लखबीर सिंह लक्खा की जीवनी: गुरुद्वारे में शबद गाने वाला 14 साल का लड़का कैसे बना भारत का ‘भजन सम्राट’?

‘प्यारा सजा है तेरा द्वार’ गाने वाले लखबीर सिंह लक्खा आज कहाँ हैं? जानिए भजन सम्राट के परिवार, उनके गायक बेटे और करोड़ों की नेट वर्थ से जुड़ी पूरी कहानी।

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लखबीर सिंह लक्खा का जीवन परिचय और जन्म (Lakhbir Singh Lakkha Biography & Birth)

जन्म और स्थान: लखबीर सिंह लक्खा जी का जन्म 25 अगस्त 1950 को हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब का रहने वाला था। लक्खा जी के पिता टाटा स्टील (TATA Steel) में कार्यरत थे, जिसके कारण उनका जन्म और पालन-पोषण जमशेदपुर (झारखंड) में हुआ।

शुरुआती जीवन और गायकी की शुरुआत: लक्खा जी के परिवार में दूर-दूर तक संगीत की कोई पृष्ठभूमि (Background) नहीं थी। वे बचपन में अपने स्कूल की प्रार्थना सभा में ‘तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो’ गाया करते थे, जहाँ से शिक्षकों ने उनकी आवाज को पहचाना।

पहला स्टेज परफॉर्मेंस: महज़ 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने जमशेदपुर के टाटानगर गुरुद्वारे में शबद कीर्तन गाकर अपनी आधिकारिक गायकी के सफर की शुरुआत की। सिक्ख परिवार से ताल्लुक रखने के कारण उनका पहला धार्मिक एल्बम भी गुरुद्वारे के शबद कीर्तन का ही रिकॉर्ड हुआ था।

लखबीर सिंह लक्खा का परिवार और बेटा (Lakhbir Singh Lakkha Family & Son)

लक्खा जी चमक-दमक की दुनिया से दूर बहुत ही साधारण जीवन जीते हैं और स्टेज पर हमेशा सफेद कुर्ता-पायजामा में नजर आते हैं। उनके परिवार की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

बेटा बृजराज सिंह लक्खा (Brijraj Singh Lakkha): लक्खा जी की महान संगीत विरासत को उनके बेटे बृजराज सिंह लक्खा बहुत खूबी से आगे बढ़ा रहे हैं। बृजराज भी आज के समय के एक बेहद लोकप्रिय और उभरते हुए भजन गायक हैं।

• बेटे के सुपरहिट भजन: यूट्यूब और स्पॉटिफ़ाई पर बृजराज सिंह लक्खा के भजन जैसे ‘तेरे दरबार में मैया खुशी मिलती है’ और ‘भोला तेरा दम दम डमरू बाजे’ काफी सर्च और सुने जाते हैं। लाइव शोज़ में पिता और बेटे की जुगलबंदी को दर्शक बहुत पसंद करते हैं।

‘लखबीर सिंह लक्खा की भजन सम्राट’ की उपाधि और करियर के बड़े टर्निंग पॉइंट्स

शुरुआती दिनों में लक्खा जी को काफी संघर्ष करना पड़ा। बिना किसी गॉडफादर या बड़े म्यूजिक लेबल के उन्होंने अपनी पहचान बनाई। उनके करियर में दो बड़े टर्निंग पॉइंट आए:

मैया का चोला है रंगला (1990 का दशक): टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले आया यह माता का भजन उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस एक भजन ने उन्हें रातों-रात पूरे भारत में प्रसिद्ध कर दिया। इसके बाद आया ‘प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी’ भजन आज 30 साल बाद भी हर पंडाल की शान है।

‘भजन सम्राट’ क्यों कहा जाता है? लक्खा जी ने केवल देवी गीत ही नहीं गाए, बल्कि उन्होंने भगवान शिव, श्री कृष्ण, खाटू श्याम जी और हनुमान जी के ऐसे दिव्य भजन गाए जो सीधे भक्तों के दिल को छूते हैं। उनकी पंजाबी और हिंदी मिश्रित गायकी शैली, सुरों का उतार-चढ़ाव और बुलंद आवाज के कारण ही जनता और संगीत जगत ने उन्हें ‘भजन सम्राट’ और ‘सुर सम्राट’ की उपाधि दी।

लखबीर सिंह लक्खा की कुल संपत्ति (Net Worth & Earnings)

लक्खा जी हमेशा कहते हैं, “मैं गाता नहीं हूँ, मैं केवल ईश्वर की सेवा करता हूँ।” फिर भी, एक पेशेवर कलाकार के रूप में उनकी कमाई के मुख्य स्रोत लाइव शोज़ और म्यूजिक रॉयल्टी हैं:

कमाई का जरिया: लक्खा जी आज भी देश-विदेश में साल के 200 से अधिक लाइव शोज़, जागरण और भजन संध्याएं करते हैं। उनकी कमाई का मुख्य जरिया उनके लाइव कॉन्सर्ट की फीस, टी-सीरीज और उनके ऑफिशियल यूट्यूब चैनल (Lakhbir Singh Lakha Official) से आने वाली रॉयल्टी है।

• अनुमानित नेट वर्थ: लखबीर सिंह लक्खा जी की कुल अनुमानित संपत्ति (Net Worth) ₹8 से ₹10 करोड़ (भारतीय रुपए) आंकी जाती है। हालांकि, वे अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा समाज सेवा, लंगर और गुरुद्वारों के रख-रखाव में दान कर देते हैं।

“दीनानाथ मेरी बात लखबीर सिंह लक्खा लिरिक्स हिंदी में”

दीनानाथ मेरी बात छानी कोन्या तेरे से भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा का गाया एक कालजयी खाटू श्याम भजन है। यह भजन पूरी तरह से बाबा श्याम के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास को दर्शाता है। लक्खा जी की बुलंद और भावुक आवाज ने इस भजन के एक-एक शब्द में जान फूंक दी है। भजन में भक्त बाबा से प्रार्थना करता है कि उसका कोई भी दुख या बात श्याम प्रभु से छिपी नहीं है। वह अपने जीवन की नैया पूरी तरह हारे के सहारे को सौंप देता है। ग्यारस और फागुन मेले में यह भजन हर श्याम प्रेमी की पहली पसंद बनकर गूंजता है।

जब चिंता कोई सताए लखबीर सिंह लक्खा भजन लिरिक्स”.

जब चिंता कोई सताए तो श्याम नाम सुखदायी” लखबीर सिंह लक्खा द्वारा गाया गया एक लोकप्रिय खाटू श्याम भजन है। यह भजन संकट और चिंताओं के समय बाबा श्याम के स्मरण से मिलने वाली शांति और संबल का सुंदर संदेश देता है।

“बाबा ऐसा मंत्र मार दे भजन

लखबीर सिंह लक्खा का प्रसिद्ध खाटू श्याम भजन “बाबा ऐसा मंत्र मार दे” भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है, जिसमें बाबा श्याम से जीवन के कष्ट दूर करने की प्रार्थना की गई है। चूंकि हमारे पास इस विशिष्ट गीत के सीधे लिंक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए आप इसे खोजने के लिए YouTube या Google का उपयोग कर सकते हैं।

“सेठां को यो सेठ सांवरा लखबीर सिंह लक्खा जी

लखबीर सिंह लक्खा जी के प्रसिद्ध खाटू श्याम भजन “सेठां को यो सेठ सांवरा” के पूरे बोल ढूँढने के लिए, आप उपलब्ध ऑनलाइन भजन पोर्टल्स और वीडियो प्लेटफॉर्म्स की मदद ले सकते हैं।

लखबीर सिंह लक्खा का सबसे पहला और सबसे प्रसिद्ध भजन कौन सा है?

उन्होंने शुरुआत शबद कीर्तन से की थी, लेकिन उनका सबसे प्रसिद्ध ऑल-टाइम हिट भजन माता का “प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी” और हनुमान जी का “राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना” है।

क्या लखबीर सिंह लक्खा के बेटे भी भजन गाते हैं?

जी हाँ, उनके बेटे बृजराज सिंह लक्खा (Brijraj Singh Lakkha) भी एक सफल भजन गायक हैं और अपने पिता के साथ कई लाइव प्रोग्राम्स में नजर आते हैं।

लखबीर सिंह लक्खा का सबसे लोकप्रिय खाटू श्याम भजन कौन सा है और इसकी क्या विशेषता है?

भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा जी का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय खाटू श्याम भजन “दीनानाथ मेरी बात छानी कोन्या तेरे से” है। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे बहुत ही सरल और भावुक हिंदी-राजस्थानी मिश्रित भाषा में गाया गया है। इसमें एक भक्त बाबा श्याम के सामने पूरी तरह समर्पित होकर कहता है कि मेरे दिल की कोई भी बात या जीवन की परेशानी आपसे छिपी नहीं है। लक्खा जी की बुलंद और दर्दभरी आवाज के कारण यह भजन हर श्याम भक्त के दिल को छू लेता है और खाटू जाने वाली हर बस, ट्रेन और पंडाल में गूंजता है।

लक्खा जी के बेटे बृजराज सिंह लक्खा के कौन से भजन इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाते हैं?

लखबीर सिंह लक्खा जी की महान संगीत विरासत को उनके बेटे बृजराज सिंह लक्खा (Brijraj Singh Lakkha) बहुत शानदार तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं। इंटरनेट और यूट्यूब पर उनके भजनों को लोग तेजी से सर्च कर रहे हैं। उनके सबसे लोकप्रिय भजनों में भगवान शिव का प्रसिद्ध ट्रैक “भोला तेरा दम दम डमरू बाजे” और माता रानी का भजन “तेरे दरबार में मैया खुशी मिलती है” शामिल हैं। बृजराज की गायकी शैली में भी अपने पिता जैसी ही गूंज और ऊर्जा देखने को मिलती है, यही वजह है कि भजन संध्याओं में पिता-बेटे की जुगलबंदी को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।

खाटू श्याम जी की ग्यारस (एकादशी) के मौके पर लक्खा जी के कौन से भजन सबसे ज्यादा सुने जाते हैं?

खाटू श्याम जी की महिमा में शुक्ल पक्ष की ग्यारस (एकादशी) का दिन सबसे पवित्र माना जाता है। इस विशेष दिन पर श्याम भक्त लक्खा जी का सुपरहिट भजन “मेरो बाबो माल लूटरो भक्तो भरलो रे झोली” सबसे ज्यादा सुनना और सर्च करना पसंद करते हैं। इसके अलावा उनका एक और प्रसिद्ध भजन “श्याम प्रभु की ज्योत” भी ग्यारस की रात को होने वाले कीर्तनों में अनिवार्य रूप से गाया जाता है। इन भजनों के माध्यम से भक्त बाबा श्याम के खजाने से सुख, समृद्धि और भक्ति का आशीर्वाद मांगते हैं।

दीनानाथ मेरी बात” भजन की भाषा क्या है और यह श्याम प्रेमियों के बीच इतनी प्रसिद्ध क्यों है?

लक्खा जी द्वारा गाए गए इस कालजयी भजन की मूल भाषा पारंपरिक राजस्थानी (मारवाड़ी) और खड़ी हिंदी का बेहतरीन मिश्रण है। चूंकि बाबा खाटू श्याम जी का मुख्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है, इसलिए उनके भजनों में मारवाड़ी शब्दों का प्रयोग भक्तों को सीधे खाटू धाम की माटी से जोड़ता है। इस भजन में उपयोग किए गए शब्द जैसे ‘छानी कोन्या’ (छिपी नहीं है) और ‘थांने’ (आपको) श्याम प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और यही पारंपरिक टच इस भजन की अपार सफलता का मुख्य कारण है।

क्या लखबीर सिंह लक्खा के पुराने और नए भजनों के लिखित बोल (Lyrics) ऑनलाइन आसानी से मिल जाते हैं?

जी हाँ, लखबीर सिंह लक्खा जी के लगभग सभी सदाबहार और सुपरहिट भजनों (जैसे “प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी”, “राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना” और “अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो”) के पूरे लिखित अंतरे इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं। कई प्रमुख हिंदी भजन ब्लॉग्स और लिरिक्स वेबसाइट्स पर ये बोल साफ-साफ टेक्स्ट फॉर्मेट में मिल जाते हैं। भक्त अक्सर इन लिखित लिरिक्स को सर्च करते हैं ताकि वे इन्हें अपनी डायरी में नोट कर सकें या स्थानीय कीर्तन और जागरण मंडलियों में खुद गा सकें।

लखबीर सिंह लक्खा कहाँ के रहने वाले हैं?

लखबीर सिंह लक्खा जी का परिवार मूल रूप से पंजाब से ताल्लुक रखता है, लेकिन उनके पिता टाटा स्टील में काम करते थे जिसके कारण लक्खा जी का जन्म और शुरुआती जीवन जमशेदपुर, झारखंड (पूर्व में बिहार) में बीता। वर्तमान में, अपने संगीत करियर, रिकॉर्डिंग्स और देश-विदेश में होने वाले लाइव शोज के चलते उनका आना-जाना मुंबई, दिल्ली और पंजाब के क्षेत्रों में लगातार बना रहता है।

लखबीर सिंह लक्खा एक भजन के लिए कितनी फीस लेते हैं?

प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा की फीस सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है। किसी जागरण या माता की चौकी के लिए उनका शुल्क कार्यक्रम के स्थान, तारीख और समय की अवधि पर निर्भर करता है। सटीक कोटेशन और बुकिंग के लिए आप Hire4Event या LiveClefs जैसे प्लेटफॉर्म्स की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा, उनके ऑफिशियल इंस्टाग्राम पेज पर दिए गए ऑफिस नंबर +919820032869 या ईमेल lakhbirsinghlakhaproductions@gmail.com पर सीधे संपर्क करके फीस और यात्रा खर्चों की सटीक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

लखबीर सिंह लक्खा के सबसे प्रसिद्ध भजन कौन कौन से है?

भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा का सबसे लोकप्रिय ऑल-टाइम हिट भजन माता रानी की भेंट “प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी” है, जो पिछले तीन दशकों से हर नवरात्रि और पंडाल की शान बना हुआ है। इसके अलावा हनुमान जी का भजन “राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना” और भगवान कृष्ण का प्रसिद्ध गीत “अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो” उनके सबसे ज्यादा सुने जाने वाले भजनों में शामिल हैं।

लखबीर सिंह लक्खा जी को ‘भजन सम्राट’ की उपाधि किसने दी?

लक्खा जी को ‘भजन सम्राट’ या ‘सुर सम्राट’ की उपाधि किसी सरकारी संस्था ने नहीं, बल्कि भारत की धर्मपरायण जनता और उनके करोड़ों प्रशंसकों ने दी है। पाँच दशकों से भी अधिक समय तक लगातार बिना रुके माता रानी, हनुमान जी, शिव जी और कृष्ण जी के सैकड़ों सुपरहिट भजन गाने और अपनी बुलंद व जादुई आवाज से करोड़ों भक्तों को मंत्रमुग्ध करने के कारण वे संगीत जगत और जनता के बीच स्वाभाविक रूप से ‘भजन सम्राट’ के रूप में स्थापित हो गए।

लखबीर सिंह लक्खा का पहला भजन कौन सा था और उन्हें प्रसिद्धि कैसे मिली?

लखबीर सिंह लक्खा जी सिक्ख परिवार से आते हैं, इसलिए उन्होंने अपने गायकी सफर की शुरुआत महज़ 14 साल की उम्र में जमशेदपुर के गुरुद्वारे में शबद कीर्तन गाकर की थी। उनका पहला रिकॉर्डेड एल्बम भी शबद का ही था। लेकिन उन्हें व्यावसायिक रूप से राष्ट्रव्यापी प्रसिद्धि 1990 के दशक में मिली, जब टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले उनका माता रानी का भजन “मैया का चोला है रंगला” रिलीज हुआ। इस भजन की बम्पर सफलता के बाद वे रातों-रात भारत के सबसे बड़े भजन गायकों की कतार में शामिल हो गए।

खाटू श्याम जी और अन्य देवी-देवताओं के भजनों ने इस महान गायक को भारतीय संगीत जगत का ‘भजन सम्राट’ बना दिया। लखबीर सिंह लक्खा जी की बुलंद आवाज आज भी हर पंडाल की शान है। उनके गाए कालजयी भजन हमेशा भक्तों के दिलों में गूंजते रहेंगे।

लखबीर सिंह लक्खा के 5 सबसे प्रसिद्ध ऑल-टाइम हिट भजन

  • प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी.. दुर्गा माता (Navratri स्पेशल) पिछले 30 सालों से हर नवरात्रि में बजने वाला भारत का सबसे लोकप्रिय माता भजन
  • राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना ..हनुमान जी / श्री राम..हनुमान जी की भक्ति और श्री राम के प्रति उनके समर्पण को दर्शाने वाला कालजयी गीत।
  • अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो ..श्री कृष्ण / सुदामा मिलन .भगवान कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के भावुक मिलन की कहानी बयां करता मर्मस्पर्शी भजन।
  • दीनानाथ मेरी बात छानी कोन्या..खाटू श्याम जी (ग्यारस स्पेशल) बाबा श्याम के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक, जो फागुन मेले में हर श्याम प्रेमी की पहली पसंद है।
  • मैया का चोला है रंगला:दुर्गा माता (भेंट) टी-सीरीज के बैनर तले आया वह ऐतिहासिक भजन जिसने लक्खा जी को रातों-रात स्टार बनाया।

लक्खा जी के भजन “जब चिंता कोई सताए” का मुख्य भावार्थ या अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ बेहद गहरा और संबल देने वाला है। इसमें लक्खा जी बताते हैं कि जब जीवन में कोई भी परेशानी या चिंता आपको घेर ले, तो केवल बाबा श्याम के नाम का स्मरण करने से ही मन को परम शांति मिलती है। लोग इस भजन की पंक्तियों का हिंदी भावार्थ गूगल पर इसलिए पढ़ते हैं ताकि वे इसके आध्यात्मिक संदेश को गहराई से समझ सकें।

लक्खा जी के बेटे बृजराज सिंह लक्खा के प्रसिद्ध खाटू श्याम भजन कौन से हैं?

पिता की संगीत विरासत को आगे बढ़ाते हुए बृजराज सिंह लक्खा ने भी कई शानदार श्याम भजन गाए हैं। इंटरनेट पर उनकी “बृजराज सिंह लक्खा खाटू श्याम भजन लिस्ट” काफी सर्च की जाती है, जिसमें उनके लाइव जागरण ट्रैक और सांवरा सरकार को समर्पित नए भजन शामिल हैं।

दीनानाथ मेरी बात” भजन के मारवाड़ी लिरिक्स की क्या खासियत है?

इस भजन में शुद्ध राजस्थानी और मारवाड़ी भाषा के पारंपरिक शब्दों (जैसे ‘छानी कोन्या तेरे से’) का बहुत ही खूबसूरती से उपयोग किया गया है। लक्खा जी की आवाज में इन मारवाड़ी बोलों को लिखित रूप में लोग इसलिए ढूंढते हैं ताकि वे खाटू श्याम जी के कीर्तनों में इसे बिना किसी गलती के शुद्ध उच्चारण के साथ गा सकें।

लखबीर सिंह लक्खा की “खाटू श्याम अमृतवाणी” लिखित में कहाँ मिलेगी?

लक्खा जी द्वारा गाई गई संपूर्ण खाटू श्याम अमृतवाणी के लिखित बोल (Lyrics) विभिन्न हिंदी धार्मिक पोर्टल्स और भजन ब्लॉग्स पर उपलब्ध हैं। श्याम प्रेमी अक्सर एकादशी और फाल्गुन मेले के दौरान घर पर पाठ करने के लिए इसका लिखित हिंदी टेक्स्ट सर्च करते हैं, जिसे आप आसानी से कॉपी कर सकते हैं।

“बृजराज सिंह लक्खा भजन लिस्ट”

भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा के सुपुत्र बृजराज सिंह लक्खा अपने पिता की संगीत विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और उनकी बुलंद आवाज युवाओं को आकर्षित कर रही है। यूट्यूब और स्पॉटिफ़ाई पर उनकी “बृजराज सिंह लक्खा भजन लिस्ट” को लोग काफी सर्च करते हैं। उनके सबसे लोकप्रिय भजनों में “भोला तेरा दम दम डमरू बाजे”, “तेरे दरबार में मैया खुशी मिलती है”, “मैया का बुलावा आया है” और “सांवरे सरकार” शामिल हैं, जिन्हें लाइव जागरणों में बहुत पसंद किया जाता है।

लखबीर सिंह लक्खा का संगीत का शुरुआती सफर कैसा रहा और उन्हें अपने जीवन के शुरुआती दिनों में किस प्रकार का संघर्ष करना पड़ा?

लखबीर सिंह लक्खा जी का जन्म एक साधारण सिख परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही संगीत का गहरा शौक था, जिसकी झलक उनके स्कूल के दिनों में ही दिखने लगी थी जब वे स्कूल की प्रार्थनाओं में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरते थे। महज 14 वर्ष की छोटी सी उम्र में उन्होंने जमशेदपुर के स्थानीय गुरुद्वारे में शबद कीर्तन गाकर अपने गायन सफर की आधिकारिक शुरुआत की।

हालाँकि, एक सिख परिवार से ताल्लुक रखने के कारण शुरुआती दौर में उनके लिए माता रानी के जगराते या हिंदू धार्मिक भजन गाना आम नहीं था। जब उनका हौसला थोड़ा और बढ़ा, तो अपनी कला को तराशने और आजीविका कमाने के लिए उन्होंने कुछ समय के लिए एक लोकल ऑर्केस्ट्रा (Orchestra) जॉइन कर लिया। इस दौरान वे स्टेज शोज़ और शादियों के कार्यक्रमों में लोकप्रिय फिल्मी गाने गाया करते थे। लक्खा जी का शुरुआती जीवन काफी आर्थिक तंगी और संघर्षों से भरा रहा, जहाँ उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए कई सालों तक छोटे-मोटे मंचों पर परफॉर्म करना पड़ा।

भजन सम्राट’ बनने से पहले लखबीर सिंह लक्खा जी टाटा स्टील में क्या काम करते थे और संगीत के प्रति उनके जुनून के कारण नौकरी के दौरान क्या परेशानियाँ आती थीं?

संगीत में कदम रखने के बाद भी लखबीर सिंह लक्खा जी को एक स्थायी आजीविका की सख्त जरूरत थी। इसी जीविकोपार्जन के लिए उन्होंने जमशेदपुर में टाटा स्टील (Tata Steel) में नौकरी जॉइन की। लक्खा जी ने इस प्रतिष्ठित कंपनी में लगभग 19 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। वे अपने इंटरव्यू में हमेशा बेहद भावुक होकर इस बात का जिक्र करते हैं कि जब उनके जीवन में गहरा आर्थिक संकट था, तब टाटा स्टील ने उन्हें नौकरी देकर उनका हाथ थामा था और उनके परिवार को सहारा दिया था।

लेकिन जैसे-जैसे संगीत और भजनों के प्रति उनका समर्पण बढ़ता गया, वैसे-वैसे नौकरी और कला के बीच संतुलन बनाना उनके लिए बेहद कठिन होता चला गया। जब भी उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में माता के जगराते या भजनों के कार्यक्रम होते थे, तो लक्खा जी को वहां जाने के लिए दफ्तर से लंबी छुट्टियां लेनी पड़ती थीं। इस वजह से कई बार कंपनी के उच्च अधिकारियों के साथ उनकी अनबन और वैचारिक मतभेद हो जाते थे। आखिरकार, संगीत के प्रति उनकी दीवानगी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने भजन गायन को अपना पूरा समय देने के लिए टाटा स्टील की सुरक्षित नौकरी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

साल 1978 में बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) की यात्रा ने लखबीर सिंह लक्खा के जीवन और करियर को पूरी तरह से कैसे बदल दिया?

साल 1978 लखबीर सिंह लक्खा जी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ (Turning Point) साबित हुआ। उस वर्ष वे जमशेदपुर के स्थानीय कांवड़ियों के एक दल के साथ सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ (देवघर, झारखंड) की यात्रा पर निकले। इस यात्रा के दौरान भगवान शिव की भक्ति का उन पर ऐसा जादुई और गहरा असर हुआ कि उन्होंने पूरी तरह से सांसारिक चमक-धमक को छोड़ दिया। महादेव के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करने के लिए उन्होंने लगातार 9 वर्षों तक नंगे पैर कांवड़ यात्रा की।

बैद्यनाथ धाम की इस आध्यात्मिक अनुभूति के बाद लक्खा जी का मन फिल्मी गानों और ऑर्केस्ट्रा की दुनिया से पूरी तरह से उचट गया। उन्होंने कसम खा ली कि अब वे अपनी बुलंद आवाज़ का इस्तेमाल केवल ईश्वर की आराधना के लिए ही करेंगे। इसी दौरान शिव भक्ति से ओत-प्रोत होकर उनका पहला सुपरहिट भजन ‘कावड़ की महिमा’ (जिसे लोग ‘पगली’ नाम से भी जानते हैं) रिलीज हुआ। इस एक भजन ने उत्तर भारत (विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश) के घर-घर में लक्खा जी को एक बड़े भजन गायक के रूप में स्थापित कर दिया और उनके एक नए युग की शुरुआत हुई।

लखबीर सिंह लक्खा को देश-विदेश में व्यावसायिक सफलता कैसे मिली और टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने उनके करियर को चमकाने में क्या भूमिका निभाई?

हालांकि लक्खा जी उत्तर भारत के क्षेत्रीय इलाकों में काफी लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन उन्हें राष्ट्रव्यापी (National) और वैश्विक (Global) स्तर पर असली व्यावसायिक पहचान 1990 के दशक में मिली। संगीत जगत के दिग्गज और टी-सीरीज़ (T-Series) कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की पारखी नजरों ने लक्खा जी की भारी, बुलंद और मां दुर्गा के प्रति ऊर्जा से भरी अनूठी आवाज को पहचान लिया। गुलशन कुमार उन्हें जमशेदपुर से सीधे मुंबई (माया नगरी) ले आए और उन्हें एक बड़े मंच पर लॉन्च किया।

-सीरीज के भव्य बैनर तले लक्खा जी का माता रानी की भेंटों का एल्बम आया, जिसमें मुख्य भजन “मैया का चोला है रंगला” शामिल था। यह भजन रिलीज होते ही पूरे देश में एक ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। नवरात्रों और त्योहारों के दौरान देश की हर गली और पंडाल में सिर्फ यही भजन गूंजने लगा। गुलशन कुमार के मार्गदर्शन और टी-सीरीज के बड़े नेटवर्क के कारण लक्खा जी के भजन कैसेट्स करोड़ों की संख्या में बिके। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वे भारतीय संगीत जगत के निर्विवाद ‘भजन सम्राट’ बन गए।

लखबीर सिंह लक्खा का पहला सुपरहिट भजन कौन सा था?

लखबीर सिंह लक्खा का पहला राष्ट्रव्यापी सुपरहिट भजन “मैया का चोला है रंगला” था, जिसे 1990 के दशक में टी-सीरीज़ के बैनर तले गुलशन कुमार ने रिलीज़ किया था। हालांकि, इससे पहले क्षेत्रीय स्तर पर भगवान शिव को समर्पित उनका भजन ‘कावड़ की महिमा’ (पगली) भी उत्तर भारत में बेहद लोकप्रिय हो चुका था।

लखबीर सिंह लक्खा के बेटे का क्या नाम है और वह क्या करते हैं?

लखबीर सिंह लक्खा के बेटे का नाम राजदीप गिल है, जिन्हें संगीत की दुनिया में पन्ना गिल (Panna Gill) के नाम से जाना जाता है। पन्ना गिल भी अपने पिता की तरह एक बेहद प्रतिभाशाली गायक और संगीतकार हैं, जिन्होंने कई रियलिटी शोज़ (जैसे इंडियन आइडल) में हिस्सा लिया है और वे मुख्य रूप से सूफी, पॉप और भक्ति संगीत गाते हैं।

ब्रिज राज सिंह लक्खा (Brijraj Singh Lakkha): ये भी लखबीर सिंह लक्खा जी के ही सुपुत्र हैं। ब्रिज राज सिंह जी बिल्कुल अपने पिता की तरह बुलंद और भारी आवाज में माता रानी के भजन, शिव भजन और खाटू श्याम जी के भजन गाते हैं। टी-सीरीज़ (T-Series) भक्ति सागर पर उनके कई भजन (जैसे महाकुंभ स्पेशल “ये प्रयागराज है”, “भोला तेरा दम दम डमरू बाजे”) काफी लोकप्रिय हैं।

लखबीर सिंह लक्खा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा का जन्म 25 अगस्त 1950 को जमशेदपुर (टाटानगर), झारखंड (तत्कालीन बिहार) में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब के जालंधर के पास स्थित रैया गाँव का रहने वाला था, लेकिन उनके माता-पिता बाद में काम के सिलसिले में जमशेदपुर आकर बस गए थे।

क्या लखबीर सिंह लक्खा सिख हैं?

हाँ, लखबीर सिंह लक्खा एक सिख परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके माता-पिता सरदार बाबू सिंह और सरदारनी बलवंत कौर थे। सिख पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, उन्होंने माता रानी, भगवान शिव और खाटू श्याम जी के भजनों को अपनी बुलंद आवाज़ दी और पूरे भारत में ‘भजन सम्राट’ के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई

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