सालासर बालाजी मंदिर: जहाँ दाढ़ी-मूँछ वाले हनुमान जी हरते हैं भक्तों के सारे कष्ट (Salasar Balaji Temple Churu Guide)

  • राजस्थान के चूरू जिले (Churu District) में स्थित सालासर बालाजी मंदिर (Salasar Balaji) करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान हनुमान की प्रतिमा दाढ़ी और मूँछ (Bearded Hanuman Ji) के साथ विराजमान है।

सालासर बालाजी मंदिर का चमत्कारी इतिहास ( salasar balaji History and Miracle)

  • इस मंदिर की स्थापना के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है। माना जाता है कि 18वीं शताब्दी में नागौर जिले के ‘आसोता’ गाँव में एक किसान के खेत में हल चलाते समय हनुमान जी की यह दिव्य प्रतिमा प्रकट हुई थी।
  • भक्त शिरोमणि मोहनदास जी: सालासर के परम भक्त मोहनदास जी को स्वप्न में बालाजी ने दर्शन दिए थे। उन्हीं की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान यहाँ साक्षात प्रकट हुए।
  • दाढ़ी-मूँछ वाली प्रतिमा: प्रतिमा के प्रकट होने के बाद जब इसे सालासर लाया गया, तो इसमें दाढ़ी और मूँछें उभरी हुई थीं, जो हनुमान जी के ‘विराट और पुरुषार्थी’ स्वरूप को दर्शाती हैं।

सालासर बालाजी मंदिर में 5 विशेष अनुभव (5 Things to Experience in Salasar Balaji)

  • नारियल बांधने की परंपरा (Tying Coconut): यहाँ श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी करने के लिए मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन वृक्ष पर लाल कपड़े में नारियल बांधते हैं।
  • मोहनदास जी की धूनी: मंदिर के पास ही भक्त मोहनदास जी की पवित्र धूनी (Holy Fire) है, जिसके दर्शन किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है।
  • अंजनी माता मंदिर: सालासर से कुछ ही दूरी पर बालाजी की माता अंजनी का भव्य मंदिर है, जहाँ संतान प्राप्ति की कामना के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
  • सवामणी प्रसाद: यहाँ ‘सवामणी’ (50 किलो का भोग) चढ़ाने का विशेष महत्व है। हमारी टीम ने देखा कि लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर सवामणी का वितरण करते हैं।
  • स्थानीय ढाबों का जायका: मंदिर के आसपास के लोकल ढाबों (Local Dhabas) पर आप शुद्ध देशी घी का चूरमा और सांगरी की सब्जी का स्वाद ले सकते हैं, जो आपकी थकान मिटा देगा।

FAQ salasar balaji maharaj

सालासर बालाजी मंदिर की स्थापना का श्रेय किसे जाता है?

सालासर बालाजी मंदिर की स्थापना का मुख्य श्रेय भक्त शिरोमणि मोहनदास जी (Mohandas Ji) को जाता है। वे बचपन से ही हनुमान जी के परम भक्त थे। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर बालाजी महाराज ने उन्हें मूर्ति के रूप में प्रकट होने का वचन दिया था। संवत 1811 में जब आसोता गाँव के खेत में यह प्रतिमा मिली, तो उसे बड़े आदर के साथ सालासर लाया गया और मंदिर की नींव रखी गई।

सालासर बालाजी मंदिर हनुमान जी की प्रतिमा अन्य मंदिरों से अलग (दाढ़ी-मूँछ वाली) क्यों है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी ने मोहनदास जी को दर्शन दिए थे, तब वे इसी वयस्क स्वरूप में थे। चूँकि भक्त को इसी रूप में साक्षात दर्शन हुए थे, इसलिए मूर्ति का स्वरूप भी वैसा ही रखा गया। यह दुनिया का संभवतः इकलौता मंदिर है जहाँ हनुमान जी को एक पूर्ण पुरुष (Bearded Face) के रूप में पूजा जाता है, जो उनके शक्ति और परिपक्वता का प्रतीक है।

सालासर धाम पहुँचने के लिए सबसे अच्छा साधन क्या है (How to Reach Salasar)?

सालासर धाम सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यदि आप हवाई मार्ग से आ रहे हैं, तो जयपुर एयरपोर्ट (Jaipur Airport) सबसे नजदीक है, जहाँ से आप टैक्सी ले सकते हैं। रेल मार्ग के लिए सुजानगढ़ (Sujangarh) या लक्ष्मणगढ़ (Laxmangarh) रेलवे स्टेशन पास पड़ते हैं। राजस्थान रोडवेज की बसें भी दिल्ली, जयपुर और बीकानेर से नियमित रूप से चलती हैं।

नारियल बाँधने की मन्नत का क्या रहस्य है और इसे कैसे किया जाता है?

सालासर में नारियल बाँधना एक प्राचीन परंपरा है। श्रद्धालु एक नारियल को लाल कपड़े (मौलि) में लपेटकर मंदिर के प्रांगण में मौजूद जाल या वृक्ष पर अपनी मनोकामना मांगते हुए बाँधते हैं। माना जाता है कि यहाँ सच्चे मन से बाँधा गया धागा कभी खाली नहीं जाता। जब मन्नत पूरी हो जाती है, तो भक्त पुन: दर्शन के लिए आते हैं और अक्सर सवामणी (Sawamani) का भोग लगाते हैं।

क्या सालासर के पास रुकने के लिए अच्छी धर्मशालाएं और होटल उपलब्ध हैं?

जी हाँ, सालासर एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थल है, इसलिए यहाँ हर बजट के हिसाब से रुकने की व्यवस्था है। यहाँ 1500 के बजट में होटल (Hotels under 1500) और कई ट्रस्ट की साफ-सुथरी धर्मशालाएं आसानी से मिल जाती हैं। हमारी टीम ने अनुभव किया कि यहाँ की धर्मशालाओं में खाने-पीने और रहने की व्यवस्था बहुत ही व्यवस्थित और सस्ती है।

सालासर से खाटू श्याम जी की दूरी कितनी है और कैसे पहुँचें?

सालासर से खाटू श्याम जी की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। आप निजी टैक्सी, अपनी कार या राजस्थान रोडवेज की बसों के जरिए 2 से 2.5 घंटे में यह सफर तय कर सकते हैं।

भगवान के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है। सालासर बालाजी की कृपा से जीवन की कठिन राहें सरल हो जाती हैं और मन को अद्भुत शांति प्राप्त होती है। यदि आप भी जीवन में बल, साहस और सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में हैं, तो एक बार सालासर बालाजी महाराज के चरणों में अवश्य आएँ। अगर यह बालाजी जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो नीचे कमेंट में “जय बालाजी” लिखें और अपने अनुभव हमारे साथ साझा करें।

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