बाबा रामदेव जी की पूजा कैसे करें? जानें सही विधि, महाशुभ मुहूर्त और प्रिय भोग की संपूर्ण जानकारी

बाबा रामदेव जी की पूजा कैसे करें? से महत्वपूर्ण है कि बाबा रामदेव की पूजा सम्यक रूप से करें। इस आलेख में बाबा रामदेव जी की संपूर्ण पूजा विधि हिंदी में। जानें पूजा सामग्री, बाबे री दूज का शुभ मुहूर्त, बाबा के प्रिय भोग और मनोकामना पूर्ति के विशेष नियम।

बाबा रामदेव जी की पूजा कैसे करें?

सुबह स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनकर लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर बाबा रामदेव जी की तस्वीर और उनके पगलिया (चरण चिह्न) स्थापित करें। पगलिया पर गंगाजल व कच्चे दूध के छींटे देकर कुमकुम और अक्षत से तिलक करें। इसके बाद वस्त्र स्वरूप मौली और बाबा का प्रिय कपड़े का घोड़ा अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर उन्हें चूरमे या मिश्री का भोग लगाएं। शांत मन से “ॐ नमो बाबा रामदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें और अंत में “पिछम धरा सू…” आरती गाकर मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।

बाबा रामदेव जी की पूजा के लिए सामग्री

बाबा रामदेव जी की पूजा के लिए कुछ विशेष सामग्रियां बेहद जरूरी हैं। पूजा स्थान पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा और बाबा की तस्वीर के साथ सबसे महत्वपूर्ण उनके पगलिया (चरण चिह्न) होने चाहिए। इसके अलावा, शुद्धिकरण के लिए गंगाजल व कच्चा दूध, तिलक के लिए कुमकुम व अक्षत (चावल), और वस्त्र के लिए मौली की आवश्यकता होती है। बाबा को प्रसन्न करने के लिए उनका सबसे प्रिय कपड़े का घोड़ा और भोग के लिए चूरमा, मिश्री या मखाने चढ़ाए जाते हैं। अंत में, आरती के लिए देसी घी का दीपक, अगरबत्ती और कपूर का उपयोग किया जाता है।

बाबा रामदेव की पूजा का सबसे सही शुभ मुहूर्त

बाबा रामदेव जी की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:30 से 5:30 बजे) और संध्या काल (शाम 6:30 से 7:30 बजे) सबसे सर्वोत्तम माना जाता है।वैसे तो हर गुरुवार बाबा की आराधना के लिए श्रेष्ठ है, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बाबे री दूज) उनकी पूजा का सबसे बड़ा और महाशुभ मुहूर्त माना जाता है। साल 2026 में यह पवित्र तिथि 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को है, जिस दिन मुख्य बाबा रामदेव जयंती और विश्वप्रसिद्ध रामदेवरा मेले की शुरुआत होगी। इस दिन अमृत या शुभ चौघड़िया देखकर की गई पूजा विशेष फलदायी और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली होती है।

बाबा रामदेव के प्रिय भोग

लोकदेवता बाबा रामदेव जी (रामसा पीर) को समर्पित सबसे प्रिय और पारंपरिक भोग चूरमा है। शुद्ध देसी घी, गेहूं के आटे और गुड़ या चीनी से बना चूरमा (विशेषकर चूरमे के लड्डू) बाबा को बेहद पसंद हैं, जिसके लिए प्रसिद्ध भजन “भोग लगावे थारे सुरमो…” भी गाया जाता है।

इसके अलावा बाबा को मिश्री, मखाने, खोये के पेड़े, लापसी (मीठा दलिया) और मीठे चावल (जर्दा) का भोग भी नियमित रूप से लगाया जाता है। विशेष अवसरों, जैसे भाद्रपद मेले या ‘बाबे री दूज’ पर, मंदिरों में बाबा को 56 भोग या अन्नकूट की भव्य झांकी सजाकर महाप्रसाद चढ़ाया जाता है।

घर पर बाबा रामदेव जी को प्रसन्न करने की सबसे सरल और प्रामाणिक विधि

घर पर बाबा रामदेव जी को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार या दूज को लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उनकी तस्वीर और पगलिया स्थापित करें। गंगाजल से पवित्र कर कुमकुम-अक्षत से तिलक करें। बाबा को मौली और प्रिय कपड़े का घोड़ा चढ़ाएं। देसी घी का दीपक जलाकर चूरमे का भोग लगाएं और “ॐ नमो बाबा रामदेवाय नमः” मंत्र का जाप कर आरती करें।

  • पिछम धरा सू म्हारा पीरजी पधारिया, घर अजमल जी के अवतार लियो।लाछां सुगना करे थारी आरती, हरजी भाटी उभा चंवर ढोले।हर की ढोल थारे मन्दिर बाजिया, झालर की झणकार होवे।कंचन थाल कशूरी को दीपको, घृत की ज्योत थारे जगमगावे।जय बाबा रामदेव, जय हो रामापीर।
  • नवलख तारा थारी चुनड़ ओढ़े, चन्द्र सूरज थारी ज्योत जगे।गंगा जमना थारे चरणां बहे, शेषनाग थारो छत्र धरे।इन्द्र राजा थारे मेघ बरसावे, पवन देव थारे चंवर ढोले।जय बाबा रामदेव, जय हो रामापीर।
  • अंधा ने आंख देवे, कोढ़िया ने काया, बांझण ने बेटा देवे, अमर सुहाग।डूबती जहाज ने पार लगावे, भक्तां रा संकट पल में काटे।दुखियारा री झोली भर देवे, ऐसा म्हारा पीरजी अंतर्यामी।जय बाबा रामदेव, जय हो रामापीर।
  • रुणिचा रा धणिया थारी महिमा भारी, कलियुग में थारो परचो भारी।जो कोई ध्यावे मनवांछित पावे, भक्ति मुक्ति रो मारग पावे।अजमल जी का कंवर, मैणादे का लाला, राणी नेतल रा भरतार हरी।जय बाबा रामदेव, जय हो रामापीर।
  • पिछम धरा सू म्हारा पीरजी पधारिया, घर अजमल जी के अवतार लियो।लाछां सुगना करे थारी आरती, हरजी भाटी उभा चंवर ढोले।कहो भक्तां सब जय बाबरी, बेड़ा पार म्हारा पीरजी करे।जय बाबा रामदेव, जय हो रामापीर।

बाबे री दूज के व्रत की कथा

प्राचीन काल में पोकरण (रूणिचा) के राजा अजमल जी और रानी मैणादे संतान न होने से बहुत दुखी थे। एक दिन किसानों ने राजा को संतानहीन कहकर ताना दिया, जिससे वे व्यथित होकर द्वारका पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण की कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने स्वयं पुत्र रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। कुछ समय बाद वीरमदेव जी का जन्म हुआ। फिर भाद्रपद शुक्ल द्वितीया की आधी रात महल में अनेक दिव्य चमत्कार हुए और भगवान बाबा रामदेव जी ने अवतार लिया। तभी से यह पावन तिथि “बाबे री दूज” के रूप में श्रद्धा और भक्ति से मनाई जाती है।

बाबा रामदेव जी जम्मा जागरण की विधि और नियम (Jamma Jagran Vidhi & Rules)

बाबा रामदेव जी का जम्मा जागरण भाद्रपद शुक्ल द्वितीया या दशमी को आयोजित होता है। इसकी शुरुआत अखंड घी की ज्योत, कलश, पगलिया, कपड़े के घोड़े और पंचरंगी नेजा (ध्वजा) के पूजन व 85 विशेष मंत्रों के पाठ से होती है। इस पावन रात मुख्य सेवादार और भक्त बिना सोए, शुद्ध मन से पूरी रात बाबा के भजनों और वाणियों का गुणगान करते हैं। जागरण के दौरान किसी भी प्रकार का नशा पूरी तरह वर्जित होता है। सुबह सूर्योदय के समय अंतिम आरती और चूरमे के प्रसाद वितरण के साथ यह जम्मा संपन्न होता है।

बाबा रामदेव जी जम्मा जागरण में गाए जाने वाले मुख्य भजन (Popular Jamma Bhajans)

जम्मा जागरण का आरंभ गुरु, गणेश और धरती माता की वंदना (“प्रथम सुमिरूं गणपत देवा…”) से होता है। इसके बाद बाबा रामदेव जी के मुख्य आह्वान भजन (“खम्मा खम्मा ओ कंवर अजमाल जी रा…”) के साथ उनकी उपस्थिति की कामना की जाती है। फिर बाबा की बाल-लीलाओं से जुड़ा लोकप्रिय भजन (“घोड़लियो मंगवा दे म्हारी मां…”) और उनकी द्वारिका यात्रा के दिव्य प्रसंग गाए जाते हैं। मध्य रात्रि में बाबा के चमत्कारों और सुगना बाई की पुकार वाले परचा भजन (“थाली भर कर ल्याई रे खीचड़ो…”) गाए जाते हैं। अंत में, परम भक्त हरजी भाटी की प्राचीन मारवाड़ी वाणियों और भजनों के साथ पूरी रात का यह संगीतमय गुणगान पूर्ण होता है।

बाबा रामदेव जी का व्रत और भोजन का नियम: फलाहार या एक समय सात्विक भोजन?

बाबा का व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक बिना अनाज और नमक का पूर्ण उपवास (फलाहार) होता है, जिसमें पानी, दूध या फल ले सकते हैं। शाम को चंद्र दर्शन या बाबा की ज्योत के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। व्रत खोलने के लिए बिना प्याज, लहसुन या भारी मसालों का शुद्ध सात्विक भोजन बनता है, जिसमें मुख्य रूप से पारंपरिक मीठे पकवान जैसे चूरमा या लापसी का भोग लगाकर ही व्रत खोला जाता है।

बाबा रामदेव जी मंत्र जाप की सही विधि (Step-by-Step Jaap Vidhi)

इस साधना की शुरुआत शुक्ल पक्ष की द्वितीया या गुरुवार को सुबह-शाम स्नान के बाद सफेद या पीले वस्त्र पहनकर करें। ऊन या कुशा के आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें और बाबा के सम्मुख शुद्ध घी का दीपक व गूगल धूप जलाकर मिश्री या चूरमे का भोग लगाएं। किसी विशेष मन्नत के लिए पहले दिन हाथ में जल-अक्षत लेकर संकल्प लें, फिर रुद्राक्ष या तुलसी की माला से लगातार 9, 11 या 21 दिनों तक रोज 1 माला जाप करें। मान्यता है कि इस नियमित जाप से मानसिक शांति, रोगमुक्ति और सुख-समृद्धि मिलती है।

बाबा रामदेव जी व्रत में दूज (बीज) या दशम (दशमी) का चुनाव कैसे करें?

दूज (बाबे री बीज) का व्रत: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को बाबा रामदेव जी का अवतार दिवस (जन्मदिन) माना जाता है। यदि आप साल भर हर महीने व्रत रखना चाहते हैं, तो हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया (बीज) का व्रत रखना सबसे उत्तम और सर्वमान्य है। मानसिक शांति और सुख-समृद्धि के लिए लोग ‘बीज का व्रत’ चुनते हैं।

दशम (दशमी) का व्रत: भाद्रपद शुक्ल दशमी को बाबा रामदेव जी ने जीवित समाधि ली थी (कहा जाता है कि उन्होंने एकादशी को समाधि ली थी, लेकिन उसकी पूर्व संध्या यानी दशमी से ही भक्ति और व्रत की शुरुआत हो जाती है)। जो लोग बहुत कठिन मन्नत मांगते हैं या किसी विशेष संकट से मुक्ति चाहते हैं, वे भाद्रपद महीने की दशमी का विशेष व्रत रखते हैं।

यदि आप नियमित या मासिक व्रत शुरू करना चाहते हैं, तो दूज (बीज) का चुनाव करें। वार्षिक बड़ी मन्नत के लिए भाद्रपद दशमी का व्रत किया जाता है।

नेजा (ध्वजा) और घोडलो चढ़ाने के नियम (Offering Flags & Horses)

घोडलो (कपड़े का घोड़ा): बाबा रामदेव जी की बाल-लीला की याद में मन्नत पूरी होने पर कपड़े का घोड़ा चढ़ाया जाता है। इसे चढ़ाने के लिए भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बीज) या किसी भी माह की शुक्ल पक्ष की दूज/दशमी सर्वोत्तम है। घोड़ा हमेशा साफ और सुंदर वस्त्र का होना चाहिए।

नेजा (ध्वजा): बाबा की ध्वजा सफेद या पंचरंगी (पांच रंगों की) होती है। इसे शुक्ल पक्ष की द्वितीया, दशमी या एकादशी को सुबह के समय घर की छत पर वायव्य (उत्तर-पश्चिम) या ईशान कोण में लगाना शुभ होता है। ध्वजा कभी जमीन से नहीं छूने चाहिए।

बाबा रामदेव जी की पूजा कैसे करें? जानें सही विधि, महाशुभ मुहूर्त और प्रिय भोग की संपूर्ण जानकारी आपको कैसी लगी? बोलो रामसा पीर की जय।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top