खाटू श्याम जी कलियुग के देवता क्यों कहलाते हैं

खाटू श्याम जी कलियुग के देवता क्यों कहलाते हैं और खाटू श्याम की कहानी क्या है और खाटू श्याम की महिमा पर लिखा यह आर्टिकल आपको हृदय से पसंद आयेगा।

खाटू श्याम जी कलियुग के देवता क्यों कहलाते हैं?

भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य वरदान :महाभारत युद्ध से पहले, जब वीर बर्बरीक ने धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के मांगने पर अपने शीश का दान (शीश-दान) दे दिया, तब श्रीकृष्ण उनकी इस महान आहुति से अत्यधिक प्रसन्न हुए। श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि कलियुग में तुम मेरे सबसे प्रिय नाम ‘श्याम’ से पूजे जाओगे। उन्होंने घोषणा की कि कलियुग में जो भी भक्त सच्चे मन से तुम्हारा नाम लेगा, उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

हारे का सहारा’ होने का वचन :बर्बरीक के पास तीन ऐसे दिव्य बाण थे, जिनसे वे अकेले ही पूरा महाभारत का युद्ध समाप्त कर सकते थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि युद्ध में जो भी पक्ष हारेगा या कमजोर होगा, वे उसकी ओर से लड़ेंगे। श्रीकृष्ण जानते थे कि इस वचन के कारण युद्ध का संतुलन बिगड़ सकता है। आज कलियुग में जब कोई व्यक्ति जीवन से पूरी तरह निराश या हार जाता है, तो बाबा श्याम उसका हाथ थामते हैं, इसीलिए उन्हें ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है।

निस्वार्थ भक्ति और शीश का दान :बर्बरीक ने बिना किसी संकोच या लालच के दुनिया का सबसे बड़ा दान—अपना ही शीश—श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। कलियुग में इस प्रकार के निस्वार्थ त्याग और समर्पण को ही भक्ति की पराकाष्ठा माना गया है। यही कारण है कि उन्हें ‘शीश के दानी’ के रूप में कलियुग का सबसे दयालु देव माना जाता है।

Kalyug ke devta khatu shyam ji ki katha hindi me कलियुग के देवता खाटू श्याम जी की कहानी

महाभारत काल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक महान योद्धा थे। उनके पास तीन अमोघ बाण थे, जिससे वे पलभर में युद्ध जीत सकते थे। उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था कि वे युद्ध में ‘हारे हुए पक्ष’ का साथ देंगे।

युद्ध का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का रूप धरकर बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया । बर्बरीक ने हंसते-हंसते अपना शीश दान कर दिया । इस परम त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना नाम ‘श्याम’ दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे ‘हारे का सहारा’ बनकर पूजे जाएंगे और बाद में उनका शीश खाटूधाम (राजस्थान) में प्रकट हुआ ।

बर्बरीक को कलियुग के देवता का वरदान किसने दिया

बर्बरीक को कलियुग के देवता होने का वरदान स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने दिया था।महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक के पास तीन ऐसे अचूक बाण थे, जो किसी भी सेना को अकेले ही समाप्त कर सकते थे। जब श्रीकृष्ण ने उनसे उनके शीश की मांग की, तो बर्बरीक ने बिना संकोच किए धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश काटकर श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया।बर्बरीक के इस अद्वितीय और निस्वार्थ महादान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे उनके स्वयं के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे। श्रीकृष्ण ने यह भी कहा कि कलियुग में जो भी व्यक्ति जीवन से हार जाएगा, उसका सहारा बाबा श्याम बनेंगे।

कलियुग का राजा खाटू नरेश

कलियुग में बाबा खाटू श्याम जी को ही ‘कलियुग का राजा’ और ‘खाटू नरेश’ के नाम से पुकारा जाता है। महाभारत काल में जब वीर बर्बरीक ने धर्म और वचन की खातिर भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया, तब उनकी इस महान आहुति से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग का राजा बनने का आशीष दिया।श्रीकृष्ण ने अपना साक्षात ‘श्याम’ नाम देकर उन्हें संसार का सबसे कृपालु देव बनाया। आज राजस्थान के खाटूधाम में सिंहासन पर विराजमान बाबा श्याम करोड़ों भक्तों के दुखों को दूर करते हैं। जो व्यक्ति दुनिया से निराश होकर बाबा के दरबार में आता है, राजा की तरह उसकी हर मनोकामना पूरी होती है, इसीलिए उन्हें ‘हारे का सहारा’ और ‘कलियुग का राजा’ कहा जाता है।

कलियुग का राजा खाटू श्याम स्टेटस डाउनलोड

  • “प्यारा सा मुखड़ा, घुंघराले केश।कलियुग का राजा, मेरा खाटू नरेश।”जय श्री श्याम! जब बाबा साथ हैं, तो डरने की क्या बात है।
  • “जीत की उम्मीद क्या रखना इस दुनिया से,जब हारने वालों का हाथ थामने वाला खुद कलयुग का राजा बैठा है।”हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा! 🚩
  • “दुनिया के राजा तो बहुत देखे, पर कलयुग का राजा मेरा खाटू नरेश है।”

खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को कलियुग का प्रत्यक्ष देवता क्यों माना जाता है?

खाटू श्याम बाबा (बर्बरीक) को कलियुग का प्रत्यक्ष देवता माना जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों की हर पुकार सुनकर उन पर शीघ्र कृपा बरसाते हैं। वे आडंबर या धन-दौलत के नहीं, बल्कि केवल सच्ची श्रद्धा और निष्छल भाव के भूखे हैं। जीवन में हमेशा धर्म और न्याय का साथ देने वाले बाबा श्याम अपने दरबार में आने वाले हर श्रद्धालु के दुख, संकट और रोगों का निवारण करते हैं। मान्यता है कि वे खाटू धाम में साक्षात विराजमान हैं, जहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। उनकी पूजा का मार्ग बेहद सरल है, जिसमें किसी जटिल विधि-विधान की नहीं, बस सच्चे प्रेम की आवश्यकता होती है।

खाटू श्याम जी कलियुग के देवता क्यों कहलाते हैं , पर लिखा यह आर्टिकल आपको कैसा लगा? खाटू श्याम बाबा की जय।

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