“बाबे री बीज कब है? जानिए तिथि, व्रत विधि और स्टेटस डाउनलोड”

बाबे री बीज क्यों मनाई जाती है? जानिए बाबा रामदेव जी का जन्म किस दिन हुआ था, इसका इतिहास, पौराणिक कथा, व्रत विधि और शुभकामनाएं भेजने के लिए स्पेशल भजन व स्टेटस लिस्ट।

वर्ष 2026 में बाबे री बीज कब है?

वर्ष 2026 में बाबा रामदेव जी का पावन जन्मोत्सव यानी “बाबे री बीज” 13 सितंबर 2026 (रविवार) को धूमधाम से मनाया जाएगा । हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पवित्र दिन प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को पड़ता है।इसी विशेष दिन से जैसलमेर के रामदेवरा (रूणेचा धाम) में विश्व प्रसिद्ध 642वें वार्षिक भादवा मेले की आधिकारिक शुरुआत होगी। तड़के सुबह 04:00 बजे बाबा की समाधि पर भव्य मंगला आरती की जाएगी और पंचरंगी ‘नेजा’ (ध्वजा) चढ़ाई जाएगी। इस दिन राजस्थान और गुजरात के घरों में बाबा के निमित्त व्रत रखकर रात्रि में भव्य ‘जम्मा’ (भजन जागरण) का आयोजन किया जाता है।

बाबे री बीज मंगला आरती का समय (Mangla Aarti Timings)

मेले के पहले दिन रामदेवरा मुख्य मंदिर के कपाट तड़के सुबह खोल दिए जाएंगे। बाबा की विश्व प्रसिद्ध मंगला आरती सुबह 04:00 बजे से 04:30 बजे के बीच की जाएगी। इसी पावन आरती के साथ मंदिर के शिखर पर पंचरंगी ‘नेजा’ (ध्वजा) चढ़ाई जाएगी और आधिकारिक रूप से मेले का शंखनाद होगा।

रामदेवरा मेला बाबे री बीज लाइव दर्शन (Live Darshan):

: जो श्रद्धालु किसी कारणवश जैसलमेर के रूणेचा धाम नहीं पहुँच पा रहे हैं, वे घर बैठे इंटरनेट पर बाबा के दर्शन कर सकते हैं। ‘बाबे री बीज’ के दिन सुबह की मुख्य मंगला आरती और अभिषेक का सीधा प्रसारण (Live Stream) रामदेवरा मंदिर समाधि समिति के आधिकारिक यूट्यूब चैनल (Ramdevra Mandir Official) और फेसबुक पेज पर तड़के सुबह 04:00 बजे से लाइव किया जाएगा।

बाबा रामदेव जी का जन्म किस दिन हुआ था? (इतिहास)

पौराणिक एवं ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, बाबा रामदेव जी का जन्म विक्रम संवत 1409 में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था।जन्म स्थान: बाड़मेर जिले की शिव तहसील का उंडू-काश्मीर गांव।माता-पिता: वे तंवर वंशीय राजपूत राजा अजमाल जी और माता मैणादे के पुत्र थे।श्रीकृष्ण अवतार: लोक मान्यता है कि राजा अजमाल जी की अनन्य भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) ने उनके घर पुत्र रूप में अवतार लिया था। मारवाड़ की भाषा में ‘द्वितीया’ तिथि को ‘बीज’ कहा जाता है, इसी कारण बाबा के जन्मदिवस को ‘बाबे री बीज’ के नाम से पुकारा जाता है।

बाबे री बीज क्यों मनाई जाती है और इसका क्या महत्व है?

बाबे री बीज मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य बाबा रामदेव जी द्वारा समाज को दिए गए सांप्रदायिक सौहार्द, छुआछूत मिटाने और लोक कल्याण के संदेश को याद करना है।

सांप्रदायिक एकता का प्रतीक: इस दिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोग बाबा के दरबार में शीश नवाते हैं। हिंदू जहाँ इन्हें कृष्ण का अवतार मानते हैं, वहीं मुस्लिम इन्हें ‘रामशाह पीर’ के रूप में पूजते हैं।

रामदेवरा मेले का शंखनाद: रूणेचा धाम में इसी दिन बाबा की समाधि पर मंगला आरती के साथ पवित्र ‘नेजा’ (पंचरंगी ध्वजा) चढ़ाई जाती है, जिससे आधिकारिक रूप से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र ‘भादवा मेले’ की शुरुआत होती है

बाबे री बीज की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, पोकरण के राजा अजमाल जी तंवर निसंतान थे। प्रजा उन्हें ‘बांझिया’ कहकर ताने देती थी, जिससे दुखी होकर वे द्वारकाधीश (भगवान कृष्ण) की शरण में गए। राजा की अगाध भक्ति को देखकर भगवान कृष्ण ने उन्हें वचन दिया कि वे स्वयं उनके घर कार्तिक शुक्ल एकादशी को बड़े भाई ‘वीरमदेव’ (बलराम के अवतार) और भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को छोटे पुत्र ‘रामदेव’ के रूप में अवतार लेंगे।

भादवा महीने की शुक्ल द्वितीया को जब माता मैणादे के महल में पालने में कुमकुम के पैरों के निशान (पगलिया) अपने आप छप गए और दूध उफनकर शांत हो गया, तब अजमाल जी को विश्वास हुआ कि साक्षात प्रभु उनके घर पधार चुके हैं।

बाबे री बीज की व्रत विधि और पूजा नियम

राजस्थान और गुजरात के घरों में श्रद्धालु भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री बीज) के दिन बाबा रामदेव जी के निमित्त विशेष व्रत और उपासना करते हैं। इस दिन सुबह स्नान कर संकल्प लेने के बाद घर के पवित्र स्थान पर चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर बाबा की तस्वीर या ‘पगलिया’ (चरण चिह्न) स्थापित किए जाते हैं। इसके बाद पांच रंगों की नेजा (ध्वजा) अर्पण कर, दीपक प्रज्ज्वलित किया जाता है और शुद्ध देसी घी के चूरमे, मिश्री तथा नारियल का भोग लगाया जाता है। इस पावन तिथि की रात को घरों और मंदिरों में बाबा के ‘व्यावले’ (भजन) गाकर ‘जम्मा’ (जागरण) किया जाता है और अगले दिन सुबह आरती के पश्चात प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।

बाबे री बीज की हार्दिक शुभकामनाएं (शायरी और बधाई संदेश)

आप इन आकर्षक और भक्तिमय संदेशों को इमेजेस या टेक्स्ट के रूप में व्हाट्सएप और फेसबुक पर शेयर कर सकते हैं:

  • “खम्मा खम्मा हो अजमाल जी रा कंवर,नेतल रा भरतार, म्हारो हेलो सुणो जी रामापीर!”आपको और आपके पूरे परिवार को ‘बाबे री बीज’ की हार्दिक शुभकामनाएं! 🙏✨
  • “लीले घोड़े रा असवार, बाबा कलयुग का अवतारी,मेटो म्हाका सारा कष्ट, अरज सुणो थे म्हारी।”जय बाबे री! बाबे री बीज की लख-लख बधाई! 🐎🌸

बाबे री बीज स्पेशल भजन और आरती लिस्ट (Top Bhajans)

इस पावन दिन पर घरों और पंडालों (जम्मा जागरण) में सबसे ज्यादा सुने और गाए जाने वाले भजनों की सूची इस प्रकार है, जिन्हें आप अपने वीडियो के बैकग्राउंड म्यूजिक या प्लेलिस्ट में शामिल कर सकते हैं:खम्मा खम्मा हो अजमाल जी रा कंवर (मशहूर पारंपरिक भजन)लीलो घोड़ो सोवे बाबा रामापीर को (प्रकाश माली)थाने तो ध्यावे आखो मारवाड़ जी (श्याम पालीवाल)बाबा रामदेव जी की आरती: “ओम् जय श्री रामा, बाबा जय श्री रामा…” (शाम की आरती के समय सबसे लोकप्रिय)

बाबे री बीज स्टेटस डाउनलोड (Baba ri beej status video download)

बाबे री बीज के पावन अवसर पर यदि आप व्हाट्सएप स्टेटस या इंस्टाग्राम रील्स के लिए शॉर्ट वीडियो डाउनलोड करना चाहते हैं, तो इसका सबसे सुरक्षित तरीका बेहद आसान है। इसके लिए आप यूट्यूब शॉर्ट्स या इंस्टाग्राम पर जाकर “Baba ri beej status 4K Full HD” या “Ramdevra Mela WhatsApp Status” लिखकर सर्च कर सकते हैं। इसके बाद, अपनी पसंद के शॉर्ट वीडियो के लिंक को कॉपी करें और किसी भी विश्वसनीय ऑनलाइन वीडियो डाउनलोडर टूल या थर्ड-पार्टी ऐप में पेस्ट करके उसे 1080p या 4K क्वालिटी में सीधे अपने फोन की गैलरी में सेव कर लें। इस प्रकार डाउनलोड किए गए दिव्य वीडियो को आप अपनी पसंदीदा रामापीर शायरी के साथ अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर आसानी से लाइव कर सकते हैं।

बाबा रामदेव बीज (भादवा सुदी बीज)

बाबा रामदेव बीज (भादवा सुदी बीज) प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला एक पावन लोक उत्सव है। लोक मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र तिथि को कलयुग के अवतारी देवता बाबा रामदेव जी का जन्म बाड़मेर के उंडू-काश्मीर गांव में हुआ था।स्थानीय मारवाड़ी और गुजराती भाषा में द्वितीया तिथि को ‘बीज’ कहा जाता है, इसलिए इसे ‘बाबे री बीज’ या रामदेव जयंती भी कहते हैं।

बाबे री बीज आस्था और कौमी एकता का महापर्व है । इस दिन गुरु बालीनाथ और बाबा रामदेव जी की आराधना से जीवन के कष्ट मिटते हैं। यदि आप भी रामदेवरा यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो हम आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं देते हैं और जय बाबे री! बाबा रामदेव जी की कृपा आप पर बनी रहे।

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