“हाबूर स्टोन जैसलमेर का इतिहास और रहस्य: बिना जामन के दही जमाने वाला 1 पत्थर”।

क्या आप जानते हैं हाबूर स्टोन जैसलमेर (Habur Stone) बिना जामन के दूध को दही बना देता है? जानिए इस चमत्कारी जीवाश्म पत्थर का इतिहास, विज्ञान और औषधीय लाभ

📋 फैक्ट फाइल: हाबूर स्टोन जैसलमेर

  • आधिकारिक नाम (Official Name): हाबूर फॉसिल स्टोन (Habur Fossil Stone) / हाबूर का पत्थर
  • अन्य लोकप्रिय नाम (Popular Nicknames): दही जमाने वाला पत्थर (The Curd-Making Stone), चमत्कारी पत्थर, जादुई पत्थर
  • उत्पत्ति स्थान (Origin Place): हाबूर गांव, जैसलमेर, राजस्थान, भारत (Jaisalmer, Rajasthan)
  • अनुमानित उम्र (Estimated Age): लगभग 1.8 करोड़ वर्ष (18 Million Years Old)
  • भौगोलिक स्रोत (Geological Origin): प्राचीन ‘टेथिस सागर’ (Tethys Sea) के समुद्री जीवों और वनस्पतियों के जीवाश्म
  • मुख्य रंग (Primary Colors): सुनहरा-भूरा (Golden-Brown) और हल्का डार्क चॉकलेट रंग
  • उपलब्ध प्रमुख उत्पाद (Main Products): हाबूर स्टोन ग्लास, कटोरे, कप, थाली और सजावटी पिरामिड
  • औसत बाजार मूल्य (Average Market Price): ₹300 से ₹1,500 तक (आकार और नक्काशी के आधार पर)
  • बिना जामन के दही (Zero-Starter Curdling): इस पत्थर के बर्तन में गुनगुना दूध रखने पर इसमें मौजूद प्राकृतिक अमीनो एसिड रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Reaction) करके रात भर में गाढ़ा दही जमा देते हैं
  • पोषक तत्वों से भरपूर (Rich in Minerals): इसके बर्तनों में खान-पान रखने से शरीर को आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स मिलते हैं.
  • हेल्थ बेनिफिट्स (Health Benefits): पेट की गैस, एसिडिटी, कब्ज और ब्लड शुगर (Diabetes) को नियंत्रित करने में मददगार
  • वैज्ञानिक वर्गीकरण (Scientific Classification): बायो-कंट्रोल सेडिमेंट्री रॉक (Bio-controlled Sedimentary Rock)
  • भौतिक बनावट (Texture & Finish): प्राकृतिक रूप से छिद्रयुक्त (Porous) और मैट फिनिश, जिसे घिसाई के बाद चमकदार बनाया जाता है।
  • पहचान का तरीका (Identification Mark): इसके ऊपर शंख और कौड़ियों जैसी बारीक घुमावदार आकृतियों की प्राकृतिक नक्काशी दिखाई देती है।
  • प्रमुख रासायनिक घटक (Chemical Components): सिलिका, आयरन ऑक्साइड और कार्बोनेट मिनरल्स का प्राकृतिक मिश्रण।
  • तापमान सहनशीलता (Thermal Property): यह पत्थर अत्यधिक ठंडे और गर्म तापमान को सह सकता है, जिससे इसके बर्तन लंबे समय तक चलते हैं।
  • पहला इस्तेमाल (First-time Use): नए बर्तन को इस्तेमाल करने से पहले 24 घंटे के लिए पानी में डुबोकर रखना अनिवार्य होता है ताकि इसके प्राकृतिक छिद्र सक्रिय हो सकें।
  • दही का स्वाद (Taste Profile): इस पत्थर में जमे दही का स्वाद मिट्टी के कुल्हड़ जैसा सोंधा और पूरी तरह से केमिकल-मुक्त (Organic) होता है।
  • लाइफटाइम (Durability): सही देखरेख के साथ, इस पत्थर के बर्तनों की कार्यक्षमता और मजबूती दशकों तक बनी रहती है।
  • एंटी-बैक्टीरियल गुण (Natural Anti-Bacterial): इस पत्थर की सतह पर हानिकारक बैक्टीरिया पनप नहीं पाते। जीवाश्मों की विशेष प्रकृति के कारण यह खुद को प्राकृतिक रूप से कीटाणुरहित रखता है।
  • एसिड टेस्ट (Acid Test): असली हाबूर स्टोन पर यदि नींबू के रस की एक बूंद डाली जाए, तो इसमें मौजूद प्राकृतिक चूने और जीवाश्मों के कारण हल्की सी बुदबुदाहट (Effervescence) होती है, जबकि नकली सीमेंटेड पत्थर पर कोई असर नहीं होता।

हाबूर स्टोन जैसलमेर का प्राचीन इतिहास (Ancient History of Habur Fossil Stone)

जैसलमेर मुख्य शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित हाबूर (Habur Village) नाम का एक छोटा सा गांव है। इसी गांव की भूगर्भिक संरचना में यह विशेष पत्थर पाया जाता है। भूवैज्ञानिकों (Geologists) के अनुसार, करोड़ों साल पहले जहाँ आज थार का रेगिस्तान है, वहाँ ‘टेथिस सागर’ (Tethys Sea) हुआ करता था।

समय के साथ आए प्राकृतिक बदलावों और भौगोलिक हलचलों के कारण समुद्र सूख गया। समुद्र के सूखने के बाद वहाँ मौजूद समुद्री जीव, शंख, और वनस्पतियाँ मिट्टी के नीचे दब गईं। करोड़ों सालों तक अत्यधिक दबाव और तापमान के कारण ये जीव जीवाश्म (Fossils) में बदल गए। इसी जैविक प्रक्रिया से जिस सुनहरे-भूरे रंग के पत्थर का निर्माण हुआ, उसे आज हम हाबूर फॉसिल स्टोन (Habur Fossil Stone) के नाम से जानते हैं।

हाबूर स्टोन जैसलमेर:बिना जामन के दही जमाने का जादुई रहस्य (Scientific Reason Behind Curdling Milk)

हाबूर स्टोन की सबसे अनूठी और प्रसिद्ध विशेषता यह है कि यह बिना किसी जामन (Starter Culture/Curd Catalyst) के भी दूध को दही में बदल देता है। यदि आप इस पत्थर से बने ग्लास या कटोरे (Habur Stone Utensils) में गुनगुना दूध डालकर रात भर के लिए छोड़ दें, तो सुबह तक वह गाढ़े और मीठे दही में बदल जाता है।

हाबूर स्टोन जैसलमेर :इसके पीछे का विज्ञान क्या है? (The Science Behind It)

इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि शुद्ध विज्ञान और प्रकृति का तालमेल है। वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार, इस जीवाश्म पत्थर में भारी मात्रा में अमीनो एसिड (Amino Acids), फिनाइल एलांइन और सिस्टिन पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें प्राकृतिक रूप से ऐसे सूक्ष्म जीव और खनिज (Minerals) मौजूद होते हैं, जो दूध के संपर्क में आते ही उसमें रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Reaction) शुरू कर देते हैं। यह प्रक्रिया दूध में मौजूद लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदल देती है, जिससे बिना किसी बाहरी बैक्टीरिया या खट्टे दही के इस्तेमाल के, शुद्ध और ताजा दही जम जाता है।

हाबूर स्टोन जैसलमेर के औषधीय लाभ (Health Benefits of Habur Stone)

आयुर्वेद और स्थानीय लोक-मान्यताओं में हाबूर के पत्थर को स्वास्थ्य के लिए एक बेहतरीन औषधि (Medicinal Stone) माना गया है। इस पत्थर के बर्तनों में खान-पान रखने से शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits) मिलते हैं:

पेट की समस्याओं से राहत (Digestive Health): हाबूर स्टोन के ग्लास में रात भर रखा हुआ पानी सुबह खाली पेट पीने से गैस, कब्ज (Constipation), और एसिडिटी जैसी पाचन संबंधी बीमारियों में आराम मिलता है।

मधुमेह का नियंत्रण (Diabetes Management): माना जाता है कि इस पत्थर में मौजूद खनिज इंसुलिन के स्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं, जिससे ब्लड शुगर (Blood Sugar) नियंत्रित रहता है।

त्वचा रोग में फायदेमंद (Skin Diseases): इसके पानी से चेहरा धोने या इसका नियमित सेवन करने से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे त्वचा की चमक बढ़ती है और एलर्जी दूर होती है।

खनिजों की पूर्ति (Rich in Minerals): इस पत्थर से जमे दही या पानी में कैल्शियम, आयरन, और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व (Essential Nutrients) प्राकृतिक रूप से मिल जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।

हाबूर स्टोन जैसलमेर के बर्तन और उत्पाद (Habur Stone Products and Market Price)

जैसलमेर आने वाले पर्यटक इस चमत्कारी पत्थर को स्मृति चिन्ह (Souvenirs) के रूप में अपने साथ ले जाना कभी नहीं भूलते। स्थानीय कारीगर इस पत्थर को तराशकर कई तरह के आकर्षक उत्पाद बनाते हैं:हाबूर स्टोन ग्लास (Habur Stone Glass)दही जमाने वाले कटोरे (Curd Making Bowls)चाय के कप और मग (Tea Cups and Mugs)सजावटी सामान और पिरामिड (Decorative Items and Pyramids)

यदि आप हाबूर स्टोन ग्लास की कीमत (Habur Stone Glass Price) की बात करें, तो यह इसके आकार और फिनिशिंग के आधार पर ₹300 से लेकर ₹1,500 तक आसानी से मिल जाता है। आप इसे जैसलमेर के स्थानीय बाजारों (Local Markets of Jaisalmer) जैसे सोनार किले के पास की दुकानों से खरीद सकते हैं। इसके अलावा, आजकल कई ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर ऑनलाइन हाबूर स्टोन खरीदें (Buy Habur Stone Online) का विकल्प भी उपलब्ध है।

बिना जामन के दही जमाने वाला पत्थर कहाँ मिलता है?

यह विशेष पत्थर राजस्थान के जैसलमेर जिले से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित हाबूर गांव (Habur Village) में मिलता है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, यह 1.8 करोड़ साल पुराने समुद्री जीवाश्मों से निर्मित एक दुर्लभ पत्थर है।

हाउ टू क्लीन हाबूर स्टोन ग्लास? (How to clean Habur stone glass)

हाबूर स्टोन ग्लास या बर्तनों को साफ करने के लिए कभी भी रासायनिक साबुन, सर्फ या डिशवाशर का उपयोग न करें। इसे केवल सादे गुनगुने पानी और एक साफ सूती कपड़े से रगड़कर साफ करना चाहिए, ताकि इसके प्राकृतिक रोमकूप (pores) बंद न हों।

हाउ टू यूज़ हाबूर स्टोन फॉर कर्ड मेकिंग? (How to use Habur stone for curd making)

पहली बार इस्तेमाल करने से पहले बर्तन को 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद, दही जमाने के लिए बर्तन में हल्का गुनगुना दूध डालें और उसे ढककर रात भर के लिए छोड़ दें। सुबह तक बिना किसी जामन के गाढ़ा और सोंधा दही तैयार हो जाएगा।

क्या हाबूर स्टोन जैसलमेर के कोई साइड इफेक्ट्स हैं? (Habur stone glass side effects)

प्राकृतिक और जैविक होने के कारण सामान्य तौर पर इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। हालांकि, शुरुआत में इसके रोमकूपों से निकलने वाले प्राकृतिक खनिजों के कारण पानी या दूध का स्वाद थोड़ा अलग लग सकता है। चिकित्सा उपचार के विकल्प के रूप में इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

How to use Habur stone for curd making?

पहला कदम (बर्तन तैयार करना): नए बर्तन को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले सादे पानी में 24 घंटे के लिए भिगोकर रखें, ताकि इसके प्राकृतिक रोमछिद्र (pores) सक्रिय हो जाएं.

दूध तैयार करना: ताजा दूध अच्छी तरह उबालें और फिर उसे हल्का गुनगुना (lukewarm) होने तक ठंडा होने दें. दूध न तो ज्यादा गर्म होना चाहिए और न ही ठंडा.

स्टार्टर कल्चर (जामन): परंपरागत रूप से यह माना जाता है कि बिना जामन के भी दही जमता है. हालांकि, बेहतर और गाढ़े परिणाम के लिए दूध में आधा चम्मच ताजा दही (जामन) अच्छी तरह मिला लें.

रेस्टिंग टाइम: अब इस दूध को हाबूर स्टोन के बर्तन में डालें, इसे ढकें और किसी गर्म या स्थिर जगह पर 6 से 12 घंटे के लिए बिना हिलाए छोड़ दें.

मौसम का ध्यान रखें: गर्मियों में दही 5-6 घंटे में जम जाता है, जबकि सर्दियों में इसे जमने में 10 से 14 घंटे का समय लग सकता है.

Is Habur stone safe for health?

जी हाँ, हाबूर स्टोन स्वास्थ्य के लिए 100% प्राकृतिक, गैर-विषाक्त (non-toxic) और पूरी तरह से सुरक्षित है.केमिकल फ्री: प्लास्टिक या धातु के बर्तनों के विपरीत, यह एक जैविक जीवाश्म चूना पत्थर (fossil-rich limestone) है जो भोजन या पानी के संपर्क में आने पर कोई हानिकारक रसायन नहीं छोड़ता.आयुर्वेदिक और औषधीय महत्व: आयुर्वेद में इसके बर्तनों का उपयोग शरीर को प्राकृतिक शीतलता देने, पाचन क्रिया को सुधारने और एसिडिटी को कम करने के लिए किया जाता है.सुरक्षा नियम: यह तभी तक पूरी तरह सुरक्षित है जब तक आप इसकी सफाई में केमिकल साबुन या डिशवॉशर जेल का उपयोग नहीं करते. रासायनिक साबुन इसके छिद्रों में जमा हो सकते हैं, इसलिए इसे हमेशा केवल सादे गुनगुने पानी से ही साफ करें.

Habur stone village distance from Jaisalmer

हाबूर गांव (जिसे अब पूनमसिंह नगर के नाम से भी जाना जाता है), जैसलमेर मुख्य शहर से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 40 से 51 किलोमीटर (km) की दूरी पर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है.

जैसलमेर से कार या स्थानीय टैक्सी द्वारा थार रेगिस्तान के रास्तों (जैसे जैसलमेर – सम – धनाना रोड) से होते हुए इस गांव तक पहुँचने में लगभग 50 से 55 मिनट का समय लगता है.

Can we wash Habur stone with soap?” (क्या हम हाबूर स्टोन को साबुन या डिशवॉशर लिक्विड से धो सकते हैं?)

इसका सीधा जवाब है—बिलकुल नहीं (Strictly No!)। हाबूर के बर्तनों पर कभी भी केमिकल साबुन, डिटर्जेंट या डिशवॉशर जेल का उपयोग न करें।

केमिकल सोखने का खतरा: यह पत्थर स्पंज की तरह छिद्रयुक्त (Porous) होता है। साबुन का केमिकल इसके अंदर जमा हो जाता है, जो बाद में दूध या पानी में घुलकर पेट में जा सकता है।गुड बैक्टीरिया का नुकसान: कठोर केमिकल इसके प्राकृतिक माइक्रो-ऑर्गेनिज्म और अमीनो एसिड को नष्ट कर देते हैं। इससे बर्तन की दही जमाने की क्षमता खत्म हो जाती है।

साफ करने का सही तरीका: हर बार इस्तेमाल के बाद बर्तन को केवल हल्के गुनगुने पानी (Lukewarm Water) और साफ सूती कपड़े से रगड़कर धोएं। धोने के बाद इसे खुली हवा या धूप में पूरी तरह सुखा लें।

Why is my Habur stone leaking?” (मेरा हाबूर स्टोन का बर्तन नीचे से क्यों रिस रहा है/पसीना छोड़ रहा है?)

यदि नए हाबूर ग्लास या बोतल की बाहरी सतह पर पानी की बूंदें दिखें, तो घबराएं नहीं। यह कोई खराबी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है:मिट्टी के घड़े जैसा स्वभाव: यह पत्थर करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों से बना है। मिट्टी के मटके की तरह इसमें लाखों सूक्ष्म छिद्र (High Porosity) होते हैं, जिससे शुरुआत में पानी बाहर की तरफ रिसता है।आसान घरेलू समाधान: इस्तेमाल से पहले नए बर्तन को 24 से 48 घंटे के लिए सादे पानी में डुबोकर छोड़ दें। इसके बाद जब आप इसमें नियमित रूप से दूध जमाएंगे, तो दूध के फैट्स इन छिद्रों को प्राकृतिक रूप से हमेशा के लिए ब्लॉक (Seal) कर देंगे और लीकेज पूरी तरह बंद हो जाएगी।

हाबूर स्टोन जैसलमेर:असली बनाम नकली को परखने के 3 घरेलू तरीके (Habur Stone Fake vs Real Test at Home)

दही जमाने का टेस्ट (The Curdling Test) – सबसे प्रामाणिक तरीकाविधि: हाबूर स्टोन के कटोरे या ग्लास में थोड़ा सा गुनगुना दूध डालें (ध्यान रहे, इसमें कोई जामन या खट्टा दही नहीं मिलाना है)। इसे ढककर रात भर (10-12 घंटे) सामान्य तापमान पर रख दें।परिणाम: यदि सुबह तक दूध गाढ़े, मीठे और सोंधे दही में बदल जाता है, तो आपका पत्थर 100% असली है। नकली या मिलावटी पत्थर में दूध वैसा का वैसा ही रहेगा या खराब होकर फट जाता है।

एसिड या नींबू टेस्ट (The Acid Reaction Test)विधि: बर्तन के किसी ऐसे हिस्से पर (जैसे कि पेंदे के नीचे) नींबू के रस की एक या दो बूंदें टपकाएं।परिणाम: असली हाबूर पत्थर में प्राकृतिक कैल्शियम कार्बोनेट और जीवाश्म होते हैं, जिसके कारण नींबू के एसिड से संपर्क होते ही वहाँ हल्की सी बुदबुदाहट (Effervescence/Fizzing) होने लगेगी। नकली पेंट किए गए या प्लास्टिक के बर्तनों पर नींबू के रस का कोई असर नहीं होगा।

वाटर एब्जॉर्प्शन टेस्ट (Water Absorption Test)विधि: नए सूखे बर्तन में थोड़ा सा साफ पानी भर कर रखें।परिणाम: असली पत्थर प्राकृतिक रूप से छिद्रयुक्त (Porous) होता है। पानी डालने के कुछ ही मिनटों बाद बर्तन की बाहरी दीवारें पानी सोखने के कारण हल्की नम होने लगेंगी और उन पर ‘पसीना’ जैसा दिखाई देगा। नकली या केमिकल-कोटेड बर्तनों की बाहरी सतह पूरी तरह सूखी रहेगी।

“Habur stone curd taste” हाबूर स्टोन जैसलमेर में जमे दही का स्वाद कैसा होता है

सोंधी खुशबू: मिट्टी के कुल्हड़ या मटके जैसी प्राकृतिक और सोंधी (Earthy) महक आती है।हल्की मिठास: प्राकृतिक मिनरल्स के कारण यह दही ज्यादा खट्टा नहीं होता और इसमें हल्की मिठास (Mildly Sweet) रहती है।गाढ़ा और क्रीमी: पत्थर के बारीक छिद्र दूध का अतिरिक्त पानी सोख लेते हैं, जिससे दही बिल्कुल गाढ़ा (Thick) और चक्के जैसा जमता है।100% ऑर्गेनिक: बिना किसी केमिकल या कृत्रिम जामन के जमने के कारण इसका स्वाद एकदम शुद्ध और ताजा महसूस होता है।

Habur stone bottle online

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब प्लास्टिक और तांबे की बोतलों के विकल्प के रूप में हाबूर स्टोन की बोतल (Habur Stone Water Bottle) को ऑनलाइन सर्च कर रहे हैं।यह क्यों ट्रेंड में है?: जैसे तांबे की बोतल पानी को डिटॉक्स करती है, वैसे ही यह जीवाश्म पत्थर पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है और उसमें आवश्यक मिनरल्स (कैल्शियम, मैग्नीशियम) घोलता है।ऑनलाइन उपलब्धता: यह बोतल Amazon India जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स और Pokaran Pottery या Harishyam Arts जैसे राजस्थानी हस्तशिल्प पोर्टल्स पर आसानी से मिल जाती है।ऑनलाइन कीमत: क्षमता (Capacity) के आधार पर 650ml से 1 लीटर की असली हाबूर स्टोन बोतल ऑनलाइन बाजार में ₹1,950 से ₹2,600 के बीच बिक रही है।

Habur stone glass price in Jaisalmer” (जैसलमेर के स्थानीय बाजार में ग्लास की सही कीमत क्या है)

जैसलमेर मार्केट की सही कीमत: यदि आप सीधे जैसलमेर के स्थानीय कारीगरों या थोक विक्रेताओं से खरीदते हैं, तो एक सामान्य आकार (3 से 4 इंच) के हाबूर स्टोन ग्लास की कीमत ₹400 से ₹650 प्रति पीस होती है।

कीमत किस पर निर्भर करती है?: ग्लास ‘अनपॉलिश्ड’ (Unpolished/Raw) है या ‘पॉलिश्ड’ (Polished) है। बिना पॉलिश वाले ग्लास थोड़े सस्ते होते हैं और आयुर्वेद के लिए इन्हें ही सबसे बेस्ट माना जाता है

Habur stone tea cup set” (मेहमानों को सर्व करने के लिए हाबूर स्टोन जैसलमेर कप सेट की डिमांड)

लुक और खासियत: करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों की प्राकृतिक सुनहरी-भूरी नक्काशी (Gold/Brown Finish) इसे बेहद यूनिक बनाती है। भारी पत्थर के कारण इसमें चाय लंबे समय तक गर्म रहती है।2 कप सेट की कीमत: लोकल और ऑनलाइन मार्केट में इसकी कीमत लगभग ₹800 से ₹1,000 के बीच है।4 से 6 कप सेट की कीमत: त्योहारों और शादियों में गिफ्ट देने के लिए पूरा सेट ₹2,200 से ₹2,650 तक आता है।

हाबूर स्टोन जैसलमेर को चमत्कारी पत्थर क्यों माना जाता है?

राजस्थान के जैसलमेर जिले के हाबूर गांव में पाए जाने वाले हाबूर स्टोन (Habur Stone) को मुख्य रूप से इसके बिना जामन (खट्टा) के दूध से स्वादिष्ट दही जमाने के जादुई गुण के कारण चमत्कारी माना जाता है। स्थानीय लोग इसे ‘हाबूरिया भाटा’ भी कहते हैं। यदि इस पत्थर से बने बर्तन या गिलास में दूध भरकर रात भर के लिए रख दिया जाए, तो सुबह तक वह प्रोबायोटिक युक्त पौष्टिक दही में बदल जाता है।

हाबूर स्टोन का वैज्ञानिक रहस्य इसके लाखों साल पुराने समुद्री जीवाश्मों और दुर्लभ खनिजों में छिपा है। इसके संपर्क में आते ही दूध प्राकृतिक रूप से फर्मेंट होकर पौष्टिक दही बन जाता है। स्वास्थ्य, आयुर्वेद और वास्तु के लिहाज से बेहद गुणकारी होने के कारण ही लोग इसे एक चमत्कारी पत्थर मानते हैं।

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