घर पर खाटू श्याम जी का दीया कैसे जलाएं? जानिए सही नियम, दिशा और विधि

क्या आप घर पर खाटू श्याम जी की पूजा करते हैं? जानिए घर पर खाटू श्याम जी का दीया कैसे जलाएं, दीये का मुख किस दिशा में हो, घी का दीपक सही है या तेल का और इसके क्या नियम हैं।

घर पर खाटू श्याम जी का दीया कैसे जलाएं?

बाबा श्याम की पूजा के लिए हमेशा गाय के शुद्ध घी का दीपक सबसे उत्तम माना जाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो आप तिल के तेल का उपयोग भी कर सकते हैं। हालांकि, बाबा की सौम्य पूजा में सरसों का तेल इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

दीपक में हमेशा गोल बत्ती (फूल बत्ती) का प्रयोग करें। भगवान विष्णु और कृष्ण के अवतारों की पूजा में गोल बत्ती को स्थिरता और शांति का प्रतीक माना जाता है। लंबी बत्ती का प्रयोग यहाँ वर्जित माना गया है।

दीये का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व दिशा से स्वास्थ्य और लंबी आयु मिलती है, जबकि उत्तर दिशा से धन और समृद्धि आती है। भूलकर भी दीये की लौ दक्षिण दिशा की तरफ न रखें।

शास्त्रों के अनुसार दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें। दीया स्थापित करने से पहले उसके नीचे थोड़े से अक्षत (चावल) या फूलों की पंखुड़ियों का आसन ज़रूर दें। यदि घी का दीया है तो अपनी बाईं ओर और तेल का है तो दाईं ओर रखें।

दीया प्रज्वलित करते समय शांत मन से “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके बाद बाबा श्याम की आरती गाएं और उन्हें मिश्री या पेड़े का भोग लगाएं। सच्ची श्रद्धा से जलाया गया एक दीपक भी आपकी हर मनोकामना पूर्ण कर सकता है।

खाटू श्याम जी को कौन सा दीपक जलाएं

खाटू श्याम जी की पूजा में गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाना सबसे उत्तम और फलदायी माना जाता है। बाबा श्याम भगवान श्री कृष्ण के ही अवतार हैं, इसलिए उनकी पूजा में घी का दीया घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। यदि घी उपलब्ध न हो, तो विकल्प के रूप में आप तिल के तेल का दीपक भी जला सकते हैं, लेकिन उनकी पूजा में सरसों के तेल का उपयोग करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही दीपक में हमेशा गोल बत्ती का प्रयोग करें और उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें ताकि घर में शुभता का संचार हो सके।

खाटू श्याम जी एकादशी ज्योत नियम

खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी की ज्योत का विशेष महत्व है, इसलिए इस दिन घर के मंदिर में गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक ज़रूर जलाना चाहिए। ज्योत जलाते समय हमेशा गोल बत्ती का प्रयोग करें और उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें ताकि घर में सुख-समृद्धि का वास हो। बाबा श्याम को प्रसन्न करने के लिए एकादशी के दिन उन्हें चूरमा, मावे के पेड़े या पंचमेवा का भोग लगाएं और श्रद्धापूर्वक “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करें। बस ध्यान रखें कि इस विशेष दिन पर घर में पूर्ण शुद्धता बनाए रखें, परिवार का कोई भी सदस्य चावल का सेवन न करें और घर में ज्योत प्रज्वलित करने के बाद घर को कभी भी अकेला या खाली न छोड़ें।

खाटू श्याम जी की ज्योत कैसे जलाएं

घर पर खाटू श्याम जी की ज्योत जगाने के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके वहां बाबा श्याम की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक लें और उसमें हमेशा गोल बत्ती का ही प्रयोग करें। दीपक को कभी सीधे जमीन पर न रखें, बल्कि उसके नीचे थोड़े से अक्षत (चावल) या फूल रखकर उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर करें। अब शांत मन से “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए ज्योत प्रज्वलित करें और बाबा को पेड़े या मिश्री का भोग लगाकर श्रद्धा से आरती गाएं।

श्याम बाबा की पूजा विधि घर पर : क्या ध्यान रखें

घर पर श्याम बाबा की पूजा करते समय हमेशा शुद्धता और नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनके मंदिर को साफ-सुथरा रखें और पूजा की शुरुआत हमेशा गाय के शुद्ध घी के दीपक से करें। दीपक में गोल बत्ती लगाएं और उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही रखें।

बाबा श्याम को तुलसी दल बेहद प्रिय है, इसलिए उनके हर भोग में तुलसी का पत्ता ज़रूर शामिल करें। उन्हें मुख्य रूप से मावे के पेड़े, पंचमेवा या गाय के दूध का भोग लगाएं। एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित रखें।

पूजा के दौरान शांत मन से “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती गाएं। ध्यान रखें कि पीरियड्स या सूतक के दिनों में मूर्ति को न छुएं। पूरी श्रद्धा और साफ मन से की गई पूजा बाबा तुरंत स्वीकार करते हैं।

क्या पीरियड्स या सूतक में बाबा का दीया जला सकते हैं?

शास्त्रों के अनुसार, सूतक या महिलाओं के पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना या दीया जलाना वर्जित है। ऐसे समय में परिवार का कोई अन्य सदस्य दीया जला सकता है, या आप मन ही मन बाबा का नाम जप सकते हैं।

श्याम बाबा की अखंड जोत घर में रख सकते हैं क्या?

हाँ, रख सकते हैं। लेकिन अखंड जोत (जो 24 घंटे जलती है) के नियम बहुत कड़े होते हैं। उसमें समय-समय पर घी डालना, हवा से बचाना और घर को खाली न छोड़ना जैसे नियमों का पालन करना पड़ता है। यदि आप ये नहीं कर सकते, तो सुबह-शाम सामान्य दीया जलाना ही बेहतर है।

खाटू श्याम जी की ज्योत किस दिन जलानी विशेष होती है?

वैसे तो बाबा श्याम का दीया रोज़ जलाना चाहिए, लेकिन शुक्ल पक्ष की एकादशी (Gyaras) और द्वादशी के दिन घर में बाबा की विशेष ज्योत जलाना अत्यंत शुभ और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है।

क्या बाबा श्याम को सरसों के तेल का दीपक लगा सकते हैं?

खाटू श्याम जी की पूजा में सरसों के तेल का दीपक लगाने से बचना चाहिए। बाबा श्याम की पूजा अत्यंत सात्विक और सौम्य मानी जाती है, जिसके लिए गाय का शुद्ध घी सर्वोत्तम है। यदि आपके पास घी उपलब्ध नहीं है, तो आप विकल्प के रूप में तिल के तेल (Sesame Oil) का दीपक जला सकते हैं। सरसों का तेल स्वभाव से उग्र (तामसिक) माना जाता है, जिसका उपयोग केवल हनुमान जी, शनिदेव या भैरव जी की पूजा में विशेष फल के लिए किया जाता है। इसलिए बाबा श्याम के लिए घी या तिल के तेल का ही चुनाव करें।

श्याम बाबा की अखंड जोत के लिए कितना घी लगता है?

यदि आप घर पर 24 घंटे के लिए बाबा श्याम की अखंड जोत जला रहे हैं, तो इसके लिए एक दिन (24 घंटे) में लगभग 350 ग्राम से 500 ग्राम (आधा किलो) शुद्ध घी की आवश्यकता होती है। घी की मात्रा इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपके अखंड दीये का आकार कितना बड़ा है और उसकी बत्ती (लौ) कितनी मोटी रखी गई है। अखंड जोत के लिए हमेशा थोड़े बड़े और गहरे पीतल या मिट्टी के दीये का उपयोग करें ताकि बार-बार घी डालने की ज़रूरत न पड़े और दीया शांत होने का खतरा न रहे।

खाटू श्याम जी के दीये का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

खाटू श्याम जी के दीये का मुख हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, दीपक की लौ को पूर्व दिशा की ओर रखने से घर के सदस्यों की आयु लंबी होती है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और मानसिक शांति मिलती है। वहीं, उत्तर दिशा की ओर लौ रखने से घर में सुख, समृद्धि, धन लाभ और व्यापार में उन्नति होती है। भूलकर भी दीपक का मुख दक्षिण (South) दिशा की तरफ न करें, क्योंकि यह दिशा यमराज और पितरों की मानी जाती है, जिससे घर में अशांति या आर्थिक नुकसान हो सकता है।

खाटू श्याम पूजा पर दीपक भगवान के दाईं तरफ रखें या बाईं तरफ?

दीपक को भगवान के किस तरफ रखना है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप दीये में घी डाल रहे हैं या तेल। शास्त्रों के अनुसार, यदि आप गाय के शुद्ध घी का दीपक जला रहे हैं, तो उसे हमेशा भगवान की मूर्ति के बाईं ओर (Left Side) रखना चाहिए, जो कि पूजा करते समय आपके दाईं ओर होगा। इसके विपरीत, यदि आप तिल के तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे भगवान के दाईं ओर (Right Side) रखें, जो आपके बाईं ओर पड़ेगा। इसके साथ ही आसन का नियम भी बेहद महत्वपूर्ण है; दीपक को कभी भी सीधे फर्श या चौकी पर न रखें, बल्कि दीया स्थापित करने से पहले उसके नीचे थोड़े से अक्षत (साबुत चावल) या फूलों की पंखुड़ियों का आसन ज़रूर दें।

घर में श्याम बाबा की ज्योत सुबह जलानी चाहिए या शाम को?

घर में श्याम बाबा की ज्योत सुबह और शाम दोनों समय जलानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, सुबह की पूजा और ज्योत का सबसे शुभ समय सूर्योदय के समय यानी सुबह 5:00 बजे से 7:00 बजे (अमृत वेला या ब्रह्म मुहूर्त के आसपास) के बीच माना जाता है। वहीं, शाम की ज्योत और आरती का सही समय सूर्यास्त के समय यानी शाम 6:00 बजे से 7:30 बजे (प्रदोष काल) के बीच होता है। यदि आप किसी कारणवश सुबह ज्योत नहीं जला पाते हैं, तो शाम को संध्या आरती के समय घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें, क्योंकि इस समय घर में ज्योत जलाने से नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है।

दीया जलाते समय खाटू श्याम जी का कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

खाटू श्याम जी का दीया प्रज्वलित करते समय आप शांत मन से नीचे दिए गए बेहद प्रभावशाली और सरल मंत्र का कम से कम 3 या 11 बार जाप करें:”ॐ श्री श्याम देवाय नमः”यदि आप कोई बड़ा मंत्र याद नहीं रख सकते, तो दीये की लौ को देखते हुए पूरी श्रद्धा से इस महामंत्र को भी दोहरा सकते हैं, जिसे बाबा तुरंत स्वीकार करते हैं:”हारी का सहारा, बाबा श्याम हमारा। जय श्री श्याम!”

खाटू श्याम ज्योत लेने के बाद बाबा श्याम से मन्नत (अर्जी) कैसे मांगें?

जब घर में बाबा श्याम की ज्योत जल रही हो, तब उसके सामने हाथ जोड़कर अर्जी लगाने का एक विशेष तरीका होता है। सबसे पहले अपने दोनों हाथों को ज्योत के ऊपर से घुमाकर अपने माथे और आंखों पर लगाएं, जिसे ज्योत लेना कहते हैं। इसके बाद बाबा श्याम की तस्वीर की आंखों में देखते हुए अपने मन की बात या समस्या को बिल्कुल वैसे ही कहें, जैसे आप अपने किसी माता-पिता या सच्चे मित्र से बात कर रहे हों। मन्नत मांगते समय कहें, “हे शीश के दानी, हे हारे के सहारे बाबा श्याम, मैं आपकी शरण में हूँ, मेरा यह कार्य अटका हुआ है और इसे अब आप ही पार लगाएंगे।” अंत में बाबा को अपनी श्रद्धा अनुसार एकादशी पर चूरमे का भोग लगाने या खाटू धाम आकर दर्शन करने का संकल्प दें, क्योंकि बाबा श्याम केवल भाव के भूखे हैं और साफ मन से मांगी गई अर्जी वे कभी खाली नहीं जाने देते।

“खाटू श्याम जी की ज्योत में गोल बत्ती लगाएं या लंबी?”

खाटू श्याम जी की ज्योत में हमेशा गोल बत्ती (फूल बत्ती) का ही प्रयोग करना चाहिए। सनातन धर्म के नियमों के अनुसार, भगवान विष्णु, श्री कृष्ण और उनके सभी अवतारों (जैसे बाबा श्याम) की सौम्य पूजा में गोल बत्ती लगाना अनिवार्य माना गया है। गोल बत्ती को स्थिरता, शांति और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लंबी बत्ती का उपयोग मुख्य रूप से देवी मां की पूजा, साधना या पितरों के दीपक के लिए किया जाता है, इसलिए बाबा श्याम के सामने लंबी बत्ती भूलकर भी नहीं लगानी चाहिए।

क्या खाटू श्याम जी का दीया बुझने पर कोई अपशकुन होता है?

यदि हवा के झोंके या घी खत्म होने के कारण बाबा श्याम का दीया अचानक बुझ जाए, तो मन में किसी भी तरह का डर या अपशकुन का विचार न लाएं। शास्त्रों के अनुसार, ऐसा होने पर तुरंत बाबा से माफी मांगें, दीये की बत्ती को साफ करें या बदलें, और उसमें दोबारा घी डालकर उसे प्रज्वलित कर दें। बाबा श्याम केवल भक्त के मन का भाव और श्रद्धा देखते हैं, न कि अनजाने में हुई गलतियाँ।

बाबा श्याम की ज्योत के बचे हुए घी या बत्ती का क्या करना चाहिए?

पूजा खत्म होने के बाद यदि दीये में थोड़ा घी या तेल बच जाता है, तो उसे फेंकने के बजाय अगले दिन की पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, दीये की जली हुई बत्ती (कालिमा) को कभी भी कूड़ेदान में न फेंकें। हफ्ते या महीने भर की एकत्रित बत्तियों को किसी पवित्र पेड़ (जैसे पीपल या तुलसी) की जड़ के पास रख दें या उन्हें मिट्टी में दबा दें ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे।

क्या तांबे के दीपक में खाटू श्याम जी की ज्योत जला सकते हैं?

खाटू श्याम जी की पूजा में पीतल या मिट्टी के दीपक का उपयोग करना सबसे उत्तम माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, तांबे के बर्तन का उपयोग केवल अर्घ्य देने, पानी रखने या सूर्य देव की पूजा के लिए किया जाता है। तांबे के दीये में घी या तेल डालकर जोत जलाने की मनाही होती है, क्योंकि इससे धातु पर रासायनिक असर हो सकता है। इसलिए बाबा श्याम के लिए हमेशा पीतल, चांदी या साफ मिट्टी के दीये का ही चुनाव करें।

क्या खाटू श्याम जी का दीया जलाते समय अगरबत्ती लगाना ज़रूरी है?

बाबा श्याम की पूजा में दीया जलाना अनिवार्य है, लेकिन अगरबत्ती लगाना ज़रूरी नहीं है। आजकल बाज़ार में मिलने वाली अधिकांश अगरबत्तियों में बांस की लकड़ी का उपयोग होता है, और सनातन धर्म में बांस जलाना पूरी तरह वर्जित माना गया है। इसलिए बाबा श्याम की ज्योत के साथ हमेशा बांस-रहित धूपबत्ती, चंदन या गूगल की सुंगध का ही प्रयोग करें, जिससे घर का वातावरण सात्विक बना रहे।

घर के मंदिर में बाबा श्याम की ज्योत के सामने पर्दा कब करना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार, जब बाबा श्याम विश्राम करते हैं, तब मंदिर में पर्दा करना चाहिए। दोपहर में भोग लगाने के बाद (लगभग 1:00 से 4:00 बजे तक) और रात को शयन आरती के बाद (9:30 या 10:00 बजे के बाद) मंदिर का पट या पर्दा बंद कर देना चाहिए। ध्यान रखें कि दोपहर या रात को जब पट बंद हों, तब मंदिर के अंदर सामान्य दीया या ज्योत प्रज्वलित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जलता हुआ दीया जागृत अवस्था का प्रतीक है जो बाबा के विश्राम में बाधा डालता है।

क्या किराए के मकान में या छोटे फ्लैट में बाबा श्याम की ज्योत जगा सकते हैं?

हाँ, आप किराए के मकान, छोटे फ्लैट या देश-विदेश में कहीं भी रहकर बाबा श्याम की ज्योत जगा सकते हैं। बाबा श्याम केवल भक्त के शुद्ध भाव के भूखे हैं, स्थान के नहीं। बस इतना ध्यान रखें कि जहाँ आप मंदिर स्थापित कर रहे हैं, वह जगह साफ-सुथरी हो, उसके ऊपर या नीचे शौचालय न हो और दीपक जलाते समय उसका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही रहे।

क्या खाटू श्याम जी के दीये की बची हुई राख (भस्म) का तिलक लगा सकते हैं?

हाँ, खाटू श्याम जी के दीये या धूपबत्ती से निकलने वाली भस्म (राख) को बेहद पवित्र माना जाता है। पूजा संपन्न होने और दीपक के पूरी तरह ठंडे हो जाने के बाद, आप उस भस्म को एक छोटी डिब्बी में सुरक्षित रख सकते हैं। रोज़ सुबह घर से बाहर निकलते समय या पढ़ाई-काम शुरू करने से पहले इस भस्म का तिलक अपने माथे या कंठ पर लगाने से बाबा श्याम का सुरक्षा कवच आपके साथ रहता है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं।

यदि किसी दिन घर में सूतक या पातक हो, तो बाबा की ज्योत का क्या करें?

हिंदू धर्म के नियमों के अनुसार, परिवार में किसी के जन्म (सूतक) या मृत्यु (पातक) के दौरान भगवान की मूर्ति को छूना, भोग लगाना या दीया जलाना पूरी तरह वर्जित होता है। ऐसे दिनों में (जो आमतौर पर 11 से 13 दिनों के होते हैं) आपको स्वयं ज्योत नहीं जलानी चाहिए। आप अपने किसी पड़ोसी या मित्र से केवल दीया प्रज्वलित करने का अनुरोध कर सकते हैं, ताकि मंदिर में अंधेरा न रहे। आप स्वयं केवल मानसिक रूप से नाम जाप कर सकते हैं।

क्या एक ही दीये से बाबा श्याम की आरती भी कर सकते हैं और उसे ज्योत के रूप में भी रख सकते हैं?

शास्त्रों के अनुसार, जिस दीपक को आपने आसन देकर मंदिर में स्थापित (स्थिर) कर दिया है, उसे बार-बार उठाकर आरती नहीं करनी चाहिए। स्थापित की गई ज्योत को स्थिर रहने दें। आरती करने के लिए हमेशा एक अलग छोटे दीपक या कपूर का उपयोग करें। आरती पूरी होने के बाद उस आरती वाले दीये को शांत होने के लिए अलग रख दें, लेकिन मुख्य ज्योत को अपने स्थान पर ही जलने दें।

घर पर खाटू श्याम जी का दीया कैसे जलाएं? आलेख आपको कैसा लगा? खाटू श्याम की मेहर आप सभी पर सदा ही बनी रहे। खाटू श्याम की जय।

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