राजस्थान की वीर धरा पर बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर देशनोक (Deshnoke) में एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर है, जो पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए आज भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। यहाँ 25,000 से भी अधिक चूहे (Kaba) बेखौफ घूमते हैं, लेकिन प्लेग (Plague) जैसी बीमारी का नामोनिशान तक नहीं है।
चूहों का साम्राज्य पर प्लेग का नाम नहीं (The Mystery of Plague)
पूरी दुनिया में जहाँ चूहों को बीमारियों का वाहक माना जाता है, वहीं देशनोक में इन्हें माता की संतान ‘काबा’ (Kaba) कहकर पूजा जाता है। यहाँ चूहों की इतनी भारी संख्या होने के बावजूद प्लेग (Plague) न फैलने के पीछे कुछ अद्भुत तथ्य हैं:
- बाहरी प्रवेश वर्जित: स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर के चूहे कभी परिसर से बाहर नहीं जाते और बाहर के चूहे कभी अंदर नहीं आ सकते।
2..सफाई का चमत्कार: हजारों चूहों के बाद भी मंदिर में कभी दुर्गंध (Bad Smell) महसूस नहीं होती।
3 .जूठा प्रसाद: श्रद्धालु उसी थाली से प्रसाद (Prasad) ग्रहण करते हैं जिसमें चूहे खाते हैं, फिर भी आज तक कोई बीमार नहीं पड़ा।
करणी माता मंदिर के 5 मुख्य अनुभव (5 Must-Have Experiences)
सफेद चूहे का दर्शन (The Holy White Rat): हजारों काले चूहों के बीच 4-5 सफेद चूहे हैं। माना जाता है कि सफेद चूहा दिखना मतलब साक्षात करणी माता ने दर्शन दे दिए।
मंगला आरती (Mangla Aarti): सुबह की पहली आरती में चूहों की सक्रियता और भक्ति का माहौल मंत्रमुग्ध कर देता है।
काबा का पैर से गुजरना: यदि कोई चूहा आपके पैर के ऊपर से गुजर जाए, तो इसे माता का विशेष आशीर्वाद माना जाता है।
चांदी के किवाड़ (Silver Doors): मंदिर के भव्य चांदी के दरवाजे और नक्काशी राजस्थान की कला का बेजोड़ नमूना हैं।
लोकल ढाबे का स्वाद: मंदिर दर्शन के बाद देशनोक के पास स्थित लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी का स्वाद लेना न भूलें।
करणी मां मंदिर और हमारी टीम अनुभव
हमारी टीम का अनुभव (Our Team Insight)
हमारी टीम ने अनुभव किया कि यह मंदिर केवल चूहों का डेरा नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा का केंद्र है। स्थानीय गाइड ने हमें बताया कि यहाँ यदि कोई चूहा मर जाता है, तो उसकी जगह चांदी का चूहा बनवाकर चढ़ाया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है जो चूहों के प्रति सम्मान को दर्शाती है।कैसा लगा हमारा यह आर्टिकल आपकी सार्थक राय दें ताकि हम और सुधार कर सकें।


