जोधपुर के मशहूर चतुर्भुज के गुलाब जामुन: स्वाद ऐसा कि मुँह में घुल जाए (Famous Chaturbhuj Gulab Jamun Jodhpur)

यदि आप जोधपुर (Blue City) की यात्रा पर हैं और आपने यहाँ के चतुर्भुज के गुलाब जामुन (Chaturbhuj Gulab Jamun) नहीं चखे, तो मान लीजिए आपकी यात्रा अधूरी है। जोधपुर अपनी चटपटी कचौरियों (Spicy Kachoris) के लिए जितना प्रसिद्ध है, उतना ही यहाँ के मीठे का भी बोलबाला है। हमारी टीम (Our Team) ने हाल ही में पुराने शहर की उन तंग गलियों का दौरा किया जहाँ पिछले कई दशकों से यह स्वाद राज कर रहा है।

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कहाँ स्थित है यह दुकान? (Location of Chaturbhuj Gulab Jamun)

यह छोटी लेकिन ऐतिहासिक दुकान जोधपुर के पुराने शहर की कचौरी गली (Kachori Gali) में पाल रोड पर स्थित है। इसे जोधपुर की सबसे पुरानी मिठाई की दुकान (Oldest Sweet Shop in Jodhpur) माना जाता है।

क्यों खास हैं चतुर्भुज के गुलाब जामुन? (Why Chaturbhuj Gulab Jamun is Famous?)

जोधपुर में गुलाब जामुन की कई दुकानें हैं, लेकिन चतुर्भुज का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। इसकी कुछ मुख्य विशेषताएं यहाँ दी गई हैं:

  • शुद्ध देसी घी (Pure Desi Ghee): यहाँ के गुलाब जामुन आज भी शुद्ध देसी घी में तले जाते हैं, जिसकी महक (Aroma) आपको दूर से ही अपनी ओर खींच लेगी।
  • मुलायम और रसीले (Soft and Juicy): ये गुलाब जामुन इतने नरम (Soft) होते हैं कि मुँह में रखते ही मक्खन की तरह घुल जाते हैं।
  • बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन (Dry Gulab Jamun): यहाँ विशेष रूप से फीके गुलाब जामुन (Sugar-free Gulab Jamun) भी मिलते हैं, जिनका उपयोग जोधपुर की मशहूर ‘गुलाब जामुन की सब्जी’ (Gulab Jamun ki Sabzi) बनाने में किया जाता है।
  • टीम का अनुभव (Team Experience): हमने वहां के स्थानीय लोगों (Local People) से बात की, जिन्होंने बताया कि यहाँ का स्वाद (Taste) पिछले 50 सालों से बिल्कुल वैसा ही बना हुआ

चतुर्भुज गुलाब जामुन कीमत और बजट (Price and Budget Guide)

अगर आप बजट ट्रेवल (Budget Travel) कर रहे हैं, तो यहाँ का स्वाद आपके लिए एकदम परफेक्ट है:प्रति प्लेट (Per Plate): ₹30 – ₹50 (2 पीस)प्रति किलो (Per KG): ₹400 – ₹500 (ताजा भाव दुकान पर चेक करें)

📊 क्विक फैक्ट बॉक्स Chaturbhuj Gulab Jamun

  • प्रसिद्ध व्यंजन (Famous Dish) चतुर्भुज के गुलाब जामुन (Chaturbhuj Gulab Jamun)
  • लोकेशन (Location) कचौरी गली, जोधपुर (Kachori Gali, Jodhpur)
  • समय (Timings) सुबह 10:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
  • जरूर ट्राई करें (Must Try) गर्मागर्म गुलाब जामुन और ताजी रबड़ी (Hot Gulab Jamun with Rabri)

बिना चाशनी वाले ‘फीके’ गुलाब जामुन

चतुर्भुज की एक और खासियत उनके बिना चाशनी वाले (Dry/Sugar-free) गुलाब जामुन हैं। जोधपुर में इनका उपयोग विश्व प्रसिद्ध ‘गुलाब जामुन की सब्जी’ (Gulab Jamun ki Sabzi) बनाने के लिए किया जाता है। हमारी टीम ने यहाँ से यह खास अनुभव लिया कि लोग यहाँ से भारी मात्रा में ये फीके गुलाब जामुन पैक करवाकर घर ले जाते हैं।

गुलाब जामुन की सब्जी: जोधपुर का अनोखा आविष्कार

अगर आप इस दुकान पर जा रहे हैं, तो यहाँ के बिना चाशनी वाले गुलाब जामुन भी जरूर देखें। जोधपुर में इन फीके गुलाब जामुन का इस्तेमाल ‘गुलाब जामुन की सब्जी’ (Gulab Jamun ki Sabzi) बनाने में होता है।

हमारी टीम की राय: यह सब्जी टमाटर, काजू और मसालों की ग्रेवी में बनती है। यदि आप विजय रेस्टोरेंट (Vijay Restaurant) या किसी स्थानीय भोजनालय में जाते हैं, तो इसे ट्राई करना न भूलें

जोधपुर में ‘चतुर्भुज’ के असली गुलाब जामुन की पहचान क्या है? (How to identify Original Shop?)

जोधपुर में ‘चतुर्भुज’ नाम से कई दुकानें खुल गई हैं, लेकिन मूल और सबसे पुरानी दुकान (Original & Oldest Shop) पुरानी सिटी की कचौरी गली (Kachori Gali) में स्थित है। असली पहचान यहाँ का सरल ढांचा और वह पुराना अनुभव है जो आपको दुकान के पास जाते ही महसूस होगा। यहाँ के गुलाब जामुन का आकार (Shape) और सिकाई का गहरा रंग (Deep Brown Color) इसकी असली पहचान है। हमारी टीम का सुझाव है कि आप हमेशा मुख्य दुकान से ही खरीदारी करें।

चतुर्भुज के ‘फीके गुलाब जामुन’ (Unsweetened Gulab Jamun) क्यों खरीदे जाते हैं?

जोधपुर की एक बहुत ही अनूठी परंपरा (Unique Tradition) है – ‘गुलाब जामुन की सब्जी’ (Gulab Jamun ki Sabzi)। चतुर्भुज की दुकान पर बिना चाशनी वाले फीके गुलाब जामुन मिलते हैं। जोधपुर के घरों में मेहमानों के स्वागत के लिए इन गुलाब जामुन को दही, काजू और मसालों की शाही ग्रेवी (Royal Gravy) में पकाया जाता है। बहुत से पर्यटक (Tourists) इन फीके गुलाब जामुन को पैक करवाकर अपने साथ ले जाते हैं ताकि वे घर पर जोधपुर का यह खास स्वाद बना सकें।

क्या चतुर्भुज के गुलाब जामुन की ऑनलाइन होम डिलीवरी (Online Delivery) उपलब्ध है?

वर्तमान में चतुर्भुज की पुरानी दुकान से कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है, लेकिन कई लोकल डिलीवरी ऐप्स (Local Delivery Apps) और कूरियर सर्विसेज (Courier Services) के माध्यम से इसे मंगवाया जा सकता है। हमारी टीम ने पाया कि जोधपुर आने वाले लोग सीधे दुकान पर जाकर ताज़ा (Fresh) लेना ही पसंद करते हैं। पैकिंग (Packing) इतनी सुरक्षित होती है कि आप इसे हवाई यात्रा (Air Travel) के दौरान भी आराम से ले जा सकते हैं।

चतुर्भुज के गुलाब जामुन इतने खास क्यों हैं? (Key Success Factors)

हमारी टीम ने यहाँ के लोकल हलवाई (Local Sweet-makers) से बात की, तो उन्होंने कुछ सीक्रेट्स साझा किए:

  • धीमी आंच की सिकाई: इन गुलाब जामुन को लोहे की कड़ाही में बहुत ही धीमी आंच (Slow Cooking) पर सेका जाता है ताकि वे अंदर तक पकें।
  • मावे का चयन: यहाँ इस्तेमाल होने वाला मावा (Khoya) विशेष रूप से आसपास के गाँवों से मंगाया जाता है ताकि उसमें प्राकृतिक मिठास रहे।
  • चाशनी का गणित: यहाँ की चाशनी (Sugar Syrup) न तो बहुत गाढ़ी होती है और न ही बहुत चिपचिपी। इसमें केसर की पंखुड़ियों (Saffron Strands) का उपयोग किया जाता है।

क्या चतुर्भुज के गुलाब जामुन सर्दियों और गर्मियों में समान रूप से मिलते हैं?

: जी हाँ, जोधपुर की यह दुकान साल के 365 दिन खुली रहती है। हमारी टीम (Our Team) ने अनुभव किया कि सर्दियों में इन गर्मागर्म गुलाब जामुन का लुत्फ उठाना एक अलग ही सुख है, वहीं गर्मियों में लोग इन्हें अक्सर ठंडी रबड़ी (Rabri) के साथ खाना पसंद करते हैं। त्योहारों जैसे दीपावली या होली के समय यहाँ भारी भीड़ (Huge Rush) होती है, इसलिए उस दौरान जल्दी जाना ही समझदारी है।

चतुर्भुज के गुलाब जामुन की ‘शेल्फ लाइफ’ (Shelf Life) कितनी होती है?

शुद्ध मावे (Pure Mawa) और देसी घी से बने होने के कारण, ये गुलाब जामुन सामान्य तापमान पर 3 से 4 दिन तक बिल्कुल ताज़ा रहते हैं। यदि आप इन्हें फ्रिज (Refrigerator) में रखते हैं, तो ये एक हफ्ते तक खराब नहीं होते। हमारी टीम का सुझाव है कि खाने से पहले इन्हें हल्का गुनगुना (Warm) कर लें, इससे इनका असली स्वाद (Original Taste) वापस आ जाता है।

चतुर्भुज गुलाब जामुन वाला का ऐतिहासिक सफर (History and Legacy)

चतुर्भुज के गुलाब जामुन की शुरुआत लगभग 100 साल पहले एक छोटी सी रेहड़ी या खोखे से हुई थी। इसे शुरू करने वाले स्वर्गीय चतुर्भुज जी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी बनाई मिठाई एक दिन जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) बन जाएगी।

  • पुश्तैनी हुनर: चतुर्भुज जी के बाद उनकी आने वाली पीढ़ियों ने इस विरासत (Legacy) को संभाला। आज भी यहाँ वही पारंपरिक तरीका अपनाया जाता है जो एक सदी पहले था।
  • क्वालिटी का जुनून: शुरुआत में जब जोधपुर में साधन कम थे, तब भी मावे की शुद्धता (Purity of Mawa) से कभी समझौता नहीं किया गया। यही कारण है कि आज भी यहाँ का स्वाद (Taste) नहीं बदला है।
  • राजाओं का स्वाद: पुराने समय में यहाँ के गुलाब जामुन जोधपुर के शाही परिवार (Royal Family of Jodhpur) के यहाँ भी भेजे जाते थे।

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