5 सबसे बड़े कारण: क्यों आपको बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर (Bawalianwala Border Jaisalmer) जरूर जाना चाहिए

जैसलमेर (Jaisalmer) की स्वर्ण नगरी से लगभग 150 किमी दूर, थार मरुस्थल (Thar Desert) के बिल्कुल अंतिम छोर पर स्थित है—बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर जिसे राजस्थान का नया ‘जीरो पॉइंट’ (Zero Point) कहा जा रहा है। हमारी टीम (Our Team) ने हाल ही में यहाँ का दौरा किया और स्थानीय गाइड (Local Guide) के साथ मिलकर इस अनूठे अनुभव (Unique Experience) को महसूस किया।

Rajasthan Travel Guide Contents

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर

बवरियानवाला जाने का सबसे मुख्य आकर्षण यहाँ होने वाली परेड (Parade) है। वाघा बॉर्डर (Wagah Border) की तर्ज पर यहाँ बीएसएफ (Border Security Force – BSF) के जवान जोश और जज्बे के साथ बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony) करते हैं। डूबते सूरज की रोशनी (Sunset Light) में जवानों का मार्च देखना रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव (Thrilling Experience) होता है।

तनोट माता से बवरियानवाला का सफर (Journey from Tanot Mata to Bawalianwala)

तनोट माता मंदिर (Tanot Mata Temple) से बवरियानवाला की दूरी लगभग 30 किमी है। यह पूरा रास्ता (Route) बेहद शांत और सुंदर है। सड़क के दोनों तरफ आपको केवल रेत के टीले (Sand Dunes) और दूर-दूर तक फैला रेगिस्तान दिखाई देगा। हमारी टीम का अनुभव (Team Experience) कहता है कि यह रोड ट्रिप (Road Trip) जैसलमेर की सबसे यादगार यात्राओं में से एक है।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर :बॉर्डर परमिट और सुरक्षा (Border Permit and Security Bawalianwala Border Jaisalmer)

चूँकि यह एक संवेदनशील इलाका (Sensitive Area) है, इसलिए यहाँ जाने के लिए आपको बॉर्डर परमिट (Border Permit) की आवश्यकता होती है। आप तनोट माता मंदिर के पास बनी बीएसएफ चेक पोस्ट (BSF Check Post) पर अपना आधार कार्ड (Aadhar Card) दिखाकर अनुमति (Permission) ले सकते हैं। सुरक्षा (Security) के लिहाज से यह क्षेत्र बहुत ही सुरक्षित और व्यवस्थित है।

2 दिन में जैसलमेर और बॉर्डर की सैर (Jaisalmer and Border Tour in 2 Days)

यदि आप 2 दिन (2 Days) के लिए जैसलमेर आ रहे हैं, तो आप पहले दिन जैसलमेर किला (Jaisalmer Fort) और गड़ीसर झील (Gadisar Lake) देख सकते हैं। दूसरे दिन सुबह जल्दी तनोट (Tanot), लोंगेवाला (Longewala) और शाम को बवरियानवाला (Bawalianwala) की परेड का प्लान (Plan) बनाएं।

फैक्ट फाइल: बवरियानवाला बॉर्डर, जैसलमेर (Fact File: Bawalianwala Border)

  • स्थान (Location) बवरियानवाला, जैसलमेर जिला, राजस्थान (Indo-Pak Border)
  • दूरी (Distance) जैसलमेर शहर से लगभग 155 किमी, तनोट से 32 किमी
  • मुख्य आकर्षण (Main Attraction) बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony)
  • परेड का समय (Parade Timing) सूर्यास्त से 30 मिनट पहले (Sunset Timing)
  • प्रवेश अनुमति (Entry Permit) तनोट बीएसएफ चेक पोस्ट से आधार कार्ड द्वारा (BSF Check Post)
  • प्रवेश शुल्क (Entry Fee) निःशुल्क (Free Entry)
  • निकटतम हवाई अड्डा (Nearest Airport) जैसलमेर एयरपोर्ट (Jaisalmer Airport)
  • निकटतम रेलवे स्टेशन (Nearest Railway) जैसलमेर रेलवे स्टेशन (Jaisalmer Railway Station)
  • फोटोग्राफी (Photography) केवल अनुमति वाले क्षेत्रों में (Allowed in Designated Areas)
  • ऐतिहासिक महत्व (Historical Significance): यह क्षेत्र 1971 के भारत-पाक युद्ध (Indo-Pak War) का गवाह रहा है और अब इसे सीमा दर्शन प्रोजेक्ट (Seema Darshan Project) के तहत विकसित किया गया है।
  • बीटिंग रिट्रीट (Beating Retreat): यहाँ की परेड अटारी-वाघा बॉर्डर (Attari-Wagah Border) की याद दिलाती है, जहाँ बीएसएफ (BSF) के जवान अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करते हैं।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर : 10 रोचक तथ्य

रेगिस्तान का वाघा बॉर्डर (Wagah of the Desert): बवरियानवाला को राजस्थान का ‘वाघा’ कहा जाता है। यहाँ की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony) में वही जोश और जुनून देखने को मिलता है जो पंजाब के अटारी बॉर्डर पर होता है।

चमत्कारी बम (Miraculous Bombs): तनोट माता मंदिर (Tanot Mata Temple), जो बवरियानवाला के रास्ते में है, वहां 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान गिरे 3000 से ज्यादा बम नहीं फटे थे। वे आज भी मंदिर के म्यूजियम (Museum) में देखे जा सकते हैं।

बिना कंक्रीट की सड़कों का जादू (Magic of Desert Roads): यहाँ की सड़कें सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बीआरओ (BRO) द्वारा इतनी बेहतरीन बनाई गई हैं कि रेगिस्तानी तूफानों (Sand Storms) के बावजूद ये जल्दी खराब नहीं होतीं।

जीरो पॉइंट का अनुभव (Zero Point Experience): बवरियानवाला वह स्थान है जहाँ आप भारत और पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) को फेंसिंग (Fencing) के जरिए बहुत करीब से देख सकते हैं।

रात का नजारा (Night View): रात के समय बॉर्डर पर लगी फ्लड लाइट्स (Flood Lights) इतनी तेज होती हैं कि रेगिस्तान की रेत चांदी की तरह चमकती है, जिसे ‘गोल्डन डस्ट’ (Golden Dust) भी कहा जाता है।

बीएसएफ की मेहमाननवाजी (Hospitality of BSF): यहाँ आने वाले पर्यटकों का स्वागत बीएसएफ के जवान बहुत ही सम्मान के साथ करते हैं, जो नागरिक-सैन्य संबंधों (Civil-Military Relations) का बेहतरीन उदाहरण है।

पाकिस्तानी टैंकों का कब्रिस्तान (Graveyard of Pakistani Tanks): बवरियानवाला से कुछ ही दूरी पर लोंगेवाला (Longewala) है, जहाँ आज भी 1971 के युद्ध में नष्ट हुए असली पाकिस्तानी टैंक (Pakistani Tanks) खुले आसमान के नीचे खड़े हैं।

वन्यजीव दर्शन (Wildlife Spotting): सफर के दौरान आपको चिंकारा (Chinkara) और रेगिस्तानी लोमड़ी (Desert Fox) आसानी से देखने को मिल सकते हैं।

स्थानीय गाइड की कहानियाँ (Stories of Local Guides): स्थानीय गाइड (Local Guides) यहाँ के हर टीले और हर चौकी (Post) के पीछे छिपी शौर्य गाथाएं सुनाते हैं, जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं।

बवरियानवाला परेड टाइमिंग (Bawalianwala Parade Timing)

यहाँ होने वाली बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony) प्रतिदिन सूर्यास्त (Sunset) से लगभग 30 मिनट पहले शुरू होती है। गर्मियों में यह समय शाम 6:00 से 6:30 के बीच और सर्दियों में शाम 5:00 से 5:30 के बीच रहता है। सटीक समय के लिए स्थानीय गाइड (Local Guide) से संपर्क करना बेहतर रहता है। हमारी टीम ने महसूस किया कि अच्छी जगह (Best Seating Spot) पाने के लिए आपको कम से कम 1 घंटा पहले पहुँच जाना चाहिए। ₹1500 के बजट (Budget) वाले यात्रियों के लिए यह एक बेहतरीन और निःशुल्क (Free) अनुभव है।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर कैसे पहुंचें (How to reach Bawalianwala)

बवरियानवाला बॉर्डर (Bawalianwala Border) पहुँचने के लिए जैसलमेर शहर (Jaisalmer City) से लगभग 155 किमी का सफर तय करना पड़ता है। सबसे पहले आप 120 किमी दूर स्थित तनोट माता मंदिर (Tanot Mata Temple) पहुँचें। यहाँ बीएसएफ चेक पोस्ट (BSF Check Post) पर अपना पहचान पत्र (ID Card) दिखाकर अनुमति (Permission) लेना अनिवार्य है।तनोट से बवरियानवाला की दूरी 32 किमी है, जिसे तय करने में करीब 45 मिनट लगते हैं। हमारी टीम (Our Team) के अनुसार, निजी वाहन या किराए की टैक्सी (Rental Taxi) सबसे उत्तम विकल्प है, क्योंकि यहाँ सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) की सुविधा कम है। कम बजट (Budget) वाले यात्री टैक्सी शेयर कर सकते हैं।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर परमिट (Bawalianwala Border Permit)

बवरियानवाला बॉर्डर परमिट (Bawalianwala Border Permit) प्रक्रिया बेहद आसान है। सीमा (Indo-Pak Border) के पास होने के कारण बीएसएफ (BSF) से अनुमति लेना अनिवार्य है।हमारी टीम (Our Team) के अनुसार, आप तनोट माता मंदिर (Tanot Mata Temple) स्थित बीएसएफ चेक पोस्ट पर अपना पहचान पत्र (Identity Card) दिखाकर यह अनुमति ले सकते हैं। यह परमिट पूरी तरह निःशुल्क (Free) है और इसके लिए किसी एजेंट की जरूरत नहीं पड़ती। अनुमति मिलने के बाद ही आप ‘जीरो पॉइंट’ तक जा सकते हैं।

क्या आप जानते हैं? बवरियानवाला बॉर्डर (Bawalianwala Border) पर बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत पर्यटन को बढ़ावा देने और लोगों में राष्ट्रवाद की भावना (Sense of Nationalism) भरने के लिए हाल ही में की गई है।

जैसलमेर जीरो पॉइंट: मुख्य आकर्षण (Key Highlights)

बीटिंग रिट्रीट परेड (Beating Retreat Parade): जीरो पॉइंट पर बीएसएफ (BSF) के जवानों द्वारा की जाने वाली परेड मुख्य आकर्षण है। यह सेरेमनी देशभक्ति के जोश से भर देती है।

भारत-पाक फेंसिंग (Indo-Pak Fencing): यहाँ आप अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) को बहुत करीब से देख सकते हैं। सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों को देखकर हर भारतीय का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है।

रेगिस्तानी शांति (Desert Peace): शहर के शोर-शराबे से दूर, यह स्थान थार मरुस्थल (Thar Desert) की शांति और प्राकृतिक सुंदरता को समेटे हुए है।

बवरियानवाला का इतिहास (History of Bawalianwala)

बवरियानवाला का इतिहास (History of Bawalianwala) वीरता और शौर्य की बेजोड़ मिसाल है। इसका ऐतिहासिक महत्व मुख्य रूप से 1971 के भारत-पाक युद्ध (Indo-Pak War) से जुड़ा है, जब लोंगेवाला की प्रसिद्ध जंग के दौरान यह एक महत्वपूर्ण सामरिक चौकी (Strategic Outpost) थी। पाकिस्तानी सेना को जैसलमेर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए भारतीय जवानों और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने यहाँ दुश्मन की हर हरकत को नाकाम किया था।1965 के युद्ध के बाद इस दुर्गम इलाके की सुरक्षा बढ़ाते हुए बवरियानवाला को एक अभेद्य दीवार के रूप में विकसित किया गया। लंबे समय तक केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित रहने के बाद, हाल ही में इसे ‘सीमा दर्शन प्रोजेक्ट’ (Seema Darshan Project) के तहत पर्यटन के लिए खोला गया है। अब यहाँ ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’ (Beating Retreat Ceremony) का आयोजन होता है, जो पर्यटकों को बीएसएफ के गौरवशाली इतिहास (Glorious History) से रूबरू कराता है।

परिवार के साथ जैसलमेर बॉर्डर: मुख्य आकर्षण (Family Highlights)

बवरियानवाला (Bawalianwala) को ‘राजस्थान का गौरव’ (Pride of Rajasthan) कहा जाता है क्योंकि यहाँ की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony) में भाग लेना हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। बच्चों के लिए यह किसी लाइव देशभक्ति फिल्म (Patriotic Movie) जैसा रोमांचक अनुभव होता है।परिवार के साथ यात्रा की शुरुआत तनोट माता मंदिर (Tanot Mata Temple) के दर्शन से होती है, जहाँ 1971 युद्ध के चमत्कारी बम (Miraculous Bombs) आज भी पर्यटकों को विस्मित करते हैं। रास्ते में लोंगेवाला वॉर मेमोरियल (Longewala War Memorial) रुकना न भूलें; यहाँ खुले में रखे पाकिस्तानी टैंक (Pakistani Tanks) और युद्ध के अवशेष फोटोग्राफी (Photography) के लिए बेहतरीन हैं। हमारी टीम (Our Team) के अनुसार, यहाँ की शॉर्ट फिल्म पूरे परिवार को जरूर देखनी चाहिए। यह सफर मनोरंजन के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय सेना के साहस से रूबरू कराने का उत्तम जरिया है।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर (Bawalianwala Border Jaisalmer) :FAQ

राजस्थान की ‘वाघा’ परेड: बवरियानवाला बॉर्डर

परेड का स्वरूप: यहाँ बीएसएफ (Border Security Force – BSF) के जवान वाघा बॉर्डर की ही तरह पूरी वर्दी और जोश के साथ मार्च करते हैं। भारतीय ध्वज को सम्मानपूर्वक उतारने की यह प्रक्रिया संगीत और नारों के बीच पूरी होती है।माहौल: यहाँ वाघा बॉर्डर जैसी बहुत बड़ी भीड़ नहीं होती, जिससे आप परेड को बहुत करीब से और शांति से देख सकते हैं। यहाँ का वातावरण अधिक ‘रॉ’ और वास्तविक (Authentic) लगता है।समय (Timing): यह सेरेमनी प्रतिदिन सूर्यास्त (Sunset) से लगभग 30 मिनट पहले शुरू होती है। हमारी टीम का सुझाव है कि आप शाम 4:30 बजे तक पहुँच जाएँ।

बवरियानवाला बॉर्डर जैसलमेर टूर हेतु आधार कार्ड जरूरी है क्या?

बॉर्डर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश के लिए कोई भी एक वैध सरकारी पहचान पत्र (Valid Govt ID) अनिवार्य है।विकल्प: यद्यपि आधार कार्ड (Aadhar Card) सबसे अधिक स्वीकार्य और आसान विकल्प है, लेकिन आप अपनी ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) या कोई अन्य सरकारी फोटो आईडी का उपयोग भी कर सकते हैं।महत्वपूर्ण: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के समय आपने जिस आईडी (ID) का विवरण दिया है, बॉर्डर पर वेरिफिकेशन (Verification) के समय उसी ओरिजिनल आईडी को साथ रखना अनिवार्य है।

“क्या बवरियानवाला जाने के लिए पहले से परमिट लेना पड़ता है?” (Do we need prior permit for Bawalianwala?)

हाँ, अब ऑनलाइन परमिट (Online Permit) अनिवार्य है।फरवरी 2026 से लागू नए नियमों के अनुसार, अब पर्यटकों को ‘श्री तनोट माता मंदिर ट्रस्ट’ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है।प्रक्रिया: आपको अपनी यात्रा की तारीख से पहले वेबसाइट पर अपनी डिटेल्स भरनी होंगी, जिसके बाद आपके ईमेल पर एक बॉर्डर पास (Border Pass) भेजा जाएगा।प्रिंटआउट: सुरक्षा जांच (Security Check) के समय आपको इस पास की दो प्रिंटेड कॉपियां साथ रखनी होंगी। अब मौके पर (On-the-spot) मैनुअल परमिट मिलने में समय लग सकता है, इसलिए ऑनलाइन बुकिंग ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

तनोट और बवरियानवाला के बीच ढाबे (Dhabas between Tanot and Bawalianwala)

तनोट से बवरियानवाला के बीच का 32 किमी का रास्ता पूरी तरह रेगिस्तानी और निर्जन है। यहाँ आपको लग्जरी रेस्टोरेंट नहीं, बल्कि शुद्ध देसी स्वाद वाले लोकल ढाबे (Local Dhabas) मिलेंगे:तनोट माता मंदिर परिसर: मंदिर के पास ही कुछ छोटे भोजनालय हैं जहाँ आपको सात्विक भोजन और नाश्ता मिल जाएगा।रास्ते के ढाबे: तनोट से निकलते ही रास्ते में एक-दो छोटे केबिन या अस्थाई ढाबे मिल सकते हैं, जहाँ की ‘कड़क चाय’ और ‘बाजरे का चूरमा’ बहुत प्रसिद्ध है।बवरियानवाला परेड क्षेत्र: परेड स्थल के पास बीएसएफ द्वारा संचालित छोटी कैंटीन या स्टॉल होते हैं, जहाँ चाय-पानी और बिस्कुट जैसी बुनियादी चीजें मिल जाती हैं।

बॉर्डर पर मोबाइल नेटवर्क की स्थिति (Mobile Network at the Border)

जैसे-जैसे आप जैसलमेर शहर से दूर तनोट और बवरियानवाला की ओर बढ़ते हैं, मोबाइल नेटवर्क (Mobile Network) काफी कमजोर होने लगता है:रामगढ़ तक: यहाँ तक आपको लगभग सभी प्रमुख कंपनियों का नेटवर्क मिल जाएगा।तनोट माता मंदिर: यहाँ नेटवर्क बहुत ही अस्थिर (Unstable) रहता है। बीएसएफ (BSF) के अपने नेटवर्क होते हैं, लेकिन आम नागरिकों के लिए सिग्नल न के बराबर होते हैं।बवरियानवाला (जीरो पॉइंट): यहाँ पहुँचते ही मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब (No Signal) हो जाता है।प्रो टिप: बॉर्डर पर जाने से पहले अपने परिवार को सूचित कर दें और जरूरी ऑफलाइन मैप्स (Offline Maps) डाउनलोड कर लें। डिजिटल डिटॉक्स (Digital Detox) के लिए यह बेहतरीन जगह है।

क्या तनोट माता मंदिर में रुकने की व्यवस्था है? (Stay at Tanot Temple)

हाँ, तनोट माता मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के रुकने के लिए धर्मशाला (Guest House) की व्यवस्था है। चूँकि यह क्षेत्र पूरी तरह से बीएसएफ (BSF) की देखरेख में है, इसलिए यहाँ रुकने के कुछ विशेष नियम हैं:धर्मशाला की सुविधा: मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित धर्मशाला में साधारण कमरे और हॉल उपलब्ध हैं। यहाँ रुकने का अनुभव बहुत ही आध्यात्मिक और शांत होता है।बुकिंग प्रक्रिया: यहाँ कमरों की एडवांस बुकिंग की सुविधा बहुत सीमित है; आमतौर पर पहुँचने पर उपलब्धता (Subject to availability) के आधार पर कमरे दिए जाते हैं।सुविधाएं: यहाँ सुविधाएं बहुत ही आधारभूत (Basic) हैं। यदि आप लग्जरी की तलाश में हैं, तो आपको जैसलमेर शहर में ही रुकना चाहिए। यहाँ का भोजन सादा और सात्विक होता है।

तनोट से बवरियानवाला रोड की स्थिति (Road Condition from Tanot to Bawalianwala

तनोट से बवरियानवाला के बीच की सड़क की स्थिति बेहतरीन (Excellent) है।सड़क की बनावट: यह बॉर्डर रोड विंग (BSF/BRO) द्वारा बनाई गई है, जो काफी मजबूत और स्मूथ है। हालाँकि यह टू-लेन (Single-intermediate lane) रोड है, लेकिन ट्रैफिक बहुत कम होने के कारण गाड़ी चलाना सुखद अनुभव होता है।दृश्य (Scenery): सड़क के दोनों ओर आपको ऊंचे-ऊंचे रेत के टीले (Sand Dunes) और विरल वनस्पतियां मिलेंगी। यह रास्ता पूरी तरह से सुनसान और सुरक्षित है।सावधानी: सड़क पर कभी-कभी रेत आ जाती है, जिसे समय-समय पर साफ किया जाता है। साथ ही, रास्ते में आवारा पशु (जैसे ऊंट या नीलगाय) अचानक सामने आ सकते हैं, इसलिए गति सीमा का ध्यान रखें।

जैसलमेर से जीरो पॉइंट की दूरी (Distance from Jaisalmer to Zero Point)

जैसलमेर शहर (मुख्य शहर/किला क्षेत्र) से बवरियानवाला ‘जीरो पॉइंट’ की कुल दूरी लगभग 155 किमी है। इस यात्रा को आप दो चरणों में समझ सकते हैं:जैसलमेर से तनोट माता मंदिर: लगभग 120 किमी (लगभग 2 से 2.5 घंटे)।तनोट से बवरियानवाला (जीरो पॉइंट): लगभग 32-35 किमी (लगभग 45-50 मिनट)।प्रो टिप: यह पूरी यात्रा (आना-जाना) करीब 310 किमी की हो जाती है, इसलिए सुबह 8:00 या 9:00 बजे तक जैसलमेर से निकलना सबसे अच्छा रहता है।

बवरियानवाला परेड का स्वरूप और जोश (Nature of Parade)

बवरियानवाला (जिसे बबलियांवाला भी कहा जाता है) में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (Beating Retreat Ceremony) का आयोजन सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा किया जाता है। यहाँ जवानों का ऊँचा जोश, उनके मार्च करने का तरीका और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूँजता आसमान हर भारतीय के दिल में देशभक्ति भर देता है। वाघा बॉर्डर के मुकाबले यहाँ भीड़ कम होती है, जिससे आप परेड को बहुत करीब से देख सकते हैं।

जैसलमेर की हमारी यह यात्रा केवल रेत के टीलों और किलों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह बवरियानवाला (Bawalianwala) और तनोट (Tanot) की वीर गाथाओं को करीब से महसूस करने का एक जरिया थी। हमारी टीम (Our Team) ने इस पूरे सफर के दौरान जो देशभक्ति और रोमांच महसूस किया, वह शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

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