“आनंद सागर झील बांसवाड़ा (बाई तालाब) का पूरा इतिहास जानें। जानिए रानी लंची बाई द्वारा निर्मित इस मीठे पानी की झील, कल्पवृक्ष की मान्यता और शाही छतरियों के बारे में।”
आनंद सागर झील बांसवाड़ा का निर्माण किसने करवाया था?
शाही निर्माता: इस मीठे पानी की कृत्रिम झील का निर्माण बांसवाड़ा के तत्कालीन शासक महारावल जगमल सिंह की रानी लंची बाई (या लांची बाई) द्वारा करवाया गया था।
निर्माण का उद्देश्य: रियासत काल में प्रजा को पेयजल संकट से उबारने, कृषि सिंचाई और नगर के भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने के उद्देश्य से इस विशाल तालाब को खुदवाया गया था।
नामकरण: क्योंकि इसका निर्माण रानी (बाई साहिबा) ने करवाया था, इसलिए आम जनता के बीच यह ‘बाई तालाब’ के नाम से लोकप्रिय हुआ। सरकारी और राजस्व रिकॉर्ड में इसे ‘आनंद सागर झील’ कहा जाता है।
आनंद सागर झील बांसवाड़ा की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक छटा
यह सुरम्य झील बांसवाड़ा शहर के पूर्वी भाग में (जिला मुख्यालय से लगभग 3 किलोमीटर दूर) अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है ।
शांत वातावरण: शहर के कोलाहल से दूर होने के कारण यहाँ का वातावरण बेहद शांत और प्रदूषण मुक्त है।
फोटोग्राफी पॉइंट: झील का साफ और मीठा पानी, चारों तरफ फैली हरियाली और शाम के समय ढलता हुआ सूरज यहाँ एक जादुई दृश्य पैदा करता है। यही कारण है कि यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट और फोटोग्राफर्स के लिए स्वर्ग है।
कल्पवृक्ष का वह कौन सा दुर्लभ जोड़ा है, जो राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में जन-आस्था का केंद्र है?
आनंद सागर झील का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी बहुत अधिक है:
पवित्र कल्पवृक्ष: इस झील के तट पर अत्यंत प्राचीन और पवित्र ‘कल्पवृक्ष’ के जोड़े मौजूद हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं में कल्पवृक्ष को इच्छाएं पूरी करने वाला दिव्य वृक्ष माना गया है।
जन-आस्था: स्थानीय लोगों और यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की यह दृढ़ मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस पवित्र स्थल पर आकर सच्चे मन से कोई भी मन्नत या इच्छा मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसी कारण यहाँ साल भर श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है।
बांसवाड़ा राज्य के पूर्व शासकों की छतरियाँ (स्मारक)
झील के ठीक समीप ही बांसवाड़ा राज्य के पूर्व शासकों की छतरियाँ (स्मारक) और समाधि स्थल बने हुए हैं।स्थापत्य कला: ये छतरियाँ पारंपरिक राजपूताना वास्तुकला का बेजोड़ नमूना हैं। सुंदर नक्काशीदार खंभे, गुंबद और प्राचीन शिलालेख यहाँ के राजाओं के गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं।ऐतिहासिक महत्व: इतिहास के प्रेमियों के लिए यह स्थान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ की छतरियाँ तत्कालीन शिल्प कौशल और वागड़ के राजवंश के इतिहास को समझने का माध्यम हैं।
बाई तालाब बांसवाड़ा (Bai Talab)
बाई तालाब, जिसे आधिकारिक तौर पर आनंद सागर झील कहा जाता है, राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के पूर्वी भाग में स्थित एक ऐतिहासिक और मीठे पानी की कृत्रिम झील है। इस सुरम्य जलाशय का निर्माण बांसवाड़ा के तत्कालीन शासक महारावल जगमल सिंह की रानी लंची बाई द्वारा प्रजा के कल्याण के लिए करवाया गया था, जिसके कारण इसका नाम ‘बाई तालाब’ पड़ा।
आनंद सागर झील बांसवाड़ा पर लिखा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा?


