जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर का पूरा इतिहास और 30+ सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवाल

बीकानेर का जूनागढ़ दुर्ग क्यों कहलाता है ‘जमीन का जेवर’? जानिए इसके अजेय रहने की कहानी, गुप्त सुरंगों का सच और यहाँ के राजाओं का वैभव। इस एक लेख में आपको मिलेंगे पर्यटकों द्वारा पूछे जाने वाले 30+ सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर।

इतिहास की गहराइयों में: चिंतामणि से जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर बनने का सफर

बीकानेर शहर की स्थापना वर्ष 1488 में राव जोधा के पुत्र राव बीकाजी ने की थी। उन्होंने यहाँ एक छोटे से गढ़ का निर्माण करवाया था। इसके बाद, बीकानेर के छठे शासक राजा राय सिंह (जो मुगल सम्राट अकबर की सेना के प्रमुख सेनापति भी थे) ने वर्तमान भव्य किले की नींव 30 जनवरी 1589 को रखी, जो 1594 में बनकर तैयार हुआ।

मूल नाम: शुरुआत में इस किले को ‘चिंतामणि दुर्ग’ कहा जाता था।

नाम बदलने की कहानी: 20वीं शताब्दी की शुरुआत में, जब तत्कालीन महाराजा गंगा सिंह और शाही परिवार इस किले को छोड़कर नए बने लालगढ़ पैलेस में रहने चले गए, तब पुराने किले को ‘जूनागढ़’ (यानी पुराना किला) नाम दिया गया।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर : जिसे कोई शत्रु कभी जीत नहीं पाया

जूनागढ़ किले का इतिहास इस मायने में अद्वितीय है कि कई विदेशी और स्थानीय राजाओं द्वारा बार-बार आक्रमण किए जाने के बावजूद, कोई भी आक्रमणकारी इसे पूरी तरह जीत नहीं सका। कामरान (मुगल शासक हुमायूं के भाई) ने केवल एक दिन के लिए इस पर कब्जा किया था, लेकिन वह भी इसे अपने पास बनाए रखने में पूरी तरह असफल रहा। इसकी सुदृढ़ प्राचीरें, 37 विशाल बुर्ज और इसके चारों ओर बनी गहरी खाई इसे दुश्मनों के लिए हमेशा अभेद्य बनाए रखती थीं।

जूनागढ़ दुर्ग: बीकानेर वास्तुकला का बेजोड़ नमूना (Architecture)

जूनागढ़ किला मुख्य रूप से बीकानेर के प्रसिद्ध डुलमेरा के लाल बलुआ पत्थरों और संगमरमर से निर्मित है। इसकी वास्तुकला में राजपूती शैली, मुगल वास्तुकला और गुजराती कारीगरी का एक अनूठा सम्मिश्रण देखने को मिलता है। किले के भीतर जाने के लिए दो मुख्य बाहरी द्वार हैं—कर्ण पोल और चाँद पोल। इसके अतिरिक्त अंदर पाँच और द्वार हैं:

सूरज पोल: यह किले का मुख्य आंतरिक प्रवेश द्वार है। सुबह की सूर्य की पहली किरण सीधे इसी द्वार पर पड़ती है। इसके दोनों तरफ इतिहास प्रसिद्ध वीर जयमल मेड़तिया और उनके बहनोई रावत पत्ता की हाथी पर सवार विशाल मूर्तियाँ स्थापित हैं, जो चित्तौड़गढ़ के युद्ध में उनके अप्रतिम बलिदान का सम्मान करती हैं।

दौलत पोल: इस द्वार की दीवारों पर उन वीरांगनाओं के हाथों के निशान (सती के छापे) बने हैं, जिन्होंने देश और सम्मान की रक्षा के लिए जौहर की अग्नि को गले लगा लिया था।

जूनागढ़ किले के भीतर बने भव्य महल

अनूप महल ‘यह किला परिसर का सबसे आलीशान महल है, जिसका उपयोग राजाओं के राजतिलक (Coronation) के लिए किया जाता था। इसकी दीवारों और छतों पर सोने की परत (Gold Leaf Work) और कीमती पत्थरों की कारीगरी की गई है

करण महल:इसे महाराजा करन सिंह ने मुगलों पर अपनी जीत की याद में बनवाया था। यह सफेद संगमरमर और सुंदर नक्काशीदार खंभों से सजा एक विशाल दरबार हॉल है।

बादल महल: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस महल की दीवारों पर नीले बादलों और बिजली कड़कने के सजीव चित्र बनाए गए हैं। मरुस्थल के राजाओं के लिए बारिश एक उत्सव जैसी थी, जिसे इस महल में जीवंत किया गया है।

फूल महल और चंद्र महल बीकानेर

फूल महल किले का सबसे पुराना हिस्सा है, जो कांच के बारीक काम और दर्पण कला से सुसज्जित है। वहीं चंद्र महल अपनी खूबसूरत पेंटिंग्स और नक्काशीदार लकड़ी की छतों के लिए जाना जाता है।

जूनागढ़ फोर्ट म्यूजियम (The Royal Museum)

इतिहास और हथियारों के शौकीनों के लिए इस किले का संग्रहालय (Museum) किसी खजाने से कम नहीं है । महाराजा डॉ. करणी सिंह जी ट्रस्ट द्वारा संचालित इस संग्रहालय में:

मध्यकालीन भारत के दुर्लभ हथियार, ढालें और बारूद के बर्तन रखे गए हैं।

राजाओं के शाही वस्त्र, चांदी के हौदे और बेशकीमती लघु चित्र (Miniature Paintings) प्रदर्शित हैं。

इस संग्रहालय का सबसे बड़ा आकर्षण प्रथम विश्व युद्ध का एक असली डी हैविलैंड (DH-9) लड़ाकू विमान है, जिसे ब्रिटिश सरकार ने महाराजा गंगा सिंह की युद्ध सेवाओं से खुश होकर बीकानेर रियासत को उपहार में दिया था।

पर्यटकों के लिए व्यावहारिक जानकारी जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर पर (Travel Guide to Junagarh Fort)

जूनागढ़ दुर्ग खुलने का समय: रोजाना सुबह 10:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक।

जूनागढ़ दुर्ग प्रवेश शुल्क (Entry Fee): भारतीय पर्यटकों के लिए ₹50 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹300। (कैमरा और गाइड के लिए अतिरिक्त शुल्क लागू हो सकता है)।

जूनागढ़ दुर्ग घूमने का सबसे अच्छा समय: अक्टूबर से मार्च (सर्दियों के महीने), क्योंकि इस दौरान बीकानेर का मौसम बेहद सुहावना रहता है。

कैसे पहुँचें: जूनागढ़ किला बीकानेर रेलवे स्टेशन (Bikaner Junction) से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर शहर के केंद्र में स्थित है। यहाँ के लिए आसानी से ऑटो, टैक्सी या ई-रिक्शा मिल जाते हैं।

जूनागढ़ किले का निर्माण किसने और कब करवाया था

बीकानेर के जूनागढ़ किले की नींव 30 जनवरी 1589 को यहाँ के शासक राजा राय सिंह जी ने रखी थी, जो मुगल सम्राट अकबर के प्रधान सेनापतियों में से एक थे। यह किला वर्ष 1594 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ था।

जूनागढ़ किले को ‘जमीन का जेवर’ क्यों कहा जाता है?

राजस्थान के अधिकांश बड़े किले (जैसे चित्तौड़गढ़ या कुंभलगढ़) किसी ऊँची पहाड़ी पर बने हैं, लेकिन जूनागढ़ किला समतल मैदानी इलाके पर बना है। थार मरुस्थल के बीच समतल जमीन पर अपनी अद्भुत वास्तुकला, लाल पत्थरों की बेमिसाल नक्काशी और भव्यता के कारण इसे बेहद खूबसूरत माना गया है, इसीलिए इसे ‘जमीन का जेवर’ कहा जाता है।

जूनागढ़ किला कभी किसी युद्ध में हारा गया था?

नहीं, जूनागढ़ किला इतिहास में हमेशा अजेय रहा। इस पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन कोई भी बाहरी शासक इसे पूरी तरह जीत नहीं सका। केवल मुगल शासक हुमायूं के भाई कामरान ने चालाकी से इस पर मात्र एक दिन के लिए कब्जा किया था, लेकिन अगले ही दिन बीकानेर के वीरों ने उसे खदेड़ दिया था।

जूनागढ़ किला घूमने का टिकट कितना है और यह कब खुलता है?

जूनागढ़ किला पर्यटकों के लिए रोजाना सुबह 10:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक खुला रहता है। वर्तमान में भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क ₹50 और विदेशी नागरिकों के लिए ₹300 है। विद्यार्थियों (Students) को आईडी कार्ड दिखाने पर टिकट में विशेष छूट मिलती है।

जूनागढ़ किले का सबसे बड़ा आकर्षण क्या है?

वैसे तो पूरा किला ही बेहद खूबसूरत है, लेकिन इसके भीतर बना ‘अनूप महल’ (जहाँ सोने की शुद्ध परत चढ़ाई गई है), बादलों का अहसास कराने वाला ‘बादल महल’ और इसके म्यूजियम में रखा प्रथम विश्व युद्ध का असली लड़ाकू विमान (DH-9 Airplane) यहाँ के सबसे बड़े आकर्षण हैं।

बीकानेर के किले का असली नाम क्या है?

बीकानेर के इस ऐतिहासिक किले का असली और पुराना नाम ‘चिंतामणि दुर्ग’ या ‘चिंतामणि किला’ था। बाद में, जब 20वीं शताब्दी में शाही परिवार इस किले को छोड़कर नए बने लालगढ़ पैलेस में शिफ्ट हो गया, तब इस पुराने किले को ‘जूनागढ़ किला’ (यानी पुराना किला) कहा जाने लगा।

जूनागढ़ किला किस पहाड़ी पर स्थित है?

जूनागढ़ किला किसी भी पहाड़ी पर स्थित नहीं है। राजस्थान के अधिकांश किलों के विपरीत, यह पूरी तरह से समतल मैदानी इलाके पर बना हुआ है। मैदान पर बने होने के कारण ही इसे प्राचीन सैन्य विज्ञान के अनुसार ‘धान्वन दुर्ग’ (रेगिस्तानी किला) या ‘भूमि दुर्ग’ की श्रेणी में रखा गया है।

जूनागढ़ किले की दीवारें क्या बोलती हैं?

राजस्थान में एक बेहद प्रसिद्ध कहावत है—”दीवारों के भी कान होते हैं, पर जूनागढ़ की दीवारें तो बोलती हैं।” ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी दीवारों पर की गई चित्रकारी, सोने की नक्काशी, कांच का काम और बारीक कारीगरी इतनी जीवंत और सजीव है कि वे खुद इतिहास की गौरवगाथाएं बयां करती प्रतीत होती हैं।

बीकानेर किले (जूनागढ़) में कुल कितने कमरे या महल हैं?

जूनागढ़ किला परिसर के भीतर लगभग 37 भव्य महल, मंडप और कई मंदिर बने हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख महल अनूप महल, करण महल, बादल महल, फूल महल, चंद्र महल और गंगा निवास हैं। इसके अलावा, यहाँ की जालीदार खिड़कियों वाले झरोखे और सुंदर आंगन पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

जूनागढ़ किला घूमने में कितना समय लगता है?

जूनागढ़ किले और उसके भीतर बने शाही संग्रहालय (Museum) को अच्छी तरह से देखने और समझने के लिए कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लगता है। इतिहास को बारीकी से जानने के लिए स्थानीय गाइड या ऑडियो गाइड की मदद लेना सबसे अच्छा रहता है।

जूनागढ़ किले के द्वार पर किन दो वीरों की मूर्तियाँ लगी हैं?

जूनागढ़ किले के मुख्य आंतरिक प्रवेश द्वार यानी ‘सूरज पोल’ पर चित्तौड़गढ़ की ऐतिहासिक लड़ाई (1567-68) में अकबर की सेना के दांत खट्टे करने वाले दो परमवीर राजपूत योद्धाओं—जयमल मेड़तिया और उनके बहनोई रावत पत्ता (फत्ता जी) की हाथी पर सवार विशाल पाषाण मूर्तियाँ स्थापित हैं। महाराजा राय सिंह ने उनकी वीरता से प्रभावित होकर ये मूर्तियाँ यहाँ लगवाई थीं।

बीकानेर के जूनागढ़ किले में कौन सा हवाई जहाज रखा है?

जूनागढ़ किले के शाही संग्रहालय (Museum) में प्रथम विश्व युद्ध (World War I) का एक असली ब्रिटिश लड़ाकू विमान डी हैविलैंड (DH-9 DE Havilland) रखा हुआ है। बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह की युद्ध सेवाओं और बहादुरी से खुश होकर ब्रिटिश सरकार ने उन्हें यह विमान उपहार स्वरूप दिया था।

क्या जूनागढ़ किला और बीकानेर का लालगढ़ पैलेस एक ही हैं?

नहीं, ये दोनों अलग-अलग इमारतें हैं। जूनागढ़ किला बीकानेर का मूल और ऐतिहासिक किला है जो 16वीं शताब्दी में बना था। वहीं, लालगढ़ पैलेस का निर्माण 20वीं शताब्दी की शुरुआत में महाराजा गंगा सिंह ने अपने पिता महाराजा लाल सिंह की याद में करवाया था, जो यूरोपीय और राजपूती वास्तुकला का मिश्रण है।

जूनागढ़ किले की सुरक्षा के लिए चारों तरफ क्या व्यवस्था थी?

चूंकि जूनागढ़ किला समतल मैदान पर बना था, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए इसके चारों ओर लगभग 40 फीट गहरी और चौड़ी खाई बनाई गई थी, जिसमें पानी भरा रहता था ताकि दुश्मन सेना सीधे किले की दीवारों तक न पहुँच सके। इसके अलावा, इसकी प्राचीर में 37 अभेद्य बुर्ज और भारी तोपें तैनात थीं।

बीकानेर के जूनागढ़ दुर्ग को बनाने में कुल कितना समय लगा था?

: इस विशाल और भव्य दुर्ग को बनने में लगभग 5 वर्ष का समय लगा था। बीकानेर के महाराजा राय सिंह जी के संरक्षण और उनके दूरदर्शी प्रधानमंत्री करम चंद की देखरेख में इसका निर्माण कार्य 30 जनवरी 1589 को शुरू हुआ था और यह 17 जनवरी 1594 को पूरी तरह बनकर तैयार हुआ था।

जूनागढ़ दुर्ग की बनावट या आकार कैसा है?

स्थापत्य कला के दृष्टिकोण से जूनागढ़ दुर्ग का आकार चतुष्कोणीय (Quadrangular) यानी चार कोनों वाला है। इस दुर्ग की परिधि (Perimeter) लगभग 1078 गज है और इसकी सुरक्षा दीवारें लगभग 40 फीट ऊँची हैं, जो डुलमेरा के लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित हैं।

जूनागढ़ दुर्ग के भीतर बना ‘गंगा निवास’ क्यों प्रसिद्ध है?

गंगा निवास’ दुर्ग के भीतर बना एक बेहद खूबसूरत दरबार हॉल है, जिसका निर्माण आधुनिक बीकानेर के निर्माता महाराजा गंगा सिंह जी ने करवाया था। इस महल का मुख्य आकर्षण इसका सामने का हिस्सा (Facade) है, जिस पर लाल पत्थरों पर इतनी बारीक और सुंदर नक्काशी की गई है कि वह पत्थर न लगकर लकड़ी जैसा प्रतीत होता है।

जूनागढ़ दुर्ग में पानी की आपूर्ति (Water Supply) के लिए क्या व्यवस्था थी?

चूंकि बीकानेर एक रेगिस्तानी इलाका है, इसलिए दुर्ग के भीतर पानी की कमी को पूरा करने के लिए प्राचीन समय में पारंपरिक जल संचयन (Water Harvesting) की बेहतरीन व्यवस्था थी। दुर्ग परिसर के अंदर विशाल कुएं और टांके (Underground Tanks) बनाए गए थे, जिनमें बरसात का पानी इकट्ठा किया जाता था, ताकि युद्ध या सूखे की स्थिति में पानी की कमी न हो।

जूनागढ़ दुर्ग में ‘बादल महल’ सबसे ऊपर क्यों बनाया गया है?

जूनागढ़ दुर्ग का ‘बादल महल’ इस किले के सबसे ऊपरी हिस्से में स्थित है। इसके पीछे दो मुख्य कारण थे—पहला, ऊँचाई पर होने के कारण यहाँ रेगिस्तान की ठंडी हवाएं सीधे आती थीं जो इसे प्राकृतिक रूप से ठंडा रखती थीं। दूसरा, मरुधरा के राजाओं के लिए रेगिस्तान में बारिश का बहुत महत्व था, इसलिए बादलों को करीब से महसूस करने के प्रतीक के रूप में इसे सबसे ऊपर बनाकर नीले बादलों की कलाकृतियों से सजाया गया।

बीकानेर के जूनागढ़ किले को बनाने में किस पत्थर का उपयोग किया गया है?

इस दुर्ग के निर्माण में मुख्य रूप से बीकानेर के पास मिलने वाले डुलमेरा के प्रसिद्ध लाल बलुआ पत्थरों (Red Sandstones) का उपयोग किया गया है। इसके अलावा, किले के अंदरूनी महलों की नक्काशी और फर्श बनाने के लिए मकराना के बेहतरीन सफेद संगमरमर (White Marble) का इस्तेमाल हुआ है।

जूनागढ़ दुर्ग के भीतर स्थित ‘अनूप महल’ का क्या महत्व है?

‘अनूप महल’ जूनागढ़ दुर्ग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि प्राचीन काल में बीकानेर रियासत के नए राजाओं का शाही राजतिलक (Coronation) इसी महल में होता था। इस महल के सिंहासन और दीवारों पर शुद्ध सोने के पानी की परत चढ़ाई गई है, जो इसकी भव्यता को दर्शाती है।

बीकानेर जूनागढ़ फोर्ट के पास रुकने या ठहरने की क्या व्यवस्था है?

जूनागढ़ फोर्ट बीकानेर शहर के बिल्कुल केंद्र में स्थित है, इसलिए इसके आसपास 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में बजट होटल्स से लेकर कई शानदार हेरिटेज पैलेस और होमस्टे उपलब्ध हैं। यहाँ से रेलवे स्टेशन और लोकल मार्केट भी बेहद पास हैं।

क्या जूनागढ़ दुर्ग में बुजुर्गों या दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर या लिफ्ट की सुविधा है?

हाँ, पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जूनागढ़ दुर्ग प्रशासन द्वारा बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, किले के कुछ मुख्य हिस्सों तक पहुँचने के लिए रैंप और रैंप-वे भी बने हुए हैं ताकि हर कोई आसानी से भ्रमण कर सके।

क्या जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के भीतर लकड़ी का कोई विशेष काम (Woodwork) देखने को मिलता है?

हाँ, जूनागढ़ दुर्ग का ‘चंद्र महल’ और ‘गंगा निवास’ अपनी बेमिसाल लकड़ी की कारीगरी के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ के दरवाजों और छतों पर अखरोट और शीशम की लकड़ी पर इतनी बारीक नक्काशी की गई है कि लोग हैरान रह जाते हैं। इसके अलावा, राजाओं के समय के नक्काशीदार लकड़ी के विशाल सन्दूक और शाही पलंग भी यहाँ सुरक्षित रखे गए हैं।

क्या जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के नीचे कोई गुप्त सुरंग (Secret Tunnel) बनी हुई है?

स्थानीय लोककथाओं और इतिहासकारों के अनुसार, आपातकाल की स्थिति में शाही परिवार की सुरक्षित निकासी के लिए जूनागढ़ दुर्ग के भीतर से एक गुप्त सुरंग बनाई गई थी। माना जाता है कि यह सुरंग किले से शुरू होकर लगभग 7-8 किलोमीटर दूर स्थित ‘लालगढ़ पैलेस’ या बीकानेर के बाहरी इलाके तक जाती थी, जिसे अब सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के ‘गज मंदिर’ की क्या खासियत है?

महाराजा गज सिंह द्वारा बनवाया गया ‘गज मंदिर’ कला का एक अद्भुत झरोखा है। इस महल की दीवारों पर बहुमूल्य पत्थरों की पच्चीकारी की गई है और सोने के पत्तरों (Gold Leaf) का काम हुआ है। यहाँ राजा और रानी के निजी शयनकक्ष (Bedrooms) हैं, जिनकी छतों पर मकराना संगमरमर और हाथीदांत (Ivory) की बारीक कारीगरी देखने को मिलती है।

बीकानेर जूनागढ़ दुर्ग के साथ और कौन सी जगहें एक ही दिन में घूमी जा सकती हैं?

चूंकि जूनागढ़ दुर्ग शहर के बीचों-बीच स्थित है, इसलिए आप इसके साथ ही लालगढ़ पैलेस, भांडाशाह जैन मंदिर (जो घी से बनी नींव के लिए प्रसिद्ध है), और बीकानेर का प्रसिद्ध रामपुरिया हवेली समूह एक ही दिन में आसानी से देख सकते हैं। शाम के समय आप यहाँ के स्थानीय बाज़ारों से बीकानेरी भुजिया और रसगुल्लों का स्वाद भी ले सकते हैं।

क्या जूनागढ़ किला यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल है?

नहीं, जूनागढ़ किला यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल नहीं है। राजस्थान के छह पहाड़ी किले (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, गागरोन, आमेर और जैसलमेर) यूनेस्को की सूची में हैं। चूंकि जूनागढ़ एक पहाड़ी किला नहीं बल्कि मैदानी (धान्वन) दुर्ग है, इसलिए यह उस विशिष्ट सूची में नहीं आता, लेकिन यह भारत के सबसे सुरक्षित और संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है।

बीकानेर जूनागढ़ फोर्ट के अंदर गाइड की क्या फीस होती है?

जूनागढ़ फोर्ट के मुख्य गेट पर पर्यटन विभाग द्वारा प्रमाणित (Authorized) गाइड आसानी से मिल जाते हैं। हिंदी और अंग्रेजी गाइड की सामान्य फीस लगभग ₹200 से ₹400 के बीच होती है (यह पर्यटकों की संख्या पर भी निर्भर करता है)। किले के विशाल इतिहास को बारीकी से समझने के लिए गाइड की मदद लेना बेहद फायदेमंद रहता है।

क्या जूनागढ़ किले के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की अनुमति है?

हाँ, जूनागढ़ किले के अंदर पर्यटकों को फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करने की पूरी अनुमति है। हालांकि, इसके लिए आपको मुख्य टिकट काउंटर से एक मामूली शुल्क (कैमरा टिकट) लेना होता है। मोबाइल कैमरे और प्रोफेशनल कैमरों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित हैं, जबकि कुछ संवेदनशील म्यूजियम गैलरी के अंदर फ्लैश लाइट का उपयोग वर्जित है।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के भीतर स्थित ‘अनूप महल’ की लाइब्रेरी (Anup Sanskrit Library) क्यों प्रसिद्ध है?

जूनागढ़ दुर्ग के भीतर महाराजा अनूप सिंह द्वारा स्थापित प्राचीन संस्कृत पुस्तकालय ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद अमूल्य है। इस लाइब्रेरी में मध्यकाल के हजारों दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ (Manuscripts), संस्कृत की प्राचीन पोथियां और दुर्लभ दस्तावेज आज भी सुरक्षित हैं, जिन पर देश-विदेश के इतिहासकार रिसर्च करने आते हैं।

क्या जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर में कोई ऐसी तोप है जो युद्ध में इस्तेमाल हुई थी?

हाँ, जूनागढ़ दुर्ग के बुर्जों और प्राचीर पर कई ऐतिहासिक तोपें तैनात हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध ‘फूल तोप’ और ‘जोधपुर विजय तोप’ हैं। ये तोपें राजपूताना काल की सैन्य शक्ति और धातु विज्ञान (Metallurgy) की उत्कृष्ट कला को दर्शाती हैं, जिन्हें पर्यटक आज भी देख सकते हैं।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर की वास्तुकला पर ‘मुगल प्रभाव’ दिखने का क्या कारण है?

इस दुर्ग के निर्माता महाराजा राय सिंह जी मुगल सम्राट अकबर की सेना के मुख्य सेनापति और उनके सबसे भरोसेमंद राजाओं में से एक थे। उन्होंने लंबे समय तक मुगलों के साथ काम किया था, यही वजह है कि जब उन्होंने जूनागढ़ दुर्ग के भीतर करण महल और अन्य दीवान-ए-खास बनवाए, तो उनमें मुगलों की मेहराबदार शैली और नक्काशी का गहरा प्रभाव साफ दिखाई देता है।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के प्रांगण (Courtyard) में लाल पत्थरों पर बिछाई गई सफेद पट्टियों का क्या महत्व है?

दुर्ग के मुख्य आँगनों में लाल बलुआ पत्थरों के फर्श पर सफेद संगमरमर की चौकोर पट्टियां (Grids) बनी हुई हैं। प्राचीन काल में इनका उपयोग शाही परिवार द्वारा ‘चौपड़’ (Pachisi) जैसे पारंपरिक खेल खेलने के लिए एक विशाल बोर्ड के रूप में किया जाता था, जहाँ इंसान खुद गोटियों की तरह खड़े होते थे।

जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर घूमने आने वाले पर्यटकों को बीकानेर के खान-पान में क्या ट्राई करना चाहिए?

जूनागढ़ दुर्ग का भ्रमण करने के बाद पर्यटकों को स्थानीय बाजारों में मिलने वाली विश्व प्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया, केसर कस्तूरी रसगुल्ले, घी-घेवर और यहाँ की स्पेशल राबड़ी (चना दाल और बाजरे से बनी) का स्वाद ज़रूर चखना चाहिए, जो बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान हैं।

क्या जूनागढ़ किले के पास भारी बैग, सूटकेस या हेलमेट जमा करने के लिए क्लॉक रूम या लॉकर की सुविधा है?

हाँ, जूनागढ़ दुर्ग के मुख्य टिकट काउंटर के पास पर्यटकों के लिए क्लॉक रूम (Cloak Room) की सुविधा उपलब्ध है, जहाँ आप अपना कीमती सामान सुरक्षित रख सकते हैं।

क्या छोटे बच्चों को प्रैम/स्ट्रोलर (पहियों वाली गाड़ी) में बैठाकर पूरे जुनागढ़ किले में घुमाया जा सकता

किले के शुरुआती हिस्से और आंगनों में रैंप बने हैं, लेकिन अंदर के कुछ महलों में तंग सीढ़ियाँ और ऊंचे दरवाजे होने के कारण स्ट्रोलर ले जाना थोड़ा मुश्किल होता है। बच्चों को गोद में या बेबी कैरियर में ले जाना बेहतर रहता है।

क्या जूनागढ़ किले के अंदर टॉयलेट और साफ पीने के पानी की व्यवस्था है?

हाँ, किला परिसर के भीतर पर्यटकों के लिए साफ पानी के वॉटर कूलर और स्वच्छ वॉशरूम (Toilets) की अच्छी व्यवस्था की गई है।

क्या जूनागढ़ किले में जूते उतारकर घूमना पड़ता है?

पर्यटकों को पूरे किले में जूते उतारने की जरूरत नहीं है। आप आराम से जूते पहनकर घूम सकते हैं। केवल किले के अंदर स्थित शाही मंदिरों में प्रवेश करते समय ही जूते उतारने होते हैं।

क्या जूनागढ़ किले के अंदर प्री-वेडिंग फोटोशूट या यूट्यूब व्लॉगिंग के लिए ट्राइपॉड/गिम्बल ले जाने की अनुमति है?

सामान्य मोबाइल और कैमरे से व्लॉगिंग की अनुमति है (कैमरा टिकट के साथ)। लेकिन प्री-वेडिंग शूट, ड्रोन कैमरा उड़ाने या भारी कमर्शियल वीडियोग्राफी के लिए महाराजा राय सिंह जी ट्रस्ट से पहले लिखित अनुमति और विशेष शुल्क (जो कि काफी अधिक होता है) देना अनिवार्य है।

क्या जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के पास गाड़ियों को पार्क करने के लिए सुरक्षित पार्किंग (Parking Facility) है?

हाँ, जूनागढ़ दुर्ग के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने पर्यटकों के लिए विशाल और सुरक्षित पार्किंग स्थल बनाया गया है। यहाँ आप अपने दोपहिया वाहन (Two Wheelers) और चार पहिया वाहन (Cars/SUVs) एक तय पार्किंग शुल्क देकर आसानी से पार्क कर सकते हैं

क्या जूनागढ़ दुर्ग बीकानेर के अंदर कोई सोवेनियर शॉप (Souvenir Shop) या हस्तशिल्प की दुकान है?

हाँ, किला परिसर के भीतर एक छोटी शाही उपहार की दुकान (Souvenir Shop) मौजूद है। यहाँ से पर्यटक बीकानेर की प्रसिद्ध उस्ता कला (ऊँट की खाल पर सोने की नक्काशी) के नमूने, राजस्थानी कठपुतलियाँ, पारंपरिक हस्तशिल्प, पेंटिंग्स, बीकानेरी कलाकृतियाँ और इतिहास से जुड़ी किताबें याद के तौर पर खरीद सकते हैं।

क्या छात्रों (Students) के लिए जूनागढ़ किले के टिकट में कोई विशेष छूट मिलती है?

हाँ, जूनागढ़ दुर्ग प्रशासन द्वारा स्कूली बच्चों और कॉलेज के छात्रों को टिकट की कीमतों में विशेष छूट (Student Discount) दी जाती है। इस छूट का लाभ उठाने के लिए छात्रों के पास अपने स्कूल या कॉलेज का वर्तमान और वैध पहचान पत्र (Valid ID Card) होना अनिवार्य है।

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