मसूरिया पहाड़ी जोधपुर का इतिहास: बाबा रामदेव जी और गुरु बालीनाथ जी का अलौकिक संबंध

रामदेवरा जाने से पहले मसूरिया क्यों जाते हैं? जानिए मसूरिया पहाड़ी जोधपुर का इतिहास, गुरु बालीनाथ जी की समाधि का महत्व, मंदिर का समय (Timings), एंट्री फीस और यात्रा से जुड़े अनसुने रहस्य।

मसूरिया पहाड़ी जोधपुर का इतिहास

जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी मारवाड़ के गौरवशाली इतिहास और अगाध धार्मिक आस्था का एक अद्भुत केंद्र है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा सर्वप्रथम इसी पहाड़ी पर अपना किला (मेहरानगढ़) बनाना चाहते थे, परंतु पानी के तीव्र संकट के कारण उन्होंने चिड़ियाटूक पहाड़ी को चुना।

यह ऐतिहासिक स्थल मारवाड़ के महान रक्षक वीर दुर्गादास राठौड़ की स्मृति से भी गहरा जुड़ा है। पहाड़ी के शीर्ष पर उनकी घोड़े पर सवार एक भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित है, जो पर्यटकों को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती है। इसके अतिरिक्त, यह स्थान लोक देवता बाबा रामदेव जी के आध्यात्मिक गुरु महायोगी बालीनाथ जी महाराज की पावन तपोस्थली और समाधि स्थल भी है, जहां स्थित प्राचीन गुफा भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र है

रामदेवरा जाने से पहले मसूरिया पहाड़ी (जोधपुर) क्यों जाते हैं?”

रामदेवरा (रूणेचा धाम) जाने से पहले जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर जाना अनिवार्य और धार्मिक रूप से आवश्यक माना जाता है क्योंकि यहाँ बाबा रामदेव जी के गुरु बालीनाथ जी की तपोस्थली और समाधि स्थित है। भारतीय सनातन परंपरा और लोक संस्कृति में मान्यता है कि गुरु का स्थान भगवान या देवता से भी ऊंचा होता है, इसलिए गुरु के दर्शन किए बिना शिष्य की पूजा स्वीकार नहीं होती।

गुरु बालीनाथ जी की तपोस्थली (Guru’s Supremacy)गुरु की आज्ञा और सम्मान: मसूरिया पहाड़ी पर एक अलौकिक प्राचीन गुफा है, जहाँ बाबा रामदेव जी के आध्यात्मिक गुरु गुसांई बालीनाथ जी ने कई वर्षों तक कठिन तपस्या की थी और बाद में जीवित समाधि ली थी।परंपरा: लोक मान्यता के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु (जातरू) सीधे रामदेवरा जाकर बाबा की समाधि के दर्शन करता है और अपने गुरु बालीनाथ जी के दरबार में हाजिरी नहीं लगाता, तो उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है और मन्नत पूरी नहीं होती।

“पहले गुरु की धोक, फिर चेले की धोक” (The Traditional Rule)मारवाड़ और गुजरात के श्रद्धालुओं में यह कहावत अत्यंत प्रसिद्ध है। ‘धोक’ का अर्थ प्रणाम या दर्शन करना होता है।परंपरा के अनुसार, बाबा रामदेव जी के मुख्य दरबार (रामदेवरा) में हाजिरी लगाने से पहले जोधपुर के मसूरिया धाम में गुरु बालीनाथ जी और बाबा रामदेव जी के बाल स्वरूप के दर्शन करना सबसे पहला और अनिवार्य चरण है।

भैरव राक्षस से जुड़ा इतिहास :कथाओं के अनुसार, जब क्रूर तांत्रिक भैरव राक्षस पोकरण क्षेत्र में जनता को प्रताड़ित करता था, तब बाबा रामदेव जी ने इसी मसूरिया पहाड़ी की गुफा में अपने गुरु बालीनाथ जी के पास रहकर ज्ञान प्राप्त किया था और यहीं से रणनीति बनाकर भैरव राक्षस का अंत किया था। इस ऐतिहासिक जुड़ाव के कारण इस पहाड़ी का महत्व बेहद खास है।

परचा नाड़ी’ में स्नान का महत्व :मसूरिया पहाड़ी मंदिर परिसर में एक पवित्र तालाब स्थित है जिसे ‘परचा नाड़ी’ कहा जाता है। तीर्थयात्री रामदेवरा की कठिन मरुस्थलीय यात्रा शुरू करने से पहले इस नाड़ी के पवित्र जल से आचमन करते हैं या स्नान करते हैं, जिससे यात्रा मंगलमय होती है।

पैदल यात्रियों (जातरुओं) का मुख्य पड़ाव :गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान के अन्य जिलों से आने वाले लाखों पैदल यात्री (जातरू) जोधपुर के रास्ते ही जैसलमेर (रामदेवरा) की ओर बढ़ते हैं। भौगोलिक और पारंपरिक दृष्टि से मसूरिया पहाड़ी इन सभी यात्रियों का सबसे बड़ा विश्राम और भक्ति केंद्र बनता है, जहाँ से वे बाबा की ‘नेजा’ (ध्वजा) लेकर आगे की यात्रा शुरू करते हैं।

Masuria Hill Garden Jodhpur: Entry Fee & Timings मसूरिया पहाड़ी जोधपुर प्रवेश शुल्क

अगर आप यहाँ जाने की योजना बना रहे हैं, तो वर्तमान समय सारणी और टिकट दरें नीचे दी गई हैं:प्रवेश शुल्क (Entry Fee): ₹30 प्रति व्यक्ति (भारतीय पर्यटकों के लिए) | ₹300 (विदेशी पर्यटकों के लिए)खुलने का समय (Timings): सुबह 8:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक (यह सातों दिन खुला रहता है)सबसे अच्छा समय: शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे के बीच, ताकि आप दर्शन के साथ-साथ शानदार सूर्यास्त (Sunset) का आनंद भी ले सकें।

Jodhpur Sunset Point: Masuria Hills मसूरिया पहाड़ी जोधपुर सनसेट पॉइंट

फोटोग्राफर्स और व्लॉगर्स के लिए मसूरिया पहाड़ी जोधपुर एक बेहतरीन सनसेट पॉइंट (Best Sunset Point) है।360-डिग्री विहंगम दृश्य: पहाड़ी की ऊंचाई से पूरी ‘ब्लू सिटी’ (जोधपुर शहर) का अद्भुत नजारा दिखाई देता है।सिनेमैटिक व्यू: शाम के समय जब सूरज ढलता है, तो यहाँ से दूरी पर स्थित मेहरानगढ़ किला और उम्मेद भवन पैलेस सोने की तरह चमक उठते हैं। इंस्टाग्राम रील्स और फोटोग्राफी के लिए शाम 5:30 से 6:45 का समय सबसे परफेक्ट है।

Jodhpur Tourist Places: Masuria Hill मसूरिया पहाड़ी जोधपुर

जोधपुर के मुख्य पर्यटन स्थलों में मसूरिया पहाड़ी का अपना एक विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है।वीर दुर्गादास राठौड़ पार्क: इस पहाड़ी पर मारवाड़ के वीर योद्धा दुर्गादास राठौड़ की एक विशाल कांस्य प्रतिमा है।धार्मिक महत्व: यहाँ लोक देवता बाबा रामदेव जी के गुरु बालीनाथ जी महाराज की पवित्र समाधि और प्राचीन गुफा स्थित है। रामदेवरा (रूणेचा) जाने वाले तीर्थयात्री यहाँ धोक लगाने जरूर आते हैं।

मसूरिया पहाड़ी जोधपुर का रास्ता

जोधपुर रेलवे स्टेशन या मुख्य बस स्टैंड से मसूरिया पहाड़ी (Masuria Hill) की दूरी मात्र 3 से 5 किलोमीटर है, जहाँ आप ऑटो-रिक्शा, कैब या स्थानीय बस से 15-20 मिनट में बेहद आसानी से पहुँच सकते हैं।

गुरु बालीनाथ जी की गुफा जोधपुर: जानिए इस रहस्यमयी और पवित्र तपोस्थली का इतिहास

पवित्र तपोस्थली: जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन गुफा नाथ संप्रदाय के महान संत गुसांई बालीनाथ जी महाराज की तपोस्थली है, जहाँ उन्होंने वर्षों कठोर तपस्या की थी।

बाबा रामदेव जी से संबंध: लोक देवता बाबा रामदेव जी ने बाल्यकाल में इसी गुफा में रहकर अपने गुरु बालीनाथ जी से शस्त्र, योग और अध्यात्म की गूढ़ शिक्षा प्राप्त की थी।

गुफा के मुख्य रहस्य: यहाँ गुरु महाराज की जीवित समाधि और पिछले 650 वर्षों से लगातार जल रही अखंड ‘अमर धुनी’ स्थित है। मान्यताओं के अनुसार, इसके आध्यात्मिक प्रभाव के कारण क्रूर भैरव राक्षस इस पहाड़ी की तरफ नहीं आ पाता था।

भादवा मेले का महत्व: प्रतिवर्ष अगस्त-सितंबर के मसूरिया मेले में रामदेवरा जाने वाले लाखों पैदल ‘जातरू’ इस संकरी गुफा में रेंगकर प्रवेश करते हैं। माना जाता है कि यहाँ शीश नवाने से सभी शारीरिक व मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं।

मसूरिया पहाड़ी जोधपुर के प्रमुख दर्शनीय और ऐतिहासिक स्थल)

बाबा रामदेव जी का प्राचीन मंदिर: यह जोधपुर का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि बाबा रामदेव जी ने अपने गुरु बालीनाथ जी से यहीं शिक्षा ली थी।

गुरु बालीनाथ जी की समाधि/धुनी: मंदिर परिसर के भीतर ही बाबा के गुरु बालीनाथ जी की पवित्र समाधि स्थित है, जो भक्तों की अगाध आस्था का केंद्र है।

वीर दुर्गादास राठौड़ की प्रतिमा: मारवाड़ के महान वीर और राष्ट्रवीर दुर्गादास राठौड़ की घोड़े पर सवार एक विशाल और भव्य कांस्य प्रतिमा यहाँ स्थापित है।

मसूरिया हिल गार्डन: पहाड़ी के चारों ओर फैला एक खूबसूरत पार्क, जहाँ बैठकर लोग समय बिताते हैं।

जोधपुर का सबसे बड़ा टीवी टॉवर: भारत के सबसे ऊंचे टेलीविजन टावरों में से एक इस पहाड़ी पर स्थित है, जो दूर से ही दिखाई देता है।

360-डिग्री पैनोरमिक व्यू पॉइंट: यहाँ से पूरी ‘ब्लू सिटी’ (जोधपुर), मेहरानगढ़ किला और उम्मेद भवन पैलेस का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। यह शहर का बेस्ट सूर्यास्त पॉइंट (Sunset Point) है।

परचा नाड़ी मसूरिया पहाड़ी का इतिहास और रहस्य

जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर स्थित परचा नाड़ी एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तालाब है, जिसका इतिहास बाबा रामदेव जी और उनके गुरु बालीनाथ जी महाराज के चमत्कारों (पर्चों) से जुड़ा है। इस नाड़ी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि मरुभूमि की भीषण गर्मी में भी इसका जलस्तर कभी समाप्त नहीं होता। मान्यता है कि बाबा रामदेव जी ने अपने गुरु की तपस्या के लिए अपनी दैवीय शक्तियों से यहाँ जल की धारा प्रकट की थी। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि इस पवित्र जल में स्नान या आचमन करने से त्वचा के रोग ठीक होते हैं और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं। यही कारण है कि रामदेवरा (रूणेचा) जाने वाले पैदल ‘जातरू’ यात्रा की सफलता के लिए इस पवित्र नाड़ी के जल को अपने माथे से लगाना कभी नहीं भूलते।

मसूरिया पहाड़ी पर किसका मंदिर है?

जोधपुर की मसूरिया पहाड़ी पर मुख्य रूप से लोक देवता बाबा रामदेव जी के गुरु, महायोगी गुसांई बालीनाथ जी महाराज का प्राचीन मंदिर और समाधि स्थल है।

इसके साथ ही यहाँ बाबा रामदेव जी का बाल स्वरूप मंदिर भी है, जहाँ उनके बचपन के रूप की पूजा की जाती है क्योंकि बाबा ने इसी स्थान पर अपने गुरु से शिक्षा-दीक्षा ली थी। गुफा के भीतर पिछले 650 से अधिक वर्षों से लगातार जल रही अखंड ‘अमर धुनी’ और परिसर में स्थित चमत्कारी ‘परचा नाड़ी’ (तालाब) भक्तों की अगाध आस्था के केंद्र हैं। गुरु-शिष्य के इसी अटूट ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जुड़ाव के कारण ही रामदेवरा (रूणेचा धाम) जाने वाले हर श्रद्धालु के लिए इस मंदिर में आकर गुरु बालीनाथ जी के चरणों में शीश नवाना अनिवार्य माना जाता है।

मसूरिया पहाड़ी जोधपुर का इतिहास: बाबा रामदेव जी और गुरु बालीनाथ जी का अलौकिक संबंध पर लिखा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? बाबा रामदेव जी की जय।

जोधपुर से रामदेवरा की दूरी कितनी है?

दूरी (Distance): जोधपुर से रामदेवरा की कुल दूरी सड़क मार्ग से आपके द्वारा चुने गए रूट के आधार पर लगभग 170 से 186 किलोमीटर बैठती है। Google Maps पर लाइव जोधपुर से रामदेवरा रूट के अनुसार यह दूरी लगभग 186 किलोमीटर है।

जोधपुर से रामदेवरा ट्रेन टिकट प्राइस (Ticket Price)

भारतीय रेलवे (IRCTC) के नियमों के अनुसार, जोधपुर से रामदेवरा के इस लगभग 180 किलोमीटर के सफर का टिकट किराया बेहद किफायती है। यदि आप रेलवे स्टेशन की खिड़की से सीधे जनरल (अनारक्षित) टिकट लेते हैं, तो इसका न्यूनतम किराया ₹85 से ₹100 के बीच आता है। वहीं, आरामदायक यात्रा के लिए स्लीपर क्लास (SL) का टिकट ₹145 से ₹170 के भीतर मिल जाता है। अगर आप एसी कोच में सफर करना चाहते हैं, तो थर्ड एसी (3A) का किराया ₹505 से ₹550 और सेकंड एसी (2A) का किराया ₹710 से ₹760 के बीच रहता है। मेला सीजन में भीड़ से बचने के लिए आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट से पहले ही ऑनलाइन रिजर्वेशन कराना सबसे बेहतर रहता है।

जोधपुर से रामदेवरा पैदल यात्रा में कितने दिन लगते हैं?

एक सामान्य पैदल जातरू प्रतिदिन 30 से 35 किलोमीटर चलता है, इस हिसाब से लगभग 175 किलोमीटर की यह पैदल यात्रा पूरी करने में 5 से 6 दिन का समय लगता है।

जोधपुर से रामदेवरा बस का किराया और समय क्या है?

राजस्थान रोडवेज (RSRTC) और निजी एक्सप्रेस बसों का किराया ₹220 से ₹350 के बीच रहता है। पहली बस तड़के सुबह 01:15 बजे से मिलनी शुरू हो जाती है और बस द्वारा सफर में 3 से 4 घंटे लगते हैं।

जोधपुर से रामदेवरा ट्रेन का न्यूनतम टिकट प्राइस क्या है?

जोधपुर से रामदेवरा के लिए ट्रेन का न्यूनतम टिकट प्राइस ₹85 से ₹100 के बीच है। यह किराया रेलवे स्टेशन की टिकट खिड़की (विंडो) से सीधे मिलने वाले जनरल (अनारक्षित/Unreserved) क्लास का है।यदि आप रिजर्वेशन कराकर यात्रा करना चाहते हैं, तो स्लीपर क्लास (Sleeper Class) का न्यूनतम किराया ₹145 से ₹170 के बीच रहता है।

जोधपुर से रामदेवरा ट्रेन टाइम टेबल (Train Timings Today)

जोधपुर जंक्शन (JU) से रामदेवरा (RDRA) के बीच दैनिक रूप से कई प्रमुख ट्रेनें संचालित होती हैं, जिनके समय का विवरण इस प्रकार है। सुबह के समय तड़के 04:00 बजे 12249 स्वर्ण नगरी एक्सप्रेस रवाना होती है जो 3 घंटे 01 मिनट में सुबह 07:01 बजे रामदेवरा पहुँचाती है। इसके बाद सुबह 06:10 बजे 20492 साबरमती – जैसलमेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस चलती है, जो मात्र 2 घंटे 57 मिनट का समय लेकर सुबह 09:07 बजे पहुँचने वाली इस रूट की सबसे तेज ट्रेन है。 दोपहर में 02:50 बजे 20486 साबरमती – जैसलमेर इंटरसिटी रवाना होकर शाम 06:25 बजे पहुँचती है। शाम के समय 05:00 बजे 15014 रानीखेत एक्सप्रेस (यात्रा अवधि 3 घंटे) और रात को 07:40 बजे 14087 रुणिचा एक्सप्रेस प्रस्थान करती है, जो 3 घंटे 40 मिनट का समय लेकर रात 11:20 बजे रामदेवरा स्टेशन पर अपना सफर पूरा करती है। ये सभी ट्रेनें सप्ताह के सातों दिन (रोजाना) चलती हैं, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा के बेहतरीन विकल्प मिलते हैं।

Jodhpur to Ramdevra Taxi Service Operators & Tempo Traveller Hire

यदि आप अपने परिवार या बड़े ग्रुप के साथ आरामदायक और निजी यात्रा का आनंद लेना चाहते हैं, तो टैक्सी बुकिंग सबसे उत्तम विकल्प है। जोधपुर में ‘Rajputana Cabs’, ‘Savaari Car Rentals’ और ‘JCS Cab’ जैसे लोकल ऑपरेटर्स के साथ-साथ ‘MakeMyTrip’ व ‘EaseMyTrip’ के जरिए ऑनलाइन वन-वे या राउंड-ट्रिप कैब बुक की जा सकती है। किराए की बात करें तो सेडान कार (Dzire / Etios) ₹10 प्रति किमी की दर से ₹2,200 से ₹3,200 में मिल जाती है, जबकि बड़े परिवारों के लिए एसयूवी (Innova / Ertiga) का कुल शुरुआती खर्च ₹5,100 से ₹6,900 तक आता है। इसके अलावा, 10 से 16 लोगों की टोली के लिए 12 से 17 सीटर AC टेम्पो ट्रैवलर का किराया ₹18 से ₹29 प्रति किलोमीटर के बीच रहता है। कैब का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप अपनी मर्जी से रास्ते में ओसियां माता जी के मंदिर या देचू के सैंड ड्यून्स पर रुकते हुए इस मरुस्थलीय सफर का पूरा आनंद ले सकते हैं।

जोधपुर से रामदेवरा पैदल यात्रा मार्ग और सेवा शिविर (Pandal List)

भादवा मेले (सितंबर) के दौरान जोधपुर से रामदेवरा के लिए मुख्यतः दो पैदल मार्ग उपयोग किए जाते हैं, जहाँ कदम-कदम पर भव्य सेवा शिविर (पंडाल) लगाए जाते हैं. मार्ग ए मथानिया, तिवरी, ओसियां, लोहावट और पोकरण से होकर गुजरता है, जहाँ यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा 108 किलोमीटर लंबा विशेष पदयात्रा ट्रैक भी तैयार किया जाता है. वहीं मार्ग बी बालेसर, देचू और पोकरण होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 11 (NH-11) का सीधा रूट है. भाद्रपद महीने के दौरान इन दोनों मार्गों पर हर 2 से 3 किलोमीटर पर स्थानीय कमेटियों और भामाशाहों द्वारा निःशुल्क सेवा शिविर लगाए जाते हैं, जहाँ जातरुओं के लिए 24 घंटे भोजन, शुद्ध पानी, ठहरने के लिए गद्दे-टेंट, पैरों की मालिश के लिए मशीनें और मुफ्त चिकित्सा व दवाइयों की उत्तम व्यवस्था होती है.

धार्मिक नियमानुसार रूट: जोधपुर रेलवे स्टेशन से मसूरिया पहाड़ी और फिर रामदेवरा

बाबा रामदेव जी की पदयात्रा का सबसे पहला और अनिवार्य नियम धार्मिक अनुशासन का पालन करना है:

चरण 1 (स्टेशन से मसूरिया पहाड़ी): यदि आप ट्रेन से जोधपुर रेलवे स्टेशन पहुँचते हैं, तो सबसे पहले आपको स्टेशन से 3.2 किलोमीटर दूर स्थित Masuriya Temple (मसूरिया पहाड़ी) जाना होता है. मान्यता के अनुसार, रामदेवरा (रूणेचा) की मुख्य यात्रा शुरू करने से पहले बाबा के गुरु बालीनाथ जी महाराज की गुफा और समाधि पर शीश नवाकर आशीर्वाद लेना अनिवार्य है.

चरण 2 (मसूरिया से रामदेवरा मार्ग): मसूरिया पहाड़ी पर धोक लगाने और ‘परचा नाड़ी’ का पवित्र जल माथे पर लगाने के बाद ही आपकी वास्तविक पदयात्रा शुरू होती है. यहाँ से यात्री मुख्य हाईवे की तरफ बढ़ते हैं.

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