सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन समय 2026 | आज का आरती टाइम, नियम और विशेष दिन

सेठ सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया (चित्तौड़गढ़, राजस्थान) में दर्शन का सही समय जानना हर श्रद्धालु के लिए बेहद जरूरी है।गलत समय पर पहुँचने से कई बार भक्तों को घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है या आरती दर्शन का लाभ नहीं मिल पाता।इस लेख में आपको सेठ सांवरिया सेठ का आज का दर्शन समय, सभी प्रमुख आरतियों की टाइमिंग, भीड़ वाले दिन, दर्शन नियम और उपयोगी टिप्स बिल्कुल स्पष्ट और अपडेट जानकारी के साथ मिलेंगे, ताकि आपकी यात्रा शांत, सफल और आध्यात्मिक बन सके।

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सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन समय (Daily Darshan Timing)

सामान्य दिनों में दर्शन समय सुबह: लगभग 4:00 बजे से रात: लगभग 9:00 बजे तक और त्योहार, एकादशी, फाल्गुन मेला और विशेष अवसरों पर दर्शन समय में परिवर्तन संभव है।

सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन और प्रमुख आरतियाँ (Aarti Timing)

1. मंगला आरती का समय: सुबह लगभग 4:00 बजे और यह दिन की पहली और सबसे पवित्र आरती मानी जाती है।

2. श्रृंगार आरती का समय: सुबह इस आरती में भगवान का भव्य श्रृंगार किया ।

3 राजभोग आरती का समय: दोपहर को भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जाता है

4 शयन आरती रात को होती है और दिन की अंतिम आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है।

  • गर्भगृह में फोटो और वीडियो निषेध✔ मोबाइल फोन का सीमित उपयोग✔ लाइन व्यवस्था का पालन अनिवार्य✔ धक्का-मुक्की से बचें✔ बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का विशेष ध्यान रखें✔ मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखें

सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन में सबसे अधिक भीड़ कब रहती है?

  • एकादशी🌑 अमावस्या🎉 जन्माष्टमी🌸 फाल्गुन माह (मेला समय)

सुबह दर्शन बनाम शाम दर्शन – क्या बेहतर है?

सुबह दर्शन के फायदे है कि भीड़ अपेक्षाकृत कम होती है और शांत वातावरण होता है और वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपयुक्त है।

FAQ सांवरिया सेठ मंदिर दर्शन

सांवरिया सेठ मंदिर में दर्शन का सही समय क्या है?

सांवरिया सेठ मंदिर, मंडफिया में सामान्य दिनों में दर्शन प्रातः लगभग 4:00 बजे से शुरू होकर रात्रि 9:00 बजे तक होते हैं।हालाँकि एकादशी, फाल्गुन मेला, जन्माष्टमी और विशेष पर्वों पर दर्शन समय में बदलाव या विस्तार किया जा सकता है। इसलिए यात्रा से पहले दर्शन समय की पुष्टि करना उचित रहता है।

सांवरिया सेठ मंदिर में प्रतिदिन कितनी आरतियाँ होती हैं?

मंदिर में प्रतिदिन मुख्य रूप से चार आरतियाँ होती हैं—मंगला आरती, श्रृंगार आरती, राजभोग आरती और शयन आरती।हर आरती का अपना आध्यात्मिक महत्व होता है और भक्त विशेष रूप से मंगला और शयन आरती में अधिक संख्या में शामिल होते हैं।

मंगला आरती का महत्व क्या है और यह कब होती है?

मंगला आरती दिन की पहली आरती होती है, जो प्रातः लगभग 4:00 बजे संपन्न होती है।मान्यता है कि मंगला आरती के दर्शन करने से भक्तों के सभी कार्य शुभ रूप से प्रारंभ होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

क्या आम भक्त आरती में शामिल हो सकते हैं?

हाँ, सांवरिया सेठ मंदिर में आरती दर्शन की सुविधा सभी श्रद्धालुओं के लिए होती है।हालाँकि अधिक भीड़ वाले दिनों में सुरक्षा और व्यवस्था के कारण भक्तों को लाइन में खड़ा होकर ही आरती दर्शन करने पड़ते हैं।

दर्शन और आरती के समय मंदिर में कितनी भीड़ रहती है?

सामान्य दिनों में दर्शन और आरती के समय 15–30 मिनट में दर्शन हो जाते हैं।लेकिन एकादशी, अमावस्या, शनिवार और फाल्गुन माह के दौरान भीड़ अधिक होने से 1 से 2 घंटे तक का समय लग सकता है।

क्या सांवरिया सेठ मंदिर में VIP दर्शन की सुविधा उपलब्ध है?

सामान्यतः सांवरिया सेठ मंदिर में VIP दर्शन की व्यवस्था नहीं होती।यहाँ सभी श्रद्धालुओं के लिए समान दर्शन व्यवस्था रखी जाती है, जिससे भक्तों के बीच समानता और अनुशासन बना रहता है।

क्या रात में आरती के बाद दर्शन होते हैं?

नहीं, शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं।रात्रि में दर्शन की अनुमति नहीं होती, इसलिए भक्तों को निर्धारित समय के भीतर ही दर्शन करने चाहिए।

दर्शन और आरती के दौरान कौन-कौन से नियमों का पालन जरूरी है?

दर्शन के समय भक्तों को✔ मोबाइल और कैमरा का सीमित उपयोग✔ गर्भगृह में फोटो-वीडियो निषेध✔ लाइन व्यवस्था का पालन✔ धक्का-मुक्की से बचाव✔ मंदिर परिसर में शांति बनाए रखनाजैसे नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

सांवरिया सेठ मंदिर में सबसे शांत दर्शन कब होते हैं?

यदि आप भीड़ से बचकर शांत वातावरण में दर्शन करना चाहते हैं, तोसुबह जल्दी (मंगला आरती के बाद) या सामान्य कार्यदिवस (सोमवार से गुरुवार) सबसे उपयुक्त माने जाते हैं।

पहली बार आने वाले भक्तों के लिए क्या सुझाव हैं?

पहली बार आने वाले श्रद्धालुओं को✔ सुबह के समय दर्शन की योजना बनानी चाहिए✔ हल्का सामान साथ रखना चाहिए✔ पर्याप्त समय लेकर आना चाहिए✔ मंदिर की मर्यादा और नियमों का सम्मान करना चाहिए

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