खाटू श्याम जी का अंगूरों का श्रृंगार! जानिए इसके पीछे का रहस्य, समय और जानिए श्रृंगार के बाद उन अंगूरों के महाप्रसाद का क्या होता है।
खाटू श्याम जी के अंगूरों के श्रृंगार का इतिहास
खाटू श्याम जी के अंगूरों के श्रृंगार का इतिहास ‘ठाकुर जी को लाड लड़ाने’ की प्राचीन वैष्णव परंपरा से जुड़ा है, जहाँ भगवान को राजा मानकर सेवा की जाती है। राजस्थान के शेखावाटी इलाके में ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी (45°C से अधिक) से बाबा के संवेदनशील शीश को बचाने के लिए प्राचीन काल में पुजारियों ने प्राकृतिक और ठंडे हरे-काले अंगूरों का बंगला सजाने की शुरुआत की। महाभारत काल के वीर बर्बरीक द्वारा किए गए शीश दान के प्रति अगाध श्रद्धा के कारण, भक्त अपने लाडले बाबा को शीतलता प्रदान करने के लिए सदियों से इस रसीले श्रृंगार की ऐतिहासिक परंपरा निभाते आ रहे हैं।
“बाबा श्याम को गर्मी में अंगूर ही क्यों चढ़ाए जाते हैं?”
खाटू श्याम जी महाभारत काल के वीर बर्बरीक हैं, जिनके पावन और संवेदनशील शीश (सिर) की पूजा खाटू धाम में होती है। राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की भीषण गर्मी से अपने लाडले राजा को बचाने और प्राकृतिक शीतलता प्रदान करने के लिए प्राचीन काल में पुजारियों ने यह अनूठी परंपरा शुरू की। स्वभाव से ठंडे, रसीले हरे और काले अंगूरों से बंगला सजाकर बाबा श्याम को तपती गर्मी से राहत दी जाती है।
“कितने किलो अंगूरों से होता है खाटू श्याम जी का श्रृंगार?
खाटू श्याम जी के भव्य अंगूरों के बंगले को सजाने के लिए नासिक और बेंगलुरु से मंगाए गए 500 से 1100 किलो (विशेष मौकों पर 1500 किलो तक) उत्तम क्वालिटी के काले और हरे अंगूरों का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिर के अनुभवी कारीगरों को एक-एक गुच्छे को बाबा के सिंहासन के चारों ओर बहुत सावधानी से पिरोने में 5 से 8 घंटे की कड़ी मेहनत लगती है, जो बाद में भक्तों को महाप्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं।
“Khatu shyam bhog angoor prasad खाटू श्याम अंगूरों का भोग
खाटू श्याम जी को अंगूरों का भोग साबुत फल और जूस दोनों रूपों में लगाया जाता है। भव्य ‘अंगूरों का बंगला’ सजाते समय सैकड़ों किलो साबुत हरे-काले अंगूरों के गुच्छे सीधे बाबा के सिंहासन और गर्भगृह में अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही, ज्येष्ठ की तपती गर्मी में दोपहर की भोग आरती के समय बाबा को शीतलता प्रदान करने के लिए ताजे अंगूरों का ठंडा रस (जूस) चांदी के कटोरे में पिलाया जाता है। यानी श्रृंगार के लिए साबुत अंगूर लटकाए जाते हैं और पीने के लिए ताजा जूस चढ़ाया जाता है।
“खाटू श्याम जी अंगूर का श्रृंगार कब है?”
खाटू श्याम जी का प्रसिद्ध ‘अंगूरों का श्रृंगार’ किसी निश्चित तारीख को नहीं होता, बल्कि यह हर साल मुख्य रूप से ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी (मई-जून) में या विशेष एकादशी (जैसे निर्जला एकादशी) पर किया जाता है। राजस्थान की तपती गर्मी में बाबा के पावन शीश को प्राकृतिक ठंडक पहुँचाने के लिए मंदिर कमेटी और सेवादार इस भव्य अंगूरों के बंगले को सजाते हैं। इसके अलावा, बड़े त्योहारों या भक्तों द्वारा विशेष मन्नत पूरी होने पर सवामणी के तौर पर भी बाबा का यह अलौकिक श्रृंगार किया जाता है।
खाटू श्याम जी को कौन से अंगूर चढ़ते हैं”
खाटू श्याम जी के भव्य ‘अंगूरों के श्रृंगार’ के लिए विशेष रूप से काले और हरे (लंबे और गोल दोनों प्रकार के) ताजे अंगूर चढ़ाए जाते हैं। बाबा श्याम के अलौकिक रूप को निखारने के लिए इन उत्तम और प्रीमियम क्वालिटी के अंगूरों को खास तौर पर नासिक और बेंगलुरु के बागानों से मंगवाया जाता है।श्रृंगार के समय इन अंगूरों के बड़े-बड़े और सुंदर गुच्छों का सीधे इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ‘अंगूरों का बंगला’ तैयार होता है। इसके अलावा, दोपहर की भोग आरती में बाबा को शीतलता प्रदान करने के लिए इन्हीं ताजे अंगूरों का ठंडा रस (जूस) बनाकर भी चांदी के पात्र में अर्पित किया जाता है।
खाटू श्याम अंगूरों के बंगले का प्रसाद कहां मिलता है”
खाटू श्याम जी के भव्य ‘अंगूरों के बंगले’ का पावन महाप्रसाद मुख्य रूप से खाटू श्याम मंदिर परिसर (राजस्थान) के भीतर ही मिलता है।शाम के समय जब बाबा श्याम का यह विशेष श्रृंगार बदला जाता है, तब सेवादारों द्वारा इन सभी पवित्र अंगूरों को उतारा जाता है। इसके तुरंत बाद, मंदिर परिसर में मौजूद सभी भक्तों, लाइन में लगे दर्शनार्थियों और स्थानीय सेवादारों में इसे मुफ्त बांटा जाता है। इसके अलावा, यदि कोई विशेष भक्त सवामणी के रूप में यह श्रृंगार करवाता है, तो वह भी मंदिर के बाहर अपने स्तर पर इस प्रसाद का वितरण करता है।
घर पर श्याम बाबा का अंगूर श्रृंगार कैसे करें”
घर पर श्याम बाबा का अंगूर श्रृंगार करने के लिए सबसे पहले बाजार से ताजे, सुंदर और पके हुए हरे और काले अंगूर खरीदकर लाएं। इन्हें साफ पानी से अच्छे से धोकर सुखा लें।इसके बाद, अपने घर के मंदिर में विराजमान बाबा श्याम के शीश (मूर्ति) के चारों तरफ छोटे और पतले धागों या सुई की मदद से अंगूर के छोटे-छोटे गुच्छों की माला बनाकर लटकाएं। आप चाहें तो सिंहासन के पीछे बैकग्राउंड में डबल-साइड टेप की मदद से अंगूरों को चिपकाकर एक सुंदर ‘अंगूरों का बंगला’ बना सकते हैं। अंत में, बाबा को ताजे अंगूरों का ठंडा जूस बनाकर चांदी या स्टील की कटोरी में भोग लगाएं।
Khatu shyam ji angoor bhog niyam”खाटू श्याम जी अंगूर श्रृंगार भोग नियम
खाटू श्याम जी को अंगूर का भोग लगाते समय पूरी पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए नासिक या बेंगलुरु के बिल्कुल ताजे, साफ और पके हुए हरे-काले अंगूरों को स्वच्छ पानी या गंगाजल से धोकर इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि बाबा श्याम भगवान कृष्ण का ही रूप हैं, इसलिए उनके इस फल भोग या ठंडे जूस में तुलसी का पत्ता रखना अनिवार्य है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इस रसीले प्रसाद को हमेशा चांदी, पीतल या साफ स्टील के बर्तन में ही अर्पित करना चाहिए। यह भोग मुख्य रूप से दोपहर की भोग आरती के समय लगाया जाता है, ताकि ज्येष्ठ की तपती गर्मी में बाबा के संवेदनशील शीश को तुरंत शीतलता और शांति मिल सके।
“Khatu shyam angoor shringar status खाटू श्याम श्रृंगार स्टेटस
“अंगूरों के बंगले में सजा है रूप तेरा प्यारा,तपती गर्मी में भी शीतल लगे दरबार तुम्हारा।जय श्री श्याम, हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा! 🙏✨”
“इस ज्येष्ठ की गर्मी में, भक्तों ने लाडले श्याम का क्या खूब लाड लड़ाया है…😍ताजे हरे और काले अंगूरों के बंगले में, मेरे खाटू नरेश को सजाया है! 🍇💫बोलो खाटू नरेश की जय!”
- “शीश के दानी का रूप है सबसे निराला,आज सजे हैं अंगूरों के बीच मेरे मोहन मुरली वाला।अद्भुत रूप, अलौकिक श्रृंगार! 🌿👑”
हारे का सहारा, अंगूरों में सजा बाबा का रूप प्यारा! 🍇 हरे कृष्ण, जय श्री श्याम! ❤️”
खाटू श्याम जी फलों का श्रृंगार”
खाटू श्याम जी का फलों का श्रृंगार मुख्य रूप से ज्येष्ठ (मई-जून) की भीषण गर्मी में बाबा श्याम के पावन शीश को प्राकृतिक शीतलता पहुँचाने के लिए किया जाता है। राजस्थान के तपते मौसम में अपने लाडले राजा को राहत देने के लिए पुजारियों द्वारा निभाई जाने वाली इस दिव्य परंपरा में सैकड़ों किलो ताजे अंगूर, सेब, संतरे, अनार और मौसमी फलों से गर्भगृह को एक आलीशान ‘फलों के बंगले’ का रूप दिया जाता है। इस दौरान दोपहर की भोग आरती में बाबा को ताजे फलों का ठंडा रस (जूस) भी अर्पित किया जाता है और शाम को श्रृंगार हटने के बाद इन सभी पवित्र फलों को भक्तों में महाप्रसाद के रूप में बांट दिया जाता है।
खाटू श्याम जी का अंगूरों का श्रृंगार मात्र रस्म नहीं है। यह बाबा श्याम के प्रति आस्था और प्रेम और निष्ठा के प्रसून है।


