परम भक्त अमानत अली खाटू श्याम की बायोग्राफी और उनके प्रसिद्ध भजन (जैसे कितनो बडो म्हारो भाग्य है)। देखें कैसे 40 साल से वे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने हैं।
अमानत अली की जीवनी और निवास (Biography & Residence Amanat Ali Khatu Shyam )
कहाँ के रहने वाले हैं: अमानत अली मुख्य रूप से राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू कस्बे (खाटू धाम) के ही स्थानीय निवासी हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण इसी पावन भूमि पर हुआ है।
बचपन का नाता: वे बताते हैं कि बाबा श्याम के मंदिर से उनका रिश्ता महज कुछ सालों का नहीं, बल्कि बचपन से है। वे खाटू धाम की गलियों और बाबा के दरबार की छांव में ही बड़े हुए हैं।
उम्र और सादगी: अमानत अली एक साधारण और सादगी पसंद इंसान हैं। उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य किसी भी प्रकार के नाम या प्रसिद्धि की चाह रखे बिना चुपचाप बाबा श्याम के चरणों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना है।
जब बंदगी सरहदें नहीं मानती: अमानत अली खाटू ( श्याम श्याम) के रूहानी मिलन की दास्ताँ
भक्ति जब नि:स्वार्थ होती है, तो मजहब और सीमाओं के तमाम खोखले दायरे खुद-ब-खुद टूट जाते हैं। खाटू धाम से आई अमानत अली जी की कहानी महज किसी सनातनी परंपरा का हिस्सा भर नहीं, बल्कि एक रूह का अपने परमात्मा से सीधा और पवित्र मिलन है। भोर की पहली किरण के साथ बाबा श्याम की चौखट को चूमते और सीढ़ियों को बुहारते उनके कांपते हाथ इस बात की गवाही देते हैं कि ईश्वर को पाने के लिए किसी खास लिबास की नहीं, सिर्फ एक साफ दिल की जरूरत होती है। आज नफरतों से भरी दुनिया में उनकी यह निश्चल सेवा एकता का रूहानी मरहम बनकर उभरी है। वे सादगी से सिखाते हैं कि उस अल्लाह और श्याम में कोई फर्क नहीं है। आंसुओं और सच्ची मोहब्बत का कोई मजहब नहीं होता; यह सिर्फ भाव की वो बेजुबां भाषा है, जिसे ईश्वर बखूबी समझता है।
40 साल की निष्काम सेवा का इतिहास और अमानत अली खाटू श्याम
4 दशकों का लंबा सफर: अमानत अली पिछले लगभग 40 वर्षों से लगातार नियमित रूप से खाटू श्याम मंदिर में सेवा दे रहे हैं। इतने लंबे समय में मौसम चाहे कोई भी हो, उनकी इस दिनचर्या में कभी कोई रुकावट नहीं आई।
दैनिक सेवा कार्य: वे प्रतिदिन सुबह करीब 4:30 बजे ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर परिसर पहुँच जाते हैं। मंदिर की सीढ़ियों को पानी से धोना, मुख्य परिसर की साफ-सफाई करना और कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को दर्शन करने में मदद करना उनका मुख्य कार्य है।
बिना किसी लोभ के सेवा: सबसे बड़ी बात यह है कि अमानत अली इस सेवा के बदले मंदिर प्रशासन या किसी भी ट्रस्ट से कोई मानदेय या पैसा नहीं लेते। उनकी यह सेवा पूरी तरह नि:शुल्क और निष्काम भाव (Selfless Service) से बाबा के प्रति उनके प्रेम का प्रतीक है।
अमानत अली खाटू श्याम जी के प्रति जो अटूट विश्वास और नि:स्वार्थ प्रेम दिखाते हैं, वह आज के समाज के लिए एक महान सीख है। वे केवल मंदिर की सफाई नहीं करते, बल्कि समाज में फैली नफरत और दूरियों को भी अपनी भक्ति से साफ करने का काम कर रहे हैं। यदि आप भी खाटू धाम जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सुबह की आरती के समय इस परम भक्त के दर्शन और सेवा भाव को करीब से देखना न भूलें।
कितनो बडो म्हारो भाग्य है खाटू श्याम भजन अमानत अली
अमानत अली जी द्वारा गाए गए भजन “कितनो बडो म्हारो भाग्य है” का मुख्य सार (Summary) परम संतोष, अनन्य भक्ति और नि:स्वार्थ सेवा भाव है। इस भजन के माध्यम से एक भक्त भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता (Gratitude) प्रकट करता है। परम सौभाग्य: संसार के वैभव को त्यागकर बाबा श्याम के दरबार में ‘चाकरी’ (सेवा) मिलना ही जीवन का सबसे बड़ा भाग्य है।पूर्ण निर्भरता: मतलबी दुनिया से विरक्ति और जीवन रूपी नाव को पूरी तरह बाबा के भरोसे छोड़ना ही सच्ची आस्था है।अंतिम अरदास: खाटू धाम की सीढ़ियां बुहारने का सुख और हमेशा बाबा के चरणों में रहना ही भक्त का परम सुकून है।।
मुस्लिम श्याम भक्त अमानत अली” के गाये खाटू श्याम बाबा के भजन आप यूट्यूब पर जरूर सुने।
अमानत अली जी द्वारा गाए गए लोकप्रिय मारवाड़ी भजन ‘श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए’ के बोल
- स्थायी:श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए,खाटू वाला श्याम बाबा प्यारा चाहिए।दुनिया की दौलत से तेरा मन ना भरेगा,जनम-जनम का तुझे साथ चाहिए।श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए…॥
- अंतरा 1:झूठे हैं जमाने के ये सारे रिश्ते-नाते,मतलब की दुनिया है, मतलब की बातें।जो विपदा में थामे तेरा हाथ आकर,ऐसा सच्चा एक तुझे यार चाहिए।श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए…॥
- अंतरा 2:हारे का सहारा मेरा बाबा श्याम है,इसके ही चरणों में चारों धाम है।भटकेगा कब तक तू दर-दर ओ बंदे,खाटू की चौखट का दीदार चाहिए।श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए…॥
- अंतरा 3:अमानत ने बाबा को दिल से पुकारा,मिल गया इसे तो सांवरिया सहारा।डूबेगी ना नैया कभी तेरी बंदे,बस श्याम नाम का पतवार चाहिए।श्याम चाहिए रे तुझे श्याम चाहिए…॥
अमानत अली जी के अन्य प्रसिद्ध भजनों में “कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा”, “सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो लुटा रियो भण्डार” और “श्याम थारे भरोसे म्हारी नाव चाले” भी बहुत लोकप्रिय हैं.
अमानत अली जी द्वारा गाए गए मारवाड़ी श्याम भजन “सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो” के संपूर्ण बोल
- स्थायी:सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो, लुटा रियो भण्डार।लेने वालो थाक जावे, पर देवे बारम्बार।महारो सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो, लुटा रियो भण्डार
- अंतरा 1:कोई आवे मांगण धन और दौलत, कोई मांगण आवे माया।कोई मांगण आवे सुंदर गोरी, कोई निरोगी काया।जो भी आवे बाबा के दर पे, वो पावे मनचाहा उपहार।महारो सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो, लुटा रियो भण्डार॥
- अंतरा 2:हाथ पसार्या दुनिया के आगे, कदे ना मिलसी भाई।एक बार जाके श्याम के आगे, तू झोली फैला रे भाई।पल भर में थारी झोली भर दे, ऐसो है दातार।महारो सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो, लुटा रियो भण्डार॥
- अंतरा 3:अमानत की बस यही दुआ है, जनम-जनम थारो साथ रहे।जब तक सांस चले इस तन में, सिर पे थारो हाथ रहे।थारे ही भरोसे म्हारी नाव चाले, तू ही है खेवनहार।महारो सेठ सांवरो बैठ्यो बैठ्यो, लुटा रियो भण्डार॥
कितनो बडो म्हारो भाग्य है (लिरिक्स)
- कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा,मने थारी चाकरी मिली।थारी चाकरी मिली, मने थारी चाकरी मिली।कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा,मने थारी चाकरी मिली॥
- दुनिया को मने काम ना कोई,तू ही म्हारो श्याम है।सुबह और शाम बाबा,लेऊं थारो नाम है।थारे ही भरोसे म्हारी नाव चाले बाबा,मने थारी चाकरी मिली।कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा,मने थारी चाकरी मिली॥
- दूर-दूर से आवे यात्री,थारो दर्शन पावण ने।शीश के दानी बाबा,तने रिझावण ने।मैं तो थारी सीढ़ियां बुहारूँ दिन-रात बाबा,मने थारी चाकरी मिली।कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा,मने थारी चाकरी मिली॥
- अमानत की अरदास यही है,चरणों में थारे रहना।सुख-दुख जो भी आवे बाबा,थारे से ही कहना।थारे ही दर पे मने चैन मिले बाबा,मने थारी चाकरी मिली।कितनो बडो म्हारो भाग्य है म्हारा बाबा,मने थारी चाकरी मिली॥
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