विभीषण मंदिर कैथून कोटा :भारत का इकलौता मंदिर जहाँ होती है रावण के भाई की पूजा! Vibhishan Temple Kaithoon Kota

भारत का इकलौता विभीषण मंदिर कैथून कोटा (Vibhishan Temple Kaithoon Kota) जहाँ मूर्ति नहीं, बल्कि पैर के अंगूठे की पूजा होती है। जानिए इस 2000 साल पुराने मंदिर का इतिहास (history), पौराणिक कथाएँ और यहाँ पहुँचने का पूरा ट्रेवल गाइड (travel guide)।

विभीषण मंदिर कैथून कोटा का पौराणिक इतिहास और महत्व (Mythology and History of Vibhishan Temple)

कैथून के इस प्राचीन मंदिर का इतिहास बेहद पुराना और रोचक है। स्थानीय लोक मान्यताओं (Local Folklore) के अनुसार, इस स्थान का इतिहास लगभग 5,000 वर्ष पुराना माना जाता है, जो त्रेतायुग और द्वापर युग के संधिकाल से मेल खाता है।

विभीषण मंदिर कैथून कोटा :रामायण काल से जुड़ाव (Connection with Ramayana Era)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंका विजय के बाद जब भगवान श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा (King of Lanka) घोषित किया, तब विभीषण ने अखंड भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की थी। माना जाता है कि कैथून की इस पावन तपोभूमि पर विभीषण जी ने कुछ समय व्यतीत किया था। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर के गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) की वर्तमान संरचना और मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार संवत 1111 (लगभग 11वीं शताब्दी) के आसपास कोटा रियासत के हाड़ौती शासकों द्वारा करवाया गया था। तब से लेकर आज तक यह मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का एक अटूट केंद्र बना हुआ है।

विभीषण मंदिर कैथून कोटा का गर्भगृह और मूर्ति का अनोखा रहस्य (Unique Idol and Mystery)

कैथून विभीषण मंदिर की वास्तुकला (Temple Architecture) और यहाँ स्थापित मूर्ति दुनिया के अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल भिन्न है। इस मूर्ति से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य हैं जो भक्तों और वैज्ञानिकों दोनों को हैरान करते हैं:

केवल धड़ की पूजा (Worship of Torso Only): मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित विभीषण जी की प्रतिमा पूरी नहीं है। यहाँ केवल उनके धड़ (सीने से ऊपर का हिस्सा) की ही पूजा की जाती है। स्थानीय जनश्रुति है कि यह मूर्ति भूगर्भ से स्वतः प्रकट (Swayambhu Idol) हुई थी।

विशालकाय आकार (Gigantic Size): मूर्ति का आकार सामान्य इंसानी कद से काफी बड़ा है, जो रामायण काल के पात्रों की विशाल कद-काठी और शारीरिक बनावट को दर्शाता है।

हाथ में सुदर्शन चक्र (Sudarshan Chakra): आमतौर पर सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के हाथों में देखा जाता है। लेकिन इस मंदिर में विभीषण जी की मूर्ति के हाथ में सुदर्शन चक्र दिखाई देता है, जो इस बात का प्रतीक है कि विभीषण एक परम विष्णु-भक्त (Devotee of Lord Vishnu) थे।

मूर्ति धंसने का रहस्य (Vibhishan Mandir Murti Mystery): स्थानीय बुजुर्गों और पुजारियों के बीच एक प्राचीन मान्यता है कि यह विशाल प्रतिमा हर साल ‘जौ के दाने’ (Barley Grain) के बराबर ज़मीन के अंदर धंसती जा रही है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन यह कथा पर्यटकों के बीच गहरी उत्सुकता पैदा करती है।

दशहरे पर अनूठी परंपरा: जहाँ रावण नहीं, विभीषण पूजे जाते हैं (Dussehra Celebration at Vibhishan Temple)

हिंदू संस्कृति में विजयादशमी यानी दशहरे (Dussehra Festival) के दिन पूरे देश में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत मनाई जाती है। लेकिन कैथून की परंपरा इसके बिल्कुल विपरीत और सुंदर है।

यहाँ के लोग विभीषण को घर का भेदी या गद्दार नहीं, बल्कि ‘धर्म और सत्य का प्रतीक’ मानते हैं। उन्होंने अधर्म के मार्ग पर चल रहे अपने सगे भाई रावण का साथ छोड़कर भगवान राम की शरण ली थी। यही कारण है कि दशहरे के दिन इस मंदिर में विशेष महाआरती (Special Maha Aarti) का आयोजन किया जाता है। दूर-दराज से लोग यहाँ आकर विभीषण जी के दर्शन करते हैं और मन्नत मांगते हैं कि उनके घर में कभी आपसी कलह न हो और भाइयों के बीच प्रेम हमेशा बना रहे। इस दौरान यहाँ एक विशाल स्थानीय मेला (Vibhishan Mela) भी आयोजित होता है।

विभीषण मंदिर कैथून कोटा के दर्शन का समय (Vibhishan Temple Kota Timings)

  • सुबह का समय (Morning Timings): सुबह 06:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
  • दोपहर का विश्राम (Afternoon Break): दोपहर 12:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहते हैं।
  • शाम का समय (Evening Timings): शाम 04:00 बजे से रात्रि 08:00 बजे तक।
  • मुख्य आरती (Aarti Timings): सुबह की मंगला आरती सुबह 06:30 बजे और संध्या आरती शाम 07:15 बजे होती है।

यात्रा गाइड: कैथून विभीषण मंदिर कैसे पहुँचें? (How to Reach Kaithoon From Kota)

दूरी (Distance From Kota to Kaithoon): कोटा जंक्शन रेलवे स्टेशन (Kota Junction) से कैथून की दूरी लगभग 18 से 20 किलोमीटर है। कोटा के मुख्य बस स्टैंड से यह दूरी मात्र 15 किलोमीटर है।

परिवहन के साधन (Modes of Transport): कोटा शहर से कैथून के लिए राजस्थान राज्य परिवहन की स्थानीय बसें (Local Buses) और ऑटो-रिक्शा बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। आप मात्र 30 मिनट में कैब या निजी वाहन से यहाँ पहुँच सकते हैं।

सर्वोत्तम मौसम (Best Time to Visit): राजस्थान में गर्मियों में अत्यधिक तापमान होता है, इसलिए कैथून घूमने का सबसे बेस्ट समय अक्टूबर से मार्च (S winter season) के बीच का माना जाता है।

ठहरने की व्यवस्था (Accommodation Options): कैथून एक छोटा ऐतिहासिक कस्बा है, इसलिए यहाँ ठहरने के लिए होटल विकल्प सीमित हैं। पर्यटकों के लिए सबसे उत्तम यही होगा कि वे कोटा शहर (Kota City) में रुकें, जहाँ बजट होटल्स से लेकर लग्जरी हेरिटेज रिसॉर्ट्स उपलब्ध हैं।

विभीषण मंदिर की मूर्ति का रहस्य क्या है? (What is the mystery of Vibhishan temple idol?)

इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि यहाँ विभीषण जी की पूरी मूर्ति नहीं है, बल्कि केवल उनके धड़ (Torso) की पूजा की जाती है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, यह विशालकाय प्रतिमा हर साल ‘जौ के दाने’ (Barley Grain) के बराबर ज़मीन के अंदर धंसती जा रही है, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए आज भी गहरी उत्सुकता का विषय है।

कोटा जंक्शन से कैथून विभीषण मंदिर की दूरी कितनी है? (What is the distance from Kota Junction to Kaithoon Vibhishan Temple?)

कोटा जंक्शन रेलवे स्टेशन (Kota Junction) से कैथून विभीषण मंदिर की कुल दूरी लगभग 18 से 20 किलोमीटर है। स्टेशन से आपको कैथून के लिए सीधे ऑटो-रिक्शा, निजी टैक्सी या स्थानीय बसें (Local Buses) बेहद आसानी से मिल जाती हैं, जिससे आप करीब 30 से 40 मिनट में मंदिर पहुँच सकते हैं।

क्या कैथून में विभीषण मंदिर के अलावा भी कुछ खास है? (Is there anything else famous in Kaithoon apart from Vibhishan Temple?)

हाँ, कैथून अपने विभीषण मंदिर के साथ-साथ विश्व प्रसिद्ध कोटा डोरिया साड़ियों (Kota Doria Sarees) का मुख्य केंद्र है। इस कस्बे के लगभग हर घर में पारंपरिक हथकरघों (Handloom) पर अद्भुत बुनाई की जाती है। यहाँ आने वाले पर्यटक मंदिर के दर्शन करने के बाद सीधे स्थानीय बुनकरों (Kaithoon Weavers) से असली जीआई टैग (GI Tag) प्रमाणित साड़ियाँ और सूट खरीद सकते हैं।

कैथून विभीषण मंदिर के मुख्य पुजारी किस समुदाय से हैं और पूजा की क्या पद्धति है? (Who are the priests of Kaithoon Vibhishan Temple and what is the worship method?)

कैथून के इस ऐतिहासिक मंदिर में पारंपरिक रूप से सनाढ्य ब्राह्मण परिवार के पुजारी पीढ़ियों से सेवा-पूजा संभाल रहे हैं। यहाँ विभीषण जी की पूजा किसी तामसी या तांत्रिक विधि से नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैष्णव पद्धति (Vaishnav Tradition) और सात्विक रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। इन्हें प्रतिदिन सुबह और शाम को शुद्ध शाकाहारी भोग (Prasad) लगाया जाता है।

क्या विभीषण मंदिर परिसर के अंदर अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तियाँ हैं? (Are there idols of other deities inside the Vibhishan temple complex?)

हाँ, मुख्य गर्भगृह में विभीषण जी की विशाल प्रतिमा के अलावा, मंदिर परिसर के भीतर एक छोटा राम दरबार (Ram Darbar) भी स्थापित है, जिसमें भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की सुंदर मूर्तियाँ हैं। इसके साथ ही परिसर में संकटमोचन हनुमान जी और भगवान शिव का एक छोटा मंदिर भी बना हुआ है, जो इसके संपूर्ण धार्मिक महत्व को पूरा करता है।

कैथून विभीषण मेले का आयोजन वर्ष के किस महीने में होता है? (In which month of the year is the Kaithoon Vibhishan Mela organized?)

कैथून का प्रसिद्ध विभीषण मेला हर साल हिंदू कैलेंडर के अनुसार अश्विन मास में मनाया जाता है, जो अंग्रेजी कैलेंडर के सितंबर या अक्टूबर महीने (September or October) में आता है। यह समय दशहरे (Vijayadashami) के त्योहार का होता है, जब इस शांत कस्बे में सबसे ज्यादा रौनक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं।

कोटा एयरपोर्ट या नजदीकी हवाई अड्डे से कैथून मंदिर कैसे पहुँचें? (How to reach Kaithoon temple from the nearest airport?)

कैथून के सबसे नजदीकी चालू कमर्शियल एयरपोर्ट जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jaipur International Airport – JAI) है, जो यहाँ से लगभग 245 किलोमीटर दूर है। जयपुर हवाई अड्डे पर उतरकर आप कोटा के लिए सीधी टैक्सी ले सकते हैं या जयपुर रेलवे स्टेशन से कोटा जंक्शन के लिए सुपरफास्ट ट्रेन पकड़ सकते हैं। कोटा पहुँचने के बाद स्थानीय ऑटो या बस से कैथून जाना बेहद आसान है।

रावण के भाई विभीषण का एकमात्र मंदिर राजस्थान के कैथून में ही क्यों बनाया गया? (Why was the only temple of Ravana’s brother Vibhishan built in Kaithoon, Rajasthan?)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, लंकापति रावण के वध और विभीषण के राज्याभिषेक के बाद जब त्रेतायुग समाप्त हो रहा था, तब विभीषण ने अखंड भारत की यात्रा की थी। राजस्थान का हाड़ौती क्षेत्र (कोटा और आस-पास का हिस्सा) प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों की तपोभूमि हुआ करता था। माना जाता है कि विभीषण जी इस क्षेत्र की शांति और भक्तिमय माहौल से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने यहाँ रुककर भगवान विष्णु की तपस्या की थी। इसी पौराणिक संबंध और उनकी स्मृति को जीवंत रखने के लिए सदियों पहले स्थानीय राजाओं और भक्तों ने कैथून की इस पावन धरती पर उनके इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया था।

कैथून विभीषण मंदिर की वास्तुकला की क्या विशेषताएँ हैं? (What are the architectural features of the Kaithoon Vibhishan Temple?)

कैथून का विभीषण मंदिर पारंपरिक राजस्थानी और हाड़ौती स्थापत्य शैली (Hadoti Architecture) का एक सुंदर नमूना है। मंदिर का बाहरी हिस्सा देखने में राजस्थान के पारंपरिक गढ़ या हवेली जैसा प्रतीत होता है, जिसमें मजबूत पत्थर की दीवारें और सुंदर नक्काशीदार मेहराब बने हुए हैं। मंदिर का सबसे मुख्य आकर्षण इसका प्राचीन गर्भगृह है, जिसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि सूर्य की किरणें सीधे विभीषण जी की विशाल प्रतिमा पर पड़ती हैं। मंदिर के स्तंभों और दीवारों पर प्राचीन काल की कलाकृतियां उकेरी गई हैं, जो 11वीं शताब्दी की वास्तुकला और शिल्प कौशल की समृद्ध कहानी बयां करती हैं।

क्या कैथून विभीषण मंदिर के दर्शन के लिए कोई विशेष नियम या ड्रेस कोड है? (Is there any specific rule or dress code for visiting the Kaithoon Vibhishan Temple?)

कैथून विभीषण मंदिर में दर्शन के लिए कोई आधिकारिक या कड़ा ड्रेस कोड (Dress Code) लागू नहीं है, लेकिन एक ऐतिहासिक हिंदू धार्मिक स्थल होने के नाते यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं से पारंपरिक और शालीन कपड़े पहनने की अपेक्षा की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से पहले जूते-चप्पल बाहर उतारना अनिवार्य है। मंदिर परिसर के भीतर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने से पहले वहाँ के पुजारियों या स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेना बेहतर रहता है। इसके अलावा, मासिक धर्म (Periods) के दौरान महिलाओं को मंदिर परिसर में प्रवेश न करने की पारंपरिक सलाह दी जाती है।

कैथून विभीषण मंदिर में नियमित रूप से कौन से धार्मिक रीति-रिवाज और अनुष्ठान किए जाते हैं? (What regular religious rituals and ceremonies are performed at the Kaithoon Vibhishan Temple?)

इस मंदिर में विभीषण जी की पूजा किसी डरावने राक्षस के रूप में नहीं, बल्कि एक परम राम-भक्त और सात्विक देवता के रूप में की जाती है। प्रतिदिन सुबह भगवान को जगाने के साथ ‘मंगला आरती’ होती है, जिसके बाद प्रतिमा का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। दोपहर में भगवान को सात्विक शाकाहारी भोजन का भोग लगाकर पट बंद कर दिए जाते हैं। शाम को मंदिर दोबारा खुलने पर ‘संध्या आरती’ होती है, जिसमें स्थानीय लोग बड़ी संख्या में झांझ-मंजीरों के साथ शामिल होते हैं। प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को यहाँ हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जाता है

कैथून विभीषण मंदिर के आस-पास पर्यटकों के लिए खाने-पीने और स्थानीय भोजन के क्या विकल्प उपलब्ध हैं? (What food and local cuisine options are available for tourists around the Kaithoon Vibhishan Temple?)

कैथून एक छोटा और पारंपरिक कस्बा है, इसलिए मंदिर के बिल्कुल पास आपको बड़े फैंसी रेस्टोरेंट नहीं मिलेंगे। हालांकि, मंदिर के आस-पास स्थानीय दुकानें हैं जहाँ आप राजस्थान का प्रसिद्ध ‘कोटा कचोरी’ (Kota Kachori), गरमा-गर्म समोसे, जलेबी और कड़क चाय का आनंद ले सकते हैं। यदि आप प्रामाणिक राजस्थानी थाली (दाल-बाटी-चूरमा) या उत्तर भारतीय भोजन करना चाहते हैं, तो सबसे बेहतरीन विकल्प कोटा मुख्य शहर है। कोटा शहर में हर बजट के रेस्टोरेंट और शुद्ध शाकाहारी भोजनालय उपलब्ध हैं, जो कैथून से मात्र 20-30 मिनट की दूरी पर स्थित हैं।

पौराणिक कथा में छुपा है कैथून विभीषण मंदिर स्थापना का राज

कथा के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक हो रहा था, तब महादेव (भगवान शिव) के मन में मृत्युलोक (धरती) का भ्रमण करने की इच्छा जागी। उनकी इस इच्छा को पूरा करने के लिए विभीषण ने एक कांवड़ तैयार की और उसमें एक तरफ भगवान शंकर व दूसरी तरफ हनुमान जी को बिठाकर सैर कराने का निश्चय किया। यात्रा शुरू करने से पहले शिवजी ने विभीषण के सामने एक शर्त रखी कि रास्ते में जहाँ भी यह कांवड़ ज़मीन से छू जाएगी, उनकी यह यात्रा वहीं पर समाप्त मान ली जाएगी।

विभीषण दोनों देवताओं को कांवड़ में लेकर धरती की सैर पर निकल पड़े। कुछ जगहों का भ्रमण करने के बाद, जैसे ही वे कैथून कस्बे में पहुँचे, अचानक विभीषण का पैर धरती पर टिक गया और शर्त के मुताबिक यात्रा वहीं रुक गई। इस दौरान कांवड़ का अगला सिरा यहाँ से करीब 12 किलोमीटर दूर ‘चौरचौमा’ में जाकर लगा, जबकि दूसरा सिरा कोटा के ‘रंगबाड़ी’ इलाके में गिरा।

यही वजह है कि रंगबाड़ी में पवनपुत्र हनुमान जी और चौरचौमा में महादेव शिव शंकर का ऐतिहासिक मंदिर स्थापित हुआ। वहीं, जिस स्थान पर विभीषण जी का पैर धरती पर पड़ा था, वहाँ इस भव्य विभीषण मंदिर का निर्माण किया गया।

विभीषण मंदिर कैथून कोटा: होली पर लगता है विभीषण मेला

राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में स्थित देश के एकमात्र विभीषण मंदिर में हर साल होली के पावन अवसर पर भव्य विभीषण मेले का आयोजन किया जाता है। पौराणिक महत्व समेटे हुए इस ऐतिहासिक मेले की रौनक देखते ही बनती है, जहाँ सात दिनों तक उत्सव का माहौल रहता है। मेले में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक विभीषण जी के दर्शन करने और राजस्थानी संस्कृति का आनंद लेने आते हैं। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, हाट-बाजार और लोक नृत्यों से सराबोर यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि आपसी भाईचारे और कैथून की अनूठी परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है।

कैथून विभीषण मंदिर की एक अनूठी और ऐतिहासिक परंपरा: हिरण्यकश्यप के पुतलेका दहन

कैथून की सबसे अनोखी और अनूठी विशेषता यह है कि पूरे देश में सिर्फ इसी स्थान पर हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई, तो इससे अत्यंत क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप अपने ही पुत्र भक्त प्रह्लाद को मारने के लिए आगे बढ़ा। उसी क्षण भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर अत्याचारी हिरण्यकश्यप का वध किया और अपने परम भक्त प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की।

बुराई पर असीम श्रद्धा और अच्छाई की इसी जीत को जीवंत रखने के लिए, कैथून में होलिका दहन के अगले दिन (धुलंडी पर) बेहद उत्साह के साथ हिरण्यकश्यप के विशाल पुतले का दहन करने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है।

विभीषण की प्रतिमा कैथून के हर साल जमीन में धंस क्यों रही है Vibhishan ji ka mandir kyon dhas raha hai

यह मान्यता राजस्थान के कोटा जिले के पास कैथून (Ketu/Kaithoon) कस्बे में स्थित दुनिया के एकमात्र प्राचीन विभीषण मंदिर से जुड़ी है। इस मंदिर में स्थापित विभीषण जी की विशाल प्रतिमा का केवल धड़ से ऊपर का हिस्सा ही दिखाई देता है, जबकि बाकी का शरीर जमीन के अंदर है।

स्थानीय लोक मान्यताओं और पुजारियों के अनुसार, विभीषण जी को भगवान ब्रह्मा से अमरता (चिरंजीवी होने) का वरदान मिला था।

जौ के दाने के बराबर धंसना: ऐसा माना जाता है कि यह प्रतिमा हर साल एक जौ (अनाज) के दाने के बराबर जमीन में समाती जा रही है।

कलयुग से संबंध: मान्यता है कि जिस दिन यह प्रतिमा पूरी तरह से धरती के अंदर समा जाएगी, उस दिन कलयुग का अंत हो जाएगा। इसे एक दैवीय चमत्कार के रूप में देखा जाता है।

पुरानी भारी पत्थरों की मूर्तियों का समय के साथ नीचे खिसकना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसे सॉइल सेटलमेंट (Soil Settlement) कहा जाता है, जिसमें मूर्ति के अत्यधिक वजन, नमी और समय के प्रभाव के कारण उसके नीचे की मिट्टी धीरे-धीरे दबती चली जाती है। जमीन के नीचे होने वाले इन सूक्ष्म भूगर्भीय बदलावों और खिंचाव की वजह से ही विभीषण जी की प्रतिमा धीरे-धीरे नीचे धंसती हुई प्रतीत होती है, जिसे स्थानीय लोग एक दैवीय चमत्कार मानते हैं।

क्या भारत में विभीषण जी का कोई मंदिर है?

हाँ, राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में दुनिया का एकमात्र समर्पित प्राचीन विभीषण मंदिर स्थित है। इसके अलावा तमिलनाडु के रामेश्वरम में कोथंडरामस्वामी मंदिर है, जहाँ विभीषण के शरण लेने की कथा जुड़ी है।

विभीषण का मंदिर कैथून का निर्माण

इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार, मंदिर का मूल ढांचा बहुत प्राचीन है और इसका निर्माण चौथी शताब्दी (गुप्त काल) के आसपास का माना जाता है। इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इस बात से भी प्रमाणित होता है कि लगभग 60 साल पहले गोरखपुर से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध “कल्याण” पत्रिका में भी कैथून के इस विभीषण मंदिर को देश का इकलौता और प्रमुख तीर्थ बताया गया था।

कोटा का विभीषण मंदिर त्रेतायुग के पौराणिक इतिहास और गुप्तकालीन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। दुनिया का एकमात्र मंदिर होने के कारण इसका धार्मिक और पुरातात्विक महत्व अतुलनीय है। आस्था और विज्ञान का यह अनोखा केंद्र आज भी देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए गहरे आकर्षण का विषय बना हुआ है।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top