क्या आपने इन लज़ीज़ जोधपुरी व्यंजनों का लुत्फ उठाया है ?Jodhpur Famous Food List 2026

Jodhpur Famous Food List 2026: जोधपुर की प्याज़ कचौरी, मिर्ची वड़ा और गुलाब जामुन की सब्जी की पूरी जानकारी। यहाँ की सबसे पुरानी और मशहूर मिठाई की दुकानों (Famous Sweet Shops) की लिस्ट और बजट गाइड। अपनी वेबसाइट ‘देसी राजस्थान’ पर जोधपुर के जायके का पूरा इतिहास जानें।

Rajasthan Travel Guide Contents

जोधपुर के सबसे प्रसिद्ध व्यंजन (Most Famous Dishes of Jodhpur)

जोधपुरी मिर्ची वड़ा (Jodhpuri Mirchi Vada)

यह जोधपुर का सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है। बड़ी हरी मिर्च के अंदर मसालेदार आलू भरकर बेसन में तलकर बनाया जाता है।टीम का अनुभव: क्लॉक टॉवर के पास शाही समोसा (Shahi Samosa) पर मिलने वाला ताज़ा मिर्ची वड़ा लाजवाब है।

मखनिया लस्सी (Makhaniya Lassi)

यह साधारण लस्सी नहीं है; यह केसर, इलायची और मलाई के ढेर (Loaded with Cream) के साथ बनाई जाती है।लोकल स्वाद: मिश्रीलाल होटल (Mishrilal Hotel) की मखनिया लस्सी इतनी गाढ़ी होती है कि उसे चम्मच से खाना पड़ता है।

मावा कचौरी (Mawa Kachori)

मिठाई प्रेमियों के लिए यह जन्नत है। कचौरी के अंदर मावा और ड्राई फ्रूट्स भरकर उसे चाशनी (Sugar Syrup) में डुबोया जाता है।खासियत: इसकी शुरुआत जोधपुर से ही हुई थी। जनता स्वीट होम (Janta Sweet Home) की मावा कचौरी विश्व प्रसिद्ध है।https://www.jantasweethome.com/?utm_source=google&utm_medium=wix_google_business_profile&utm_campaign=11654435988487670866

प्याज़ कचौरी (Pyaaz Kachori)

हिंग और मसालों के साथ भुने हुए प्याज़ की यह कचौरी सुबह के नाश्ते के लिए बेस्ट है।

गुलाब जामुन की सब्जी (Gulab Jamun ki Sabzi)

सुनकर चौंक गए? यह जोधपुर का एक सिग्नेचर व्यंजन (Signature Dish) है। यहाँ बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन को टमाटर और काजू की तीखी ग्रेवी में पकाया जाता है।टीम की राय: विजय रेस्टोरेंट (Vijay Restaurant) में इसका स्वाद हमारी टीम को सबसे बेहतरीन लगा।

चक्की की सब्जी (Chakki ki Sabzi)

यह गेहूं के आटे के ग्लूटन से बनाई जाने वाली एक बहुत ही पौष्टिक और स्वादिष्ट राजस्थानी करी है।

जोधपुर में ‘दाल-बाटी-चूरमा’ (Dal Baati Churma)

यदि आप एक ही छत के नीचे बेहतरीन राजस्थानी थाली का आनंद लेना चाहते हैं, तो जिप्सी (Gypsy) सबसे प्रसिद्ध है। लेकिन अगर आप लोकल ढाबा अनुभव (Local Dhaba Experience) चाहते हैं, तो ‘पधारो सा’ (Padharo Sa) जाएँ। हमारी टीम ने पाया कि यहाँ बाटी को शुद्ध देसी घी में डुबोकर और लहसुन की चटनी के साथ परोसा जाता है, जो असली मारवाड़ी स्वाद (Authentic Marwari Taste) देता है।

जोधपुर की प्रसिद्ध दुकानें और उनके मुख्य व्यंजन (Famous Food & Shops of Jodhpur)

  • श्री मिश्रीलाल होटल, क्लॉक टॉवर (सरदार मार्केट) के पास, मखनिया लस्सी प्रसिद्ध है।
  • शाही समोसा । क्लॉक टॉवर के पास शाही समोसा और मिर्ची वड़ा जोधपुर का सबसे चटपटा और मशहूर नाश्ता है।
  • जनता स्वीट्स नई सड़क पर है और मावा कचौरी और प्याज़ कचौरी मीठी प्रसिद्ध है।
  • जिप्सी डाइनिंग हॉल सरदारपुरा राजस्थानी थाली 30+ व्यंजनों वाली शाही मारवाड़ी थाली।
  • विजय रेस्टोरेंट ओल्ड सिटी स्थित (कचौरी गली) । गुलाब जामुन की सब्जी और तीखी और चटपटी ग्रेवी में डूबे गुलाब जामुन प्रसिद्ध है।
  • अनोखी मलाई रोटी दुकान। कचौरी गली,ओल्ड सिटी। मलाई रोटी और शुद्ध दूध की मलाई और केसर से बनी अनोखी मिठाई।
  • पधारो सा / मारवाड़ ढाबा रातानाडा / पावटा दाल-बाटी-चूरमा शुद्ध देसी घी और लहसुन की चटनी के साथ।
  • भीष्म / प्रेम प्रकाश गोल बिल्डिंग / सी रोड गुलाब जामुन मुँह में घुल जाने वाले गर्मागर्म गुलाब जामुन।
  • एम.वी. स्पाइसेस क्लॉक टॉवर मसाला चाय और मिर्च मथानिया मिर्च और बेहतरीन चाय के मसाले।
  • मोहनजी मिठाई वाला सोजती गेट राबड़ी के लड्डू जोधपुर के खास और पुराने ज़माने के स्वाद वाले लड्डू।

जोधपुर की ‘रबड़ी’ (Rabdi) और ‘लस्सी’ में क्या खास बात है जो इसे दुनिया भर में मशहूर बनाती है?

जोधपुर में दूध से बनी मिठाइयों की गुणवत्ता बहुत अधिक होती है क्योंकि यहाँ शुद्ध दूध की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में है।रबड़ी: यहाँ की रबड़ी बहुत गाढ़ी (Extra Creamy) होती है और इसे अक्सर मालपुआ या गुलाब जामुन के साथ परोसा जाता है।लस्सी: जोधपुर की मखनिया लस्सी (Makhaniya Lassi) दुनिया भर में मशहूर है। यह इतनी गाढ़ी होती है कि इसे गिलास से पीने के बजाय चम्मच से खाया जाता है। इसमें केसर, इलायची और ऊपर से सफेद मक्खन का एक बड़ा गोला डाला जाता है। श्री मिश्रीलाल होटल (Shree Mishrilal Hotel) की लस्सी और रबड़ी का स्वाद हमारी टीम ने सबसे बेहतरीन पाया है।

‘मावा कचौरी’ (Mawa Kachori) की शुरुआत जोधपुर से कैसे हुई और इसका स्वाद कैसा होता है?

माना जाता है कि मावा कचौरी (Mawa Kachori) का आविष्कार जोधपुर के प्रसिद्ध हलवाई स्वर्गीय रावत मल जी ने किया था। यह एक ऐसी कचौरी है जो नमकीन नहीं बल्कि पूरी तरह मीठी होती है।बनावट: इसके अंदर खोया (Mawa) और सूखे मेवों (Dry Fruits) का मिश्रण भरा जाता है, फिर इसे क्रिस्पी होने तक तला जाता है और अंत में गर्म चाशनी (Sugar Syrup) में डुबोया जाता है।स्वाद: यह बाहर से बहुत कुरकुरी और अंदर से मलाईदार होती है। Clock Tower (घंटाघर) और पुरानी सिटी की गलियों में सुबह-सुबह ताजी मावा कचौरी खाना एक जादुई अनुभव है। हमारी टीम का सुझाव है कि इसे गर्मागर्म ही खाएं ताकि आप इसके असली जायके को महसूस कर सकें।

जोधपुर की ‘रबड़ी’ (Rabdi) और ‘लस्सी’ में क्या खास बात है जो इसे दुनिया भर में मशहूर बनाती है?

जोधपुर में दूध से बनी मिठाइयों की गुणवत्ता बहुत अधिक होती है क्योंकि यहाँ शुद्ध दूध की उपलब्धता प्रचुर मात्रा में है।रबड़ी: यहाँ की रबड़ी बहुत गाढ़ी (Extra Creamy) होती है और इसे अक्सर मालपुआ या गुलाब जामुन के साथ परोसा जाता है।लस्सी: जोधपुर की मखनिया लस्सी (Makhaniya Lassi) दुनिया भर में मशहूर है। यह इतनी गाढ़ी होती है कि इसे गिलास से पीने के बजाय चम्मच से खाया जाता है। इसमें केसर, इलायची और ऊपर से सफेद मक्खन का एक बड़ा गोला डाला जाता है। श्री मिश्रीलाल होटल (Shree Mishrilal Hotel) की लस्सी और रबड़ी का स्वाद हमारी टीम ने सबसे बेहतरीन पाया है।

जोधपुर में ‘घेवर’ (Ghewar) का क्या महत्व है और इसे खरीदने के लिए सबसे अच्छी जगह कौन सी है?

घेवर राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई है, और जोधपुर में इसे बनाने की कला बेमिसाल है। यह एक मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखने वाली (Honeycomb-like) डिस्क होती है जिसे मैदे और घी से बनाया जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है।प्रकार: यहाँ आपको सादा घेवर, पनीर घेवर (Paneer Ghewar) और सबसे प्रसिद्ध मलाई घेवर (Malai Ghewar) की कई वैरायटी मिलती हैं।सबसे अच्छी दुकान: हमारी टीम के अनुसार, मूलजी स्वीट्स (Moolji Sweets) और जनता स्वीट होम (Janta Sweet Home) घेवर के लिए सबसे भरोसेमंद नाम हैं। जोधपुर में घेवर को पुराने पारंपरिक तरीके से लकड़ियों की आंच पर बनाया जाता है, जो इसे एक स्मोकी और रिच फ्लेवर देता है। त्योहारों जैसे तीज और रक्षाबंधन पर यहाँ घेवर की भारी डिमांड रहती है।

जोधपुर में ‘दूध-जलेबी’ (Doodh Jalebi) का कॉम्बिनेशन कहाँ सबसे अच्छा मिलता है?

जोधपुर की सर्द रातों में दूध-जलेबी खाना एक रस्म की तरह है। पुराने शहर में वैष्णव स्वीट्स (Vaishnav Sweets) और Clock Tower के पास की छोटी दुकानें इसके लिए मशहूर हैं। यहाँ लोहे की बड़ी कड़ाही में दूध को घंटों उबाला जाता है और फिर केसरिया जलेबी के साथ मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है। यह अनुभव आपको किसी भी मॉडर्न कैफे से ज्यादा सुकून देगा।

क्या जोधपुर से मिठाइयाँ ‘एक्सपोर्ट’ या ‘पार्सल’ (Courier/Packing) की जा सकती हैं?

जी हाँ, जोधपुर की बड़ी दुकानें जैसे जनता स्वीट होम (Janta Sweet Home) और जोधपुर स्वीट्स अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैकिंग (Leak-proof & Vacuum Packing) प्रदान करती हैं।टिप: यदि आप घेवर (Ghewar) या मावा कचौरी ले जा रहे हैं, तो उन्हें ‘टिन बॉक्स’ में पैक करवाएं।शेल्फ लाइफ: ड्राई फ्रूट चक्की और गुलाब हलवा 15-20 दिनों तक खराब नहीं होते, जबकि मलाई वाली मिठाइयाँ 24-48 घंटों के भीतर खा लेनी चाहिए। हमारी टीम का सुझाव है कि हवाई यात्रा (Air Travel) के लिए हमेशा ‘ड्राई स्वीट्स’ को ही प्राथमिकता दें।

जोधपुर में ‘गुलाब हलवा’ (Gulab Halwa) और ‘गुलाब जामुन’ के बीच क्या अंतर है?

: बहुत से पर्यटक नाम के कारण भ्रमित हो जाते हैं। गुलाब जामुन (Gulab Jamun) मावे की गोलियां होती हैं जिन्हें तलकर चाशनी में डुबोया जाता है, जबकि गुलाब हलवा (Gulab Halwa) एक ठोस बर्फी की तरह दिखने वाली मिठाई है जो दूध को बहुत अधिक गाढ़ा (Solidify) करके बनाई जाती है। हमारी टीम (Our Team) ने जब चतुर्भुज रमेशचंद्र (Chaturbhuj Rameshchand) पर इसे चखा, तो पाया कि इसका स्वाद चॉकलेट और मावे का एक अद्भुत मिश्रण है। इसे ‘गुलाब’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका रंग गहरा और खुशबू गुलाब की तरह रूहानी होती है, हालाँकि इसमें गुलाब के फूल नहीं डाले जाते

जोधपुर में मिठाइयों की शुद्धता (Purity) की पहचान कैसे करें?

जोधपुर के पुराने और प्रतिष्ठित हलवाई जैसे मूलजी (Moolji) या पनिहार (Parihar) आज भी अपनी साख बचाने के लिए शुद्ध देसी घी और ताज़ा मावे का इस्तेमाल करते हैं।पहचान: शुद्ध मिठाई की सबसे बड़ी पहचान उसकी महक है। असली देसी घी से बनी मिठाई हाथ में लेने पर चिकनाहट नहीं, बल्कि एक रूहानी खुशबू छोड़ती है।टीम की राय: हमेशा उन दुकानों से खरीदें जहाँ ग्राहकों की भीड़ (High Turnover) ज्यादा हो, क्योंकि वहां स्टॉक हमेशा ताज़ा मिलता है। पुराने शहर (Old City) की गलियों में स्थित छोटी पुश्तैनी दुकानें अक्सर बड़े शोरूम्स की तुलना में ज्यादा शुद्ध स्वाद प्रदान करती हैं।

क्या जोधपुर में ‘शुगर-फ्री’ मिठाइयाँ (Sugar-free Sweets in Jodhpur) भी मिलती हैं?

जी हाँ, बदलते समय के साथ जोधपुर के पुराने हलवाइयों ने भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक पर्यटकों के लिए कई विकल्प तैयार किए हैं।कहाँ मिलेगी: जोधपुर स्वीट्स (Jodhpur Sweets) और श्री कांजी (Shri Kanji Sweets) पर आपको अंजीर चक्की, खजूर के लड्डू और ड्राई फ्रूट बाइट्स मिलते हैं जिनमें अतिरिक्त चीनी (Added Sugar) नहीं होती।लोकल टिप: हमारी टीम ने यह भी पाया कि आप यहाँ से बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन (Dry Gulab Jamun) भी खरीद सकते हैं, जो प्राकृतिक रूप से कम मीठे होते हैं और इनका उपयोग घर पर सब्जी बनाने में भी किया जा सकता है।

जोधपुर की सबसे प्रसिद्ध मिठाई कौन सी है जिसे घर के लिए पैक करवाना चाहिए? (Best Sweet to Carry from Jodhpur)

अगर आप जोधपुर से अपने शहर या घर के लिए मिठाई ले जाना चाहते हैं, तो गुलाब हलवा (Gulab Halwa) और मोंठ के लड्डू सबसे बेहतरीन विकल्प हैं।कारण: इनकी शेल्फ लाइफ (Shelf Life) लंबी होती है और ये यात्रा के दौरान खराब नहीं होते।टीम का अनुभव: हमारी टीम (Our Team) ने पाया कि चतुर्भुज (Chaturbhuj) का गुलाब हलवा 15-20 दिनों तक ताज़ा रहता है। इसके अलावा, जनता स्वीट होम (Janta Sweet Home) की मावा कचौरी (Mawa Kachori) भी बहुत प्रसिद्ध है, लेकिन इसे 24 से 48 घंटों के भीतर खा लेना चाहिए। यदि आप हवाई यात्रा (Air Travel) कर रहे हैं, तो सूखे मेवों की चक्की (Dry Fruit Chakki) भी एक शानदार उपहार हो सकता है।

जोधपुर में ‘स्ट्रीट फूड टूर’ (Street Food Tour) के लिए सबसे अच्छा रूट कौन सा है?

गूगल पर लोग अक्सर जोधपुर के फूड रूट के बारे में पूछते हैं। हमारी टीम (Our Team) के अनुसार सबसे बेहतरीन रूट नई सड़क से शुरू होकर क्लॉक टॉवर (Clock Tower) की ओर जाना है।स्टेप 1: नई सड़क पर जनता स्वीट्स (Janta Sweets) की प्याज़ कचौरी से शुरुआत करें।स्टेप 2: आगे बढ़कर शाही समोसा (Shahi Samosa) पर मिर्ची वड़ा चखें।स्टेप 3: सरदार मार्केट के अंदर मिश्रीलाल (Mishrilal) की मखनिया लस्सी का आनंद लें।स्टेप 4: अंत में कचौरी गली में चतुर्भुज (Chaturbhuj) के गुलाब जामुन से अपनी यात्रा पूरी करें। यह पूरा रूट पैदल तय किया जा सकता है और आपको जोधपुर की असली संस्कृति (Authentic Culture) का अनुभव कराता है

जोधपुर की ‘मलाई रोटी’ (Malai Roti) क्या है और यह साधारण रोटी से कैसे अलग है?

बहुत से लोग नाम सुनकर इसे गेहूं की रोटी समझ लेते हैं, लेकिन मलाई रोटी (Malai Roti) जोधपुर की एक दुर्लभ और अत्यंत स्वादिष्ट मिठाई है। यह दूध की मलाई को जमाकर बनाई जाती है और इसकी शक्ल बिल्कुल एक पतली चपाती जैसी होती है।तैयारी: इसे बनाने में घंटों तक दूध को उबालकर उसकी मलाई की परतों को इकट्ठा किया जाता है और फिर केसरिया चाशनी में डुबोया जाता है।कहाँ मिलेगी: यह मिठाई बहुत ही चुनिंदा दुकानों पर मिलती है, जिनमें ओल्ड सिटी की अनोखी मलाई रोटी (Anokhi Malai Roti) सबसे प्रसिद्ध है। यह इतनी नाजुक होती है कि इसे संभालकर रखना पड़ता है। हमारी टीम का सुझाव है कि इसे ताज़ा ही खाएं, क्योंकि यह फ्रिज में रखने पर अपना असली टेक्सचर खो देती है।

क्या जोधपुर में ‘मथानिया मिर्च’ (Mathania Chilli) का खाने में विशेष महत्व है?

बिल्कुल! जोधपुर के खाने का जो गहरा लाल रंग और तीखापन आप देखते हैं, उसका श्रेय मथानिया मिर्च (Mathania Chilli) को जाता है। यह मिर्च जोधपुर के पास मथानिया गाँव में उगाई जाती है और अपनी रंगत व स्वाद के लिए विश्व प्रसिद्ध है।उपयोग: जोधपुर के मशहूर ‘लाल मास’ (Laal Maas) और ‘केर सांगरी’ में इसी मिर्च का पेस्ट इस्तेमाल होता है।खरीदारी टिप: यदि आप असली मथानिया मिर्च खरीदना चाहते हैं, तो क्लॉक टॉवर के पास एम.वी. स्पाइसेस (MV Spices) जैसी पुरानी दुकानों पर जाएँ। हमारी टीम का अनुभव है कि यह मिर्च तीखी होने के साथ-साथ खाने को एक सोंधी खुशबू (Earthy Aroma) भी देती है।

जोधपुर की ‘गुलाब जामुन की सब्जी’ (Gulab Jamun ki Sabzi) का स्वाद कैसा होता है और इसे घर पर बनाने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जोधपुर की गुलाब जामुन की सब्जी (Gulab Jamun ki Sabzi) एक शाही मारवाड़ी व्यंजन है जो मेहमाननवाजी का प्रतीक माना जाता है। इसका स्वाद तीखा, चटपटा और हल्का मलाईदार होता है।बनाने की विधि: इसमें बिना चाशनी वाले ‘फीके गुलाब जामुन’ (Unsweetened Gulab Jamun) का उपयोग होता है। ग्रेवी बनाने के लिए दही, काजू का पेस्ट, टमाटर और राजस्थानी मसालों को घी में पकाया जाता है।सावधानी: हमारी टीम (Our Team) ने एक्सपर्ट से सीखा कि कि गुलाब जामुन को ग्रेवी में तभी डालना चाहिए जब आप खाना परोसने वाले हों, वरना वे ज्यादा गल सकते हैं। यदि आप जोधपुर में हैं, तो विजय रेस्टोरेंट (Vijay Restaurant) या ओल्ड सिटी (Old City) के भोजनालयों में इसे ज़रूर आज़माएँ। स्थानीय गाइड (Local Guides) बताते हैं कि यह डिश शादियों के मेनू की जान होती है।

जोधपुर का ‘मिर्ची वड़ा’ (Jodhpuri Mirchi Vada) अन्य राजस्थानी वड़ों से कैसे अलग है?

जोधपुर का मिर्ची वड़ा केवल एक नाश्ता नहीं, बल्कि यहाँ की पहचान है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल होने वाली बड़ी हरी मिर्च और उसके अंदर भरा जाने वाला मसालेदार आलू का मिश्रण है।अंतर: अन्य शहरों में मिर्च को सादा बेसन में तला जाता है, लेकिन जोधपुर में आलू के मसाले में हींग, साबुत धनिया और अमचूर का भारी उपयोग होता है।टीम का अनुभव: हमारी टीम (Our Team) ने जब शाही समोसा (Shahi Samosa) पर इसे चखा, तो पाया कि इसकी बाहरी बेसन की परत बहुत पतली और कुरकुरी होती है, जो अंदर की मिर्च के तीखेपन को संतुलित करती है। स्थानीय गाइड (Local Guides) के अनुसार, इसे हमेशा गर्मागर्म इमली की चटनी के साथ ही खाना चाहिए

‘जोधपुरी काबुली’ (Jodhpuri Kabuli) क्या है और इसे जोधपुर का शाही भोजन क्यों कहा जाता है?

बहुत से लोग इसे मांसाहारी बिरयानी समझने की गलती करते हैं, लेकिन जोधपुरी काबुली (Kabuli) एक शुद्ध शाकाहारी और अत्यंत समृद्ध (Rich) पुलाव है।विशेषता: इसमें चावल की परतों के बीच सब्जियाँ, गट्टे, ब्रेड के तले हुए टुकड़े, काजू, किशमिश और अनार के दाने डाले जाते हैं। इसे दही के साथ दम देकर पकाया जाता है।इतिहास: यह मारवाड़ के शाही परिवारों में विशेष उत्सवों पर बनाया जाता था। हमारी टीम का अनुभव है कि इसका स्वाद शाही और नवाबी (Royal Experience) होता है। यदि आप जोधपुर में किसी शादी या जिप्सी (Gypsy) जैसे रेस्टोरेंट में हैं, तो काबुली चखना न भूलें।

जोधपुर में ‘दही की कचौरी’ और ‘प्याज़ की कचौरी’ (Pyaaz Kachori) में क्या अंतर है?

प्याज़ कचौरी: यह मसालेदार भुने हुए प्याज़ और हींग के फ्लेवर के साथ आती है। यह कड़क (Crispy) होती है और इसे यात्रा के दौरान ले जाया जा सकता है।दही कचौरी: यह राज कचौरी की तरह होती है जिसे बीच से तोड़कर उसमें मीठा दही, सोंठ, हरी चटनी और बारीक सेव डाली जाती है।खरीदारी टिप: जनता स्वीट होम (Janta Sweet Home) पर प्याज़ की कचौरी का वॉल्यूम सबसे ज्यादा रहता है। हमारी टीम का सुझाव है कि सुबह के नाश्ते में प्याज़ कचौरी और शाम के समय दही कचौरी का आनंद लेना चाहिए।

क्या जोधपुर का ‘लाल मास’ (Laal Maas) बहुत तीखा होता है? इसे कहाँ खाना चाहिए?

‘लाल मास’ जोधपुर के मांसाहारी व्यंजनों का राजा है। यह अपनी रंगत के लिए मथानिया मिर्च (Mathania Mirch) पर निर्भर करता है।स्वाद: यह तीखा तो होता है, लेकिन मथानिया मिर्च की खासियत यह है कि यह जलन के बजाय एक गहरा स्वाद और लाल रंग देती है। इसे शुद्ध देसी घी और मटके में धीमी आंच पर पकाया जाता है।कहाँ खाएं: रातानाडा क्षेत्र के रेस्टोरेंट्स और ओन द रॉक्स (On The Rocks) जैसे स्थानों पर इसका सबसे प्रामाणिक स्वाद मिलता है। हमारी टीम ने पाया कि इसे बाजरे के सोगरे (Millet Rotis) के साथ खाने पर असली मारवाड़ी स्वाद उभर कर आता है।

📊 जोधपुर की टॉप मिठाई दुकानें और उनके सिग्नेचर आइटम (Jodhpur famous sweet shops )

  • मूलजी स्वीट्स (Moolji Sweets) सोजती गेट पर है और मलाई घेवर और पनीर घेवर हेतु प्रसिद्ध है।
  • जोधपुर स्वीट्स (Jodhpur Sweets) सी रोड, सरदारपुरा में है और गुलाब हलवा और रसमलाई आकर्षण है।
  • श्री कांजी स्वीट्स (Shri Kanji) नई सड़क पर है और मेवा बाटी और ड्राई फ्रूट चक्की प्रसिद्ध है।
  • वैष्णव स्वीट्स (Vaishnav Sweets) ओल्ड सिटी में है और गरमा-गर्म जलेबी और दूध-जलेबी प्रसिद्ध है।
  • पोकर स्वीट होम (Pokar Sweets) रेलवे स्टेशन के पास है और रोड बजट-फ्रेंडली ताज़ा मिठाइयाँ मिलती है।

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