माउंट आबू पर्वत: जहाँ बसते हैं 33 करोड़ देवी-देवता – अनकही कहानियाँ और गुप्त मंदिर

पुराणों में माउंट आबू पर्वत को ‘अर्बुदांचल’ कहा गया है और इसे हिमालय का छोटा भाई माना जाता है। मान्यता है कि जब देवताओं पर संकट आता था, तो वे इसी पवित्र पर्वत की शरण लेते थे। यही कारण है कि इसे ’33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान’ (Abode of 33 Crore Deities) कहा जाता है।

माउंट आबू पर्वत मान्यता के पीछे की पौराणिक कहानी (The Mythology)

स्कंद पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव के नंदी बैल के पैर एक गहरे गड्ढे में फंस गए थे, तब उसे बचाने के लिए ‘अर्बुदा’ नामक सर्प (Serpent) ने सहायता की थी। देवताओं ने प्रसन्न होकर इस पर्वत पर अपना वास बनाया।

ऋषियों का निमंत्रण: यह भी कहा जाता है कि ऋषि वशिष्ठ (Sage Vashistha) ने जब यहाँ यज्ञ किया था, तब उन्होंने सभी 33 करोड़ देवताओं को यहाँ आमंत्रित किया था। तब से यह स्थान देवताओं की तपोभूमि बन गया।

माउंट आबू पर्वत में गुप्त और छोटे मंदिर (Hidden & Lesser-Known Temples in Mount Abu)

मुख्य मंदिरों (जैसे दिलवाड़ा) के अलावा, माउंट आबू की पहाड़ियों में कई ऐसे छोटे मंदिर हैं जिन्हें ‘देवताओं की उपस्थिति’ का केंद्र माना जाता है:

कोटेश्वर महादेव (Koteshwar Mahadev): यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है। माना जाता है कि यहाँ एक साथ करोड़ों शिवलिंगों की ऊर्जा समाहित है।

बृहस्पति देव मंदिर (Jupiter Temple): गुरु शिखर के पास स्थित यह भारत के बहुत कम ‘बृहस्पति मंदिरों’ में से एक है। लोग इसे नौ ग्रहों के गुरु का निवास मानते हैं।

पांडव भवन के पास के गुप्त मंदिर: नक्की झील के चारों ओर की पहाड़ियों में ऐसे कई छोटे-छोटे पत्थर के मंदिर (Rock Shrines) हैं, जिन्हें स्थानीय लोग विशिष्ट देवताओं के स्थान के रूप में पूजते हैं।

33 करोड़’ का असली आध्यात्मिक अर्थ

आध्यात्मिक गुरुओं के अनुसार, यहाँ ‘करोड़’ शब्द का अर्थ केवल संख्या (Number) नहीं, बल्कि ‘कोटि’ यानी ‘प्रकार’ (Categories) भी है। इसका मतलब है कि यहाँ हर प्रकार की ईश्वरीय शक्ति का वास है।

माउंट आबू पर्वत को 33 करोड़ देवी-देवताओं का निवास स्थान क्यों कहा जाता है? (Why Mount Abu is called the home of 33 crore Gods and Goddesses?)

मान्यताओं के अनुसार, माउंट आबू (अर्बुदांचल पर्वत) अत्यंत पवित्र भूमि है। कहा जाता है कि यहाँ के ऋषि-मुनियों की तपस्या से प्रसन्न होकर सभी देवी-देवता यहाँ वास करने आए थे। यहाँ स्थित अधर देवी मंदिर (Adhar Devi Temple) और अचलेश्वर महादेव (Achleshwar Mahadev) जैसे स्थान इस मान्यता को और पुख्ता करते हैं।

माउंट आबू पर्वत का सबसे रहस्यमयी मंदिर कौन सा है? (Which is the most mysterious temple in Mount Abu?)

अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achleshwar Mahadev Temple) को सबसे रहस्यमयी माना जाता है। यहाँ भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है और मंदिर के गर्भगृह में एक ऐसा गड्ढा (ब्रह्म खड्ड) है, जिसके अंत का पता आज तक कोई नहीं लगा सका।

क्या माउंट आबू पर्वत में कोई ‘गुप्त’ या कम चर्चित मंदिर भी है? (Are there any hidden or offbeat temples in Mount Abu?)

हाँ, ऋषिकेश मंदिर (Rishikesh Temple) और गौमुख मंदिर (Gaumukh Temple) ऐसे गुप्त मंदिर हैं जहाँ भीड़ कम होती है। गौमुख मंदिर पहुँचने के लिए आपको करीब 700 सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं, जहाँ एक प्राकृतिक झरने का पानी गाय के मुख जैसी आकृति से लगातार बहता रहता है।

माउंट आबू के मंदिरों के दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय क्या है? (Best time to visit temples in Mount Abu?

वैसे तो आप साल भर यहाँ आ सकते हैं, लेकिन मानसून (Monsoon) और सर्दियों (Winter) के दौरान यहाँ का वातावरण बहुत ही आध्यात्मिक और शांत होता है। शिवरात्रि और नवरात्रि के समय यहाँ विशेष रौनक रहती है।

क्या माउंट आबू पर्वत के सभी मंदिरों में प्रवेश निःशुल्क है? (Is entry free in all temples of Mount Abu?

जी हाँ, माउंट आबू के अधिकांश हिंदू मंदिरों में प्रवेश निःशुल्क (Free Entry) है। हालाँकि, दिलवाड़ा जैन मंदिर (Delwara Jain Temple) जैसे कुछ स्थानों पर फोटोग्राफी और मोबाइल ले जाने पर सख्त प्रतिबंध है।

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