” बागौर की हवेली (Bagore Ki Haveli) घूमने का पूरा गाइड! जानें यहाँ की दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी, धरौहर डांस शो टाइम और टिकट प्राइस की जानकारी। हमारी टीम के अनुभव और लोकल गाइड ।
बागौर की हवेली का गौरवशाली इतिहास (History of Bagore Ki Haveli)
पिछोला झील के ‘गणगौर घाट’ (Gangaur Ghat) के ठीक सामने खड़ी यह हवेली 18वीं शताब्दी की वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
निर्माण: इसका निर्माण मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमरचंद बड़वा (Amarchand Badwa) ने 1751 से 1778 के बीच करवाया था।
- स्थापत्य: इस हवेली में कुल 138 कमरे (138 Rooms) हैं, जो कांच के बारीक काम और भित्ति चित्रों (Fresco Paintings) से सजे हुए हैं।
संग्रहालय: वर्तमान में इसे एक संग्रहालय (Museum) में बदल दिया गया है, जहाँ मेवाड़ के शाही परिवार की वस्तुओं को संजोकर रखा गया है
बागौर की हवेली मुख्य आकर्षण: जो आपको मिस नहीं करना चाहिए (Top Things to See in Bagore Ki Haveli)
दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी (World’s Largest Turban): यहाँ के पगड़ी संग्रहालय (Turban Museum) में दुनिया की सबसे विशाल पगड़ी रखी है, जिसकी लंबाई 150 फीट से अधिक है।
धरोहर लोक नृत्य शो (Dharohar Dance Show): हर शाम 7:00 बजे यहाँ राजस्थान का सबसे शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम होता है।
कठपुतली संग्रहालय (Puppet Museum): बच्चों के लिए यहाँ रंग-बिरंगी कठपुतलियों का अनूठा संग्रह है।
शाही वस्त्रागार (Royal Costumes): यहाँ राजा-महाराजाओं के काल के असली वस्त्र और आभूषण प्रदर्शित किए गए हैं।
- संग्रहालय (Museum) सुबह 9:30 – शाम 5:30
- सांस्कृतिक शो (Dharohar Show) शाम 7:00 – रात 8:00
- प्राचीन वस्तुओं का शौक है तो संग्रहालय देखें और सांस्कृतिक कार्यक्रम में रुचि है तो तो दरबार शो देखें
म्यूजियम (Museum – दिन का समय)
- म्यूजियम में आप दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी और मेवाड़ की शाही वस्तुओं को देख सकते हैं।
- भारतीय वयस्क (Indian Adult): ₹60
- भारतीय बच्चे (Children 5-12 years): ₹30
- विदेशी नागरिक (Foreigners): ₹100
- कैमरा शुल्क (Camera Fee): ₹50 (मोबाइल/स्टिल कैमरा)
. धरौहर डांस शो (Dharohar Dance Show – शाम का समय)
यह शो हवेली के आंगन में होता है और यहाँ की सबसे लोकप्रिय गतिविधि है।
- शो का समय (Show Timings): शाम 7:00 बजे से रात 8:00 बजे तक।
- टिकट काउंटर खुलना: शाम 6:15 बजे (ऑफलाइन टिकट के लिए)।
- भारतीय वयस्क (Indian Adult): ₹90 – ₹125
- भारतीय बच्चे (Children): ₹45
- विदेशी पर्यटक (Foreigners): ₹150
हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience)
हमारी टीम ने जब शाम के शो के लिए टिकट ली, तो हमें पता चला कि “पहले आओ, पहले पाओ” (First come, first served) के आधार पर बैठने की जगह मिलती है।
लोकल गाइड की टिप (Local Guide Tip): अगर आप सबसे आगे बैठकर कलाकारों के पैरों की थाप महसूस करना चाहते हैं, तो शाम 6:00 बजे ही टिकट की लाइन में लग जाएँ।
लोकल दुकान का अनुभव: हवेली के बाहर लोकल दुकानों (Local Shops) से ₹50-100 में मिलने वाले हस्तशिल्प के छोटे सामान सोवेनियर (Souvenirs) के लिए बेस्ट हैं।
पास का ढाबा: शो के बाद हमने पास ही एक लोकल ढाबे पर मेवाड़ की प्रसिद्ध ‘मिर्ची वड़ा’ और ‘लहसुन की चटनी’ खाई, जो सिर्फ ₹30-40 में पेट भर देती है।
प्रो टिप: यदि आप म्यूजियम और शो दोनों देखना चाहते हैं, तो दोपहर 4:30 बजे पहुँचें। म्यूजियम देखने के बाद आप सीधे शो की लाइन में लग सकते हैं, इससे आपका समय बचेगा।
बागौर की हवेली उदयपुर में सबसे प्रसिद्ध क्या है? (What is famous in Bagore Ki Haveli Udaipur?)
बागौर की हवेली अपनी राजस्थानी संस्कृति (Rajasthani Culture) और ऐतिहासिक वास्तुकला (Historical Architecture) के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहाँ का सबसे मुख्य आकर्षण शाम को होने वाला ‘धरोहर लोक नृत्य शो’ (Dharohar Folk Dance Show) है, जहाँ कलाकार चकरी, भवाई और घूमर जैसे नृत्य करते हैं। इसके अलावा, यहाँ के म्यूजियम (Museum) में ‘दुनिया की सबसे बड़ी पगड़ी’ (World’s Largest Turban) रखी गई है, जो पर्यटकों के बीच कौतूहल का विषय रहती है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यहाँ की कांच की नक्काशी (Mirror Work) और पिछोला झील (Pichola Lake) का नज़ारा इसे उदयपुर की सबसे बेहतरीन जगह बनाता है।
बागौर की हवेली डांस शो की टिकट और समय क्या है? (Bagore Ki Haveli Dance Show Ticket Price and Timings?)
अगर आप यहाँ के सांस्कृतिक कार्यक्रम (Cultural Program) का आनंद लेना चाहते हैं, तो यह शो हर शाम 7:00 बजे से 8:00 बजे (7 PM to 8 PM) तक चलता है। टिकट काउंटर (Ticket Counter) शाम 6:15 बजे खुल जाता है। भारतीयों के लिए टिकट की कीमत लगभग ₹100 और विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists) के लिए ₹200 के आसपास रहती है (कीमतें बदल सकती हैं)। कैमरे के लिए आपको अलग से चार्ज (Camera Charges) देना होगा। हमारी सलाह है कि आप शो शुरू होने से कम से कम 30 मिनट पहले पहुँचें ताकि आपको बैठने के लिए अच्छी जगह (Best Seating View) मिल सके।
बागौर की हवेली का इतिहास क्या है और इसे किसने बनवाया? (What is the History of Bagore Ki Haveli and who built it?)
इस भव्य हवेली का निर्माण 18वीं शताब्दी (18th Century) में मेवाड़ के प्रधानमंत्री (Prime Minister of Mewar) अमरचंद बड़वा (Amarchand Badwa) द्वारा करवाया गया था। उनके बाद यह हवेली मेवाड़ राजघराने (Mewar Royal Family) के अधिकार में आ गई। इसे ‘बागौर की हवेली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि बाद में यहाँ बागौर के महाराज (Maharaj of Bagore) निवास करने लगे थे। इसमें 100 से अधिक कमरे (More than 100 Rooms) हैं जो मेवाड़ की पारंपरिक शैली (Traditional Style) को दर्शाते हैं। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (West Zone Cultural Centre) द्वारा अब इसका रख-रखाव किया जाता है।
क्या बागौर की हवेली बच्चों और परिवारों के लिए उपयुक्त है? (Is Bagore Ki Haveli suitable for children and families?)
जी हाँ, यह सपरिवार (Family Trip) घूमने के लिए एक आदर्श स्थान है। यहाँ होने वाला कठपुतली शो (Puppet Show) बच्चों को बहुत पसंद आता है। म्यूजियम के अंदर आप पुराने जमाने के बर्तन, आभूषण (Jewelry), और हथियार (Weapons) देख सकते हैं, जो नई पीढ़ी को राजस्थान के गौरवशाली इतिहास (Glorious History of Rajasthan) से रूबरू कराते हैं। हवेली के पास ही स्थित गणगौर घाट (Gangaur Ghat) पर आप परिवार के साथ सुकून के पल बिता सकते हैं और स्थानीय हस्तशिल्प (Local Handicrafts) की खरीदारी भी कर सकते हैं।
क्या बागौर की हवेली के पास पार्किंग की सुविधा है? (Is there parking facility near Bagore Ki Haveli?)
हवेली पुराने शहर (Old City) की संकरी गलियों में स्थित है, इसलिए यहाँ चार पहिया वाहनों (Four-Wheelers) के लिए पार्किंग (Parking Space) मिलना बहुत मुश्किल है। यदि आप अपनी कार से आ रहे हैं, तो आपको उसे थोड़े दूर बने सार्वजनिक पार्किंग स्थल (Public Parking Lot) पर खड़ा करना होगा। हमारी टीम (Our Team) ने अनुभव किया कि ऑटो-रिक्शा (Auto Rickshaw) या स्कूटी (Scooty) से यहाँ पहुँचना सबसे सुविधाजनक और समय बचाने वाला विकल्प है। गणगौर घाट (Gangaur Ghat) के पास पैदल घूमना भी एक शानदार अनुभव (Wonderful Experience) है।
बागौर की हवेली फोटोग्राफी पॉइंट्स (Photography Points)
फोटोग्राफी पॉइंट्स (Photography Points): हवेली के अंदर कांच के काम (Mirror Work) और गणगौर घाट (Gangaur Ghat) के फोटो क्लिक करने के लिए बेस्ट स्पॉट्स है।
बागौर की हवेली का ‘कांच महल’ क्यों खास है? (Why is the ‘Glass Palace’ of Bagore Ki Haveli famous?)
बागौर की हवेली के अंदर स्थित ‘कांच महल’ (Glass Palace) मेवाड़ की उत्कृष्ट चित्रकारी और बेजोड़ कांच की नक्काशी (Exquisite Mirror Work) का एक अद्भुत नमूना है। यह कमरा विशेष रूप से शाही परिवार की महिलाओं (Royal Ladies) के लिए बनाया गया था, जहाँ वे अपनी साज-सज्जा (Dressing and Grooming) किया करती थीं। इस महल की दीवारों और छतों पर बारीक कांच के टुकड़ों (Intricate Glass Pieces) से सुंदर कलाकृतियाँ और बेल-बूटे बनाए गए हैं, जो रोशनी पड़ने पर पूरे कमरे को जगमगा देते हैं। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, जब सूरज की किरणें इन कांच के टुकड़ों पर पड़ती हैं, तो यह महल किसी जादुई दुनिया (Magical World) जैसा दिखाई देता है। यहाँ की खिड़कियों से पिछोला झील (Pichola Lake) का मनमोहक नज़ारा भी दिखता है, जो पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन फोटो पॉइंट (Photography Point) है।
बागौर की हवेली के ‘मोर चौक’ की क्या विशेषता है? (What are the unique features of ‘Peacock Courtyard’ in Bagore Ki Haveli?)
‘मोर चौक’ (Peacock Courtyard) बागौर की हवेली का सबसे सुंदर और जीवंत हिस्सा माना जाता है। इस चौक का नाम यहाँ की दीवारों पर बनी मोर की शानदार आकृतियों (Stunning Peacock Mosaics) के कारण पड़ा है। इन मोरों को रंगीन कांच के टुकड़ों (Colored Glass Pieces) और बारीक नक्काशी से इतनी कुशलता से बनाया गया है कि वे बिल्कुल असली प्रतीत होते हैं। यह चौक राजस्थानी शिल्पकारों (Rajasthani Artisans) की कलात्मकता का प्रमाण है। पुराने समय में यहाँ शाही उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम (Cultural Events) आयोजित किए जाते थे। हमारी टीम ने वहां के स्थानीय गाइड (Local Guide) से जाना कि इन मोरों की बनावट में नीले, हरे और सुनहरे रंगों का जो मेल है, वह मेवाड़ की समृद्ध विरासत (Rich Heritage of Mewar) को दर्शाता है। यदि आप उदयपुर की यात्रा (Udaipur Trip) पर हैं, तो मोर चौक की फोटोग्राफी करना बिल्कुल न भूलें।
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