महाभारत रहस्य: बर्बरीक के धड़ का क्या हुआ और कहाँ गिरा था बाबा श्याम का धड़?

क्या आप जानते हैं कि बर्बरीक के धड़ का क्या हुआ और बर्बरीक का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ था? इंटरनेट पर इस रहस्यमयी लोककथा पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। आइए आज विस्तार से जानते हैं कि खाटू श्याम का धड़ कहाँ है और इससे जुड़ी चमत्कारी कहानी क्या है।

महाभारत युद्ध के बाद बर्बरीक के शरीर का क्या हुआ?/बर्बरीक के धड़ का क्या हुआ,

जब वीर बर्बरीक ने अपने हाथों से अपना मस्तक काटकर भगवान श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया, तो श्री कृष्ण ने उनके शीश को अमृत से सींचकर कुरुक्षेत्र युद्धभूमि के समीप ही एक ऊंचे स्थान पर रख दिया ताकि वे महाभारत का पूरा युद्ध देख सकें।

पौराणिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, शीश दान के बाद बर्बरीक के विशालकाय और पराक्रमी धड़ (Torso) को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण मान्यताएं प्रचलित हैं:

बर्बरीक के धड़ का कुरुक्षेत्र के समीप अंतिम संस्कार (वैदिक मत)

स्कंद पुराण और महाभारत के कुछ क्षेत्रीय प्रसंगों के अनुसार, चूंकि बर्बरीक पांडव कुल के राजकुमार थे, इसलिए भगवान श्री कृष्ण की देखरेख में पांडवों द्वारा बर्बरीक के धड़ का कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि के पास ही पूरे सैन्य सम्मान और वैदिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया गया था।

बर्बरीक के धड़ की हरियाणा की पावन धरा पर भू-समाधि (लोक मान्यता)

वहीं, एक अन्य बेहद मजबूत लोक मान्यता के अनुसार, शीश कटने के बाद बर्बरीक का शीश विहीन धड़ कुरुक्षेत्र से कुछ दूरी पर जाकर गिरा और वहां की पावन मिट्टी में स्वतः ही विलीन (भू-समाधि) हो गया। यही कारण है कि आज भी हरियाणा में बाबा के धड़ की विशेष पूजा की जाती है।

खाटू श्याम जी के धड़ की कहानी (हिसार का इतिहास)

अगर आप यह खोज रहे हैं कि बाबा श्याम का धड़ कहाँ पर है, तो आपको हरियाणा के हिसार जिले का इतिहास जानना होगा। पूरे भारत में जहां राजस्थान का खाटू धाम शीश पूजा के लिए प्रसिद्ध है, वहीं बर्बरीक धड़ मंदिर हरियाणा के हिसार में स्थित है।

1707 ईस्वी का चमत्कार: लोक कथाओं के अनुसार, सन् 1707 के आसपास हिसार के स्थानीय ग्रामीणों को स्वप्न में बाबा श्याम ने दर्शन दिए और एक विशेष स्थान पर खुदाई करने का निर्देश दिया।

मूर्तियां प्रकट होना: जब ग्रामीणों ने उस स्थान पर खुदाई की, तो वहां से बर्बरीक के धड़ की प्राचीन मूर्तियां प्रकट हुईं। इसके बाद वहां हिसार श्याम बाबा मंदिर धड़ पूजा की शुरुआत हुई।

नीले घोड़े के पैरों के निशान: मंदिर परिसर में आज भी वह ऐतिहासिक शिला मौजूद है, जिस पर बाबा श्याम के नीले घोड़े के पैरों के निशान छपे हुए हैं, जो इस स्थान की प्रामाणिकता को साबित करते हैं।

बीड़ गांव हिसार श्याम मंदिर और स्याहड़वा गांव का संबंध

गूगल पर श्याम भक्त अक्सर बीड़ गांव हिसार श्याम मंदिर और स्याहड़वा गांव श्याम बाबा मंदिर लिखकर सर्च करते हैं। दरअसल, प्राचीन समय में हिसार का यह क्षेत्र एक बेहद घना जंगल हुआ करता था, जिसे स्थानीय भाषा में ‘बीड़’ कहा जाता था। वीर बर्बरीक (Barbarika) के नाम के अपभ्रंश के कारण ही इस जगह का नाम ‘बीड़ बबरान’ पड़ा।

यह मंदिर हिसार के पास बीड़ बबरान और स्याहड़वा गांव के समीप स्थित है। यहाँ एक पवित्र ‘श्याम कुंड’ भी बना हुआ है। माना जाता है कि जो भक्त राजस्थान के खाटू धाम में बाबा के शीश के दर्शन करते हैं, यदि वे हिसार के इस मंदिर में आकर बाबा के धड़ के दर्शन भी कर लें, तो उनकी श्याम यात्रा और सभी मनोकामनाएं पूरी मानी जाती हैं।

बर्बरीक का धड़ वर्तमान में कहाँ स्थित है और उसकी पूजा कहाँ होती है?

वीर बर्बरीक (बाबा खाटू श्याम) का धड़ हरियाणा के हिसार जिले के ‘बीड़ बबरान’ (बीड़ गांव) में स्थापित है । पूरे भारत में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ बाबा श्याम के केवल धड़ (गर्दन के नीचे का हिस्सा) की विशेष पूजा की जाती है।

बर्बरीक धड़ मंदिर हरियाणा (Barbarik Dhad Mandir Haryana)

यदि कोई गूगल पर बर्बरीक धड़ मंदिर हरियाणा लिखकर सर्च करता है, तो उसका सीधा इशारा हिसार जिले के इन्हीं पावन धामों की तरफ होता है। जहाँ पानीपत का श्री श्याम बाबा चुलकाना धाम (Shree Shyam Baba Chulkana Dham) बर्बरीक द्वारा किए गए महान ‘शीश दान’ के स्थल के रूप में पूजनीय है, वहीं हिसार का यह धड़ मंदिर उनके शरीर के समाहित होने की भूमि के रूप में पूरे हरियाणा और देश भर के श्याम भक्तों के बीच ‘हारे का सहारा’ बनकर प्रसिद्ध है।

हिसार श्याम बाबा मंदिर धड़ पूजा (Hisar Shyam Baba Mandir Dhad Puja)

पूरे भारत में राजस्थान का खाटू धाम शीश पूजा के लिए जाना जाता है, लेकिन हिसार श्याम बाबा मंदिर धड़ पूजा के लिए एकमात्र विशेष स्थान है। ऑफिशियल खाटू धाम ब्लॉग के अनुसार, यहाँ कलयुग के देवता बाबा श्याम (वीर बर्बरीक) के गर्दन के नीचे के हिस्से यानी धड़ की आराधना की जाती है। मान्यता है कि खाटू में शीश के दर्शन के बाद हिसार में धड़ के दर्शन करने से ही भक्तों की परिक्रमा और मन्नतें पूरी मानी जाती हैं।

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