डूंगरपुर में घूमने की जगह: 5 सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल, जहाँ आपको ज़रूर जाना चाहिए

जानिए डूंगरपुर में घूमने की जगह (Places to visit in Dungarpur) जैसे जूना महल, गैब सागर झील और बादल महल का इतिहास। साथ ही हमारी टीम के अनुभव के आधार पर ₹1500 के बजट में बेस्ट होटल, लोकल ढाबे और 2 दिन के संपूर्ण टूर प्लान की सटीक जानकारी के लिए अभी पढ़ें!

Rajasthan Travel Guide Contents

डूंगरपुर में घूमने की जगह

1. जूना महल (Juna Mahal Dungarpur) – स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना

यदि आप डूंगरपुर के वास्तविक इतिहास को महसूस करना चाहते हैं, तो जूना महल (Juna Mahal) आपकी सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए। धनमाता पहाड़ी की तलहटी में स्थित यह 7 मंजिला महल बाहर से भले ही एक मजबूत किले जैसा दिखता हो, लेकिन इसके अंदर का नजारा अद्भुत है।

क्यों खास है: महल के अंदर की दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी, कांच का काम (Glass Work) और दुर्लभ भित्तिचित्र (Frescoes) बेहद शानदार हैं। यहाँ राजा-महाराजाओं के समय के चित्र और वास्तुकला आज भी जीवंत लगती है।

स्थानीय गाइड की बात: गाइड के अनुसार, इस महल की बनावट ऐसी है कि पुराने समय में दुश्मन इस पर आसानी से आक्रमण नहीं कर पाते थे।

2. गैब सागर झील और बादल महल (Gaib Sagar Lake & Badal Mahal)

डूंगरपुर शहर के बीचोबीच स्थित गैब सागर झील (Gaib Sagar Lake) यहाँ का सबसे मुख्य आकर्षण है। इस झील के शांत पानी और इसके किनारे बने खूबसूरत मंदिरों का नजारा शाम के समय देखने लायक होता है।

बादल महल (Badal Mahal): इस झील के ठीक बीचोबीच स्थित है ‘बादल महल’, जो अपनी बेहतरीन राजपूत वास्तुकला के लिए जाना जाता है। पानी के बीच बने इस महल की परछाई जब झील में पड़ती है, तो वह दृश्य कैमरों में कैद करने लायक होता है।

श्रीनाथजी मंदिर: झील के किनारे ही प्रसिद्ध विजय राजराजेश्वर मंदिर और श्रीनाथजी का भव्य मंदिर परिसर है, जहाँ स्थापत्य कला का बेहतरीन काम देखा जा सकता है।

3. उदय बिलास पैलेस (Udai Bilas Palace) – हेरिटेज का शानदार अनुभव

गैब सागर झील के तट पर स्थित उदय बिलास पैलेस (Udai Bilas Palace) डूंगरपुर के शाही वैभव का प्रतीक है। महारावल उदय सिंह द्वितीय द्वारा निर्मित यह महल अपनी वास्तुकला में राजपूत शैली और नीले धूसर बलुआ पत्थर (Blue-Grey Sandstone) के अद्भुत उपयोग के लिए प्रसिद्ध है

क्यों जाएँ: इस महल के स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी और इसके अंदर का ‘चित्रशाला’ विंग बेहद खूबसूरत है। वर्तमान में इस महल का एक बड़ा हिस्सा हेरिटेज होटल में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसकी भव्यता को निहारने दूर-दूर से पर्यटक यहाँ आते हैं।

4 .देव सोमनाथ मंदिर (Deo Somnath Temple) – बिना सीमेंट-चूने का चमत्कार

डूंगरपुर शहर से लगभग 24 किमी दूर सोम नदी के तट पर स्थित देव सोमनाथ मंदिर (Deo Somnath Temple) सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक अनसुलझा रहस्य है।

रहस्यमयी बनावट: 12वीं सदी के इस भव्य शिव मंदिर के निर्माण में कहीं भी सीमेंट, चूने या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह पूरा 3 मंजिला मंदिर सिर्फ पत्थरों को एक-दूसरे के साथ इंटरलॉक (Interlocking System) करके खड़ा किया गया है। सदियों से यह मंदिर हर प्राकृतिक आपदा को झेलते हुए शान से खड़ा है।

5. बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham) – आदिवासियों का महाकुंभ

हमारी सूची में पांचवा सबसे महत्वपूर्ण स्थान है बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham), जो डूंगरपुर की आसपुर तहसील के नवाटापरा में स्थित है।

त्रिवेणी संगम: यह पवित्र स्थल सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर स्थित है। यहाँ प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा (जनवरी-फरवरी) को बेणेश्वर मेला (Beneshwar Mela) भरता है, जिसे ‘आदिवासियों का कुंभ’ भी कहा जाता है। यहाँ का खंडित शिवलिंग पूरी दुनिया में अपनी तरह का एकमात्र पूजनीय शिवलिंग है।

हमारी टीम का अनुभव और बजट

हमारी टीम ने जब स्थानीय गाइड के साथ डूंगरपुर की गलियों और इन ऐतिहासिक स्थलों को एक्सप्लोर किया, तो पाया कि डूंगरपुर को बहुत ही आसानी से 2 दिन में पूरा घूमा जा सकता है।

टूर बजट: डूंगरपुर शहर में आपको ₹1200 से ₹1500 के बजट में अच्छे और साफ-सुथरे होटल्स (Budget Hotels in Dungarpur) मिल जाएंगे। शहर के अंदर घूमने के लिए आप लोकल ऑटो का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आपका पूरा टूर बेहद कम बजट में शानदार तरीके से पूरा हो जाएगा।

डूंगरपुर में रुकने की व्यवस्था: बजट होटल से लेकर शाही पैलेस तक (Dungarpur Stay Guide)

बजट होटल्स नियर गैब सागर झील (Budget Hotels near Gaib Sagar Lake)

यदि आप सुबह और शाम का सबसे खूबसूरत नजारा देखना चाहते हैं, तो गैब सागर झील के आस-पास रुकना सबसे बेस्ट माना जाता है। इंटरनेट पर सबसे ज्यादा सर्च इसी लोकेशन के लिए होती है। यहाँ झील के किनारे कई ऐसे गेस्ट हाउस और होटल्स हैं जिनकी खिड़की या बालकनी से सीधे झील और बादल महल का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

₹1000 से ₹1500 के बीच होटल्स की लिस्ट (Hotels under 1500 Rs in Dungarpur)

मिडिल क्लास फैमिली और बैकपैकर्स (Backpackers) के लिए डूंगरपुर एक बेहद किफायती शहर है। यदि आप ₹1000 से ₹1500 के बजट में होटल तलाश रहे हैं, तो आपको मुख्य शहर और गैब सागर के आस-पास कई साफ-सुथरे, एसी/नॉन-एसी कमरे और फैमिली के लिए पूरी तरह सुरक्षित होटल्स आसानी से मिल जाएंगे। इन होटलों में वाई-फाई और अच्छे रेस्टोरेंट की सुविधा भी उपलब्ध होती है।

उदय बिलास पैलेस रूम प्राइस और हेरिटेज स्टे (Udai Bilas Palace Room Tariff)

शुरुआती रूम (Standard/Art Deco): ₹11,300 – ₹12,500 / प्रति रातलेक व्यू सूट्स (Lake View Suites): ₹15,000 – ₹18,000+ / प्रति रातएक्स्ट्रा बेड (Extra Bed): ₹3,300 / प्रति रात(नोट: टैक्स अलग से। सीजन के अनुसार किराए में बदलाव संभव है और उदय बिलास पैलेस रूम बुकिंग से पहले आप इनसे अधिकृत रूप से सूचना प्राप्त कर होटल बुक करें।

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड के पास होटल (Hotels near Dungarpur Railway Station)

यदि आप देर रात ट्रेन या बस से डूंगरपुर पहुँच रहे हैं, या सुबह आपकी जल्दी ट्रेन है, तो मुख्य बस स्टैंड (Dungarpur Bus Stand) और डूंगरपुर रेलवे स्टेशन के पास होटल लेना सबसे समझदारी भरा फैसला होता है। इन लोकेशंस के आस-पास आपको ₹800 से ₹1200 की रेंज में लॉज और कम बजट वाले रूम्स मिल जाते हैं, जहाँ से पूरे शहर के लिए ऑटो और टैक्सियाँ आसानी से उपलब्ध होती हैं।

बेणेश्वर मेले के दौरान टेंट सिटी बुकिंग (Beneshwar Dham Tent Stay & Dharamshala)

यदि आप विशेष रूप से जनवरी-फरवरी के महीने में आयोजित होने वाले आदिवासियों के महाकुंभ यानी बेणेश्वर मेले (Beneshwar Mela) में आ रहे हैं, तो धाम के पास रुकने की व्यवस्था बिल्कुल अलग होती है। मेले के समय त्रिवेणी संगम के पास विशेष अस्थाई टेंट सिटी (Tent House Stay) बसाई जाती है। इसके अलावा धाम परिसर के नजदीक विभिन्न समाजों की धर्मशालाएं और आश्रम भी बने हुए हैं।

हमारी टीम का व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि सामान्य दिनों में डूंगरपुर आने पर आपको आसानी से वॉक-इन होटल्स (बिना बुकिंग के) मिल जाएंगे। लेकिन यदि आप बेणेश्वर मेले (Beneshwar Dham Mela) के दिनों में यात्रा कर रहे हैं, तो डूंगरपुर, बांसवाड़ा या धाम के आस-पास रुकने के लिए कम से कम एक महीना पहले ही एडवांस ऑनलाइन बुकिंग ज़रूर कर लें, क्योंकि उस दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और होटल मिलना मुश्किल हो जाता है।

डूंगरपुर के टॉप प्रसिद्ध रेस्टोरेंट (Top Places to Eat in Dungarpur)

Sagar Hotel and Restaurant- Dungarpurनया बस स्टैंड के बिल्कुल सामने स्थित यह रेस्टोरेंट शुद्ध शाकाहारी भोजन प्रेमियों के लिए डूंगरपुर का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद स्थान है। यहाँ का पारिवारिक माहौल और त्वरित सर्विस पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है।

खासियत: यहाँ की ‘विशेष राजस्थानी थाली’ और उत्तर भारतीय (North Indian) सब्जियां बेहद लोकप्रिय हैं।

बजट: यह मिडिल क्लास और बजट बैकपैकर्स के लिए एकदम सही है, जहाँ ₹1500 के बजट में पूरा परिवार पेट भरकर शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले सकता है।

होटल सै पैलेस, डूंगरपुर

सागवाड़ा मार्ग पर स्थित यह रेस्टोरेंट उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो डूंगरपुर की यात्रा के दौरान एक शांत और आलीशान माहौल में भोजन करना चाहते हैं।खासियत: यहाँ आपको पारंपरिक पंजाबी, चाइनीज और बेहतरीन राजस्थानी व्यंजनों की एक विस्तृत श्रृंखला मिलती है।माहौल: सिटिंग अरेंजमेंट बहुत बढ़िया है, जो इसे दोस्तों और परिवार के साथ लंच या डिनर के लिए परफेक्ट स्पॉट बनाता है।

न्यू चौहान रेस्टोरेंट & बार डूंगरपुर

ओल्ड बस स्टैंड और गैब सागर पाल रोड के नजदीक स्थित यह रेस्टोरेंट और लाउंज उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है जो घूमने के बाद शाम को आराम से बैठकर नॉन-वेज और अन्य व्यंजनों का लुत्फ उठाना चाहते हैं।

खासियत: स्थानीय गाइड के अनुसार, यहाँ मिलने वाले नॉन-वेजिटेरियन (Non-Veg) और मुगलई स्टाइल के व्यंजन स्वाद के मामले में काफी मशहूर हैं।लोकेशन: गैब सागर झील के नजदीक होने के कारण इसकी कनेक्टिविटी मुख्य शहर से बेहद आसान है।

चीजें अनुभव करने के लिए डूंगरपुर में… (Things to experience in Dungarpur…)

1. मावा लापसी (Mawa Lapsi): डूंगरपुर और वागड़ क्षेत्र की यह सबसे खास पारंपरिक मिठाई है। इसे टूटे हुए गेहूं (दलिया), शुद्ध देसी घी, गुड़ और भरपूर मावे (खोया) व ड्राई फ्रूट्स से बनाया जाता है, जो त्योहारों पर जरूर बनती है।

2. पारंपरिक चूरमा लड्डू (Traditional Churma Laddoo): कंडे (गोबर के उपले) पर सेंकी गई बाटी को बारीक पीसकर, उसमें प्रचुर मात्रा में घी और गुड़ मिलाकर ये लड्डू तैयार किए जाते हैं। हमारी टीम ने एक लोकल ढाबे पर इसका लाजवाब स्वाद चखा।

3. सागवाड़ा के रसगुल्ले और गुलाब जामुन (Rasgulla & Gulab Jamun): डूंगरपुर के सागवाड़ा (Sagwara) क्षेत्र के जोधपुर मिष्ठान भंडार (Jodhpur Misthan Bhandar) के सॉफ्ट रसगुल्ले और गरमा-गरम गुलाब जामुन बेहद मशहूर हैं, जिन्हें खाने के लिए शाम को भारी भीड़ उमड़ती है।

4. मलाई घेवर (Malai Ghevar): तीज़-त्योहारों के मौसम में यहाँ के स्थानीय हलवाइयों द्वारा बनाया जाने वाला क्रिस्पी घेवर, जिस पर गाढ़ी रबड़ी-मलाई और पिस्ता-बादाम की परत चढ़ाई जाती है।

5. दूध-मावा पेड़ा और कलाकंद (Milk-Mawa Peda & Kalakand): ग्रामीण इलाकों से आने वाले शुद्ध दूध के कारण यहाँ के दानेदार कलाकंद और बिना मिलावट वाले मावा पेड़े (Mawa Peda) अपनी शुद्धता और असली स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं।

डूंगरपुर के प्रसिद्ध मांडविया हनुमान जी मेले (Mandaviya Hanuman Ji Mela) की क्या विशेषताएं हैं?

मांडविया हनुमान जी मेला (Mandaviya Hanuman Ji Mela) डूंगरपुर में देव दिवाली (कार्तिक पूर्णिमा) के पावन अवसर पर आयोजित होने वाला वागड़ अंचल की अगाध आस्था का एक बेहद भव्य और तीन दिवसीय मेला है। हमारी टीम को स्थानीय गाइड ने बताया कि इस ऐतिहासिक मेले में केवल डूंगरपुर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों और गुजरात से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु मन्नतें मांगने और संकटमोचन हनुमान जी के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं। मेले के दौरान पूरा परिसर रंग-बिरंगी रोशनी, भजनों, पारंपरिक लोक नृत्यों और स्थानीय वागड़ी संस्कृति के अनूठे रंग से सराबोर रहता है।

डूंगरपुर के ऐतिहासिक नीला पानी मेले (Neela Pani Mela) की क्या मुख्य विशेषताएं हैं?

नीला पानी मेला (Neela Pani Mela) डूंगरपुर जिले में सापन नदी (Sapan River) के पवित्र किनारे आयोजित होने वाला एक प्राचीन और ऐतिहासिक लोक मेला है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले इस मेले की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग जुटते हैं और पवित्र नदी में स्नान कर पूर्वजों का तर्पण करते हैं। हमारी टीम के अनुभव के अनुसार, यह मेला वागड़ की पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत, हस्तशिल्प और ग्रामीण परिवेश को बेहद करीब से देखने का सबसे बेहतरीन जरिया है, जिसे इंटरनेट पर भी खूब सर्च किया जाता है।

भुवनेश्वर महादेव और सीमलवाड़ा में मनाए जाने वाले सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) की क्या खासियत है?

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) डूंगरपुर के प्रसिद्ध भुवनेश्वर महादेव मंदिर और सीमलवाड़ा (Simalwara) क्षेत्र में मनाया जाने वाला एक अत्यंत गरिमामय और सांस्कृतिक उत्सव है। इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह वागड़ अंचल के गौरवशाली इतिहास, अदम्य स्वाभिमान और धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और पूर्वजों के बलिदान से जोड़ते हैं। यही वजह है कि इस स्वाभिमान पर्व को लेकर आजकल लोगों में भारी क्रेज है।

डूंगरपुर जिला प्रशासन का ‘ग्राम रथ अभियान’ (Gram Rath Abhiyan

डूंगरपुर जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया गया ‘ग्राम रथ अभियान’ (Gram Rath Abhiyan) इन दिनों पूरे वागड़ अंचल में बेहद चर्चा में है। हमारी टीम ने इस अनूठी पहल को समझा। इस अभियान की मुख्य विशेषता यह है कि इसके तहत एक विशेष रथ गाँव-गाँव जाकर स्थानीय ‘वागड़ी बोली’ (Vagdi dialect) और लुप्त होती पारंपरिक कठपुतली कला (Puppetry) के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है।

इसके जरिए ग्रामीणों को राज्य व केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल साक्षरता और महिला सशक्तिकरण की जानकारी बेहद मनोरंजक तरीके से दी जा रही है। जिला प्रशासन का यह अभिनव प्रयोग कम पढ़े-लिखे लोगों तक सीधी पहुँच बनाने में बेहद सफल साबित हो रहा है

डूंगरपुर में घूमने की जगह (5 best places to visit) और उनकी विस्तृत फैक्ट फाइल

  • कैसे पहुँचें (NH 48) उदयपुर हवाई अड्डे से 120 किमी और उदयपुर मुख्य शहर से मात्र 106 किमी की दूरी पर स्थित।
  • उपनाम (Nickname) पहाड़ों की नगरी (City of Hills)
  • प्रमुख नदियां सोम, माही और जाखम (Som, Mahi & Jakham)
  • प्रमुख पर्यटन स्थल जूना महल, गैप सागर झील, उदय बिलास पैलेस, बेणेश्वर धाम।
  • धनमाता पहाड़ी डूंगरपुर शहर की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है, जहां स्थित प्राचीन काली माता मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और यह स्थानीय लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है।
  • जूना महल डूंगरपुर में धनमाता पहाड़ी की तलहटी में बना 13वीं शताब्दी का एक 7 मंजिला पुराना महल है, जो बाहर से एक मजबूत और अभेद्य किले जैसा दिखाई देता है।
  • गैप सागर झील डूंगरपुर शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित एक विशाल मानव निर्मित ऐतिहासिक झील है, जो यहाँ की लाइफलाइन मानी जाती है। इसी झील के ठीक बीच में बेहद कलात्मक और स्थापत्य का बेजोड़ नमूना बादल महल स्थित है।
  • उदय बिलास पैलेस गैप सागर झील के सुरम्य तट पर स्थित एक भव्य महल है, जो वागड़ की राजपूताना वास्तुकला का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। इसे महारावल उदय सिंह द्वितीय ने बनवाया था।
  • बेणेश्वर धाम डूंगरपुर जिले के साबला ब्लॉक में सोम, mahi और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम (Confluence of three rivers) पर स्थित एक बेहद पावन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है।
  • देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर मुख्य शहर से करीब 24 किमी दूर सोम नदी के सुरम्य तट पर स्थित 12वीं सदी का एक ऐतिहासिक और चमत्कारिक शिव मंदिर है।
  • देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर मुख्य शहर से करीब 24 किमी दूर सोम नदी के सुरम्य तट पर स्थित 12वीं सदी का एक ऐतिहासिक और चमत्कारिक शिव मंदिर है।
  • सीमलवाड़ा और पीठ क्षेत्र डूंगरपुर जिले के ऐसे प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक कस्बे हैं, जो अपनी पारंपरिक हस्तशिल्प और गुजरात सीमा से सटे होने के कारण अनूठी मिश्रित संस्कृति के लिए जाने जाते हैं।
  • धम्बोला ग्राम और ग्राम विकास चौपाल के माध्यम से प्रशासन सीधे आमजन और जनजातीय परिवारों से जुड़ रहा है। यहाँ कठपुतली कला (Puppetry) के मंचन और स्थानीय वागड़ी बोली के संवादों द्वारा आम जनता को बैंकिंग धोखाधड़ी से बचने, डिजिटल साक्षरता अपनाने और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठाने के लिए ऑन-द-स्पॉट जागरूक किया जा रहा है।
  • धार्मिक सद्भाव ,गलियाकोट दरगाह, माही नदी तट दाऊदी बोहरा समुदाय का पवित्र केंद्र, शानदार संगमरमर नक्काशी।
  • सीमलवाड़ा और पीठ कस्बे, पारंपरिक लकड़ी के खिलौने और टेराकोटा कलाकृति।
  • थूर की पाल डूंगरपुर जिले का एक खूबसूरत और शांत जल निकाय (Water body) है, जो चारों तरफ से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है और प्राकृतिक रूप से समृद्ध है।
  • पीठ का हस्तशिल्प बाजार डूंगरपुर-गुजरात सीमा के नजदीक बसा एक ऐसा पारंपरिक ग्रामीण बाजार (Rural market) है, जो सदियों से स्थानीय जनजातीय कला और व्यापार का मुख्य केंद्र रहा है।

“2 दिन में डूंगरपुर कैसे घूमें””(How to visit Dungarpur in 2 days”)

दिन 1: महलों का इतिहास, खूबसूरत झील और प्रसिद्ध मिठास

सुबह 09:00 बजे – जूना महल (Juna Mahal)पहले दिन की शुरुआत डूंगरपुर के सबसे प्राचीन वैभव जूना महल से करें। धनमाता पहाड़ी की तलहटी में बना यह 7 मंजिला महल बाहर से एक मजबूत किले जैसा दिखता है, लेकिन इसके अंदर की संकरी गलियां और दीवारों पर बने नायाब भित्तिचित्र (Frescoes) व कांच का बारीक काम देखने लायक हैं। यहाँ के गुप्त रास्तों और इतिहास को समझने के लिए स्थानीय गाइड की मदद जरूर लें।

दोपहर 01:00 बजे – लोकल ढाबे पर पारंपरिक लंच (Traditional Vagadi Lunch)दोपहर के भोजन के लिए शहर के किसी पुराने लोकल ढाबे पर जाएँ। हमारी टीम के अनुभव के अनुसार, यहाँ कंडे (गोबर के उपले) पर सेंकी गई पारंपरिक दाल-बाटी और शुद्ध देसी घी से बने चूरमा लड्डू (Churma Laddoo) का स्वाद बेहद लाजवाब होता है, जो ₹150 से ₹300 के बजट में आसानी से मिल जाता है।

दोपहर 03:30 बजे – धनमाता पहाड़ी और काली माता मंदिर (Dhanmata Hill)लंच के बाद धनमाता पहाड़ी पर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के दर्शन के लिए जाएँ। यहाँ की सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद जब आप चोटी पर पहुँचेंगे, तो वहाँ से पूरे डूंगरपुर शहर और उसकी झीलों का अद्भुत विहंगम दृश्य (Bird’s-eye view) दिखाई देता है।

शाम 05:00 बजे से सूर्यास्त तक – गैप सागर झील और बादल महल (Gaib Sagar Lake & Badal Mahal)शाम का समय डूंगरपुर की लाइफलाइन गैप सागर झील के किनारे बिताएं। झील के ठीक बीचों-बीच स्थित कलात्मक बादल महल की परछाई जब पानी में दिखती है, तो वह नजारा जादुई होता है। यहाँ आप बोटिंग पॉइंट (Boating point) से नाव की सवारी का आनंद ले सकते हैं और बर्ड वाचिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। पास ही स्थित श्रीनाथजी मंदिर में शाम की आरती का हिस्सा जरूर बनें।

रात 08:00 बजे – डिनर और मशहूर मावा लापसी (Famous Mawa Lapsi)रात के खाने के बाद डूंगरपुर के स्थानीय बाजार के मिष्ठान भंडारों पर जाकर यहाँ की सबसे प्रसिद्ध मिठाई मावा लापसी (Mawa Lapsi) या दानेदार कलाकंद का स्वाद लेना न भूलें, जो आपके पहले दिन की यात्रा को एक मीठा अंत देगी।

दिन 2: पवित्र नदियां, आदिवासियों का कुंभ और अजूबा मंदिर

सुबह 08:30 बजे – देव सोमनाथ मंदिर (Deo Somnath Temple)दूसरे दिन सुबह डूंगरपुर मुख्य शहर से लगभग 24 किमी दूर सोम नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध देव सोमनाथ मंदिर के लिए निकलें। यह 12वीं सदी का तीन मंजिला शिव मंदिर वास्तुकला का एक अजूबा है, क्योंकि इसे बनाने में कहीं भी सीमेंट, चूने या गारे (Mortar) का उपयोग नहीं किया गया है। पत्थरों को केवल इंटरलॉकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है।

दोपहर 12:00 बजे – बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham – Confluence of 3 Rivers)देव सोमनाथ से सीधे साबला ब्लॉक में स्थित बेणेश्वर धाम पहुँचें। यह सोम, माही और जाखम नदियों का पवित्र त्रिवेणी संगम है, जिसे ‘आदिवासियों का महाकुंभ’ भी कहा जाता है। यहाँ के स्वयंभू शिव मंदिर के दर्शन करें और संगम तट की शांति का अनुभव करें।

शाम 05:00 बजे – उदय बिलास पैलेस (Udai Bilas Palace)डूंगरपुर शहर लौटकर अपनी यात्रा का समापन उदय बिलास पैलेस के दीदार के साथ करें। नीले-धूसर बलुआ पत्थर (Grey green sandstone) से बनी इसकी महीन नक्काशी और राजपूत शैली के झरोखे बेहद आकर्षक हैं। वर्तमान में यह एक नामचीन लग्जरी हेरिटेज होटल है, जिसके बगीचों में टहलना एक शाही अहसास कराता है।

जूना महल डूंगरपुर की पेंटिंग्स का इतिहास (Juna Mahal Dungarpur Paintings History)

सुबह की शुरुआत हमने डूंगरपुर के सबसे पुराने वैभव जूना महल (Juna Mahal) से की। पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह 7 मंजिला पुराना महल बाहर से भले ही एक किले जैसा मजबूत दिखता हो, लेकिन इसके अंदर का नजारा अद्भुत है।

टीम का अनुभव: हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) ने हमें बताया कि यहाँ की भित्ति चित्र (Fresco Paintings) और कांच का काम असली सोने के पानी और प्राकृतिक रंगों से किया गया है। यहाँ की कामुक पेंटिंग्स और राजा-महाराजाओं के दौर के चित्र देखकर हमारी टीम दंग रह गई। इतिहास और कला प्रेमियों के लिए यह जगह जन्नत है।

उदय बिलास पैलेस विंटेज कार कलेक्शन (Udai Bilas Palace Vintage Car Collection)

दोपहर के समय हम पहुंचे डूंगरपुर की सबसे मशहूर हेरिटेज प्रॉपर्टी उदय बिलास पैलेस (Udai Bilas Palace)। गैपसागर झील के किनारे बना यह महल आज एक लक्जरी होटल है। यहाँ का सबसे बड़ा आकर्षण है यहाँ मौजूद विंटेज कार कलेक्शन (Vintage Car Collection)। यहाँ राजाओं के जमाने की क्लासिक कारें आज भी चमचमाती हालत में रखी हुई हैं, जिन्हें देखना अपने आप में एक अलग अहसास है।

गैपसागर झील के पास खाने की बेस्ट जगह (Best Food Places Near Gaibsagar Lake)

शाम के वक्त हम गैपसागर झील (Gaibsagar Lake) के किनारे टहलने निकले। झील के बीच में बना बादल महल (Badal Mahal) डूबते सूरज की रोशनी में बेहद खूबसूरत लग रहा था।

लोकल ढाबा और एक्सपीरियंस: यहाँ घूमते हुए भूख लगने पर हमारे गाइड की सिफारिश पर हम झील के पास ही स्थित एक छोटे से लोकल कैफे और चाट भंडार पर रुके। वहाँ की गरमा-गरम कचौड़ी, समोसे और राजस्थानी मिर्ची वड़ा का स्वाद बेहद लाजवाब था। कम पैसों में असली स्थानीय स्वाद का मजा आपको यहीं मिलेगा।

देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर बिना सीमेंट का मंदिर (Deo Somnath Temple Architecture Facts)

दूसरे दिन की सुबह हमारी टीम डूंगरपुर से लगभग 24 किमी दूर सोम नदी के तट पर स्थित देव सोमनाथ मंदिर (Deo Somnath Temple) पहुंची। 12वीं सदी का यह शिव मंदिर वास्तुकला का एक अजूबा है।क्विक फैक्ट (Quick Fact): इस पूरे तीन मंजिला मंदिर के निर्माण में कहीं भी सीमेंट, चूना या गारे का इस्तेमाल नहीं हुआ है। यह पूरा मंदिर सिर्फ पत्थरों को एक-दूसरे के खांचे में फंसाकर (Interlocking System) बनाया गया है। मंदिर के सफेद संगमरमर के खंभों पर की गई नक्काशी देखने लायक है।

डूंगरपुर से बेणेश्वर धाम की दूरी और रास्ता (Dungarpur to Beneshwar Dham Distance)

दोपहर में हम वागड़ के महाकुंभ कहे जाने वाले बेणेश्वर धाम (Beneshwar Dham) के लिए रवाना हुए। डूंगरपुर मुख्य शहर से बेणेश्वर धाम की दूरी लगभग 60 किलोमीटर (Dungarpur to Beneshwar Dham distance) है। यहाँ का रास्ता बेहद खूबसूरत है, जो पहाड़ियों और गांवों के बीच से होकर गुजरता है।

यह धाम सोम, माही और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम (Confluence of Three Rivers) पर स्थित है। यहाँ आकर जो मानसिक शांति मिलती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। विशेषकर आदिवासियों के लिए यह जगह महातीर्थ मानी जाती है।

यदि आप डूंगरपुर में घूमने की जगह (Places to visit in Dungarpur), डूंगरपुर के पर्यटन स्थल (Dungarpur tourist places) और डूंगरपुर में क्या देखें (Things to see in Dungarpur) तलाश रहे हैं, तो हमारी टीम का यह अनुभव आपके बहुत काम आएगा। हम इसे अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर साझा कर रहे हैं।

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