इडाणा माता मंदिर: जहाँ देवी माँ स्वयं करती हैं अग्नि स्नान.1 हैरान करने वाला रहस्य

उदयपुर के इडाणा माता मंदिर (Idana Mata Temple) में देवी माँ स्वयं अग्नि स्नान (Agni Snan) करती हैं! जानें इस चमत्कारी मंदिर का इतिहास, रहस्य और पहुँचने का सही रास्ता।

📋 फैक्ट फाइल: श्री शक्ति पीठ इडाणा माता मंदिर (Fact File: Idana Mata Temple)

  • मुख्य देवी (Presiding Deity) इडाणा माता / शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा (Idana Mata / Goddess Durga)
  • स्थान (Location) बम्बोरा गाँव, कुराबड़ तहसील (Bambora Village, Kurabad Tehsil)
  • जिला और राज्य (District & State) उदयपुर, राजस्थान (Udaipur, Rajasthan)
  • मंदिर का प्रकार (Temple Structure) बिना छत का खुला चबूतरा, बरगद के पेड़ के नीचे (Open Platform)
  • मान्यता और आस्था (Belief/Specialty) लकवा (Paralysis) रोग से मुक्ति और मन्नत पूरी होना
  • अनोखा चढ़ावा (Unique Offering) त्रिशूल और जीवित मुर्गे (Trishul & Live Roosters)
  • उदयपुर से दूरी (Distance from Udaipur) लगभग 60 किलोमीटर (Approx. 60 KM)
  • नजदीकी रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station) उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन – UDZ (Udaipur City Railway Station)
  • नजदीकी हवाई अड्डा (Nearest Airport) महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, डबोक (Maharana Pratap Airport, Dabok)
  • दर्शन का समय (Temple Timings) सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक (आरती: सुबह 6:00 और शाम 7:00)
  • ठहरने की व्यवस्था (Accommodation) मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित धर्मशाला और भोजनशाला उपलब्ध
  • प्रमुख त्योहार (Major Festivals) चैत्र और अश्विन नवरात्रि (Chaitra & Ashwin Navratri)
  • अग्नि का रहस्य: अग्नि स्नान के दौरान आग की लपटें 10 से 15 फीट तक ऊंची उठती हैं, जिससे माता की चुनरी और चढ़ावा भस्म हो जाता है, लेकिन मूर्ति को कोई नुकसान नहीं पहुँचता।
  • अखंड ज्योति: मंदिर परिसर में सदियों से एक अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) निरंतर प्रज्वलित है।
  • मेवाड़ की आस्था: इन्हें पूरे मेवाड़ अंचल (Mewar Region) की सबसे जाग्रत देवियों में से एक माना जाता है।

इडाणा माता मंदिर कहाँ स्थित है? (Where is Idana Mata Temple located?)

यह उदयपुर जिले की कुराबड़ तहसील (Kurabad Tehsil) के अंतर्गत आने वाले बम्बोरा गाँव (Bambora Village) में स्थित है। यह पूरा क्षेत्र अरावली की शांत वादियों और प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि माता का दरबार किसी बंद गर्भगृह या आलीशान भवन में नहीं है, बल्कि माँ की दिव्य प्रतिमा एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे खुले चबूतरे (Open Platform under Banyan Tree) पर विराजमान है।

उदयपुर से इडाणा माता मंदिर की दूरी कितनी है? (What is the Udaipur to Idana Mata Temple distance?)

कुल दूरी (Total Distance): उदयपुर मुख्य शहर से बम्बोरा गाँव में स्थित इडाणा माता मंदिर की कुल दूरी लगभग 60 किलोमीटर (Approximately 60 km) है।

यात्रा का समय (Travel Time): यदि आप कार, टैक्सी या बाइक (Personal Vehicle/Cab) से यात्रा करते हैं, तो आपको यहाँ पहुँचने में करीब 1.5 से 2 घंटे का समय लगेगा।

यात्रा का मार्ग (Travel Route): सबसे सुगम और लोकप्रिय मार्ग उदयपुर से कुराबड़ होते हुए बम्बोरा (Udaipur via Kurabad to Bambora) का है। यहाँ की सड़कें अच्छी स्थिति में हैं, जिससे आपकी रोड ट्रिप (Road Trip) काफी आरामदायक हो जाती है। रास्ते में आपको राजस्थान के ग्रामीण जनजीवन और अरावली की पहाड़ियों के खूबसूरत दृश्य देखने को मिलते हैं।

‘अग्नि स्नान’: इडाणा माता मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य और चमत्कार

इडाणा माता मंदिर की सबसे खास और विस्मयकारी विशेषता यहाँ होने वाला ‘अग्नि स्नान’ है। मान्यता और आस्था है कि जब भी माता प्रसन्न होती हैं या उन पर चढ़ाए गए वस्त्रों और चुनरियों का भार बढ़ जाता है, तो मंदिर में अपने आप ही भीषण अग्नि सुलग उठती है।

रहस्यमयी आग: यह आग कैसे लगती है, इसका पता आज तक कोई नहीं लगा पाया है। विज्ञान भी इस रहस्य के आगे नतमस्तक है।

अग्नि की लपटें: अग्नि स्नान के समय आग की लपटें 10 से 15 फीट ऊंची उठती हैं।

केवल वस्त्र जलते हैं, मूर्ति नहीं: इस भीषण आग में माता की मूर्ति को छोड़कर उनके आसपास की सभी चीजें (कपड़े, चुनरी, श्रृंगार का सामान) जलकर भस्म हो जाती हैं। माता की पाषाण (पत्थर) की मूर्ति को आंच तक नहीं आती।

कोई गर्भगृह नहीं: माता का यह मंदिर बिना किसी छत या गर्भगृह के, एक खुले चबूतरे पर विशाल बरगद के पेड़ के नीचे स्थित है।

नोट: स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भक्त इस अग्नि स्नान के दर्शन कर लेता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है और उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। अग्नि शांत होने के बाद ही माता का नया श्रृंगार किया जाता है।

इडाणा माता मंदिर का इतिहास और नामकरण

नाम के पीछे की कहानी: इस क्षेत्र( मेवाड़ )को प्राचीन काल में ‘इडाणा’ कहा जाता था, जिसके कारण माता का नाम ‘इडाणा माता’ पड़ा।

राजा-महाराजाओं की आस्था: प्राचीन समय में मेवाड़ के राजा और राजपूत शासक युद्ध पर जाने से पहले माता का आशीर्वाद लेने यहाँ आते थे।

लकवे से मुक्ति और इडाणा माता मंदिर की अनोखी मान्यताएं

लकवा (Paralysis) ठीक होना: ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों को लकवा मार जाता है, वे अगर माता के दरबार में आकर कुछ दिन रुकें और दर्शन करें, तो वे ठीक हो जाते हैं।

अखंड जोत और त्रिशूल चढ़ाना: मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहाँ चांदी या तांबे के त्रिशूल चढ़ाते हैं। इसके अलावा, यहाँ कई सदियों से एक अखंड जोत लगातार जल रही है।

मुर्गों को छोड़ना: यहाँ मन्नत पूरी होने पर जीवित मुर्गों को माता के दरबार में छोड़ने की भी एक अनोखी परंपरा है।

⚠️ महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर (Important Disclaimer)हिंदी में:अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं के अनुभवों पर आधारित है। इडाणा माता मंदिर में लकवा मुक्ति की गहरी आस्था है, लेकिन यह किसी भी प्रकार का प्रमाणित वैज्ञानिक या चिकित्सीय (Medical) दावा नहीं है। लकवा (Paralysis) एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसका समय पर इलाज बेहद जरूरी है। हमारी पाठकों से विनम्र अपील है कि किसी भी बीमारी की स्थिति में योग्य डॉक्टर (Medical Specialist) से अपना इलाज और दवाइयां नियमित रूप से जारी रखें। डॉक्टर द्वारा बताए गए मेडिकल ट्रीटमेंट को करवाते हुए मानसिक शांति और आत्मबल के लिए आस्था व प्रार्थना का सहारा लिया जा सकता है, लेकिन इसे डॉक्टरी इलाज का विकल्प न मानें।

इडाणा माता मंदिर का ‘अग्नि स्नान’ (Idana Mata Agni Snan)

इडाणा माता मंदिर का ‘अग्नि स्नान’ (Idana Mata Agni Snan) आधुनिक विज्ञान के लिए एक अनसुलझा रहस्य और भक्तों के लिए साक्षात चमत्कार है। मान्यता है कि जब माता पर चढ़ाए गए वस्त्रों, चुनरियों और श्रृंगार सामग्री का भार बढ़ जाता है, तो वहाँ स्वयं ही भीषण अग्नि प्रज्वलित हो उठती है।

इस रहस्यमयी आग की लपटें 10 से 15 फीट तक ऊंची उठती हैं। इस दिव्य अग्नि में माता की पाषाण प्रतिमा को छोड़कर आसपास का सारा चढ़ावा जलकर भस्म हो जाता है। देवी माँ के इस अलौकिक रूप के दर्शन करने और इस भस्म को आशीर्वाद के रूप में पाने के लिए देश भर से श्रद्धालु यहाँ खिंचे चले आते हैं।

इडाणा माता मंदिर कैसे पहुँचे? (How to reach Idana Mata Temple?)

सड़क मार्ग द्वारा (By Road): यह सबसे बेस्ट और आसान तरीका है। उदयपुर सेंट्रल बस स्टैंड (Udaipur Central Bus Stand – Udiapole) से बम्बोरा और कुराबड़ के लिए नियमित राजस्थान रोडवेज बसें (Rajasthan Roadways Buses) और प्राइवेट लोकल बसें चलती हैं। इसके अलावा आप उदयपुर से डायरेक्ट टैक्सी या कैब बुक (Book Online Cab/Taxi) करके भी जा सकते हैं।

रेल मार्ग द्वारा (By Train): यदि आप ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं, तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन (Udaipur City Railway Station – UDZ) है। स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको मंदिर के लिए प्राइवेट गाड़ियाँ और बसें आसानी से मिल जाएंगी।

हवाई मार्ग द्वारा (By Air): हवाई यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे पास का हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, डबोक (Maharana Pratap Airport, Dabok, Udaipur) है। एयरपोर्ट से इडाणा माता मंदिर की दूरी लगभग 45 से 50 किलोमीटर है, जहाँ से आप सीधे टैक्सी किराए पर ले सकते हैं।

इडाणा माता मंदिर के दर्शन का समय क्या है (What is Idana Mata Temple timings

आरती का समय (Aarti Timings): मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम को विशेष आरती (Daily Morning and Evening Aarti) की जाती है। सुबह की आरती सूर्योदय के समय (करीब 6:00 AM) और संध्या आरती सूर्यास्त के समय (करीब 7:00 PM) होती है। नवरात्रि और त्योहारों के दिनों में यह समय थोड़ा बदल सकता है।

इडाणा माता मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन (Nearest Railway Station)

यदि आप ट्रेन के जरिए इस चमत्कारी मंदिर के दर्शन करने आ रहे हैं, तो Nearest railway station to idana mata temple मुख्य रूप से उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन (Udaipur City Railway Station – स्टेशन कोड: UDZ) है।

दूरी (Distance): उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन से बम्बोरा गाँव में स्थित इडाणा माता मंदिर की दूरी लगभग 55 से 60 किलोमीटर है।

कनेक्टिविटी (Connectivity): यह रेलवे स्टेशन दिल्ली, मुंबई, जयपुर, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे देश के सभी प्रमुख शहरों से सीधे ट्रेनों के माध्यम से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

आगे का सफर: स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको मंदिर के लिए सीधी प्राइवेट टैक्सियाँ, कैब और राजस्थान रोडवेज की बसें आसानी से मिल जाती हैं, जो आपको लगभग 1.5 से 2 घंटे में सीधे मंदिर पहुँचा देती हैं।

श्री इडाणा माता मंदिर ट्रस्ट संपर्क सूत्र (Idana Mata Trust Contact Details

यदि आप Idana mata trust contact number खोज रहे हैं, तो आपको बता दें कि सुरक्षा और प्राइवेसी कारणों से श्री शक्ति पीठ इडाणा माता ट्रस्ट (बम्बोरा) ने वर्तमान में कोई भी आधिकारिक (Official) मोबाइल नंबर या हेल्पलाइन ऑनलाइन जारी नहीं की है।

चूँकि यह मंदिर स्थानीय ग्राम पंचायत और एक स्थानीय मंदिर समिति (Trust) द्वारा प्रबंधित किया जाता है, इसलिए दान (Donations), विशेष पूजा, या धर्मशाला बुकिंग से जुड़े सभी कार्य ऑन-द-स्पॉट (On the Spot) यानी मंदिर परिसर में बने ट्रस्ट कार्यालय में जाकर ही किए जाते हैं। किसी भी भ्रामक ऑनलाइन नंबर पर पैसे भेजने या फ्रॉड से बचें। आप सीधे उदयपुर या बम्बोरा पहुँचकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।

इडाणा माता मंदिर बम्बोरा राजस्थान (Idana Mata Mandir Bambora Rajasthan)

यदि आप इस अलौकिक शक्तिपीठ के दर्शन करना चाहते हैं, तो इसकी सही भौगोलिक स्थिति इडाणा माता मंदिर बम्बोरा राजस्थान (Idana Mata Mandir Bambora Rajasthan) है। यह प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान के उदयपुर जिले की कुराबड़ तहसील के अंतर्गत आने वाले बम्बोरा गाँव में स्थित है। उदयपुर के मुख्य शहर से इस शांत और सुरम्य गाँव की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।

अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसे बम्बोरा गाँव की पहचान आज पूरे भारत में इस चमत्कारी मंदिर की वजह से है। यहाँ माता का दरबार किसी बंद गर्भगृह में नहीं, बल्कि खुले चौक में एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे स्थित है। वीकेंड और त्योहारों (विशेषकर नवरात्रि) के दिनों में बम्बोरा गाँव में देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस ग्रामीण रूट पर यात्रा करना अपने आप में मेवाड़ की संस्कृति को करीब से देखने जैसा है।

इडाणा माता जी का अगला अग्नि स्नान कब है? (When is the next Agni Snan?)

इडाणा माता का अगला अग्नि स्नान कब होगा, इसकी कोई निश्चित तारीख या भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। यह पूरी तरह चमत्कारिक और अचानक होता है। मान्यता है कि जब माता पर चुनरियों का भार बढ़ जाता है, तो स्वयं ही अग्नि प्रज्वलित हो उठती है। ऐसा साल में 2-3 बार या उससे अधिक होता है।

इसकी लाइव जानकारी के लिए आप उदयपुर के लोकल न्यूज़ पोर्टल्स या सोशल मीडिया (यूट्यूब/फेसबुक) के ताजा अपडेट्स देख सकते हैं। माता के सामान्य दर्शन और अखंड ज्योत के लिए आप साल में कभी भी बम्बोरा जा सकते हैं।

“इडाणा माता मंदिर में त्रिशूल चढ़ाने के नियम क्या हैं?” (What are the rules for offering Trishul at Idana Mata Temple?)

इडाणा माता मंदिर में मन्नत पूरी होने पर या किसी विशेष मनोकामना के लिए त्रिशूल चढ़ाने की अटूट परंपरा है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार चांदी, तांबे, पीतल या लोहे का त्रिशूल माता के दरबार में अर्पित करते हैं। मंदिर में स्नान और शुद्धता का ध्यान रखते हुए, पंडित जी के मार्गदर्शन में पूजा-आरती के बाद त्रिशूल को परिसर में तय स्थान पर स्थापित कर दिया जाता है, जिसे माता द्वारा भक्त की पुकार सुनने और उसकी रक्षा करने का प्रतीक माना जाता है।

“लकवा ग्रस्त मरीज इडाणा माता मंदिर कैसे जाएं?” (How should paralysis patients visit Idana Mata Temple?)

इडाणा माता मंदिर में लकवा ग्रस्त मरीजों के ठीक होने की गहरी मान्यता है। ऐसे मरीजों को असुविधा से बचाने के लिए निजी कार या टैक्सी से आना सबसे बेहतर रहता है, क्योंकि यहाँ का समतल परिसर व्हीलचेयर के अनुकूल है। लाभ के लिए मरीज और उनके परिजनों को मंदिर की धर्मशाला में कुछ हफ्ते या महीने रुकना होता है, जहाँ ठहरने व भोजन की उत्तम व्यवस्था है। हालांकि, इस आस्था के साथ-साथ डॉक्टर की दवाइयां और फिजियोथेरेपी (Medical Treatment) को बिल्कुल बंद न करें।

Idana mata mandir packages from Udaipur” (क्या उदयपुर से इडाणा माता मंदिर के लिए कोई वन-डे टूर टैक्सी पैकेज उपलब्ध है?)

उदयपुर से इडाणा माता मंदिर (बम्बोरा) के लिए लोकल टूर ऑपरेटर्स द्वारा वन-डे टैक्सी पैकेज आसानी से मिल जाते हैं। चूँकि मंदिर 60 किमी दूर है, इसलिए आरामदायक सफर के लिए प्राइवेट कैब सबसे बेस्ट है। इसका अनुमानित राउंड-ट्रिप किराया सेडान कारों (Dzire/Etios) के लिए ₹2,500 से ₹3,000 और एसयूवी (Ertiga/Innova) के लिए ₹3,500 से ₹4,500 तक होता है। इस पैकेज में ड्राइवर आपको उदयपुर स्टेशन या होटल से पिक करके दर्शन करवाता है और शाम तक वापस छोड़ देता है, जिसमें टोल टैक्स और ड्राइवर का खर्चा अमूमन शामिल होता है।

“Idana mata mandir dharamshala room price” (धर्मशाला में कमरे का किराया कितना है?)

कमरे का किराया (Room Rent): मंदिर की धर्मशाला में सामान्य नॉन-एसी कमरों (Non-AC Rooms) का किराया बेहद नाममात्र का होता है, जो लगभग ₹200 से ₹400 प्रति दिन के बीच रहता है।

हॉल की व्यवस्था: यदि आप बड़े परिवार या ग्रुप के साथ आ रहे हैं, तो यहाँ बड़े हॉल भी उपलब्ध हैं, जिनका शुल्क और भी कम होता है। इसके अलावा, यहाँ गद्दे और कंबल अलग से भी मिल जाते हैं।

भोजनशाला: ट्रस्ट द्वारा संचालित भोजनशाला में बहुत ही कम कीमत (या टोकन व्यवस्था) पर शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जाता है।

बुकिंग का नियम: यहाँ कमरों की कोई ऑनलाइन एडवांस बुकिंग नहीं होती है। आपको मंदिर पहुँचकर सीधे धर्मशाला के काउंटर से ही कमरा लेना होता है (First Come, First Served)।

“Ahmedabad to Idana mata temple bus timetable” (अहमदाबाद या अन्य शहरों से सीधी बसें)

गुजरात से मेवाड़ स्थित इडाणा माता मंदिर (बम्बोरा) की यात्रा के लिए सबसे सुगम और लोकप्रिय मार्ग अहमदाबाद से उदयपुर होकर जाता है। हालाँकि अहमदाबाद से सीधे बम्बोरा के लिए कुछ सीमित नाइट-सर्विस बसें उपलब्ध हैं, लेकिन सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि आप पहले अहमदाबाद से उदयपुर पहुँचें, जहाँ के लिए हर 15 मिनट में बसें और ट्रेनें आसानी से मिल जाती हैं। इसके बाद, उदयपुर के उदयपोल बस स्टैंड से सुबह 6:00 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक हर 1 से 2 घंटे में बम्बोरा और कुराबड़ के लिए लोकल व राजस्थान रोडवेज (RSRTC) की बसें आराम से मिल जाती हैं, जिससे आपकी यात्रा बेहद आसान हो जाती है।

इडाणा माता मंदिर का प्रसाद घर क्यों नहीं ले जाते?

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इडाणा माता मंदिर का चढ़ाया गया प्रसाद (विशेषकर मुख्य भोग) घर ले जाना वर्जित माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता का प्रसाद मंदिर परिसर या बम्बोरा गाँव की सीमा के भीतर ही बांटकर ग्रहण कर लेना चाहिए।

क्या इडाणा माता मंदिर में माता को शराब चढ़ाई जाती है?

हाँ, मेवाड़ के कई अन्य शक्तिपीठों की तरह इडाणा माता के दरबार में भी भक्तों द्वारा अपनी मन्नत पूरी होने पर अर्क (मदिरा/शराब) चढ़ाने की प्राचीन और पारंपरिक परंपरा है।

इडाणा माता मंदिर का इतिहास क्या है और इसकी स्थापना किसने की?

मंदिर की स्थापना का कोई लिखित या सटीक ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन लोक कथाओं के अनुसार यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहाँ पूजा की थी। सालों पहले यहाँ एक तपस्वी बाबा साधना करते थे, जिसके बाद धीरे-धीरे यह मेवाड़ का प्रमुख शक्तिपीठ बन गया।

मन्नत पूरी होने पर संतान प्राप्ति वाले दंपत्ति इडाणा माता मंदिर में क्या चढ़ाते हैं?

जहाँ लकवा ग्रस्त मरीज ठीक होने पर त्रिशूल या चांदी के अंग चढ़ाते हैं, वहीं संतान की मन्नत पूरी होने पर दंपत्तियों द्वारा माता के दरबार में पालना (लकड़ी या धातु का छोटा झूला) चढ़ाने की अनोखी परंपरा है।

इडाणा माता का मंदिर खुले चौक में क्यों है, इसके ऊपर छत क्यों नहीं है?

: मान्यता है कि माता को बंद गर्भगृह में रहना पसंद नहीं है। पूर्व में कई बार मंदिर ट्रस्ट और राजाओं द्वारा माता की मूर्ति के ऊपर छत या भव्य मंदिर बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार निर्माण कार्य अपने आप ढह गया। माता आज भी एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं।

इडाणा माता का मंदिर खुले चौक में क्यों है, इसके ऊपर छत क्यों नहीं है?

मान्यता है कि माता को बंद गर्भगृह में रहना पसंद नहीं है। पूर्व में कई बार मंदिर ट्रस्ट और राजाओं द्वारा माता की मूर्ति के ऊपर छत या भव्य मंदिर बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार निर्माण कार्य अपने आप ढह गया। माता आज भी एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं।

उदयपुर से इडाणा माता मंदिर की दूरी कितनी है और बेस्ट रूट क्या है?

उदयपुर शहर से मंदिर की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। सबसे बेस्ट रूट उदयपुर ➔ देबारी ➔ साकरोदा ➔ कुराबड़ ➔ बम्बोरा (सलूंबर मार्ग) है। आप कार, प्राइवेट टैक्सी या सूरजपोल बस स्टैंड से चलने वाली लोकल बसों द्वारा आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।

और अधिक जानकारी के लिए आप इस वेबसाइट https://hi.wikipedia.org/ पर आर्टिकल पढ़ सकते हैं।

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