बीकानेर में घूमने की जगह बता देने से पहले आपको बता दें कि राजस्थान का दिल कहे जाने वाले बीकानेर शहर का नाम आते ही दिमाग में यहाँ के भव्य महल, थार रेगिस्तान और स्वादिष्ट भुजिया-रसगुल्ले की याद आ जाती है। सन 1488 में राव बीका जी द्वारा बसाया गया यह शहर आज भी अपने राजपूती वैभव और प्राचीन वास्तुकला को संजोए हुए है।यदि आप इस छुट्टियों में बीकानेर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आज हम आपको bikaner me ghumne ki jagah के साथ-साथ यहाँ की कुछ ऐसी छिपी हुई (खूफिया) जगहों के बारे में बताएंगे, जहाँ आपको सुकून और रोमांच दोनों मिलेंगे।
बीकानेर में घूमने की 5 सबसे बेस्ट जगहें (Top 5 Best Places to Visit)
1. जूनागढ़ किला (Junagarh Fort) — अभेद्य दुर्गमुख्य तथ्य: भारत के गिने-चुने किलों में से एक जो किसी पहाड़ी पर नहीं, बल्कि समतल ज़मीन पर बना है। इसके भीतर का अनूप महल, बादल महल और फूल महल सोने की बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
2. करणी माता मंदिर, देशनोक (Karni Mata Temple) — चूहों वाला मंदिरमुख्य तथ्य: बीकानेर से 30 किमी दूर स्थित इस चमत्कारी मंदिर में 25,000 से अधिक काले चूहे (काबा) रहते हैं। यहाँ सफेद चूहे के दर्शन होना सबसे बड़ा सौभाग्य और मन्नत पूरी होने का प्रतीक माना जाता है।
3. लालगढ़ पैलेस (Lallgarh Palace) — राजसी वैभवमुख्य तथ्य: लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) से बना यह महल राजपूत, मुगल और यूरोपीय स्थापत्य कला का एक बेजोड़ नमूना है। इसके एक हिस्से में आज भी बीकानेर का राजपरिवार रहता है।
4 रामपुरिया हवेली (Rampuria Haveli) — हेरिटेज वॉकमुख्य तथ्य: बीकानेर की पुरानी गलियों में स्थित लाल पत्थरों से बनी यह हवेली अपनी जटिल नक्काशी और झरोखों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ फोटोग्राफी का एक अलग ही क्रेज है।
5 राष्ट्रीय ऊष्ट्र अनुसंधान केंद्र (Camel Research Centre)मुख्य तथ्य: यह पूरे एशिया का सबसे बड़ा ऊंट फार्म है। यहाँ आप ऊंट की अलग-अलग प्रजातियों को देखने के साथ-साथ ऊंट के दूध से बनी स्पेशल आइसक्रीम (Camel Milk Ice Cream) और चाय का स्वाद ले सकते हैं।
बीकानेर की छिपी हुई और खूफिया जगहें (Hidden Gems of Bikaner)
अगर आप भीड़भाड़ से दूर बीकानेर के असली इतिहास को महसूस करना चाहते हैं, तो इन जगहों पर जरूर जाएं:
भंडासर जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple)यह मंदिर अपनी पांचवी शताब्दी की वास्तुकला और शानदार दीवारों की पेंटिंग्स के लिए जाना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी सबसे दिलचस्प कहानी यह है कि इसके निर्माण के समय पानी की जगह 40,000 किलोग्राम शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल इसकी नींव में किया गया था। गर्मियों के दिनों में आज भी इस मंदिर के फर्श से घी की महक आती है।
देवी कुंड सागर (Devi Kund Sagar)यह बीकानेर के शाही परिवार का श्मशान घाट है, जहाँ सफेद संगमरमर और लाल पत्थरों से बनी खूबसूरत छतरियां (स्मारक) मौजूद हैं। शाम के समय यहाँ की शांति और ढलते सूरज का नजारा फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए स्वर्ग जैसा है।
रामपुरिया हवेली (Rampuria Havelia)पुराने बीकानेर शहर की संकरी गलियों में स्थित रामपुरिया हवेली को “पूर्व का गौरव” कहा जाता है। लाल पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी और विलायती कांच की खिड़कियां इसे बेहद आलीशान बनाती हैं। यह जगह इंस्टाग्राम रील्स और व्लॉगिंग के लिए बेस्ट है।
चुन्नीलाल शरबत (Chunnilal Tanwar Sharbat) — एक सदी पुराना सीक्रेट स्वाद
बीकानेर की भयंकर रेगिस्तानी गर्मी में जब आम लोग कोल्ड ड्रिंक्स ढूंढते हैं, तब पुरानी बीकानेर की यह छोटी सी दुकान एक असली हिडन गैस्ट्रोनॉमिक जेम (Food Gem) के रूप में सामने आती है।
खासियत: सन् 1939 से चल रही इस दुकान पर बिना किसी आर्टिफिशियल एसेंस के, असली फूलों और जड़ी-बूटियों के अर्क (Distillation Process) से बने शरबत मिलते हैं। यहाँ का ‘बेला शरबत’ (मोगरे के फूल का रस) और ‘चंदन शरबत’ पीते ही आत्मा तृप्त हो जाती है।
बीकानेर मिनिएचर आर्ट स्टूडियो (Bikaner Miniature Art Studio)
जूनागढ़ किले के ठीक बाहर पुरानी गलियों में स्थित यह स्टूडियो बीकानेर की सूक्ष्म चित्रकारी (Miniature Painting) को आज भी जीवित रखे हुए है।खासियत: यहाँ के स्थानीय कलाकार गिलहरी के बालों से बने अत्यंत महीन ब्रश का उपयोग करके चावल के एक छोटे से दाने या रेशम के धागे पर पूरा इतिहास उकेर देते हैं। आप यहाँ लाइव आर्टिस्ट को काम करते हुए देख सकते हैं और बेहद कम दामों में प्राचीन यादगार चीजें खरीद सकते हैं।
बजट गाइड: ₹1,500 के बजट में खाना और ठहरना (Budget Guide)
हेरिटेज होटल्स और बजट स्टे: पुराने शहर (Old City) या रामपुरिया हवेली के आसपास कई पुराने घरों को होमस्टे या बजट गेस्ट हाउस में बदला गया है, जहाँ मात्र ₹700 से ₹1,000 में राजस्थानी आतिथ्य के साथ कमरे मिल जाते हैं।
लोकल ढाबे का स्वाद: स्टेशन रोड या कोटगेट के पास पारंपरिक लोकल ढाबों (Local Dhaba) पर मात्र ₹150 से ₹200 में गट्टे की सब्जी, प्रसिद्ध पंचकुटा (केर-सांगरी की सब्जी) और बाजरे के रोटले का असली मेवाड़ा-मारवाड़ी स्वाद लिया जा सकता है। खारा के भादु भाई ढाबा की बाजरे की रोटी और जैन साब का ढाबा जयपुर रोड अपने स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
लोकल गाइड और हमारी टीम का जमीनी अनुभव (Local Guide & Experience)
बीकानेर में पाटा कल्चर, छोटू मोटू जोशी की सब्जी पूड़ी, हड़मान जी की कचौरी जस्सूसर गेट, रसगुल्ले छोटू मोटू के, बड़ा बाजार में जसराज के लड्डू, करनिदान नवलकिशोर के घेवर तो BK School के पास स्ट्रीट फूड बहुत आकर्षित करता है। जूनागढ़ रूपी जेवर, ऊंट का अजायबघर, इतिहास को जानना है तो मुख्य अभिलेखाघर, शक्ति की मां करणी मां, अदभुत वास्तु कला हेतु रामपुरिया हवेली का अलग ही आकर्षण है।
बीकानेर 1-डे टूर प्लान (1 Day Bikaner Itinerary): बीकानेर में घूमने की जगह
- सुबह (09:00 AM – 11:30 AM): नक्काशीदार महलों और राजसी वैभव से समृद्ध ऐतिहासिक जूनागढ़ किला देखें।
- दोपहर (12:00 PM – 03:00 PM): देशनोक स्थित चूहों वाले चमत्कारी करणी माता मंदिर के दर्शन करें। लौटते समय लोकल ढाबे पर पारंपरिक केर-सांगरी और मिर्ची बड़े का स्वाद लें।
- शाम (03:30 PM – 06:30 PM): एशिया के सबसे बड़े ऊंट अनुसंधान केंद्र में कैमल मिल्क कुल्फी का आनंद लें। इसके बाद पुरानी गलियों में स्थित रामपुरिया हवेली की हेरिटेज वॉक करें और घी की नींव वाले भांडाशाह जैन मंदिर के दर्शन के साथ यात्रा का समापन करें।
बीकानेर 2-डे टूर प्लान (2 Day Bikaner Itinerary): बीकानेर में घूमने की जगह
- दिन 1 (Day 1): सुबह की शुरुआत अनूठे स्थापत्य वाले जूनागढ़ किला और लालगढ़ पैलेस से करें। दोपहर में स्टेशन रोड के लोकल ढाबे पर प्रसिद्ध केर-सांगरी की सब्जी और बाजरे की रोटी का स्वाद लें। शाम को पुराने शहर की तंग गलियों में रामपुरिया हवेली की ‘हेरिटेज वॉक’ करें और 40 हजार किलो घी की नींव वाले भांडाशाह जैन मंदिर के दर्शन करें।
- दिन 2 (Day 2): सुबह 30 किमी दूर देशनोक स्थित 25,000 चूहों वाले चमत्कारी करणी माता मंदिर जाएं।
- दोपहर में एशिया के सबसे बड़े राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र में ऊंट के दूध की कुल्फी का आनंद लें।
- शाम का ढलता सूरज देवी कुंड सागर की राजसी छतरियों के बीच बिताएं। हमारी टीम और लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार यह रूट सबसे बेस्ट है।
बीकानेर में क्या ख़रीदें
बीकानेर की समृद्ध विरासत को समेटे यहाँ के बाज़ार शॉपिंग के लिए बेहद खास हैं। खाने-पीने के शौकीनों के लिए मोठ की दाल और रेगिस्तानी मसालों से बनी तीखी बीकानेरी भुजिया, स्पंजी केसरिया रसगुल्ले और शुद्ध देसी घी के घेवर सबसे प्रसिद्ध हैं, जिन्हें आप सदर बाज़ार से खरीद सकते हैं।
हस्तशिल्प की बात करें, तो ‘ऊंटों के देश’ बीकानेर के कोट गेट मार्केट से ऊंट के चमड़े पर रेशम की बारीक कढ़ाई वाली टिकाऊ मोजरी-जूतियां और नक्काशीदार लेदर कैमल शोपीस बेहतरीन विकल्प हैं। कपड़ों में महिलाओं के लिए खजांची मार्केट की वाइब्रेंट बंधेज और लहरिया साड़ियाँ तथा वजन में बेहद हल्की लेकिन गर्म ‘नोखा की रजाई’ सबसे बेस्ट खरीदारी है। इसके शहर में बारीक सोने की परत वाली पारंपरिक उस्ता कला की पेंटिंग्स और राजसी लुक के लिए कुंदन व जादऊ आभूषण स्मृति चिन्ह के रूप में खरीदना बिल्कुल न भूलें। हमारी टीम और लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार ये बीकानेर की सबसे प्रामाणिक चीजें हैं।
युवा और विदेशी पर्यटक बीकानेर की रामपुरिया हवेली (Rampuria Haveli) के आसपास इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) और फोटोग्राफी के लिए बेस्ट एंगल्स कौन से सर्च करते हैं?
द आइकॉनिक कॉर्नर शॉट (Low Angle): तंग मोड़ पर जहाँ दो हवेलियां मिलती हैं, वहाँ नीचे से ऊपर की ओर मोबाइल रखकर शॉट लें। इससे झरोखे बेहद जादुई और भव्य दिखते हैं।
द हेरिटेज वॉक (Slow-Mo): हवेली के विशाल नक्काशीदार विंटेज दरवाजों (Vintage Doors) के सामने पारंपरिक पोशाक में स्लो-मोशन वॉक करते हुए रील बनाएं।
गोल्डन ऑवर शॉट (Golden Hour): शाम 4:30 से 6:00 बजे के बीच शूटिंग करें। डूबते सूरज की किरणें लाल पत्थरों की नक्काशी को बिना किसी फिल्टर के बेहद खूबसूरत लुक देती हैं।
पुराने बीकानेर (Old Bikaner) की 400 से अधिक हवेलियों को एक्सप्लोर करने के लिए ‘Guided Walking Tour’ के क्या विकल्प हैं और इसकी बुकिंग कैसे होती है?
लोकल हेरिटेज वॉक गाइड: जूनागढ़ या रामपुरिया हवेली के पास मिलने वाले गाइड 2 से 3 घंटे की वॉक में कोठारी हवेली और डागा चौक का इतिहास बताते हैं। इसका खर्च प्रति व्यक्ति ₹300 से ₹500 आता है।
होमस्टे और होटल टूर: पुराने शहर के हेरिटेज होटल्स सुबह और शाम कस्टमाइज्ड वॉक का आयोजन करते हैं। ये आपको सीक्रेट फोटोग्राफी स्पॉट्स और उस्ता कला कलाकारों के घर तक ले जाते हैं। इसके लिए सुबह 7 से 9 या शाम 5 से 7 बजे का समय सबसे बेस्ट है।
बीकानेर की विश्व प्रसिद्ध उस्ता कला (Usta Art) के स्मृति चिन्हों (Souvenirs) के सही दाम क्या हैं और नकली सामान से बचकर असली कलाकृति कहाँ से खरीदें?
उस्ता कला (Usta Art) बीकानेर की एक बेहद दुर्लभ और राजसी हस्तकला है, जिसमें ऊंट की सूखी खाल, लकड़ी या कांच पर शुद्ध 24-कैरेट सोने की परतों (Gold Leaf) और प्राकृतिक रंगों से बारीक नक्काशी की जाती है। असली सोने के इस्तेमाल के कारण इसके स्मृति चिन्ह (Souvenirs) थोड़े महंगे होते हैं। बाज़ार में एक छोटे उस्ता आर्ट शोपीस, कुप्पी (चमड़े की बोतल) या आभूषण के डिब्बे (Jewelry Box) की सही कीमत काम की बारीकी के आधार पर ₹1,500 से ₹5,000 के बीच शुरू होती है, जबकि बड़े मास्टरपीस की कीमत ₹10,000 से लाखों रुपये तक जाती है।
आजकल बाज़ार में तांबे या प्लास्टिक पर पीला पेंट करके पर्यटकों को ₹200-₹300 में नकली उस्ता आर्ट बेच दिया जाता है। असली उस्ता कला की पहचान यह है कि इसके सोने के काम में एक शाश्वत चमक होती है जो कभी काली नहीं पड़ती, और इसकी डिजाइन थोड़ी उभरी हुई (Embossed) महसूस होती है। धोखाधड़ी से बचने के लिए पर्यटकों को हमेशा बीकानेर मिनिएचर आर्ट स्टूडियो (Miniature Art Studio) या उस्ता बारी के पास स्थित कारीगरों के पुश्तैनी मोहल्लों से ही खरीदारी करनी चाहिए। हमारी टीम और लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, यहाँ आपको राष्ट्रीय पुरस्कार सम्मानित परिवारों को लाइव काम करते देखने का मौका भी मिलता है।
बीकानेर में घूमने की जगह देखें पर इन बीकानेरी नमकीन का स्वाद जरूर लेना
भीखाराम चांदमल (Bhikharam Chandmal): कोटगेट स्थित, यह बीकानेर की सबसे पुरानी और प्रामाणिक दुकानों में से एक है। इनकी भुजिया शुद्ध मोठ और मसालों से बनती है। आप उनके भीखाराम चांदमल प्लेटफॉर्म पर जाकर उत्पाद व स्टोर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
छोटू मोटू जोशी (Chhotu Motu Joshi): यह स्टेशन रोड के पास की सबसे लोकप्रिय और पुरानी मिठाई व नमकीन की दुकानों में से एक है। यहाँ बिल्कुल ताज़ी छनी हुई और कुरकुरी मोठ की भुजिया मिलती है।
हड़मान जी भुजिया वाले (स्काई किंग) बीकानेर के , दाऊजी रोड पर सोनगिरी कुआं चौक के सामने स्थित है। सन् 1971-1972 से संचालित यह दुकान 50 से अधिक वर्षों से अपनी शुद्धता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की भुजिया शुद्ध मोठ-मोगर दाल के आटे और 100% मूंगफली के तेल से पारंपरिक ‘परत’ (हाथ से घिसने वाली) विधि द्वारा तैयार की जाती है। यहाँ तीखी मोठ भुजिया, कम तीखी ‘3 नंबर भुजिया’ और बारीक महीन भुजिया की बेहतरीन वैरायटी मिलती है।
गिरधारी लाल भुजिया वाले बीकानेर के के.ई.एम. रोड पर रतन बिहारी जी पार्क के पास स्थित है। सन् 1978 से संचालित यह प्रतिष्ठित दुकान 45 से अधिक वर्षों से पारंपरिक स्वाद परोस रही है। यहाँ की भुजिया पूरी तरह पाम ऑयल और प्रिजर्वेटिव मुक्त होती है। इसे शुद्ध मोठ दाल, खास राजस्थानी मसालों और 100% मूंगफली के तेल से तैयार किया जाता है। स्वाद प्रेमियों के बीच यहाँ की क्लासिक मोठ भुजिया और मोटा भुजिया सबसे लोकप्रिय हैं।
बीकानेर में घूमने की जगह पर संक्षेप में कहें तो, बीकानेर (Bikaner) केवल एक रेगिस्तानी शहर नहीं है, बल्कि यह राजसी इतिहास, बेजोड़ स्थापत्य कला, जीवंत उस्ता आर्ट और ज़ायकेदार खान-पान का एक ऐसा अनूठा संगम है जो हर प्रकार के मुसाफ़िर को अपनी ओर आकर्षित करता है। चाहे जूनागढ़ किले का अदम्य वैभव हो, रामपुरिया हवेली की इंस्टाग्राम-परफेक्ट गलियां हों, या फिर देशनोक करणी माता मंदिर का अलौकिक चमत्कार—यहाँ का हर कोना आपको एक नई कहानी सुनाता है। हमारी टीम और लोकल गाइड (Local Guide) के इस प्रामाणिक जमीनी अनुभव के साथ बनाई गई यह गाइड आपकी यात्रा को बेहद सुगम और यादगार बनाएगी। तो देर किस बात की? अपना बैग पैक कीजिए और ‘राठौड़ी नगरी’ के इस अद्भुत सफ़र पर निकल पड़िए!


