छोटू मोटू जोशी की सब्जी पूड़ी और लस्सी का स्वाद नहीं लिया तो फिर बीकानेर में क्या किया ?

बीकानेर रेलवे स्टेशन के पास स्थित छोटू मोटू जोशी (Chhotu Motu Joshi) की दुकान का नाम सुनते ही हर खाने-पीने के शौकीन के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। यह दुकान बीकानेर के स्वाद की एक ऐसी विरासत है, जहाँ सुबह के नाश्ते से लेकर रात की मिठाई तक, सब कुछ लाजवाब है। हमारी टीम ने जब यहाँ के व्यंजनों का स्वाद लिया, तो हमें बीकानेर की असली मेहमाननवाजी का अहसास हुआ।यहाँ छोटू मोटू जोशी की उन खास चीजों का विस्तृत विवरण है जिन्हें आपको बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए:

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छोटू मोटू जोशी की मशहूर सब्जी-पूड़ी (Famous Sabzi Poori)

छोटू मोटू जोशी की सब्जी-पूड़ी बीकानेर में नाश्ते का दूसरा नाम है। यहाँ की पूड़ी शुद्ध देसी घी में तली जाती है और इसके साथ दी जाने वाली आलू की रसेदार सब्जी का स्वाद बेमिसाल है।

अनोखा स्वाद: इस सब्जी के साथ मिलने वाली दाना मेथी की खट्टी-मीठी चटनी इसका असली राज है। यह स्वाद आपको राजस्थान के पारंपरिक घरों की याद दिला देता है।

हमारी टीम का अनुभव: हमने देखा कि पूड़ियाँ एकदम गरमा-गरम और फूली हुई परोसी जाती हैं। सब्जी में मसालों का संतुलन ऐसा है कि यह न तो बहुत तीखी है और न ही फीकी।

छोटू मोटू जोशी की मेथी और आलू की सब्जी में क्या खास है जो इसे अन्य दुकानों से अलग बनाता है?

बीकानेर की अन्य दुकानों पर साधारण आलू-कचौरी या सब्जी मिलती है, लेकिन यहाँ सब्जी की ग्रेवी (Gravy) और दाना मेथी (Fenugreek) का कॉम्बिनेशन इसे ‘यूनिक’ बनाता है। मेथी को रात भर भिगोकर उसे गुड़ और मसालों के साथ पकाकर एक गाढ़ी चटनी बनाई जाती है, जिसे आलू की सब्जी के ऊपर डालकर परोसा जाता है। यह खट्टा-मीठा और तीखा स्वाद (Sweet, Sour & Spicy) एक साथ देता है। यहाँ की पूड़ियों का आटा भी विशेष रूप से गूंथा जाता है ताकि वे तलने के बाद ज्यादा देर तक कुरकुरी बनी रहें।

छोटू मोटू जोशी नाश्ता गाइड: 7 रोचक तथ्य (Quick Fact Box)

  • 70 साल पुरानी विरासत: यह दुकान बीकानेर के सबसे पुराने और भरोसेमंद फूड ब्रांड्स में से एक है।
  • स्पेशल मसाला: सब्जी में इस्तेमाल होने वाला गरम मसाला आज भी घर पर ही तैयार किया जाता है।
  • पाचन में सहायक: दाना मेथी की चटनी न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि भारी नाश्ते को पचाने में भी मदद करती है।
  • जीके फैक्ट (GK Fact): बीकानेर के खान-पान के इतिहास में इस दुकान को ‘किंग ऑफ ब्रेकफास्ट’ माना जाता है।
  • ताज़गी का वादा: यहाँ पूड़ियाँ आपकी आँखों के सामने तलकर सीधे आपकी थाली में आती हैं।
  • सार्थक राय: यहाँ की मेथी वाली चटनी का स्वाद लेने के बाद अपनी राय देना न भूलें, क्योंकि यह स्वाद बीकानेर की पहचान है।

छोटू मोटू जोशी के 5 “गोल्डन” फैक्ट्स (Quick Fact Box)

  • प्रसिद्ध अतिथि: इस दुकान पर कई बड़ी फ़िल्मी हस्तियाँ और राजनेता बीकानेरी स्वाद का लुत्फ़ उठा चुके हैं।
  • लोकेशन: बीकानेर रेलवे स्टेशन के एग्जिट गेट (Exit Gate) के बिल्कुल सामने।
  • समय: सुबह 7:00 बजे से रात 10:30 बजे तक (नाश्ता 11 बजे तक खत्म हो जाता है)।
  • पैकिंग सुविधा: यहाँ से आप ताज़े रसगुल्ले और मिठाइयाँ स्पेशल पैकिंग में घर ले जा सकते हैं।
  • शुद्धता: यहाँ आज भी केवल शुद्ध देसी घी (Pure Desi Ghee) और ताज़े दूध का ही उपयोग होता है।

छोटू मोटू जोशी के रसगुल्ले और रसमलाई (Rasgulla & Rasmalai):

बीकानेर को ‘रसगुल्लों का शहर’ बनाने में इस दुकान का बड़ा योगदान है। यहाँ के रसगुल्ले अपनी बेमिसाल स्पंज और सफेदी के लिए जाने जाते हैं।

खासियत: रसमलाई में केसर और पिस्ते का इतना गहरा स्वाद होता है कि एक बार खाने के बाद आप इसे कभी नहीं भूलेंगे।

छोटू मोटू जोशी केसरिया कुल्फी और लस्सी (Saffron Kulfi & Lassi):

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भारी नाश्ते के बाद यहाँ की गाढ़ी केसरिया लस्सी, जो मिट्टी के कुल्हड़ में मिलती है, अमृत समान है।खासियत: कुल्फी को आज भी पुराने तरीके से जमाया जाता है, जिससे इसमें बर्फ के क्रिस्टल नहीं बल्कि शुद्ध रबड़ी का अहसास होता है।

हमने देखा कि रेलवे स्टेशन के पास होने के बावजूद यहाँ की गुणवत्ता (Quality) कभी नहीं गिरी। हमारी टीम ने जब लोकल ढाबे (Local Eatery) के पास बैठकर लोगों से बात की, तो पता चला कि कई लोग केवल यहाँ की सब्जी-पूड़ी खाने के लिए दूसरी ट्रेनों से रुकते हैं। कम बजट में यह जगह आपके पूरे सफर का सबसे सस्ता और सबसे शाही अनुभव साबित हो सकती है।

छोटू मोटू जोशी कौन हैं और इस अनोखे नाम के पीछे की कहानी क्या है?

‘छोटू मोटू जोशी’ दरअसल बीकानेर के एक प्रतिष्ठित परिवार द्वारा संचालित ब्रांड है। इस नाम के पीछे की कहानी यहाँ के संचालकों के आत्मीय और मिलनसार स्वभाव से जुड़ी है। यह नाम आज बीकानेर की शुद्धता और परंपरा (Purity & Tradition) का पर्याय बन चुका है। दुकान के मालिक आज भी उसी सादगी और सेवा भाव से ग्राहकों का स्वागत करते हैं, जैसा उनके पूर्वजों ने दशकों पहले शुरू किया था। यहाँ का हर कर्मचारी खुद को इस ‘छोटू मोटू’ परिवार का हिस्सा मानता है।

छोटू मोटू जोशी की मशहूर दुकान बीकानेर में कहाँ स्थित है और वहां कैसे पहुँचें?

छोटू मोटू जोशी की सबसे प्रसिद्ध और पुरानी दुकान बीकानेर रेलवे स्टेशन (Bikaner Railway Station) के बिल्कुल सामने, स्टेशन रोड पर स्थित है। यह स्थान शहर का मुख्य केंद्र है, जिससे पर्यटकों के लिए यहाँ पहुँचना बेहद आसान हो जाता है। जैसे ही आप रेलवे स्टेशन के ‘एग्जिट गेट’ (Exit Gate) से बाहर निकलते हैं, आपको सामने ही इस दुकान की बोर्ड और वहां उमड़ती भीड़ दिख जाएगी। हमारी टीम का सुझाव है कि यदि आप ट्रेन से बीकानेर आ रहे हैं, तो होटल जाने से पहले यहाँ का नाश्ता करना आपकी यात्रा की सबसे बेहतरीन शुरुआत होगी। आप ऑटो या ई-रिक्शा के ज़रिए शहर के किसी भी कोने से मात्र ₹20-50 में यहाँ पहुँच सकते हैं।

छोटू मोटू जोशी की आलू-पूड़ी और दाना मेथी की सब्जी में ऐसा क्या खास है जो इसे ‘अद्वितीय’ बनाता है?

यहाँ की आलू-पूड़ी और दाना मेथी की सब्जी (Dana Methi Sabzi Poori) का मेल स्वाद का एक ऐसा आविष्कार है जो आपको कहीं और नहीं मिलेगा। पूड़ियाँ शुद्ध देसी घी (Pure Desi Ghee) में तली जाती हैं, जो बहुत ही नरम और सोंधी होती हैं। इसकी असली जान ‘दाना मेथी की चटनी’ है, जिसे गुड़, अमचूर और विशेष मसालों के साथ पकाकर तैयार किया जाता है। आलू की रसेदार तीखी सब्जी के ऊपर जब यह खट्टी-मीठी मेथी डाली जाती है, तो यह स्वाद के सभी तंतुओं (Taste Buds) को सक्रिय कर देती है। हमारी टीम ने अनुभव किया कि यह कॉम्बिनेशन न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत अच्छा माना जाता है क्योंकि मेथी पाचन (Digestion) में सहायक होती है।

छोटू मोटू जोशी के रसगुल्ले और स्पंजी रसगुल्लों की क्या विशेषता है और वे इतने मशहूर क्यों हैं?

बीकानेर को ‘रसगुल्लों का शहर’ कहा जाता है और छोटू मोटू जोशी के स्पंजी रसगुल्ले (Spongy Rasgullas) इस खिताब को सही साबित करते हैं। यहाँ के रसगुल्ले अपनी बेमिसाल सफेदी, कोमलता और रस के सही संतुलन के लिए जाने जाते हैं। इन्हें शुद्ध गाय के दूध के छेने से बनाया जाता है और चाशनी का तापमान इस तरह नियंत्रित किया जाता है कि रसगुल्ला अंदर तक जालीदार और स्पंजी बने। हमारी टीम ने पाया कि ये रसगुल्ले मुँह में जाते ही मलाई की तरह घुल जाते हैं और इनकी मिठास बहुत ही संतुलित (Balanced Sweetness) होती है। यही कारण है कि लोग यहाँ से डिब्बाबंद रसगुल्ले देश-विदेश तक ले जाते हैं।

छोटू मोटू जोशी की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था और इसका राजसी रसोई से क्या संबंध है?

छोटू मोटू जोशी की स्थापना राजसी रसोइयों के अनुभव को आम जनता तक पहुँचाने के लिए की गई थी। संस्थापक छोटूलाल जोशी शाही रसोइयों में काम करते थे, जहाँ खाना बहुत समृद्ध (Rich) होता था और हलवा व अन्य मिठाइयाँ शुद्ध घी में बनाई जाती थीं। उसी राजसी स्वाद और ‘प्योरिटी’ (Purity) को उन्होंने अपनी दुकान के ज़रिए आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया। आज भी जोशी जी इसी परंपरा को ‘ट्रेडमार्क’ के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं।

छोटू मोटू जोशी के रसगुल्ले बनाने की प्रक्रिया अन्य आधुनिक दुकानों से कैसे भिन्न है?

जहाँ आज अधिकांश दुकानों में मशीनों से पनीर निकाला जाता है और रसगुल्ले बनाए जाते हैं, छोटू मोटू जोशी में सब कुछ ‘मैन्युअल’ (Manual) है। यहाँ पनीर हाथों से मथा जाता है ताकि उसकी कोमलता बनी रहे। इसके बाद, रसगुल्लों को प्राकृतिक रूप से ठंडा करने के लिए पानी और बड़े पंखों का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि इनके रसगुल्लों का स्वाद और बनावट (Texture) एकदम अलग और पारंपरिक होती है।

छोटू मोटू जोशी: राजसी रसोइयों से स्टेशन की गलियों तक (History & Heritage) सफ़र कैसा रहा?

इस दुकान का इतिहास उतना ही पुराना और गहरा है जितना कि स्वयं बीकानेर शहर। इसकी जड़ें 1488 (राव बीका द्वारा बीकानेर की स्थापना) तक जाती हैं।राजसी विरासत (Royal Legacy): जगमोहन जोशी जी के दादा, छोटूलाल जोशी (Chotulal Joshi), बीकानेर के राजसी रसोइयों (Royal Kitchens) में काम करते थे। उन्होंने अपने बड़े भाई मोतूलाल जोशी के साथ मिलकर इस दुकान की शुरुआत की थी।महाराजा गंगा सिंह का कनेक्शन: जिस इमारत में आज यह दुकान चलती है, उसका निर्माण स्वयं महाराजा गंगा सिंह (Maharaja Ganga Singh) ने करवाया था। ऐतिहासिक रूप से, यह इमारत पहले एक कॉलेज हॉस्टल हुआ करती थी।शुद्धता का प्रतीक: आज भी इस दुकान का मूल मंत्र है—”शुद्धता का प्रतीक, छोटू मोटू जोशी”। जोशी जी के अनुसार, भले ही आज लोग हल्के तेल पसंद करते हों, लेकिन वे आज भी गुणवत्ता और ताज़गी से समझौता नहीं करते।

हाथ से बना जादू: कोई मशीन नहीं, सिर्फ हुनर (Handmade Tradition)जब आप इस ऊँची छत वाली पुरानी इमारत के भीतर कदम रखते हैं, तो आप समय में पीछे चले जाते हैं। यहाँ कोई आधुनिक मशीन नज़र नहीं आएगी; सारा काम आज भी हाथों (Handmade) से ही किया जाता है।विशाल कड़ाहे (Huge Iron Kadais): यहाँ के कारीगर बड़े-बड़े लोहे के कड़ाहों में शुद्ध घी के पकवान तैयार करते हैं।रसगुल्लों का विज्ञान: यहाँ रसगुल्लों के लिए पनीर (Paneer) भी हाथों से तैयार किया जाता है। रसगुल्लों को ठंडा करने के लिए पानी और विशाल पंखों का पारंपरिक तरीका उपयोग में लाया जाता है, जो उन्हें उनकी खास बनावट और स्पंज प्रदान करता है।

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