बाबा रामदेव रूणेचा दर्शन गाइड: समाधि का इतिहास, आरती का समय और रुकने की पूरी जानकारी (Baba Ramdev Runicha Darshan Guide)

बाबा रामदेव रूणेचा दर्शन गाइड:।राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित रामदेवरा (Ramdevra), जिसे प्यार से रूणेचा (Runicha) भी कहा जाता है, सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे बड़ा केंद्र है। बाबा रामदेव जी को ‘पीरों का पीर’ (Peeron ka Peer) कहा जाता है क्योंकि मक्का से आए पाँच पीरों ने भी उनकी शक्ति को स्वीकार किया था।

Rajasthan Travel Guide Contents

रामदेवरा दर्शन के 5 मुख्य आकर्षण (5 Best Places to Visit in Ramdevra)

बाबा की समाधि (Baba Ramdev Samadhi): मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थित बाबा की जीवित समाधि, जहाँ भक्त पचरंगी नेजा (Pachrangi Neja) और कपड़े का घोड़ा (Cloth Horse) चढ़ाते हैं।

रामसरोवर तालाब (Ramsarovar Lake): माना जाता है कि इस पवित्र तालाब के जल से स्नान करने पर चर्म रोग दूर हो जाते हैं।

डाली बाई की समाधि (Dali Bai Samadhi): बाबा की अनन्य भक्त डाली बाई की समाधि और उनका पवित्र कंगन, जिसके नीचे से निकलना शुभ माना जाता है।

परचा बावड़ी (Parcha Bawdi): बाबा रामदेव जी द्वारा दिखाया गया एक अद्भुत चमत्कार (Miracle), जहाँ से पूरे गाँव को मीठा पानी मिलता है।

पंच पिपली (Panch Pipli): वह स्थान जहाँ मक्का से आए पीरों ने बाबा की शक्ति की परीक्षा ली थी।

बाबा रामदेव मंदिर की समय सारणी और आरती (Ramdevra Mandir Aarti Timings)

  • मंगला आरती (Mangala Aarti): सुबह 4:00 बजे से 5:00 बजे के बीच।
  • भोग आरती (Bhog Aarti): दोपहर 12:00 बजे।
  • संध्या आरती (Evening Aarti): सूर्यास्त के समय (शाम 6:30 – 7:30)।
  • विश्राम (Closing Time): रात्रि 9:00 बजे मंदिर के पट बंद हो जाते हैं।

बाबा रामदेव रूणेचा दर्शन गाइड फैक्ट फाइल

  • पूरा नाम (Full Name) बाबा रामदेव जी तंवर (Baba Ramdev Ji Tanwar)
  • अन्य नाम (Other Names) रूणेचा रा श्याम, रामसा पीर, पीरों के पीर
  • जन्म स्थान (Birthplace) उडू काश्मीर, तहसील शिव (बाड़मेर)
  • समाधि स्थल (Samadhi Site) रामदेवरा, पोखरण (जैसलमेर)
  • पिता का नाम (Father) अजमाल जी तंवर (Ajmal Ji Tanwar)
  • माता का नाम (Mother) मैणादे (Mainade)
  • गुरु का नाम (Guru) बालीनाथ जी (Balinath Ji)
  • वंश (Dynasty) तंवर वंशीय राजपूत (Arjun’s Descendant)
  • वाहन (Vehicle) नीला घोड़ा (Leelo Ghodo)
  • प्रमुख मेला (Main Fair) भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक
  • सांप्रदायिक सद्भाव (Communal Harmony): बाबा रामदेव राजस्थान के इकलौते ऐसे लोक देवता हैं जिन्हें हिंदू ‘कृष्ण का अवतार’ (Incarnation of Krishna) और मुसलमान ‘रामसा पीर’ (Ramsa Peer) के रूप में पूजते हैं।
  • जीवित समाधि (Living Samadhi): बाबा ने विक्रम संवत 1415 में रामसरोवर के किनारे जीवित समाधि ली थी। उनके साथ उनकी अनन्य भक्त डाली बाई ने भी समाधि ली थी।
  • 24 पर्चे (24 Miracles): बाबा के चमत्कारों को ‘पर्चा’ (Parcha) कहा जाता है। मक्का से आए 5 पीरों को अपना कटोरा पलक झपकते मक्का से मंगवाकर दिखाना उनका सबसे बड़ा पर्चा माना जाता है।
  • कामड़िया पंथ (Kamadiya Panth): बाबा ने छुआछूत मिटाने के लिए ‘कामड़िया पंथ’ की स्थापना की थी। इस पंथ की महिलाएं प्रसिद्ध तेरहताली नृत्य (13 Taali Dance) करती हैं
  • पचरंगी नेजा (Five-colored Flag): बाबा के मंदिर पर फहराई जाने वाली सफेद या पांच रंगों की ध्वजा को ‘नेजा’ (Neja) कहा जाता है।
  • जमा’ शब्द का अर्थ होता है—एकत्र होना या भक्ति में लीन होना। माना जाता है कि बाबा रामदेव जी ने स्वयं अपने भक्तों को इस रात्रि जागरण का उपदेश दिया था ताकि वे छुआछूत और भेदभाव भुलाकर एक साथ ईश्वर की भक्ति कर सकें।

Baba Ramdev Runicha parcha list (बाबा रामदेव के चमत्कारों की लिस्ट)

भैरव राक्षस का वध: पोखरण में आतंक मचाने वाले भैरव राक्षस का अंत किया।

मक्का के पीरों को पर्चा :मक्का से आए 5 पीरों के कटोरे पलक झपकते मक्का से मंगवाए।

बालीनाथ जी को दर्शन :अपने गुरु बालीनाथ जी को अलौकिक शक्ति का परिचय दिया।

कपड़े का घोड़ा उड़ाना :बचपन में दर्जी द्वारा बनाए कपड़े के घोड़े को आकाश में उड़ाया।

उफनता दूध रोकना: माता मैणादे के सामने चूल्हे पर उफनते दूध को हाथ के इशारे से रोका।

परचा बावड़ी का निर्माण: सूखी बावड़ी को मीठे और अथाह जल से भर दिया।

लाखी बंजारे की मिश्री: नमक को मिश्री और फिर मिश्री को नमक में बदल दिया।

सेठ की डूबती नाव बचाना: समुद्र के बीच फंसे भक्त की नाव को किनारे लगाया।

सुगना बाई का दुख दूर करना: अपनी बहन सुगना के मरे हुए पुत्र को पुनर्जीवित किया।

कोढ़ी का रोग मिटाना :भक्त का कुष्ठ रोग (Leprosy) अपनी कृपा से जड़ से खत्म किया।

नेजा (ध्वजा) का चमत्कार मंदिर की ध्वजा का आकाश में स्वयं फहराना।

जैसलमेर से रामदेवरा कैसे जाएँ (How to reach Ramdevra from Jaisalmer) और यात्रा का सबसे अच्छा समय क्या है?

जैसलमेर से रामदेवरा की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है। आप बस, कैब या ट्रेन (Train) के जरिए आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं।ट्रेन: जोधपुर-जैसलमेर रेलवे लाइन पर ‘रामदेवरा’ एक प्रमुख स्टेशन है।बस: राजस्थान रोडवेज और प्राइवेट बसें हर घंटे उपलब्ध हैं।यात्रा का सबसे अच्छा समय भाद्रपद मास (अगस्त-सितंबर) है, जब यहाँ विश्व प्रसिद्ध मेला लगता है। हालांकि, शांतिपूर्ण दर्शन के लिए आप सर्दियों (अक्टूबर से मार्च) में भी जा सकते हैं। हमारी टीम के अनुभव के अनुसार, पैदल यात्रियों के जत्थों के साथ जाना एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा (Spiritual Energy) देता है।

रामदेवरा में रुकने के लिए सबसे अच्छी धर्मशाला कौन सी है (Best Dharamshala in Ramdevra with contact number)?

रामदेवरा में श्रद्धालुओं के लिए ₹500 के बजट में कई अच्छी धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। प्रमुख रूप से ‘रूणेचा धाम धर्मशाला’, ‘बाबा रामदेव सेवा समिति’ और ‘मारवाड़ी धर्मशाला’ प्रसिद्ध हैं।सुविधाएं: यहाँ आपको साफ़-सुथरे कमरे और शुद्ध शाकाहारी भोजन (Vegetarian Food) मिल जाएगा।संपर्क: अधिकांश धर्मशालाओं की बुकिंग मंदिर के पास पहुँचकर भी की जा सकती है, लेकिन मेले के दौरान ऑनलाइन एडवांस बुकिंग की सलाह दी जाती है। हमने वहां के स्थानीय ढाबों पर रुककर यह जाना कि यात्रियों के लिए यहाँ ‘अन्नपूर्णा भंडारे’ भी चलते हैं, जहाँ निःशुल्क भोजन मिलता है। हम यह जानकारी अपने इसी निजी अनुभव के आधार पर साझा कर रहे हैं।

बाबा रामदेव जी समाधि का इतिहास

  • तिथि: भाद्रपद शुक्ल एकादशी, वि.सं. 1415
  • स्थान: रामसरोवर का पाल, रामदेवरा।
  • विशेष: बाबा के साथ उनकी अनन्य भक्त डाली बाई की समाधि भी पास में स्थित है।
  • प्रतीक: समाधि पर चढ़ाया जाने वाला ‘कपड़े का घोड़ा’ और ‘पचरंगी नेजा’।

डाली बाई का त्याग और बाबा रामदेव

डाली बाई का त्याग: इतिहास गवाह है कि जब बाबा समाधि लेने वाले थे, तब उनकी अनन्य भक्त डाली बाई ने दावा किया कि वह गड्ढा उनकी समाधि का है। प्रमाण स्वरूप गड्ढे से डाली बाई का कंगन और डोरा निकला, जिसके बाद डाली बाई ने बाबा से एक दिन पहले ही वहां समाधि ले ली। आज भी बाबा की समाधि के पास डाली बाई की समाधि बनी हुई है।

जोधपुर और दिल्ली से रामदेवरा (रूणेचा) पहुँचने के सबसे सुलभ साधन क्या हैं और रेलवे स्टेशन से मुख्य मंदिर की दूरी कितनी है?

जोधपुर से रामदेवरा की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 185 से 190 किलोमीटर है, जिसे बस या टैक्सी द्वारा 3.5 से 4 घंटे में तय किया जा सकता है। रेलवे के शौकीनों के लिए रामदेवरा रेलवे स्टेशन (कोड: RDRA) सबसे नजदीकी स्टेशन है, जो मुख्य मंदिर से मात्र 1.5 से 2 किमी की दूरी पर स्थित है। दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए ‘रुणिचा एक्सप्रेस’ (Runicha Express – 14659) और ‘जैसलमेर एक्सप्रेस’ सबसे बेहतरीन विकल्प हैं, जो पुरानी दिल्ली से चलकर सीधे रामदेवरा पहुँचाती हैं।हमारी टीम ने जब जोधपुर से अपनी यात्रा शुरू की, तो हमने रास्ते में लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर रुककर जोधपुर की प्रसिद्ध मिर्ची बड़ा का स्वाद लिया। वहां के स्थानीय गाइड (Local Guide) ने हमें बताया कि मेले के दौरान विशेष ‘मेला स्पेशल’ ट्रेनें भी चलाई जाती हैं। हमने महसूस किया कि रेलवे स्टेशन से मंदिर तक जाने के लिए ई-रिक्शा और ऑटो आसानी से उपलब्ध हैं। हम यह जानकारी अपने इसी व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर साझा कर रहे हैं।

बाबा रामदेव जी को ‘नेजा’ (Neja) चढ़ाने की सही विधि क्या है और पचरंगी ध्वजा का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

बाबा को नेजा (Neja) चढ़ाना उनकी विजय और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। विधि के अनुसार, श्रद्धालु अपने घर से या पैदल यात्रा के दौरान ध्वजा को जमीन पर नहीं रखते। मंदिर पहुँचने पर इसे गंगाजल से शुद्ध कर, बाबा की ज्योति के दर्शन कराकर मुख्य शिखर या निर्धारित स्थान पर फहराया जाता है। पचरंगी नेजा के पांच रंग पंचतत्वों और सांप्रदायिक एकता को दर्शाते हैं।

रूणेचा रा श्याम भजन (Runicha ra Shyam Bhajan)

बाबा के भजनों को ‘ब्यावले’ भी कहा जाता है। मारवाड़ी भाषा में गाए जाने वाले भजन जैसे “खम्मा-खम्मा ओ अजमाल जी रा कंवरा” और “थाने निवण करां म्हारो पीर जी” भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।

नेजा चढ़ाने की विधि (Neja Offering Ceremony)

बाबा की ध्वजा को ‘नेजा’ कहा जाता है। यह सफेद या पांच रंगों (पचरंगी) का होता है। श्रद्धालु इसे हाथ में लेकर मीलों पैदल चलते हैं और अंत में बाबा की समाधि के ऊपर फहराते हैं।

बाबा रामदेव रूणेचा दर्शन गाइड पर FAQ

रामदेवरा मेले (Ramdevra Mela) के दौरान ‘बाबे री दूज’ का क्या महत्व है और मंदिर के आसपास कौन से ऐतिहासिक स्थल दर्शन के लिए अनिवार्य हैं?

‘बाबे री दूज’ (भादवा शुक्ल द्वितीया) बाबा रामदेव जी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन मंदिर में उमड़ने वाला जनसैलाब देखने लायक होता है। मेले के दौरान श्रद्धालु केवल मुख्य समाधि ही नहीं, बल्कि परचा बावड़ी (Parcha Bawdi) और पंच पिपली (Panch Pipli) के दर्शन भी अनिवार्य रूप से करते हैं। परचा बावड़ी का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है और भक्त इसे अपने साथ घर ले जाते हैं। वहीं पंच पिपली वह स्थान है जहाँ मक्का से आए पाँच पीरों ने बाबा की परीक्षा ली थी और उनके चमत्कारों को देखकर उन्हें ‘पीरों का पीर’ की उपाधि दी थी। रामदेवरा से कुछ ही दूरी पर पोखरण का किला (Pokhran Fort) स्थित है, जो अपनी वास्तुकला और इतिहास के लिए प्रसिद्ध है।

बाबे री दूज और भादवा मेला (Babe ri Dooj & Bhadwa Mela)

भाद्रपद शुक्ल द्वितीया, जिसे ‘बाबे री दूज’ कहा जाता है, बाबा का जन्मदिवस है। इसी दिन से मुख्य मेले की शुरुआत होती है जो एकादशी तक चलता है। इसे ‘मारवाड़ का कुंभ’ भी कहा जाता है।

रामदेवरा पैदल यात्रा

‘खम्मा-खम्मा’ के जयकारों के साथ श्रद्धालु हाथों में पचरंगी नेजा लेकर मीलों पैदल चलते हैं। रास्ते में जगह-जगह सेवा शिविरों में भक्तों की सेवा की जाती है।

परचा बावड़ी और पंच पिपली (Parcha Bawdi & Panch Pipli)

परचा बावड़ी वह स्थान है जहाँ बाबा ने अपनी अलौकिक शक्ति से जल संकट दूर किया था। वहीं पंच पिपली में मक्का के पीरों ने बाबा के साथ भोजन किया था, जहाँ आज भी प्राचीन पीपल के पेड़ मौजूद हैं।

पोखरण का किला (Pokhran Fort

रामदेवरा से मात्र 12 किमी दूर स्थित यह ऐतिहासिक किला बाबा रामदेव जी के परिवार और उनके बचपन की यादों से जुड़ा है।

बाबा रामदेव जी के प्रमुख मंदिर और स्थल (Main Temples & Places)

रामदेवरा (Ramdevra): जैसलमेर (प्रमुख केंद्र)मसूरिया (Masuria): जोधपुरबिराटिया (Biratiya): ब्यावरसुरता खेड़ा (Surta Kheda): चित्तौड़गढ़छोटा रामदेवरा (Chhota Ramdevra): गुजरात में

आपको बाबा रामदेव जी का कौनसा भजन पसन्द है?

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