PRITHWI Project Rajasthan की पूरी जानकारी! ₹1500 करोड़ का बजट, Wildlife Valorisation Initiative का अर्थ और नए Eco-tourism sites। जानें कैसे मिलेगा स्थानीय युवाओं को रोजगार।
PRITHWI प्रोजेक्ट: एक नज़र में (Quick Fact Box)
- प्रोजेक्ट का पूरा नाम: Project for Resilient and Integrated Terrestrial Habitats and Wildlife Valorisation Initiative
- कुल बजट (Total Budget) :₹1,500 करोड़ (1500 Crore)
- मुख्य फोकस इको-टूरिज्म (Eco-tourism) और वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation)
- प्रमुख क्षेत्र (Key Areas) जैसलमेर खुरी, रणथंभौर, सरिस्का और शेखावाटी
- रोजगार लक्ष्य 10,000 स्थानीय गाइड प्रशिक्षण (Local Guide Training)
- नोडल एजेंसी वन एवं पर्यावरण विभाग, राजस्थान (Forest Dept. Rajasthan)
- घोषणा (Announced By) राजस्थान सरकार (बजट 2026-27)
PRITHWI Project Rajasthan: प्रमुख घटक और निवेश (Major Components & Investment)
आवास विकास (Habitat Development): ₹500 करोड़ — जंगलों का घनत्व बढ़ाने और घास के मैदान (Grasslands) विकसित करने के लिए।
इको-टूरिज्म (Eco-tourism): ₹400 करोड़ — नए पर्यटन सर्किट और विशेष पर्यटन क्षेत्र (Special Tourism Zones) बनाने के लिए
संघर्ष न्यूनीकरण (Conflict Mitigation): ₹300 करोड़ — मानव-वन्यजीव टकराव रोकने और वन्यजीव एम्बुलेंस (Wildlife Ambulance) सेवा के लिए।
अवसंरचना (Infrastructure): ₹200 करोड़ — नए ट्रेल्स, एंट्री गेट और सुविधा केंद्रों के निर्माण के लिए।
प्रशिक्षण एवं शिक्षा (Training & Outreach): ₹100 करोड़ — स्थानीय युवाओं को Eco-trail Guide Training देने के लिए।
PRITHWI Project Rajasthan: विशेष प्रोजेक्ट्स (Special Projects Highlights)
खुरी STZ (Jaisalmer Khuri STZ): राजस्थान का पहला अल्ट्रा-लक्जरी सस्टेनेबल डेजर्ट कैंपिंग जोन।
थार कल्चरल सर्किट (Thar Cultural Circuit): 5 जिलों (जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर, जालौर) को जोड़ने वाला पर्यटन मार्ग।
वन्यजीव वीरता पहल (Wildlife Valorisation Initiative): जानवरों के संरक्षण को स्थानीय आय से जोड़ने की अनूठी तकनीक।
कुलधरा हब (Kuldhara Hub): ऐतिहासिक गांव में पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र।
PRITHWI प्रोजेक्ट: 7 सबसे रोचक तथ्य (7 Amazing Facts)
रेगिस्तान में लक्जरी का नया पता: जैसलमेर के पास खुरी (Khuri STZ) को दुनिया के बेहतरीन ‘सस्टेनेबल लक्जरी’ डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ ऐसे रिसॉर्ट्स बनेंगे जो बिना कंक्रीट के होंगे और पूरी तरह सौर ऊर्जा (Solar Energy) पर चलेंगे।
जानवरों के लिए अपनी ‘एम्बुलेंस’ (Wildlife Ambulance): इस प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा जहाँ वन्यजीवों के लिए 24/7 समर्पित एम्बुलेंस नेटवर्क होगा। इसमें जीपीएस और प्राथमिक उपचार की आधुनिक सुविधाएं होंगी।
हॉन्टेड से हाई-टेक तक (Kuldhara Hub): रहस्यमयी गांव कुलधरा (Kuldhara), जिसे लोग डरावना मानते थे, अब वहां एक हाई-टेक पर्यटक सुविधा केंद्र बनेगा। यहाँ एआर/वीआर (AR/VR) के जरिए इस गांव के इतिहास को जीवंत किया जाएगा।
10,000 ‘नेचर वॉरियर्स’ (Nature Warriors): सरकार केवल गाइड नहीं बना रही, बल्कि 10,000 युवाओं को इको-ट्रेल गाइड प्रशिक्षण (Eco-trail Guide Training) देकर उन्हें पर्यावरण का रक्षक बना रही है। ये युवा विदेशी पर्यटकों को राजस्थानी संस्कृति और वन्यजीवों की बारीकियां समझाएंगे।
शेखावाटी की ‘ओपन आर्ट गैलरी’: इस ₹1,500 करोड़ के प्रोजेक्ट का एक हिस्सा 660 से अधिक प्राचीन हवेलियों के संरक्षण (Restoration) के लिए है। यह दुनिया का सबसे बड़ा ‘ओपन एयर म्यूजियम’ बनने की राह पर है।
स्मार्ट फॉरेस्ट (Smart Forest Technology): पहली बार राजस्थान के पार्कों में जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) और एआई कैमरों का उपयोग होगा ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष (Conflict Mitigation) को रोका जा सके।
थार का ‘ग्रैंड टूर’ (Thar Cultural Circuit): यह सर्किट 5 जिलों को एक धागे में पिरोएगा। हमारी टीम ने जब इस रूट का दौरा किया, तो पाया कि यहाँ के लोकल ढाबों (Local Dhabas) का खाना और लोक संगीत इस सफर का सबसे रोचक हिस्सा होने वाला है।
वन्यजीव वीरता पहल का असली मतलब (Wildlife Valorisation Initiative Meaning)
अक्सर लोग ‘Valorisation’ का अनुवाद ‘वीरता’ से करते हैं, लेकिन यहाँ इसका असली मतलब “मूल्य संवर्धन” है।अर्थ: वन्यजीवों और जंगलों को केवल सुरक्षा देना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें एक ऐसी मूल्यवान संपत्ति के रूप में विकसित करना है जिससे प्रकृति और इंसान दोनों का भला हो।यह कैसे काम करेगी? इसके तहत वन्यजीवों के संरक्षण को आर्थिक लाभ से जोड़ा जाएगा। जब जंगल सुरक्षित होंगे, तो पर्यटन बढ़ेगा और उसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा। इसे ही ‘Valorisation’ कहा गया है।
जैसलमेर खुरी में क्या नया है? (Khuri Special Tourism Zone)
जैसलमेर का खुरी क्षेत्र अब दुनिया के नक्शे पर अल्ट्रा-लक्जरी सस्टेनेबल कैंपिंग (Ultra-Luxury Sustainable Camping) के लिए जाना जाएगा।नया क्या है? यहाँ विशेष पर्यटन क्षेत्र (Special Tourism Zone – STZ) बनाया जा रहा है। हमारी टीम ने खुरी के धोरों का दौरा किया और पाया कि यहाँ ऐसे इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट्स प्रस्तावित हैं जो शून्य कार्बन उत्सर्जन (Zero Carbon Emission) पर आधारित होंगे।सुविधाएं: यहाँ आपको राजस्थानी संस्कृति के साथ-साथ मॉडर्न लक्जरी का ऐसा मेल मिलेगा जो प्रकृति को नुकसान पहुँचाए बिना बनाया गया है।
PRITHWI प्रोजेक्ट: स्थानीय युवाओं के लिए अवसर (Local Community Benefits
युवाओं के लिए यह प्रोजेक्ट रोजगार की खान साबित होने वाला है।नई भर्तियां (785+ Posts): राजस्थान वन विभाग में वनपाल (Forester) और वनरक्षक (Forest Guard) के पदों पर बड़ी भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।गाइड प्रशिक्षण (Eco-trail Guide Training): सरकार 10,000 युवाओं को सर्टिफाइड गाइड बना रही है। हमारी टीम ने कुछ प्रशिक्षण केंद्रों का जायजा लिया, जहाँ युवाओं को वन्यजीवों की ट्रैकिंग और विदेशी भाषाओं का ज्ञान दिया जा रहा है।
शेखावाटी का कायाकल्प (Heritage Conservation)
इतिहास प्रेमियों के लिए ₹200 करोड़ का बजट शेखावाटी की हवेलियों में नई जान फूँक देगा।संरक्षण (Restoration): लगभग 660 प्राचीन हवेलियों को उनकी पुरानी भव्यता वापस दी जाएगी।पर्यटन: इसे एक ओपन एयर म्यूजियम (Open Air Museum) की तरह विकसित किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक पैदल चलकर (Heritage Walk) कलाकृतियों का आनंद ले सकेंगे।
PRITHWI प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है और यह राजस्थान के अन्य पर्यटन प्रोजेक्ट्स से कैसे अलग है?
PRITHWI प्रोजेक्ट (Project for Resilient and Integrated Terrestrial Habitats and Wildlife Valorisation Initiative) का मुख्य उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पारिस्थितिक स्थिरता (Ecological Stability) और स्थानीय आर्थिक विकास के बीच एक संतुलन बनाना है।यह प्रोजेक्ट अन्य योजनाओं से अलग इसलिए है क्योंकि इसमें ‘Wildlife Valorisation’ (वन्यजीव मूल्य संवर्धन) पर जोर दिया गया है। अन्य प्रोजेक्ट्स में अक्सर इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान होता है, लेकिन यहाँ ₹1,500 करोड़ का एक बड़ा हिस्सा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को फिर से जीवित करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Conflict Mitigation) को आधुनिक तकनीक से कम करने पर खर्च हो रहा है। हमारी टीम ने फील्ड में देखा कि यह योजना केवल किलों को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सैलानियों को प्रकृति के साथ जिम्मेदारी से जोड़ने का एक माध्यम है।
वन्यजीव वीरता पहल (Wildlife Valorisation Initiative) स्थानीय समुदायों की आय को कैसे बढ़ाएगी?
इस पहल का सीधा संबंध ‘प्रकृति आधारित अर्थव्यवस्था’ से है। जब सरकार वन्यजीवों के आवासों का विकास (Habitat Development) करती है, तो उस क्षेत्र में जैव-विविधता बढ़ती है, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।इसके तहत स्थानीय युवाओं को Eco-trail Guide Training दी जा रही है, जिससे वे केवल ‘रास्ता दिखाने वाले’ नहीं, बल्कि ‘सर्टिफाइड एक्सपर्ट’ बन रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर वेतन और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इसके अलावा, लोकल ढाबों (Local Dhabas) और होमस्टे को इस प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है, जिससे पर्यटन से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा बड़े होटलों के बजाय सीधे स्थानीय लोगों की जेब में जा रहा है।
जैसलमेर खुरी में बनने वाला ‘स्पेशल टूरिज्म जोन’ (STZ) क्या है और पर्यटकों को यहाँ क्या नया मिलेगा?
जैसलमेर का खुरी STZ (Special Tourism Zone) राजस्थान का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जो पूरी तरह से सस्टेनेबल लक्जरी (Sustainable Luxury) के सिद्धांत पर काम करेगा।यहाँ पर्यटकों को रेगिस्तान के बीच ‘अल्ट्रा-लक्जरी’ टेंट हाउस और रिसॉर्ट्स मिलेंगे, जो बिना कंक्रीट के बने होंगे और 100% सौर ऊर्जा पर आधारित होंगे। यहाँ नया अनुभव यह होगा कि पर्यटक बिना शोर-शराबे के ‘साइलेंट डेजर्ट सफारी’ का आनंद ले सकेंगे। इसके साथ ही, पास में स्थित कुलधरा गांव में एक आधुनिक डिजिटल सुविधा केंद्र बनाया जा रहा है, जहाँ एआर/वीआर (AR/VR) तकनीक से गांव के इतिहास को दिखाया जाएगा। हमारी टीम का अनुभव कहता है कि यह उन लोगों के लिए स्वर्ग होगा जो भीड़भाड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता की तलाश में हैं।
क्या PRITHWI प्रोजेक्ट से वन्यजीवों और इंसानों के बीच होने वाले टकराव (Conflict) में कमी आएगी?
हाँ, यह इस प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा है। ₹1,500 करोड़ के बजट में से ₹300 करोड़ विशेष रूप से मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict Mitigation) के लिए रखे गए हैं।इसके तहत अभयारण्यों की सीमाओं पर जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) और सेंसर-आधारित चेतावनी प्रणालियां लगाई जा रही हैं। यदि कोई वन्यजीव आबादी क्षेत्र की ओर आता है, तो सिस्टम तुरंत वन विभाग और ग्रामीणों को अलर्ट कर देगा। इसके साथ ही, घायल जानवरों के लिए 24/7 वन्यजीव एम्बुलेंस (Wildlife Ambulance) सेवा शुरू की जा रही है। हमारी टीम ने जब वन अधिकारियों से बात की, तो उन्होंने बताया कि इन तकनीकों से न केवल जानवरों की जान बचेगी, बल्कि स्थानीय किसानों की फसलों और मवेशियों का नुकसान भी कम होगा।
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