिटल: भुजिया के साम्राज्य से ‘दिल के इलाज’ तक का सफरभुजिया और नमकीन के ग्लोबल किंग ‘हल्दीराम’ परिवार ने इस अस्पताल को जब अपना योगदान दिया, तो उसके पीछे एक गहरा पारिवारिक संकल्प था। स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार के बुजुर्गों की यह इच्छा थी कि बीकानेर की जनता जिससे उन्हें इतना प्यार और तरक्की मिली, उन्हें कभी दिल की बीमारी के इलाज के लिए अपने घर-बार से दूर बड़े शहरों के महंगे चक्कर न काटने पड़ें। आज यहाँ दिल्ली-मुंबई के स्तर की कार्डियक केयर बहुत ही रियायती दरों पर मिलती है।
एशिया का सबसे बड़ा ‘फ्री-इलाज’ नेटवर्क होने का गौरवपीबीएम हॉस्पिटल का ‘आचार्य तुलसी क्षेत्रीय कैंसर संस्थान’ पूरे एशिया महाद्वीप में इस मायने में अनूठा है कि यहाँ किसी भी अन्य बड़े कैंसर संस्थान के मुकाबले सबसे ज्यादा मरीजों का ₹0 के खर्च (Absolutely Free Treatment) पर इलाज किया जाता है। राजस्थान सरकार की योजनाओं और दानदाताओं (भामाशाहों) के सहयोग से यहाँ हर साल हजारों जटिल कीमोथेरेपी और रेडिएशन बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं
बीकानेर का पीबीएम हॉस्पिटल (PBM Hospital) केवल ईंट-पत्थरों और डॉक्टरों का एक अस्पताल नहीं है, बल्कि यह महाराजा गंगा सिंह जी के अपने बेटे ‘प्रिंस बिजय सिंह’ के प्रति अटूट प्रेम और एक पिता के आंसुओं का जीवंत स्मारक है। एक राजकुमार की अकाल मृत्यु (Unfortunate Demise of the Prince) ने राजपरिवार को गहरा जख्म दिया, लेकिन उस दुख से उपजे इस संकल्प ने मरुभूमि के लाखों गरीब और लाचार मरीजों को नया जीवनदान दिया है।



