श्याम भक्तों के मन में यह जिज्ञासा उठती है कि खाटू श्याम जी की पोशाक कौन सिलता है? बाबा श्याम का बागा और पोशाक का कपड़ा कहाँ से आता है? इस भव्य श्रृंगार को करने के क्या नियम हैं और इसे कौन करता है? इंटरनेट पर इस बेहद महत्वपूर्ण और रहस्यमयी विषय पर कोई भी विस्तृत जानकारी मौजूद नहीं है। आज के इस विशेष लेख में हम आपको बाबा श्याम की पोशाक मेकिंग, दर्जी परिवार, कपड़े के चयन और श्रृंगार के कड़े नियमों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
बाबा श्याम की पोशाक को क्या कहा जाता है और इसका महत्व क्या है?
धार्मिक ग्रंथों और स्थानीय राजस्थानी संस्कृति के अनुसार, खाटू श्याम जी द्वारा धारण की जाने वाली पोशाक को आम भाषा में वस्त्र न कहकर ‘बागा’ या ‘पोशाक’ कहा जाता है। बाबा श्याम का यह बागा उनके राजा स्वरूप को दर्शाता है। महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम ‘श्याम’ दिया था और कलयुग में अपने रूप में पूजे जाने का वरदान दिया था। यही कारण है कि बाबा श्याम का श्रृंगार हमेशा एक राजा या महाराजा की तरह किया जाता है।
बाबा श्याम को बागा अर्पित करने का आध्यात्मिक महत्व बहुत बड़ा है। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर या बाबा के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट करने के लिए उन्हें पोशाक भेंट करते हैं। ऐसा माना जाता है कि बाबा को प्रेमपूर्वक बागा अर्पित करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
बाबा श्याम का बागा और पोशाक का कपड़ा
बाबा श्याम की पोशाक के लिए इस्तेमाल होने वाला कपड़ा कोई साधारण कपड़ा नहीं होता। इस कपड़े के चयन से लेकर इसकी बुनाई तक में विशेष सावधानी और अटूट पवित्रता का ध्यान रखा जाता है। अगर बात बाबा श्याम के बागे के लिए शाही और रेशमी कपड़ों के चयन की करें, तो मुख्य रूप से केवल उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्रों का ही उपयोग किया जाता है। इसमें शुद्ध सिल्क (Pure Silk) बाबा के दैनिक और विशेष त्योहारों के श्रृंगार के लिए सबसे पहली पसंद माना जाता है, क्योंकि इसकी अलौकिक चमक और तरलता बाबा के स्वरूप को और अधिक निखार देती है। वहीं दूसरी ओर, सोने और चांदी के महीन धागों से बुने गए ब्रोकेड (Brocade) के भव्य कपड़े का उपयोग मुख्य रूप से एकादशी और फाल्गुन मेले जैसे बड़े, पावन अवसरों पर किया जाता है। मौसम के बदलते मिजाज के अनुसार भी बाबा की सेवा का पूरा ख्याल रखा जाता है; जैसे सर्दियों के मौसम में बाबा को ठंड से बचाने और उन्हें एक भारी, शाही लुक देने के लिए गहरे रंग के मखमली वेलवेट (Velvet) कपड़ों का इस्तेमाल होता है, तो ठीक इसके विपरीत, जब राजस्थान में गर्मियों के दौरान अत्यधिक गर्मी पड़ती है, तब अपने भक्तवत्सल स्वरूप में बाबा को किसी भी प्रकार का कष्ट न हो, इसलिए पुजारियों द्वारा गर्मियों के दिनों में हल्के, ठंडे और शुद्ध सूती (Pure Cotton) कपड़ों से बने विशेष बागे प्रेमपूर्वक पहनाए जाते हैं
बाबा श्याम का बागा और पोशाक का कपड़ा कहाँ से आता है?
वैसे तो देश और दुनिया के कोने-कोने से श्याम भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार कपड़ा लाते हैं, लेकिन मंदिर के विशेष ऑर्डर्स और भारी कारीगरी के लिए कपड़ा मुख्य रूप से चार शहरों से आता है:
• जयपुर (राजस्थान): जयपुर अपनी पारंपरिक गोटा-पत्ती और लहरिया के काम के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बाबा की पोशाक में लगने वाला अधिकांश गोटा और पारंपरिक हैंडीक्राफ्ट वर्क जयपुर के जौहरी बाज़ार और पुरोहित जी की हवेली से आता है।
• सूरत (गुजरात): सूरत को भारत की कपड़ा नगरी कहा जाता है। यहाँ से विशेष रूप से जरी, सेक्विन (Sitara Work) और ब्रोकेड के चमकीले कपड़े मंगाए जाते हैं।
• कोलकाता (पश्चिम बंगाल): कोलकाता अपनी बारीक धागे की कढ़ाई और कश्मीरी व जरदोजी वर्क के लिए जाना जाता है। जब बाबा के लिए बेहद अनूठी और हाथ से कढ़ाई की हुई पोशाक बनानी होती है, तो कपड़ा कोलकाता के कारीगरों से तैयार कराया जाता है।
• अहमदाबाद (गुजरात): यहाँ से उच्च गुणवत्ता वाले सूती और सिल्क के थान खरीदे जाते हैं।
खाटू श्याम जी की पोशाक कौन सिलता है और कहाँ बनती है?
खाटू धाम (गाँव) के भीतर और मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित रींगस कस्बे में कुछ ऐसे विशेष और पारंपरिक दर्जी परिवार रहते हैं, जिनकी तीन से चार पीढ़ियां केवल और केवल बाबा श्याम की पोशाक और उनके निशान (धार्मिक ध्वज) सिलने का काम कर रही हैं।इन कारीगरों के लिए यह कोई व्यवसाय या आम नौकरी नहीं है, बल्कि वे इसे बाबा श्याम की उनके परिवार पर एक विशेष कृपा और ईश्वरीय सेवा मानते हैं। इन परिवारों के सदस्य सुबह स्नान करके, पूरी शुद्धता के साथ, बाबा के भजनों का गान करते हुए सिलाई मशीन पर बैठते हैं।
बाबा श्याम की पोशाक का सटीक नाप
यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि बाबा श्याम के शीश मंडल और उनके धड़, यानी पीछे का वह हिस्सा जहां बागा बांधा जाता है, उसका एक निश्चित और सदियों पुराना पारंपरिक नाप होता है। सबसे खास बात यह है कि यह पवित्र नाप इन स्थानीय पारंपरिक दर्जी परिवारों के पास पीढ़ियों से पूरी गोपनीयता के साथ सुरक्षित है। आम इंसानों की तरह बाबा का बार-बार शारीरिक नाप नहीं लिया जाता, बल्कि मुख्य पुजारियों द्वारा प्राचीन काल से तय किए गए इसी मानक नाप के आधार पर कुशल दर्जी पूरी श्रद्धा से कपड़े को काटते और सिलते हैं। जब भी देश-विदेश से आने वाले श्याम भक्त अपनी मन्नत के अनुसार अपनी पसंद का रंग, जैसे लाल, पीला, केसरिया, नीला या हरा और अपना बजट इन कारीगरों को बताते हैं, तो ये अनुभवी शिल्पकार बिना बाबा को देखे, उसी पारंपरिक माप के गणित से हूबहू उनके विग्रह पर एकदम सटीक और फिट बैठने वाली अलौकिक व भव्य पोशाक तैयार कर देते हैं।
बाबा श्याम की पोशाक तैयार होने में कितना समय और कितनी लागत आती है?
बाबा श्याम की पोशाक की मेकिंग में लगने वाला समय और उसकी कुल लागत पूरी तरह से वस्त्रों पर की जाने वाली बारीक कारीगरी और कपड़े के प्रकार पर निर्भर करती है। अगर बात बाबा के रोजमर्रा के बदलाव के लिए सिली जाने वाली दैनिक पोशाक (Daily Poshak) की करें, तो ये साधारण और सुंदर पोशाकें मात्र 1 से 2 दिन में बनकर पूरी तरह तैयार हो जाती हैं। इसके विपरीत, जब बात फाल्गुन के पावन लक्खी मेले, कार्तिक पूर्णिमा, जन्माष्टमी या हर महीने आने वाली शुक्ल पक्ष की विशेष एकादशी की होती है, तब बाबा के लिए अत्यंत भव्य, दिव्य और विशेष भारी पोशाकें (Heavy Festival Poshak) तैयार की जाती हैं। इन विशिष्ट पोशाकों को आम मशीनों से नहीं, बल्कि कुशल कारीगरों द्वारा अपने हाथों से सोने-चांदी के तारों की महीन कढ़ाई यानी सच्ची जरदोजी, कीमती चमकीले नग, मोती और भारी राजस्थानी गोटे का काम करके सजाया जाता है; यही कारण है कि ऐसी एक सिंगल शाही पोशाक को पूरी बारीकी से तैयार करने में 15 दिन से लेकर 1 महीने तक का लंबा समय लग जाता है, जिसमें कई अनुभवी कारीगर पूरी पवित्रता के साथ एक साथ दिन-रात अपनी सेवा देते हैं।
बाबा के दरबार में अमीर-गरीब एक समान हैं, इसलिए उनके बागे हर बजट में उपलब्ध हैं। जहाँ साधारण सूती या सिल्क पोशाक ₹2,100 से ₹5,100 में मिल जाती है, वहीं मध्यम गोटा-पत्ती वाली ₹11,000 से ₹31,000 में बनती है। संपन्न भक्त असली सोने-चांदी के वर्क वाली भव्य पोशाकें ₹51,000 से लाखों रुपये में तैयार करवाते हैं।
क्या कोई आम दर्जी बाबा श्याम की पोशाक सिल सकता है?
तकनीकी रूप से कोई भी कुशल दर्जी इसे सिल सकता है, लेकिन बिना सटीक नाप (Measurement) और कड़े नियमों (शुद्धता) की जानकारी के इसे सही से बनाना असंभव है। इसलिए खाटू धाम और रींगस के पारंपरिक दर्जी ही इसे सिलते हैं जिनके पास इसका पुश्तैनी नाप उपलब्ध है।
बाबा श्याम की उतारी गई (पुरानी) पोशाकों का क्या किया जाता है?
जब बाबा श्याम की पोशाक बदली जाती है, तो उतारी गई पवित्र पोशाक को मंदिर समिति या पुजारियों द्वारा उन विशेष भक्तों को प्रसाद के रूप में दे दिया जाता है जिन्होंने उसे चढ़ाया था या बड़ी मन्नत मांगी थी। कई बार इन पोशाकों के छोटे टुकड़ों को ताबीज या लॉकेट में डालकर भक्तों को रक्षा-कवच के रूप में भी वितरित किया जाता है।
क्या कोई भी भक्त बाबा श्याम को पोशाक चढ़ा सकता है? (बाबा श्याम की पोशाक बुकिंग प्रक्रिया)
हाँ, कोई भी आम या खास भक्त बाबा श्याम को पोशाक भेंट कर सकता है, लेकिन इसके लिए मंदिर की एक निश्चित प्रक्रिया और नियम हैं जिसका पालन करना आवश्यक है
करोड़ों भक्तों के कारण खाटू श्याम जी में पोशाक चढ़ाने की महीनों लंबी वेटिंग लिस्ट होती है, जिसके लिए आधिकारिक कार्यालय या मुख्य पुजारी परिवार से संपर्क कर तारीख बुक करनी पड़ती है। मंदिर के कड़े नियमों और सटीक नाप के अनुसार ही सिली हुई पोशाक स्वीकार की जाती है।
Khatu Shyam Ji Poshak Online खाटू श्याम जी के वस्त्र ऑनलाइन
खाटू श्याम जी पोशाक ऑनलाइन (Khatu Shyam Ji Poshak Online) के माध्यम से आप श्याम बाबा के लिए सुंदर और प्रीमियम बागा घर बैठे खरीद सकते हैं। यहाँ सिल्क, मखमली (velvet) और नेट के कपड़ों पर जरी, गोटा-पत्ती और मोतियों की हैवी कारीगरी वाली पोशाकें उपलब्ध हैं। यह सभी साइज (5 इंच से बड़े विग्रहों तक) और बसंती, लाल, गुलाबी जैसे आकर्षक रंगों में मिलती हैं। एकादशी और फाल्गुन मेले जैसे विशेष अवसरों के लिए बेहतरीन डिजाइन्स ऑनलाइन बेस्ट प्राइस पर उपलब्ध हैं।
Shyam Baba Heavy Poshak
श्याम बाबा हैवी पोशाक (Shyam Baba Heavy Poshak) खाटू नरेश के श्रृंगार के लिए एक बेहद खूबसूरत और प्रीमियम विकल्प है। इस बागा को विशेष रूप से सिल्क और वेलवेट के शानदार कपड़ों पर तैयार किया जाता है, जिस पर जरी, जरदोजी, कुंदन और मोतियों की हैवी हैंडवर्क कारीगरी की जाती है। एकादशी, फाल्गुन मेले और विशेष उत्सवों पर बाबा श्याम को सजाने के लिए यह रॉयल पोशाक सबसे उत्तम मानी जाती है।
खाटू श्याम जी के बागा (पोशाक) के लिए सबसे शुभ रंग कौन सा माना जाता है?
बाबा श्याम को सभी रंग प्रिय हैं, लेकिन बसंती (पीला), केसरिया, लाल और नीला रंग सबसे शुभ और लोकप्रिय माना जाता है। बसंत पंचमी पर बसंती और फाल्गुन मेले में रंग-बिरंगे हैवी बागा चढ़ाने की विशेष परंपरा है।
घर के मंदिर के लिए श्याम बाबा की पोशाक का सही साइज कैसे चुनें?
ऑनलाइन खरीदते समय अपने बाबा श्याम के विग्रह (मूर्ति) या शीश की ऊंचाई इंच में मापें। आमतौर पर घरों में 4 इंच, 5 इंच और 6 इंच के विग्रह होते हैं, जिनके लिए इसी साइज के तैयार बागा ऑनलाइन आसानी से मिल जाते हैं।
क्या खाटू श्याम जी की पोशाक के साथ पूरा शृंगार सेट मिलता है?
: हाँ, ऑनलाइन और मार्केट में दोनों विकल्प हैं। आप चाहें तो सिर्फ पोशाक (बागा और पटका) ले सकते हैं, या फिर पोशाक, मुकुट/पगड़ी, माला और मोरछड़ी का पूरा कॉम्बो सेट भी खरीद सकते हैं।
बाबा श्याम की नाइट ड्रेस (शयन पोशाक) क्या होती है?
रात को बाबा के शयन (सोने) के समय भारी पोशाक उतारकर उन्हें हल्के कॉटन या रेशमी कपड़े का सीधा पटका और धोती पहनाई जाती है, जिसे नाइट ड्रेस या शयन बागा कहते हैं।
लड्डू गोपाल और खाटू श्याम जी के विग्रह (Idol) की पोशाक के साइज में क्या अंतर है?
लड्डू गोपाल की पोशाक गोल (घेरेदार) होती है, जबकि खाटू श्याम जी के विग्रह (शीश या खड़ी मूर्ति) के लिए सीधे कट वाले पटके और बागे की जरूरत होती है। घर के छोटे विग्रहों के लिए लोग आमतौर पर “Khatu Shyam Ji Dress 4 Inch” या “5 Inch Poshak” सर्च करते हैं। वहीं बड़ी चौकियों के लिए “Size 6” से लेकर 2×2 फीट तक के बड़े सेट इस्तेमाल होते हैं।
त्योहारों और विशेष दिनों के अनुसार बाबा श्याम के पोशाक के रंगों का चयन कैसे करें?
बसंत पंचमी और फाल्गुन एकादशी: इसके लिए पीले रंग का “Basanti Baga” सबसे उत्तम है।
शाही उत्सवों पर: गहरे नीले रंग की “Shahi Neel Poshak” चढ़ाई जाती है।
• नियमित श्रृंगार व मंगलवार: इसके लिए “Lal Kesari Dress” (लाल-केसरिया) बेहद शुभ मानी जाती है।
बाबा श्याम का बागा मिलने के बाद घर पर क्या करना चाहिए?
खाटू श्याम धाम से बाबा का उतरा हुआ बागा (प्रसाद स्वरूप) मिलना परम सौभाग्य की बात है। घर लाने के बाद इसे सीधे जमीन पर या अपवित्र जगह पर न रखें। इसे सबसे पहले अपने घर के मंदिर या तिजोरी (लॉकर) में स्थापित करें। प्रतिदिन धूप-दीप दिखाते समय इस बागे को भी नमन करें। मान्यता है कि इसे तिजोरी में रखने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
श्याम बाबा के वस्त्र सिलने या बनाने के क्या नियम हैं?
घर पर श्याम बाबा का बागा सिलते समय पवित्रता का विशेष ध्यान रखें। सिलाई करने वाला व्यक्ति स्नान करके स्वच्छ हो और केवल नए, साफ कपड़े का ही उपयोग करे। कार्य के दौरान मन में “जय श्री श्याम” का जाप करते रहें। बाबा के लिए हमेशा बसंती, लाल, नीला या गुलाबी जैसे चमकीले रंगों का चुनाव करें और काले या गहरे उदास रंगों से पूरी तरह बचें।
बागा मिलने के बाद अनजाने में हुई भूल का क्या उपाय है?
यदि बागा मिलने के बाद अनजाने में वह जमीन पर गिर जाए, उस पर अशुद्ध हाथ लग जाएं, या कोई अन्य भूल हो जाए, तो घबराएं नहीं। इसके निवारण के लिए बाबा श्याम के सम्मुख बैठकर गंगाजल छिड़ककर बागे को पवित्र करें, एक घी का दीपक जलाएं और अपनी भूल के लिए क्षमा याचना करें। बाबा बड़े दयालु हैं, वे सच्चे मन से मांगी गई माफी को तुरंत स्वीकार करते हैं। भविष्य के लिए सावधानी बरतने का संकल्प लें।
क्या बागा के टुकड़े को लॉकेट या अंगूठी में पहन सकते हैं?
हाँ, बाबा श्याम के बागे (प्रसादी वस्त्र) के एक छोटे से टुकड़े को लॉकेट, ताबीज या अंगूठी (कवच की तरह) में सुरक्षित करवाकर धारण किया जा सकता है। भक्त इसे बाबा के साक्षात् आशीर्वाद के रूप में पहनते हैं ताकि वे हमेशा बाबा की सकारात्मक ऊर्जा से घिरे रहें। हालांकि, इसे पहनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि शौचालय जाते समय या सूतक (अशुद्ध समय) के दौरान इसकी पवित्रता खंडित न हो; ऐसे समय में इसे उतारकर मंदिर में रख देना बेहतर माना जाता है।
खाटू श्याम जी का असली बागा प्रसाद कैसे मिलता है?
खाटू श्याम जी का उतारा हुआ असली प्रसादी बागा मिलना पूरी तरह से बाबा की कृपा और भाग्य पर निर्भर करता है। इसे प्राप्त करने के मुख्य दो तरीके हैं
1. मंदिर कमेटी के माध्यम से: जो भक्त मंदिर में नई पोशाक चढ़ाने की रसीद कटवाते हैं या विशेष सेवा करते हैं, उन्हें बाबा का उतारा हुआ पुराना प्रसादी बागा (या उसका एक अंश) आशीर्वाद के रूप में दिया जाता है।
2.पुजारियों के माध्यम से: मंदिर के सेवादार और पुजारियों के माध्यम से भी भाग्यशाली भक्तों को प्रसादी वस्त्र या बागे का टुकड़ा उपहार स्वरूप मिल जाता है।
बाबा श्याम का बागा कब और कहाँ मिलता है? (जैसे बसंत पंचमी या फाल्गुन मेले के नियम)
बाबा श्याम का मुख्य बागा प्रसाद खाटू श्याम जी के मुख्य मंदिर (राजस्थान) में ही मिलता है।• बसंत पंचमी और फाल्गुन मेला: इन विशेष उत्सवों पर देश-विदेश से भक्त बाबा के लिए अनोखे और अमूल्य बागे लेकर आते हैं। इन दिनों में मंदिर में हर कुछ घंटों में या प्रतिदिन बाबा का शृंगार बदला जाता है। उत्सव के दौरान पोशाक चढ़ाने के नियम बहुत कड़े होते हैं, जिसके लिए मंदिर कमेटी से हफ्तों या महीनों पहले संपर्क करके एडवांस बुकिंग या रसीद कटवानी होती है। मेला समाप्त होने के बाद ही यह प्रसादी बागा तय नियमों के अनुसार भक्तों को वितरित किया जाता है।
अगर खाटू धाम में सीधे बागा प्रसाद न मिले तो कहाँ से लें?
खाटू धाम की प्रामाणिक दुकानें: खाटू श्याम मंदिर के आसपास और मुख्य बाजार में ऐसी कई पुरानी और प्रतिष्ठित दुकानें हैं, जो मंदिर के पुजारियों या सेवादारों से जुड़े होते हैं। उनके पास प्रसादी वस्त्रों के छोटे टुकड़े (कतरन) उपलब्ध होते हैं, जिन्हें आप श्रद्धापूर्वक ले सकते हैं।
प्रतीकात्मक स्पर्श कराकर: आप बाजार से एक नया सुंदर बागा खरीदकर मंदिर के पुजारियों को दे सकते हैं। वे उस बागे को बाबा श्याम के विग्रह या चरणों से स्पर्श (Touch) कराकर आपको वापस लौटा देते हैं, जिसे “चरण-स्पर्शी प्रसादी बागा” कहा जाता है। यह भी उतना ही फलदायी माना जाता है।
खाटू श्याम जी का बागा क्या होता है? आम पोशाक और असली बागे में क्या अंतर है?
‘बागा’ मूल रूप से खाटू श्याम जी के विग्रह (शीश) को पहनाए जाने वाले विशेष राजसी वस्त्र (पोशाक और पटका) को कहा जाता है। आम पोशाक और असली बागे में बड़ा अंतर है
• आम पोशाक: यह बाजार में मिलने वाले सामान्य रेडीमेड वस्त्र होते हैं, जो केवल कपड़े और साधारण गोटे से बने होते हैं।
असली बागा: यह केवल एक कपड़ा नहीं बल्कि बाबा की श्रद्धा में डूबी एक कलाकृति है। इसे सिल्क या मखमली कपड़े पर असली सोने-चांदी के तारों की जरी-जरदोजी, कीमती रत्नों, हीरों और मोतियों से हाथों द्वारा तैयार किया जाता है। इसकी बनावट खाटू नरेश के शीश के आकार के अनुसार बिल्कुल सटीक और शाही अंदाज में की जाती है, जो विग्रह पर सजते ही अलौकिक रूप ले लेती है।
बाबा श्याम का बागा चमत्कारी क्यों माना जाता है?
बाबा श्याम का बागा चमत्कारी इसलिए माना जाता है क्योंकि वह सीधे शीश के दानी (बर्बरीक) के दिव्य विग्रह को स्पर्श करता है। खाटू श्याम जी की मूर्ति जीवंत मानी जाती है। जब कई दिनों तक वह वस्त्र बाबा के शरीर पर रहता है, तो उसमें मंदिर के मंत्रोच्चार, भजनों की गूंज और बाबा की दिव्य सकारात्मक ऊर्जा समाहित हो जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस बागे का एक छोटा सा टुकड़ा भी अगर घर में रख दिया जाए, तो वह नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है, बीमारियाँ ठीक करता है और अटके हुए काम पूरे कर देता है।
खाटू श्याम जी का पुराना उतरा हुआ बागा कहाँ जाता है?
खाटू धाम में रोज बदलने वाले पुराने बागे कहाँ जाते हैं, यह बड़ा रहस्य है। मंदिर नियमानुसार इन्हें कहीं फेंका या बेचा नहीं जाता। इसका बड़ा हिस्सा पोशाक भेंट करने वाले भाग्यशाली भक्तों और पुजारियों में प्रसादी रूप में बंटता है। ऐतिहासिक वस्त्र सुरक्षित भंडार में सहेजे जाते हैं, जबकि कुछ को छोटे टुकड़ों (कतरन) में बांटकर भक्तों को रक्षा-कवच स्वरूप दिया जाता है।


