रामदेव जी की बहन सुगना बाई का इतिहास: जानिए पति का नाम, ससुराल और पूंगलगढ़ की पूरी कहानी

“जानिए बाबा रामदेव जी की बहन सुगना बाई का पूरा इतिहास। सुगना बाई के पति का नाम, ससुराल पूंगलगढ़ की प्रसिद्ध लोककथा और झुरावो भजन की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।”

सुगना बाई का जन्म और परिवार

सुगना बाई का जन्म पोकरण (वर्तमान जैसलमेर जिला, राजस्थान) के तंवर राजपूत राजवंश में हुआ था। उनके पिता पोकरण के राजा ठाकुर अजमाल जी तंवर और माता मैणादे थीं। राजा अजमाल जी के घर चार संतानें हुईं, जिनमें दो पुत्र (वीरमदेव जी और बाबा रामदेव जी) तथा दो पुत्रियां (लाछां बाई और सुगना बाई) थीं। सुगना बाई बाबा रामदेव जी की सगी बहन थीं और उनसे अगाध प्रेम करती थीं।

सुगना बाई का ससुराल और विवाह

लोक मान्यताओं के अनुसार, सुगना बाई का विवाह तत्कालीन बीकानेर रियासत के अंतर्गत आने वाले पूंगलगढ़ (वर्तमान में पूगल, बीकानेर) के परिहार (पड़िहार) राजवंश में हुआ था। उनके पति का नाम कुंवर उदयसिंह पड़िहार था, जो पूंगलगढ़ के शासक राव विजयसिंह के पुत्र थे। विवाह के बाद सुगना बाई पूंगलगढ़ चली गईं। लोकगीतों में उनके एक पुत्र का भी वर्णन मिलता है, जिसका नाम ‘भानु’ था।

पूंगलगढ़ की लोककथा और बाबा रामदेव जी का पर्चा (The Legend of Pungalgarh)

सुगना बाई के जीवन से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथा उनके ससुराल पूंगलगढ़ से संबंधित है। कथा के अनुसार, बाबा रामदेव जी के परम भक्त और रूणिचा के निवासी रत्ना रबारी एक बार व्यापार के सिलसिले में पूंगलगढ़ गए थे। वहां किसी गलतफहमी या राजा के क्रोध के कारण रत्ना रबारी को पूंगलगढ़ की जेल में डाल दिया गया।

जब सुगना बाई को पता चला कि उनके भाई का परम भक्त उनके ससुराल की जेल में कैद है, तो वे बहुत दुखी हुईं। उन्होंने अपने भाई रामदेव जी को याद किया और एक कौवे के माध्यम से रूणिचा संदेश भेजा। भजनों में इस प्रसंग को “पुंगलगढ़ में कागला उड़ाऊ बीरा” के रूप में गाया जाता है।

बहन की पुकार सुनकर बाबा रामदेव जी अपने नीले घोड़े पर सवार होकर तुरंत पूंगलगढ़ पहुंचे। वहां उन्होंने राजा को अपने दिव्य चमत्कार (पर्चे) दिखाए, जिसके बाद भयभीत होकर राजा ने रत्ना रबारी को ससम्मान मुक्त कर दिया। बाबा रामदेव जी अपनी बहन सुगना बाई को भी अपने साथ पीहर (रूणिचा) लेकर आए।

सुगना बाई रो झुरावो (Sugna Bai Ro Jhuravo)

राजस्थानी भजनों में ‘झुरावो’ का अर्थ होता है – विरह या याद में गाया जाने वाला दर्दभरा गीत। जब सुगना बाई अपने ससुराल पूंगलगढ़ में थीं और उन्हें अपने पीहर तथा भाई रामदेव जी की याद सताती थी, तब वे जो गीत गाती थीं, उन्हें ‘सुगणा बाई रो झुरावो’ कहा जाता है। प्रकाश माली, कुशाल बारठ और श्याम पालीवाल जैसे प्रसिद्ध राजस्थानी गायकों ने इन भजनों को गाकर अमर कर दिया है। आज भी भाद्रपद (भादवा) के महीने में जब रामदेवरा (रूणिचा) का मेला भरता है, तो यह भजन हर कोने में गूंजता है।

सुगना बाई के पति का क्या नाम था

लोक इतिहास और राजस्थानी मान्यताओं के अनुसार, बाबा रामदेव जी की बहन सुगना बाई के पति का नाम कुंवर उदयसिंह पड़िहार (परिहार) था। वे बीकानेर संभाग में स्थित तत्कालीन पूंगलगढ़ (पुगल) के शासक राव विजयसिंह पड़िहार के पुत्र थे। लोककथाओं और भजनों में सुगना बाई के बेटे का नाम ‘भानु’ बताया जाता है। विवाह के बाद सुगना बाई पूंगलगढ़ चली गई थीं, जहां लोकगीतों के अनुसार उन्हें कई कठिन पारिवारिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। जब पूंगलगढ़ में उनके बेटे भानु या उनके परिवार पर कोई संकट आया, तब भाई बाबा रामदेव जी ने वहां पहुंचकर अपनी दिव्य शक्तियों से उनकी रक्षा की थी।

लाछ बाई और सुगना बाई रामदेव जी की क्या लगती थी?

लाछ बाई (लाचां बाई) और सुगना बाई लोक देवता बाबा रामदेव जी की सगी बहनें थीं। रामदेव जी के पिता तंवर वंश के राजा अजमाल जी और माता मैणादे थीं, जिनकी चार संतानें थीं—वीरमदेव जी, बाबा रामदेव जी, लाछां बाई और सुगना बाई।इन दोनों बहनों का रामदेव जी के जीवन और लोककथाओं में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सुगना बाई का विवाह पुंगलगढ़ (बीकानेर) और लाछां बाई का विवाह अमरकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। लोक मान्यताओं के अनुसार, इन दोनों बहनों का अपने भाई रामदेव जी से अगाध प्रेम था, और बाबा ने समय-समय पर अपने चमत्कारों (परचों) से दोनों बहनों के ससुराल में उनकी लाज बचाई थी।

बाबा रामदेव जी अपनी बहन सुगना को लेने ससुराल कब गए थे?

विवाह के बाद कई वर्षों तक सुगना बाई अपने पीहर रूणिचा नहीं आ पाई थीं। जब उनके ससुराल पूंगलगढ़ के अभिमानी राजा ने बाबा रामदेव जी के परम भक्त रत्ना रबारी को बिना कसूर जेल में डाल दिया, तो सुगना बाई को गहरा आघात लगा। उन्होंने महल की छत (डागलिये) पर खड़े होकर विरह में एक कौवे के माध्यम से अपने भाई रामदेव जी को भावुक संदेश भेजा। बहन की व्याकुल पुकार सुनते ही बाबा रामदेव जी तुरंत अपने नीले घोड़े पर सवार होकर पूंगलगढ़ पहुँचे, वहाँ अपने चमत्कारों से रत्ना रबारी को मुक्त कराया और अपनी लाडली बहन सुगना बाई को ससम्मान वापस पीहर लेकर आए।

रत्ना रबारी की कैद और बाबा रामदेव जी का चमत्कार

रूणिचा निवासी बाबा रामदेव जी के परम भक्त रत्ना रबारी जब ऊंटों के व्यापार के लिए पूंगलगढ़ गए, तो वहाँ के अभिमानी परिहार राजा ने उन्हें बिना वजह कालकोठरी में डाल दिया। जेल में बंद रत्ना रबारी ने जब रोते हुए अपने आराध्य को पुकारा, तो बाबा रामदेव जी ने पूंगलगढ़ में अपनी दिव्य माया रची। राजा के महल के अस्त्र-शस्त्र हवा में उड़ने लगे और जेल के मजबूत ताले अपने आप टूट गए। यह महाचमत्कार (पर्चा) देखकर राजा बुरी तरह डर गया और उसने तुरंत रत्ना रबारी के पैर पकड़कर उन्हें ससम्मान रिहा कर दिया।

“वीरा म्हारा रामदेव रे बाई ने एक वार मिलन ने आव (Trending Audio Lines

वीरा म्हारा रामदेव रे, बाई ने एक वार मिलन ने आव” सुगना बाई द्वारा अपने भाई बाबा रामदेव को याद करने वाली एक भावुक और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय ऑडियो लाइन है। यह पंक्ति, जो पूंगलगढ़ में सुगना की व्यथा को दर्शाती है, भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है और रील्स पर ट्रेंड कर रही है।

सुगना बाई की पुकार सोंग रील्स ट्रेंडिंग”.

सुगना बाई की पुकार” एक बेहद भावुक और लोकप्रिय राजस्थानी भजन है, जो आजकल इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) और यूट्यूब शॉर्ट्स पर जबरदस्त ट्रेंड कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस गाने की “वीरा म्हारा रामदेव रे…” जैसी दर्दभरी लाइनें ऑडियो बैकग्राउंड के रूप में बहुत पसंद की जा रही हैं।रील्स पर लोग इस ऑडियो के साथ भाई-बहन के अटूट प्रेम, रक्षाबंधन त्योहार और मारवाड़ी संस्कृति को दर्शाते हुए वीडियो बना रहे हैं। प्रकाश माली और अन्य कलाकारों के गाए इस गाने की इमोशनल टोन के कारण, इस पर बने शॉर्ट वीडियो को लाखों में व्यूज और लाइक्स मिल रहे हैं।

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