लोग महंगे प्रोटीन पाउडर और विदेशी डाइट प्लान पर हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे पूर्वजों के पास राबड़ी एक ऐसा ‘देसी प्रोटीन शेक’ (Desi Protein Shake) था, जो न केवल शरीर को फौलाद बनाता है, बल्कि तपती गर्मी में शरीर को अंदर से ठंडा भी रखता है?
राबड़ी के 5 चमत्कारी फायदे (5 Benefits of Rabadi as a Protein Shake)
नेचुरल प्रोटीन और एनर्जी (Natural Protein & Energy)बाजरा और जौ दोनों ही प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं। जब इन्हें छाछ के साथ मिलाकर पकाया जाता है, तो यह एक कम्पलीट मील बन जाता है। हमारी टीम ने लोकल दुकानों (Local Shops) पर देखा कि मेहनत करने वाले लोग इसे पीकर दिन भर ऊर्जावान रहते हैं।
प्रोबायोटिक्स का खजाना (Rich in Probiotics)रात भर मिट्टी के बर्तन में रखी (Fermented) राबड़ी में गुड बैक्टीरिया विकसित होते हैं। यह आपके गट हेल्थ (Gut Health) को सुधारता है और डाइजेशन को इतना मजबूत बनाता है कि आप भारी से भारी डाइट आसानी से पचा सकें।
लू और गर्मी से सुरक्षा (Protection from Heatstroke)फिटनेस के साथ-साथ यह लू (Heatstroke) का पक्का इलाज है। जिम में पसीना बहाने के बाद यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को रीस्टोर करता है और आपको डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बचाता है।
. वजन घटाने में मददगार (Effective for Weight Loss)इसमें फाइबर की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसे पीने के बाद आपको बार-बार भूख नहीं लगती, जिससे आप अनहेल्दी स्नैक्स खाने से बच जाते हैं। यह लो कैलोरी (Low Calorie) और हाई सप्लीमेंट डाइट है।
. हड्डियों की मजबूती (Strengthens Bones)बाजरे में कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है। वर्कआउट के दौरान हड्डियों और जोड़ों पर जो तनाव पड़ता है, राबड़ी का नियमित सेवन उसे रिकवर करने में मदद करता है।
फैक्ट फाइल: राजस्थानी राबड़ी (Fact File: Rajasthani Rabadi)
- अन्य नाम (Common Names) देसी प्रोटीन शेक, मारवाड़ी अमृत, राबोटी।
- मुख्य सामग्री (Key Ingredients) बाजरा/जौ/मक्का का आटा, ताजी छाछ, नमक और पानी।
- तैयारी का समय (Prep Time) 15 – 20 मिनट (पकाने में) + 8 घंटे (फर्मेंटेशन के लिए)।
- मुख्य पोषक तत्व (Key Nutrients) आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, विटामिन B12 और प्रोबायोटिक्स।
- कैलोरी काउंट (Calorie Count) लगभग 120-150 कैलोरी (प्रति गिलास)।
- सबसे प्रसिद्ध क्षेत्र (Famous Regions) शेखावाटी, मारवाड़ (जोधपुर, बीकानेर) और हरियाणा।
- प्राकृतिक एयर कंडीशनर (Natural AC): रेगिस्तान की 48°C गर्मी में भी यह शरीर को अंदर से ठंडा रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।
- गरीबों का अमृत (Poor Man’s Nectar): बेहद कम कीमत (मात्र ₹10-20) में यह संपूर्ण पोषण प्रदान करती है।
- बासी का जादू (Power of Fermentation): ताजी बनी राबड़ी से कहीं ज्यादा फायदेमंद ‘बासी राबड़ी’ (रात भर रखी हुई) मानी जाती है, क्योंकि इसमें प्रोबायोटिक्स की मात्रा बढ़ जाती है।
- सर्व करने का तरीका (Serving Style): इसे हमेशा ठंडी छाछ, भुने जीरे और बारीक कटे कच्चे प्याज के साथ परोसा जाता है।
राबड़ी के बारे में 5 सबसे रोचक तथ्य (5 Most Interesting Facts About Rabadi)
रात का खाना, सुबह का नाश्ता (Dinner to Breakfast)परंपरागत रूप से, राबड़ी को रात के समय धीमी आंच पर पकाया जाता है और रात भर ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। सुबह तक यह फर्मेंट (Ferment) हो जाती है, जिसे नाश्ते में छाछ के साथ लिया जाता है। इसे ‘बासी राबड़ी’ कहते हैं और यह ताजी राबड़ी से ज्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक मानी जाती है।
रेगिस्तान का ‘नेचुरल कूलर’ (Natural Cooler of Desert)जब राजस्थान में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है, तो राबड़ी लू (Heatstroke) से बचाने वाले कवच की तरह काम करती है। यह शरीर के तापमान को अंदर से 2-3 डिग्री तक कम रखने में मदद करती है।
मिट्टी के बर्तन का विज्ञान (Science of Earthen Pots)हमारी टीम ने लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर देखा कि राबड़ी को हमेशा मिट्टी के बर्तन में ही जमाया जाता है। मिट्टी के सूक्ष्म छिद्र (Pores) वाष्पीकरण के जरिए इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं और इसके अम्लीय स्तर (pH level) को संतुलित करते हैं।
बिना मेहनत वाला सुपरफूड (Low-Effort Superfood)इसे बनाने में बहुत ही कम सामग्री और मेहनत लगती है, लेकिन इसके गुण किसी भी विदेशी सुपरफूड जैसे ‘क्विनोआ’ या ‘ओट्स’ से कहीं ज्यादा हैं। यह दुनिया के सबसे सस्ते और बेहतरीन प्रोबायोटिक ड्रिंक्स (Probiotic Drinks) में से एक है।
किसानों का ऊर्जा स्रोत (Energy Source for Farmers)राजस्थान के किसान और चरवाहे सुबह एक बड़ा कटोरा राबड़ी पीकर निकलते हैं और दोपहर तक बिना थके चिलचिलाती धूप में काम कर पाते हैं। यह धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज (Slow-release energy) करती है, जिससे लंबे समय तक भूख नहीं लगती।
क्या राबड़ी पीने से सच में वजन कम (Weight Loss) करने में मदद मिलती है?
जी हाँ, राबड़ी वजन घटाने के लिए एक बेहतरीन देसी विकल्प है। इसका मुख्य कारण इसमें मौजूद उच्च फाइबर (High Fiber) और लो कैलोरी (Low Calorie) सामग्री है। जब आप बाजरे या जौ की राबड़ी पीते हैं, तो यह पेट में धीरे-धीरे पचती है, जिससे आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती (Satiety)। इसके अलावा, इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आपके मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को तेज करते हैं, जिससे शरीर की फालतू चर्बी जलाने में मदद मिलती है। हमारी टीम ने अनुभव किया है कि सुबह के नाश्ते में राबड़ी लेने से आप दिन भर ओवरईटिंग (Overeating) से बच जाते हैं।
राबड़ी और दही/छाछ में क्या अंतर है और कौन सा ज्यादा फायदेमंद है?
दही और छाछ सीधे दूध से बने उत्पाद हैं, जबकि राबड़ी अनाज (अक्सर बाजरा या मक्का) और छाछ का एक फर्मेंटेड मिश्रण (Fermented Mix) है। पोषण के मामले में राबड़ी कहीं आगे है क्योंकि इसमें अनाज के कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और छाछ के प्रोबायोटिक्स दोनों के गुण मिल जाते हैं। जहाँ छाछ केवल हाइड्रेशन देती है, वहीं राबड़ी शरीर को ऊर्जा (Energy) भी प्रदान करती है और लू से बचाने में अधिक सक्षम है। हमारे लोकल गाइड के अनुसार, रेगिस्तानी इलाकों में लोग छाछ से ज्यादा राबड़ी पर भरोसा करते हैं क्योंकि यह धूप में काम करने की ताकत देती है।
क्या डायबिटीज (Diabetes) के मरीज राबड़ी का सेवन कर सकते हैं?
डायबिटीज के मरीज राबड़ी का सेवन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मधुमेह रोगियों के लिए जौ (Barley) की राबड़ी सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि जौ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low GI) बहुत कम होता है, जो ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने नहीं देता। इसमें चीनी या गुड़ के बजाय काला नमक और भुना जीरा मिलाकर पीना चाहिए। यह एक हाई-फाइबर डाइट है जो इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद कर सकती है। हालांकि, सेवन से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।
राबड़ी को स्टोर करने का सही तरीका क्या है और यह कितने समय तक ताजी रहती है?
राबड़ी को स्टोर करने का सबसे पारंपरिक और वैज्ञानिक तरीका मिट्टी का बर्तन (Earthen Pot) है। मिट्टी के बर्तन में रखने से यह प्राकृतिक रूप से ठंडी रहती है और इसका फर्मेंटेशन सही दिशा में होता है। सामान्य तापमान पर इसे 24 घंटे तक रखा जा सकता है। यदि आप इसे फ्रिज में रखते हैं, तो यह 2-3 दिनों तक खराब नहीं होती। हमारी टीम ने लोकल दुकानों (Local Shops) पर देखा है कि लोग रात की बनी राबड़ी को अगले दिन दोपहर तक इस्तेमाल करते हैं, जिससे उसका स्वाद और खट्टापन (Probiotic level) और बढ़ जाता है।
क्या राबड़ी को सर्दियों (Winter) में भी पिया जा सकता है?
आमतौर पर राबड़ी को गर्मियों का पेय माना जाता है, लेकिन सर्दियों में इसे गर्म सर्व (Hot Serving) किया जा सकता है। सर्दियों में इसे ताजी और गर्म स्थिति में पीने से शरीर को गर्माहट और ऊर्जा मिलती है। बाजरे की तासीर गर्म होती है, इसलिए सर्दियों में बिना फर्मेंट किए हुए गर्म-गर्म बाजरा राबड़ी का सेवन स्वास्थ्यवर्धक होता है। हालांकि, अगर आपको सर्दी-जुकाम की समस्या है, तो खट्टी या ठंडी राबड़ी से परहेज करना चाहिए।
15 मिनट में बाजरे की राबड़ी: बनाने की विधि (Step-by-Step Method)
सबसे पहले एक मिक्सिंग बाउल में 3 बड़े चम्मच बारीक पिसा हुआ बाजरे का आटा (Pearl Millet Flour) लें और उसमें एक कप ताजी छाछ (Buttermilk) डालकर मथनी या विस्कर से अच्छी तरह फेंट लें, ताकि इसमें एक भी गुठली (Lump) न रहे। अब इस गाढ़े घोल में 1 गिलास और छाछ मिलाएं और इस मिश्रण को एक भारी तले वाले बर्तन (अधिमानतः स्टील या मिट्टी की हांडी) में डालकर मध्यम आंच पर चढ़ा दें। कुकिंग के दौरान सबसे महत्वपूर्ण समय प्रबंधन (Time Management) टिप यह है कि इसे पहले 10 मिनट तक लगातार चलाते रहें, वरना आटा नीचे चिपक सकता है। जैसे ही मिश्रण में उबाल आने लगे और यह गाढ़ा होकर एक क्रीमी टेक्सचर (Creamy Texture) लेने लगे, इसमें स्वादानुसार नमक डालें और 2 मिनट और पकने दें। 15वें मिनट पर गैस बंद कर दें और ऊपर से भुना हुआ जीरा पाउडर (Roasted Cumin) छिड़कें। हमारी टीम ने लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर अनुभव किया है कि इस गरमा-गरम राबड़ी को अगर आप बारीक कटे कच्चे प्याज और एक चम्मच ठंडी दही के साथ परोसते हैं, तो इसका स्वाद किसी भी लग्जरी डिश को मात दे सकता है।
क्या राबड़ी को हर रोज पिया जा सकता है?
जी हाँ, राबड़ी एक प्राकृतिक सुपरफूड है जिसे आप रोजाना अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। यह किसी भी आर्टिफिशियल सप्लीमेंट से बेहतर है। हमारी टीम का अनुभव है कि ₹1500 के बजट वाले होटलों के महंगे नाश्ते की तुलना में रोजाना एक गिलास राबड़ी पीना आपको अधिक फिट और एक्टिव रखता है। यह वजन घटाने और पेट की बीमारियों को दूर रखने का सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है।
राबड़ी का स्वाद और पौष्टिकता कैसे बढ़ाएं?
इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें बारीक कटा कच्चा प्याज (Raw Onion) और भुना हुआ जीरा (Roasted Cumin) जरूर डालें। प्याज लू से बचाता है और जीरा पाचन में सुधार करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे हमेशा मिट्टी के कुल्हड़ (Earthen Pot/Kulhad) में पिएं। मिट्टी की सौंधी खुशबू इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है और इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रखती है।
राबड़ी बनाने के लिए कौन सा अनाज चुनना चाहिए?
अनाज का चुनाव हमेशा सीजन (Season) और जरूरत के हिसाब से करना चाहिए।बाजरा (Pearl Millet): यह प्रोटीन और आयरन से भरपूर होता है, जो शारीरिक मजबूती के लिए बेस्ट है।जौ (Barley): इसकी तासीर सबसे ठंडी होती है, इसलिए भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए जौ की राबड़ी सर्वश्रेष्ठ है।मक्का (Maize): यदि आप स्वाद और हल्की डाइट चाहते हैं, तो मक्के की राबड़ी एक अच्छा विकल्प है।हमारे स्थानीय गाइड के अनुसार, जून की गर्मी में जौ और सर्दियों के शुरुआती दिनों में बाजरे की राबड़ी का सेवन सबसे अधिक लाभकारी होता है।
राबड़ी पीने का सर्वश्रेष्ठ समय क्या है और क्या इसे खाली पेट पीना चाहिए?
राबड़ी पीने का सबसे उत्तम समय सुबह का नाश्ता (Morning Breakfast) है। हमारी टीम ने राजस्थान के लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर देखा है कि लोग अपने दिन की शुरुआत इसी से करते हैं। यदि आप इसे खाली पेट (Empty Stomach) पीते हैं, तो इसके प्रोबायोटिक गुण पाचन तंत्र को तुरंत सक्रिय कर देते हैं। यह पेट की गर्मी को शांत करता है और आपको पूरे दिन के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। खाली पेट सेवन करने से इसके पोषक तत्व शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित (Absorb) होते हैं।
बासी राबड़ी: फर्मेंटेशन का जादू (The Magic of Fermentation)
जब हम राबड़ी को रात भर मिट्टी के बर्तन में रखते हैं, तो इसमें ‘फर्मेंटेशन’ (किण्वन) की प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया इसे महज एक भोजन से बदलकर एक शक्तिशाली प्रोबायोटिक (Probiotic Drink) बना देती है।
प्रोबायोटिक्स और गुड बैक्टीरिया (Good Bacteria)फर्मेंटेशन के दौरान राबड़ी में लैक्टोबैसिलस जैसे गुड बैक्टीरिया पैदा होते हैं। ये बैक्टीरिया हमारे गट हेल्थ (Gut Health) के लिए बहुत जरूरी हैं। हमारी टीम ने लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर अनुभव किया कि जो लोग नियमित बासी राबड़ी पीते हैं, उन्हें कभी भी कब्ज या एसिडिटी की समस्या नहीं होती।
विटामिन B12 का प्राकृतिक स्रोत (Natural Source of B12)वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध है कि फर्मेंटेशन प्रक्रिया अनाज में विटामिन B12 और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ा देती है। शाकाहारी लोगों के लिए बासी राबड़ी विटामिन B12 का सबसे सस्ता और प्रभावी स्रोत है।
पारंपरिक रूप से माना जाता है कि बासी राबड़ी की तासीर ताजी राबड़ी से कहीं अधिक ठंडी होती है। यह शरीर के आंतरिक तापमान (Internal Body Temperature) को कम रखने में मदद करती है, जो भीषण गर्मी और लू से बचाव के लिए अनिवार्य है।
राबड़ी और शरीर का तापमान: प्राकृतिक एयर कंडीशनर (Body Temperature & Rabadi)
राजस्थान की तपती धूप में राबड़ी शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह शरीर के आंतरिक तापमान (Internal Body Temperature) को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करती है। इसमें मौजूद छाछ और अनाज का मेल इलेक्ट्रोलाइट संतुलन (Electrolyte Balance) बनाए रखता है, जिससे डिहाइड्रेशन नहीं होता। फर्मेंटेशन के कारण इसकी तासीर ठंडी होती है, जो पेट की गर्मी शांत कर शरीर को अंदर से ठंडा रखती है। लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर हमारी टीम ने देखा कि लोग लू से बचने हेतु इसमें कच्चा प्याज मिलाते हैं।सावधानी (Precautions): गला खराब होने से बचने के लिए संतुलित मात्रा में ही लें और सर्दी-जुकाम होने पर बासी राबड़ी से परहेज करें।
पाचन के लिए राबड़ी के 5 बड़े लाभ (5 Key Benefits for Digestion)
राबड़ी पाचन तंत्र के लिए एक शक्तिशाली प्राकृतिक प्रोबायोटिक (Natural Probiotic) है। फर्मेंटेशन के कारण इसमें मौजूद ‘लैक्टोबैसिलस’ बैक्टीरिया आंतों की सफाई कर भोजन का अवशोषण सुधारते हैं। इसमें मौजूद अघुलनशील फाइबर (Insoluble Fiber) पुरानी कब्ज से राहत दिलाकर मल त्याग को सुचारू बनाता है। अपनी ठंडी तासीर के कारण यह पेट के एसिड को न्यूट्रलाइज (Neutralize) कर एसिडिटी और सीने की जलन में तुरंत आराम देती है। हमारी टीम ने लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर अनुभव किया कि इसमें भुना जीरा मिलाने से गैस और पेट की सूजन मिनटों में दूर हो जाती है, जिससे यह गट हेल्थ (Gut Health) का रक्षक बनती है।
फिटनेस और डाइट: वजन घटाने में राबड़ी का महत्व (Weight Loss & Fitness)
फिटनेस के शौकीनों के लिए राबड़ी किसी ‘देसी सुपरफूड’ से कम नहीं है। बाजरा और जौ जैसे अनाज हाई-फाइबर (High-Fiber) के पावरहाउस हैं, जो पाचन तंत्र को साफ कर कब्ज जैसी समस्याओं को दूर रखते हैं। एक गिलास राबड़ी में बहुत कम कैलोरी होती है, फिर भी यह लो-कैलोरी तृप्ति (Low-Calorie Satiety) प्रदान करती है, जिससे आप ‘अनहेल्दी स्नैकिंग’ से बच जाते हैं। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं, जो फैट बर्न (Fat Burn) करने में सीधा सहयोग देता है ।
क्या राबड़ी का सेवन मानसून या बारिश के मौसम में सुरक्षित है?
मानसून में पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है, इसलिए इस मौसम में ताजी बनी राबड़ी का सेवन करना चाहिए। बासी या बहुत ज्यादा फर्मेंट की हुई राबड़ी मानसून में पेट में भारीपन पैदा कर सकती है। यदि आप बारिश के मौसम में इसे पी रहे हैं, तो इसमें अदरक का रस या थोड़ा सा अजवाइन पाउडर जरूर मिलाएं ताकि यह आसानी से पच सके।
क्या राबड़ी में दूध या चीनी मिलाई जा सकती है?
पारंपरिक राजस्थानी राबड़ी नमकीन होती है, लेकिन हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मीठी राबड़ी (Sweet Rabadi) भी बनाई जाती है। यदि आप इसे मीठा पीना चाहते हैं, तो इसे दूध और गुड़ के साथ बना सकते हैं। हालांकि, वेट लॉस और प्रोबायोटिक लाभ के लिए इसे हमेशा छाछ और नमक के साथ ही पीना चाहिए। हमारी टीम का अनुभव है कि नमकीन राबड़ी का जो औषधीय प्रभाव है, वह मीठी राबड़ी में नहीं मिलता।
क्या राबड़ी पीने से नींद आती है या सुस्ती महसूस होती है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि राबड़ी या छाछ पीने से सुस्ती आती है, लेकिन असल में यह आपके शरीर को रिलैक्स (Relax) करती है। इसमें मौजूद पोषक तत्व मानसिक तनाव को कम करते हैं और शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं, जिससे एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है। दोपहर के समय इसे पीने से आपको गर्मी की वजह से होने वाली थकान महसूस नहीं होती। हमारे स्थानीय गाइड ने बताया कि किसान इसे पीकर ही दोपहर की कड़ी धूप में काम कर पाते हैं।
क्या राबड़ी को छोटे बच्चों या बुजुर्गों को दिया जा सकता है?
हाँ, राबड़ी बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए बहुत फायदेमंद है। बच्चों के लिए यह एक प्राकृतिक ग्रोथ प्रमोटर (Growth Promoter) है क्योंकि इसमें कैल्शियम और आयरन प्रचुर मात्रा में होता है। बुजुर्गों के लिए, जिनकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, राबड़ी का फर्मेंटेड रूप (Fermented Form) पचाने में बहुत हल्का और पोषक होता है। हमारी टीम ने राजस्थान के गांवों में देखा है कि 6 महीने के बच्चों को भी हल्की राबड़ी दी जाती है ताकि उनका पेट साफ रहे और उन्हें गर्मी न लगे।
आज के इस दौर में जहाँ हम विदेशी ‘स्मूदीज़’ और ‘प्रोटीन शेक्स’ के पीछे भाग रहे हैं, वहाँ राजस्थानी राबड़ी जैसा प्राचीन और विज्ञान-सम्मत विकल्प हमारे अपने घर की रसोई में मौजूद है। यह न केवल चिलचिलाती गर्मी और लू (Heatstroke) से आपकी रक्षा करती है, बल्कि आपके पाचन तंत्र (Digestive System) और फिटनेस के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।
राबड़ी के मुख्य प्रकार (Main Types of Rabadi)
बाजरे की राबड़ी (Bajra Rabadi)यह राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक राबड़ी है। बाजरे के आटे को छाछ के साथ पकाकर बनाया जाता है।खासियत: यह देसी प्रोटीन शेक (Desi Protein Shake) के रूप में जानी जाती है।टीम अनुभव: हमने लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर देखा कि इसे सर्दियों में गर्म और गर्मियों में रात भर फर्मेंट करके ठंडा पिया जाता है।
जौ की राबड़ी (Barley Rabadi)गर्मियों के लिए इसे ‘अमृत’ माना जाता है क्योंकि जौ की तासीर सबसे ठंडी होती है।खासियत: यह लू से बचाव (Protection from Heatstroke) के लिए सर्वश्रेष्ठ है और वजन घटाने में भी सहायक है।वैज्ञानिक लाभ: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह डायबिटीज (Diabetes) में भी फायदेमंद है।
मक्के की राबड़ी (Maize/Corn Rabadi)मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर, चित्तौड़गढ़) में मक्के की राबड़ी बहुत चाव से पी जाती है।खासियत: यह स्वाद में थोड़ी मीठी और मलाईदार होती है।सर्विंग टिप: इसे अक्सर ताजी मक्का के दानों को पीसकर भी बनाया जाता है, जिसे ‘घाट की राबड़ी’ कहते हैं।
मीठी राबड़ी (Sweet Rabadi)हरियाणा और शेखावाटी के कुछ इलाकों में छाछ के बजाय दूध और चीनी/गुड़ का उपयोग किया जाता है।खासियत: यह एक हेल्दी डेजर्ट (Healthy Dessert) की तरह काम करती है और बच्चों को बहुत पसंद आती है।
गेहूं की राबड़ी (Wheat Rabadi)पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गेहूं के दलिए (Broken Wheat) से राबड़ी तैयार की जाती है।खासियत: यह काफी गाढ़ी होती है और इसे मुख्य भोजन की तरह भी खाया जा सकता है।
गर्मियों का खास पेय: राजस्थानी राबड़ी (Special Summer Drink: Rajasthani Rabadi)
जब उत्तर भारत के मैदानों और राजस्थान के रेगिस्तानों में सूरज अपनी तपिश बढ़ाता है, तब वहां के लोग किसी विदेशी कोल्ड ड्रिंक के बजाय एक पारंपरिक ‘देसी’ पेय पर भरोसा करते हैं, जिसे राबड़ी (Rabadi) कहा जाता है। हमारी टीम ने जब पश्चिमी राजस्थान के स्थानीय गाइड (Local Guide) के साथ यात्रा की, तो उन्होंने इसे “रेगिस्तान का अमृत” बताया।



