पुष्कर मेला अजमेर राजस्थान 2026 की सही गाइड। जानें पुष्कर मेला कब है 2026, मुख्य आकर्षण, ऊंट सफारी का किराया और अजमेर से पुष्कर की दूरी व रूट।”
पुष्कर मेला अजमेर राजस्थान कब है 2026
विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला 2026 इस वर्ष 17 नवंबर से 24 नवंबर 2026 तक राजस्थान के पवित्र शहर पुष्कर में आयोजित किया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह धार्मिक और सांस्कृतिक मेला हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। मेले का सबसे पवित्र और मुख्य आकर्षण कार्तिक पूर्णिमा स्नान 24 नवंबर 2026 को होगा, जब लाखों श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाएंगे।
व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पुष्कर पशु मेला मुख्य कार्यक्रमों से कुछ दिन पहले, यानी 10 नवंबर 2026 से ही शुरू हो जाएगा। इस दौरान किसान और पशुपालक अपने ऊंटों और घोड़ों के साथ मेला मैदान में जुटने लगते हैं। अगर आप इस रंग-बिरंगे उत्सव, कैमल सफारी और राजस्थानी लोक संस्कृति का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो नवंबर के मध्य की ये तारीखें आपकी यात्रा के लिए सबसे उत्तम समय हैं।
पुष्कर मेले 2026 की होने वाले दिन-वार सांस्कृतिक कार्यक्रमों (Day-by-Day Events Schedule pushkar-mela-2026) की सूची
पुष्कर मेला 2026 का भव्य आधिकारिक आगाज 17 नवंबर 2026 (मंगलवार) को सुबह 10:00 बजे मेला ग्राउंड में वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और आधिकारिक ध्वजारोहण के साथ होगा। उद्घाटन के साथ ही पूरा मेला क्षेत्र 121 पारंपरिक नगाड़ों के एक साथ वादन से गूंज उठेगा, जबकि राजस्थानी मांडना प्रतियोगिता और ‘हारमोनी मैराथन’ संस्कृति के इस उत्सव में नए रंग भरेंगे। दिन चढ़ने के साथ ही खेल प्रेमियों के लिए स्थानीय निवासियों और विदेशी पर्यटकों के बीच रोमांचक वॉलीबॉल व फुटबॉल मैच आयोजित किए जाएंगे। वहीं, ढलती शाम पुष्कर सरोवर के घाटों को लाखों दीयों की रोशनी से जगमग करेगी, जहां भव्य दीपदान और महाआरती के बाद ‘वॉयस ऑफ पुष्कर’ और लोक कलाकारों की सतरंगी प्रस्तुतियां इस पहले दिन को यादगार बना देंगी।
पुष्कर मेले का दूसरा दिन 18 नवंबर 2026 (बुधवार) पूरी तरह से मरुस्थल के जहाज यानी ऊंटों के नाम रहेगा, जिसकी शुरुआत प्रसिद्ध ‘गोरबंद’ (ऊंट श्रृंगार प्रतियोगिता) से होगी। इस अनोखे आयोजन में ऊंटों को रंग-बिरंगे पोम-पोम, मोतियों और पारंपरिक कशीदाकारी वाले कपड़ों से सजाकर एक भव्य परेड निकाली जाएगी, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी। इसके साथ ही, दोपहर में एक विशेष स्पर्धा आयोजित की जाएगी जिसमें कुशल पशुपालक ऊंटों के बालों की कलात्मक कटाई (Fur Shearing) कर उनकी पीठ पर खूबसूरत ज्यामितीय आकृतियां उकेरेंगे। दिनभर की इन रोचक गतिविधियों के बाद, ढलती शाम को रेगिस्तानी रेतों के सुनहरे धोरों के बीच एक शानदार कैम्पफायर सजेगा, जहां पारंपरिक लोक संगीत (Desert Campfire Folk Melodies) की मधुर तानें इस मरुस्थलीय शाम को बेहद जादुई और खुशनुमा बना देंगी।
पुष्कर मेले के तीसरे दिन 19 नवंबर 2026 को मवेशी मैदान में पर्यटकों की पसंदीदा ‘सबसे लंबी मूंछ’ प्रतियोगिता होगी। साथ ही राजस्थानी साफा बांधने का मुकाबला सजेगा, जिसमें विदेशी सैलानी भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। वहीं, दोपहर में ऊंटों की पीठ पर खेला जाने वाला म्यूजिकल चेयर गेम सभी का भरपूर मनोरंजन करेगा।
पुष्कर मेले के चौथे दिन 20 नवंबर 2026 को भारतीय और विदेशी महिलाओं के बीच प्रसिद्ध मटका रेस होगी। इसके बाद देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच रोमांचक रस्साकशी का महा-मुकाबला सजेगा। वहीं दोपहर 4:00 बजे शिल्पग्राम में ‘फूड एंड क्राफ्ट फेस्टिवल’ का उद्घाटन होगा, जहां लोग पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों और शानदार हस्तशिल्प का लुत्फ उठा सकेंगे।
पुष्कर मेले के पांचवें दिन 21 नवंबर 2026 को सुबह रोमांचक हॉट एयर बैलून सफारी शुरू होगी। दोपहर में पारंपरिक राजस्थानी दूल्हा-दुल्हन प्रतियोगिता का आयोजन होगा, और शाम को प्रसिद्ध कालबेलिया व चरी लोक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुतियां सजोंगी।
पुष्कर मेले के छठे दिन 22 नवंबर 2026 को रेतीले धोरों पर हाई-स्पीड ऊंट दौड़ और मनमोहक ऊंट नृत्य प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। वहीं, शाम को मुख्य मंच पर राष्ट्रीय कलाकारों द्वारा शानदार कव्वाली और सूफी संगीत की जादुई प्रस्तुति दी जाएगी।
पुष्कर मेले सातवें दिन 23 नवंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे पारंपरिक धोती-कुर्ते में ‘लगान’ स्टाइल क्रिकेट मैच खेला जाएगा। शाम 06:00 बजे सभी 52 घाटों पर लाखों दीयों से भव्य दीपदान और महाआरती होगी, और रात में प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा भजन संध्या सजेगी।
पुष्कर मेले के अंतिम दिन 24 नवंबर 2026 को भोर में कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य पवित्र स्नान होगा, जहां लाखों श्रद्धालु पुष्कर झील में डुबकी लगाकर ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करेंगे। दोपहर में समापन समारोह के दौरान बेहतरीन पशुपालकों और विजेताओं को पुरस्कार बांटे जाएंगे, और रात में आसमान भव्य आतिशबाजी से जगमगा उठेगा।
पुष्कर मेला क्यों प्रसिद्ध है और इसका क्या महत्व है?
पुष्कर मेला अपनी धार्मिक आस्था और दुनिया के सबसे बड़े ऊंट व पशु व्यापार के अनूठे संगम के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुष्कर में सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा का दुनिया का एकमात्र सक्रिय मंदिर स्थित है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ यह मेला राजस्थानी लोक संस्कृति, कालबेलिया नृत्य, मूंछ प्रतियोगिता, हॉट एयर बैलून राइड और सजे-धजे ऊंटों की परेड जैसी अनूठी गतिविधियों के लिए देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
अजमेर रेलवे स्टेशन से पुष्कर कैसे पहुंचें और कितनी दूरी है?
अजमेर रेलवे स्टेशन से पुष्कर की कुल दूरी लगभग 15 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग द्वारा पहाड़ों के खूबसूरत नजारों के बीच करीब 30 से 40 मिनट में आसानी से तय किया जा सकता है। अजमेर स्टेशन के बाहर से आपको पुष्कर के लिए सीधे राजस्थान रोडवेज की बसें (किराया लगभग ₹30-₹40) और प्राइवेट टैक्सियाँ या ऑटो (किराया ₹300 से ₹500) चौबीसों घंटे आसानी से मिल जाते हैं। मेले के दिनों में भारी भीड़ के कारण प्रशासन द्वारा विशेष बसें भी चलाई जाती हैं और ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए वन-वे रूट लागू किया जाता है।
पुष्कर मेले में रुकने और खाने-पीने की क्या व्यवस्था होती है?
पुष्कर मेले के दौरान पर्यटकों के लिए रेत के धोरों पर अस्थायी ‘टेंट सिटी’ बसाई जाती है, जहां लग्जरी स्विस टेंट से लेकर बजट टेंट मिलते हैं। इसके अलावा शहर में बजट होटल्स, रिसॉर्ट्स और घाटों के पास सस्ती धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। धार्मिक नगरी होने के कारण पुष्कर में मांस-मदिरा पूरी तरह प्रतिबंधित है। यहाँ खाने के लिए पारंपरिक राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा, हलवाई गली के प्रसिद्ध रसीले मालपुए, कढ़ी-कचौड़ी और रबारी बेहद मशहूर हैं। साथ ही, विदेशी पर्यटकों के लिए इज़राइली और इटैलियन फूड कैफे भी आसानी से मिल जाते हैं।
Pushkar mela hot air balloon ticket price
• सटीक कीमत (Ticket Price): पुष्कर मेले में हॉट एयर बैलून सफारी की प्रति व्यक्ति कीमत ₹12,000 से ₹15,000 के बीच होती है। विदेशी पर्यटकों के लिए यह किराया लगभग $200 से $250 अमेरिकी डॉलर होता है।
समय और अवधि: यह राइड दिन में दो बार—सुबह सूर्योदय (Sunrise) और शाम को सूर्यास्त (Sunset) के समय संचालित की जाती है। हवा में उड़ने का कुल समय लगभग 45 से 60 मिनट होता है। इसकी बुकिंग आप पर्यटन विभाग की अधिकृत वेबसाइट्स से एडवांस में कर सकते हैं।
Most expensive horse in pushkar mela (करोड़ों के शाही घोड़ों की कहानी)
पुष्कर मेला केवल ऊंटों के लिए नहीं, बल्कि मारवाड़ी और काठियावाड़ी नस्ल के दुनिया के सबसे महंगे और आलीशान घोड़ों की प्रदर्शनी के लिए भी मशहूर है।
• शाही नस्लें और कीमत: हर साल मेले में देश भर के राजा-रजवाड़ों और बड़े ब्रीडर्स के ऐसे घोड़े आते हैं, जिनकी कीमत ₹1 करोड़ से लेकर ₹5 करोड़ या उससे भी अधिक होती है।
• खासियत: पिछले मेलों में ‘शाहबाज’, ‘द्रोण’ और ‘बादल’ जैसे शाही घोड़ों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। इन घोड़ों की चाल, चमकदार त्वचा, और नुकीले कान इनकी असली पहचान होते हैं। पशु प्रेमी और ब्लॉगर इन करोड़ों के घोड़ों की एक झलक पाने और उनकी तस्वीरें खींचने के लिए विशेष रूप से मवेशी मैदान में जुटते हैं।
Pushkar fair longest moustache competition video (सबसे लंबी मूंछ प्रतियोगिता)
क्या होता है खास? इसमें राजस्थान के कोने-कोने से आए पुरुष अपनी कई फीट लंबी मूंछों को लहराते हुए मंच पर उतरते हैं। कड़े मुकाबले के बाद जजों द्वारा सबसे लंबी और रोबीली मूंछ वाले व्यक्ति को ‘मिस्टर पुष्कर’ के खिताब से नवाजा जाता है। विदेशी पर्यटक इस अनोखे पल के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर खूब शेयर करते हैं।
Lagaan cricket match pushkar fair schedule (विदेशी बनाम देसी मैच का समय)
आमिर खान की मशहूर फिल्म ‘लगान’ की याद दिलाने वाला यह फ्रेंडली क्रिकेट मैच पुष्कर मेले के सबसे मनोरंजक आयोजनों में से एक है।
मैच का रोमांच: इस अनोखे मुकाबले में स्थानीय राजस्थानी ग्रामीण पारंपरिक धोती-कुर्ता और रंग-बिरंगा साफा पहनकर मैदान में उतरते हैं, जबकि दूसरी तरफ विदेशी पर्यटकों की (गोरे साहबों की) टीम होती है। पूरे मैच के दौरान कमेंट्री भी राजस्थानी और हिंग्लिश अंदाज में होती है, जिसे देखने के लिए पूरा स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भर जाता है।
Best ashram in pushkar to stay (धार्मिक यात्रियों और बुजुर्गों के लिए सर्वश्रेष्ठ आश्रम)
शांति, आध्यात्मिकता और सात्विक वातावरण चाहने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुष्कर सरोवर और ब्रह्मा मंदिर के आस-पास कई प्रसिद्ध आश्रम और धर्मशालाएं हैं, जहाँ ठहरने और भोजन (भंडारे) की उत्तम व्यवस्था होती है:
• सनातन धर्म धर्मशाला (गांधी आश्रम के पास): यह पुष्कर की सबसे बड़ी और पुरानी धर्मशालाओं में से एक है। यहाँ परिवार के साथ रुकने के लिए ₹500 से ₹1,000 में अच्छे कमरे मिल जाते हैं।
श्री रंगनाथ वेणुगोपाल मंदिर आश्रम: पुराने रंगजी मंदिर के पास स्थित इस आश्रम का शांत माहौल श्रद्धालुओं को बहुत आकर्षित करता है। यहाँ सात्विक भोजन और ठहरने की बहुत ही किफायती व्यवस्था है।
• खोजी जी महाराज का आश्रम और जटाधारी आश्रम: साधु-संतों और धार्मिक यात्रियों के लिए यह पवित्र स्थान हैं, जहाँ कार्तिक पूर्णिमा के दौरान विशेष सत्संग और भंडारे आयोजित किए जाते हैं।
Pushkar tent city booking price list (लग्जरी और स्विस टेंट का किराया)
रेत के सुनहरे धोरों पर अस्थायी रूप से बसाई जाने वाली ‘टेंट सिटी’ (Tent City) में रुकना एक बेहद अनूठा और राजशाही अनुभव है। यहाँ यात्रियों की सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग बजट के टेंट मिलते हैं। बुनियादी बेड और अटैच टॉयलेट वाले स्टैंडर्ड नॉन-एसी टेंट का किराया ₹3,500 से ₹5,000 प्रति रात होता है। यदि आप थोड़ी और विलासिता चाहते हैं, तो एयर कंडीशनर और किंग साइज बेड से लैस लग्जरी एसी टेंट ₹8,000 से ₹12,000 में बुक किए जा सकती हैं। वहीं फाइव-स्टार सुविधाओं, राजस्थानी थीम और वाई-फाई वाले रॉयल स्विस कॉटेज का किराया ₹15,000 से ₹25,000 से अधिक तक जाता है। ध्यान रखें कि मेले के मुख्य दिनों (21 से 24 नवंबर) में इन कीमतों में 20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए आधिकारिक वेबसाइट्स से एडवांस बुकिंग कराना ही समझदारी है।
Cheapest places to stay in pushkar fair (बजट यात्रियों के लिए सबसे सस्ती जगहें)
होमस्टे (Local Homestays): मेले के दौरान पुष्कर के स्थानीय निवासी अपने घरों के कमरों को पर्यटकों के लिए खोल देते हैं। यहाँ आपको ₹800 से ₹1,500 प्रति रात में साफ़-सुथरा कमरा और घर का बना राजस्थानी खाना आसानी से मिल जाता है।
• बैकपैकर हॉस्टल्स (Backpacker Hostels): युवाओं और अकेले यात्रा करने वाले (Solo Travelers) लोगों के लिए पुष्कर में ज़ोस्टेल (Zostel), द हॉस्टलर (The Hosteller) और मस्टैच (Moustache) जैसे कई शानदार हॉस्टल्स हैं। मेले के दिनों में यहाँ एक शेयरिंग डॉर्मिटरी बेड (Dormitory Bed) की कीमत ₹700 से ₹1,200 प्रति रात के बीच होती है।
सामुदायिक भवन और रैन बसेरे: राजस्थान पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा मेला मैदान के पास बड़े-बड़े पंडाल और अस्थायी कम्युनिटी हॉल बनाए जाते हैं, जहाँ महज ₹200 से ₹300 में रात गुजारने की बुनियादी व्यवस्था मिल जाती है।
Pushkar fair entry fee (पुष्कर मेले की एंट्री फीस कितनी है)
पुष्कर मेले में प्रवेश के लिए कोई एंट्री फीस नहीं है (Entry is completely Free)।• निशुल्क आयोजन: मुख्य मेला मैदान, मवेशी बाजार, घाटों पर होने वाली महाआरती और राजस्थान पर्यटन विभाग के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने के लिए कोई टिकट नहीं लगती है। हालांकि, यदि आप व्यक्तिगत रूप से हॉट एयर बैलून राइड, कैमल सफारी या टेंट सिटी में रुकने जैसी व्यावसायिक सेवाओं का लाभ उठाते हैं, तो आपको उनके तय शुल्कों का भुगतान करना होगा।
How to reach pushkar fair from delhi (दिल्ली से पुष्कर मेला अजमेर राजस्थान कैसे जाएं)
दिल्ली से पुष्कर मेले में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के लिए यह एक बेहद लोकप्रिय सर्च है। दिल्ली से पुष्कर की कुल दूरी लगभग 415 किलोमीटर है और यहाँ पहुंचने के तीन बेहतरीन रास्ते हैं:
ट्रेन द्वारा -( सबसे बेस्ट): दिल्ली (NDLS) से अजमेर के लिए कई सुपरफास्ट ट्रेनें जैसे ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ और ‘शताब्दी एक्सप्रेस’ चलती हैं, जो आपको 6 घंटे में अजमेर पहुंचा देती हैं। अजमेर से पुष्कर सिर्फ 30 मिनट की दूरी पर है।
रोड द्वारा: यदि आप अपनी कार या बस से आना चाहते हैं, तो दिल्ली-जयपुर-अजमेर एक्सप्रेसवे (NH 48) के जरिए लगभग 7 से 8 घंटे में पुष्कर पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग द्वारा: पुष्कर का सबसे नजदीकी और मुख्य चालू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जयपुर (JAI) है, जो देश-विदेश के सभी प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। जयपुर से पुष्कर की दूरी लगभग 145 किलोमीटर है, जहाँ से आप टैक्सी या एक्सप्रेसवे बसों के जरिए करीब 3 घंटे में आसानी से मेला मैदान पहुँच सकते हैं। हालाँकि अजमेर के पास किशनगढ़ में एक घरेलू एयरपोर्ट मौजूद है, लेकिन वहाँ के लिए उड़ानें हमेशा उपलब्ध या रेगुलर नहीं रहतीं। इसलिए पर्यटकों के लिए जयपुर एयरपोर्ट ही हवाई यात्रा का सबसे विश्वसनीय और बेस्ट विकल्प है।
पुष्कर मेले का सबसे महंगा घोड़ा
पुष्कर पशु मेले में हाल के वर्षों में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाला और सबसे महंगा घोड़ा ‘शाहबाज’ (Shahbaz) रहा है, जिसकी कीमत ₹15 करोड़ आंकी गई थी। चंडीगढ़ के ब्रीडर गैरी गिल का यह शानदार मारवाड़ी नस्ल (Marwari Breed) का घोड़ा पूरे मेले में मुख्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस घोड़े की केवल एक बार ब्रीडिंग (Covering Fee) की फीस ही ₹2 लाख है, और इसके मालिक को मेले के दौरान इस आलीशान घोड़े के लिए ₹9 करोड़ तक के ऑफर भी मिल चुके हैं, लेकिन उन्होंने इसे बेचने से साफ इनकार कर दिया।
बीकानेर का ‘बादल’ मारवाड़ी घोड़ा
शाहबाज के अलावा बीकानेर का ‘बादल’ नामक मारवाड़ी घोड़ा भी पुष्कर मेले की बड़ी शान रहा है। इसके आलीशान लुक और शानदार वंशावली के कारण इसके लिए ₹11 करोड़ तक की बोली लग चुकी है। इस घोड़े की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार ब्रीडिंग लाइन है; इसके मालिक के मुताबिक, यह अब तक सैकड़ों उत्तम नस्ल के बछड़ों (Colts) का पिता बन चुका है।
‘कर्मदेव’ (Karmadev) – सबसे ऊंचा मारवाड़ी घोड़ा
कर्मदेव’ को भारत का सबसे ऊंचा मारवाड़ी घोड़ा माना जाता है, जिसकी ऊंचाई 72 इंच है . पंजाब के मोहाली के रहने वाले इसके मालिक गुरुप्रताप सिंह गिल हैं. पुष्कर मेले में इसकी अद्वितीय कद-काठी के कारण इसके लिए ₹11 करोड़ की भारी-भरकम बोली लगाई गई थी. इस शाही घोड़े के रखरखाव और डाइट पर मासिक ₹30,000 से ₹45,000 का खर्च आता है. इसकी त्वचा की चमक और ताकत बनाए रखने के लिए इसे चने, जौ, सोयाबीन और विशेष न्यूट्रिएंट्स दिए जाते हैं.
पुष्कर मेले की शान मारवाड़ी घोड़े अपनी राजसी पहचान, धनुषाकार कान और वफादारी के लिए प्रसिद्ध हैं .चैंपियन वंशावली के कारण ‘शाहबाज’ और ‘कर्मदेव’ जैसे घोड़ों की कीमत ₹11 से ₹15 करोड़ तक होती है.
मारवाड़ी घोड़े इतने महंगे क्यों होते हैं”
मारवाड़ी घोड़े अपनी दुर्लभ नस्ल, राजसी पहचान और बेजोड़ शारीरिक विशेषताओं के कारण इतने महंगे होते हैं। इनका सबसे मुख्य आकर्षण इनके अंदर की ओर मुड़े हुए कान हैं, जो आपस में मिलकर एक ‘धनुष’ जैसी आकृति बनाते हैं और 180 डिग्री तक घूम सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से बेहद वफादार और साहसी माने जाने वाले इन घोड़ों का उपयोग प्राचीनकाल में राजा-महाराजा युद्ध के मैदान में करते थे।
इनकी करोड़ों में कीमत होने का दूसरा बड़ा कारण इनकी चैंपियन वंशावली (Lineage) है। यदि किसी घोड़े की ब्लडलाइन मजबूत है, तो उसकी मांग नस्ल सुधार (Breeding) के लिए बहुत बढ़ जाती है। ‘कर्मदेव’ और ‘शाहबाज’ जैसे घोड़ों के मालिक केवल एक बार की ब्रीडिंग फीस के ₹2 लाख से ₹5 लाख तक चार्ज करते हैं, जो कमाई का बड़ा जरिया है। इसके अलावा, चना, जौ, गाय का घी और न्यूट्रिएंट्स जैसी इनकी शाही खुराक और रखरखाव पर होने वाला लाखों का मासिक खर्च भी इन्हें बेहद कीमती बनाता है।
पुष्कर मेला अजमेर राजस्थान की जीवंत संस्कृति, आस्था और दुनिया के सबसे बड़े पशु व्यापार का एक अनूठा महाकुंभ है ..करोड़ों के शाही घोड़ों से लेकर रेतीले धोरों की ऊंट सफारी तक, यह उत्सव हर साल पर्यटकों को राजस्थान के राजसी वैभव से रूबरू कराता है।


