खाटू श्याम जी का दूसरा मंदिर कहाँ है? जानें राजस्थान के इन प्राचीन और रहस्यमयी श्याम धामों का इतिहास!

“क्या आप जानते हैं खाटू श्याम जी का दूसरा मंदिर कहाँ है? जानें मुंडरू धाम में बाबा के 2 शीश की पूजा के पीछे का रहस्य और उदयपुर हाईवे मंदिर की लाइव अपडेट!”

खाटू श्याम जी का दूसरा मंदिर कहाँ है? (The Second Khatu Shyam Dham)

वैसे तो देश में बाबा श्याम के कई मंदिर हैं, लेकिन झीलों की नगरी उदयपुर में बन रहा नया धाम बेहद विशेष है। शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर उदयपुर-चित्तौड़गढ़ हाईवे पर, ‘तुलसीदास जी की सराय’ के पास बाबा खाटू श्याम जी का एक विशाल और भव्य दूसरा मंदिर आकार ले रहा है. श्री श्याम सेवा ट्रस्ट द्वारा बनाए जा रहे इस 1 लाख स्क्वायर फीट के भव्य परिसर में गौशाला, 108 कमरों की धर्मशाला और सुंदर बगीचे तैयार किए जा रहे हैं, ताकि मेवाड़ की पावन धरती पर कदम रखते ही भक्तों को ठीक मुख्य खाटू धाम जैसा ही दिव्य और अलौकिक अनुभव मिल सके।

मुंडरू धाम का रहस्य: एक ही मंदिर में बाबा श्याम के 2 सिर (शीश) की पूजा क्यों होती है? जानें असली इतिहास

सन 1599 में ठाकुर हरदेराम जी को खुदाई में बाबा का मूल शीश मिला, जिसे उन्होंने मंदिर में स्थापित किया. समय के साथ यह मंदिर जमीन में समा गया, जो 60 साल पहले मूसलाधार बारिश से दोबारा प्रकट हुआ. ग्रामीणों ने इसके ऊपर नया मंदिर बनाकर मूल मूर्ति वहाँ रख दी, जबकि नीचे प्राचीन गर्भगृह में प्रतीकात्मक शीश स्थापित किया. इसी कारण यहाँ दो शीश की पूजा होती है.

खाटू श्याम जी और मूंडरू धाम में से कौन सा मंदिर पहले बना था?

इतिहासकारों और प्रामाणिक साक्ष्यों के अनुसार, सीकर के मुख्य श्री खाटू श्याम मंदिर का मूल निर्माण राजा रूपसिंह चौहान द्वारा 1027 ईस्वी में करवाया गया था. वहीं, मुंडरू के इस प्राचीन श्याम मंदिर में मिले शिलालेख के अनुसार इसका निर्माण 1599 ईस्वी (संवत 1656) में हुआ था.

तो फिर मुंडरू को पुराना क्यों माना जाता है? स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद बर्बरीक का कटा हुआ शीश (या मूंड) रूपी पत्थर सबसे पहले इसी पहाड़ी क्षेत्र में आकर गिरा था, जिसके कारण इस कस्बे का नाम ‘मूंडरू’ पड़ा. ऐतिहासिक इमारत या ढांचे के रूप में खाटू धाम पुराना है, लेकिन पौराणिक घटनाक्रम और भूमिगत प्राकट्य के दृष्टिकोण से कई श्रद्धालु मुंडरू को बाबा का आदि-स्थान (या सबसे प्राचीन भूमि) मानते हैं.

मूंडरू धाम का जमीन के नीचे वाला प्राचीन गर्भगृह कहाँ है?

मुंडरू धाम का असली और मूल गर्भगृह आज भी मुख्य मंदिर परिसर के ठीक नीचे, जमीन से लगभग 15 फीट गहराई में स्थित है. बारिश के बाद जब यह दबा हुआ ढांचा मिला, तो इसकी सदियों पुरानी सीलन और मोटी दीवारें आज भी वैसी ही दिखाई देती हैं.

उदयपुर में खाटू श्याम जी का मंदिर किस जगह पर है? (सटीक लोकेशन और रूट मैप)

भक्त अक्सर इसकी सटीक लोकेशन को लेकर उलझन में रहते हैं। यह मंदिर झीलों की नगरी उदयपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर उदयपुर-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर ‘तुलसीदास जी की सराय’ (डबोक एयरपोर्ट रोड) के पास स्थित है।

कैसे पहुँचें (रूट मैप): यदि आप उदयपुर बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन से आ रहे हैं, तो आप एयरपोर्ट जाने वाले मार्ग (डबोक रोड) पर कैब या लोकल ट्रांसपोर्ट ले सकते हैं। यह मुख्य हाईवे पर ही होने के कारण आसानी से दिखाई दे जाता है। यहाँ भक्तों की सुविधा के लिए 108 कमरों की धर्मशाला, गौशाला और विशाल पार्किंग जोन भी विकसित किया जा रहा है।

उदयपुर में खाटू श्याम जी मंदिर (चित्तौड़गढ़ हाईवे श्याम मंदिर) का गर्भगृह कैसा दिखता है?

इस मंदिर के गर्भगृह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में अयोध्या के भव्य राम मंदिर में उपयोग किए गए पत्थरों (बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थर) का इस्तेमाल किया जा रहा है। गर्भगृह का आंतरिक हिस्सा बेहद दिव्य और नक्काशीदार है, जहाँ बाबा श्याम के शीश स्वरूप की स्थापना की जा रही है। गर्भगृह के ठीक सामने एक विशाल सभा मंडप बनाया गया है जहाँ हज़ारों श्याम भक्त एक साथ बैठकर कीर्तन का आनंद ले सकेंगे।

राजस्थान में खाटू श्याम जी के प्रमुख मंदिर और उनकी सही लोकेशन:

मुख्य खाटू श्याम मंदिर (सीकर): यह मुख्य और सबसे बड़ा आस्था केंद्र है, जो सीकर जिले के खाटू गाँव (पिनकोड- 332602) में स्थित है. यहाँ पास में ही पवित्र श्याम कुंड और श्याम बगीची भी स्थित हैं.

प्राचीन श्री श्याम मंदिर (रींगस): सीकर जिले के ही रींगस में स्थित इस मंदिर को बाबा का ‘पहला दरबार’ माना जाता है. मान्यता है कि खाटू धाम की मुख्य पदयात्रा (निशान यात्रा) शुरू करने से पहले यहाँ दर्शन करना अनिवार्य है।

आदि प्राचीन मुंडरू श्याम धाम: सीकर जिले के मूंडरू कस्बे में स्थित यह वह रहस्यमयी भूमिगत मंदिर है, जहाँ बाबा के दो शीश की एक साथ पूजा होती है और जिसे मुख्य खाटू धाम से भी पुराना (सन 1599 का) माना जाता है.

मेवाड़ का भव्य श्याम धाम (उदयपुर): -चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर ‘तुलसीदास जी की सराय’ के पास बाबा का एक और अत्यंत विशाल और भव्य दूसरा मंदिर आकार ले रहा है.

शहरी मंदिर (जयपुर): जयपुर शहर के भीतर रहने वाले भक्तों के लिए झोटवाड़ा में स्थित श्री खाटू श्याम मंदिर और टोंक फाटक स्थित श्याम मंदिर भी आस्था के बड़े केंद्र हैं, जो हूबहू मुख्य खाटू धाम की तर्ज पर ही संचालित होते हैं

जोधपुर में खाटू श्याम जी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कहाँ स्थित है?

जोधपुर में बाबा श्याम का सबसे प्रमुख आस्था केंद्र पाल गाँव (Pal Gaon) स्थित ‘साईं धाम – श्री खाटू श्याम मंदिर’ और चोपसानी हाउसिंग बोर्ड (Sector 14) का श्याम मंदिर है। यहाँ हर महीने की एकादशी (ग्यारस) पर बेहद भव्य भजन संध्या और विशेष श्रृंगार किया जाता है.

कोटा (Kota) में रहकर बाबा श्याम के दर्शन कहाँ किए जा सकते हैं?

कोटा शहर में रहने वाले छात्र और स्थानीय निवासी रंगबाड़ी (Rangbari) के वीर सावरकर नगर स्थित प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर या बसंत विहार (रामधाम, दादाबाड़ी) के भव्य श्याम मंदिर में दर्शन कर सकते हैं। त्योहारों और एकादशी पर यहाँ विशेष महाआरती का आयोजन होता है।

अजमेर और पाली (Pali) में प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर कहाँ हैं?

अजमेर में बाबा श्याम के भक्त पंचशील नगर (Panchsheel Nagar) और दिल्ली गेट रोड स्थित श्याम मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं पाली शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में एकादशी के अवसर पर स्थानीय श्याम मंडलों द्वारा भव्य निशान पदयात्राएं और कीर्तन आयोजित किए जाते हैं।

बीकानेर में खाटू श्याम जी का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कहाँ है?

बीकानेर का सबसे मुख्य और प्रसिद्ध मंदिर जयपुर रोड (NH-11) पर तिलक नगर, उदासर में स्थित है (वैष्णो धाम मंदिर के ठीक सामने). यहाँ की अखंड जोत सीधे सीकर के मुख्य खाटू धाम से लाई गई है. इसके अलावा शहर के बीच रथखाना कॉलोनी में भी बाबा श्याम का एक बेहद सुंदर नवनिर्मित मंदिर है.

जयपुर रोड (बीकानेर) स्थित श्याम मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

यह मंदिर भक्तों के लिए रोजाना सुबह 05:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और फिर शाम को 04:30 बजे से रात 09:30 बजे तक खुला रहता है. एकादशी (ग्यारस) और विशेष त्योहारों पर मंदिर के कपाट दोपहर में भी खुले रह सकते हैं।

बीकानेर से मुख्य खाटू श्याम जी मंदिर (सीकर) जाने का सबसे बेस्ट रूट कौन सा है?

अपनी गाड़ी या टैक्सी से जाने के लिए सबसे बेस्ट रूट बीकानेर ➔ श्रीडूंगरगढ़ ➔ रतनगढ़ ➔ फतेहपुर ➔ सीकर ➔ खाटू धाम है. इस नेशनल हाईवे-11 (NH-11) वाले मार्ग से कुल दूरी लगभग 265 से 272 किलोमीटर है, जिसे तय करने में 4.5 से 5 घंटे का समय लगता है.

रथखाना कॉलोनी बीकानेर का नवनिर्मित श्याम मंदिर

बीकानेर शहर के बिल्कुल हृदय स्थल में स्थित रथखाना कॉलोनी (राजविलास होटल के सामने वाली गली) में बाबा श्याम का एक और सुंदर नवनिर्मित मंदिर भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है. यहाँ बाबा की मूर्ति का श्रृंगार इतना सजीव और अनुपम होता है कि भक्तों को लगता है बाबा साक्षात बातें कर रहे हैं.

सात समंदर पार: विदेशों में श्याम बाबा के मंदिर (Khatu Shyam Temples Abroad)

पाकिस्तान (कराची और हैदराबाद)पड़ोसी देश पाकिस्तान के कराची शहर में साल 2010 में जोधपुर के एक मूल प्रवासी परिवार के सहयोग से भव्य खाटू श्याम मंदिर का निर्माण कराया गया था। इसके अलावा सिंध प्रांत के हैदराबाद शहर में भी बाबा श्याम का एक बेहद जागृत और सुंदर दरबार स्थित है जहाँ स्थानीय हिंदू समाज नियमित रूप से कीर्तन करता है।

नेपाल (काठमांडू)भारत के पड़ोसी और हिंदू राष्ट्र रहे नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी सनातन प्रेमियों द्वारा बाबा श्याम का एक भव्य मंदिर स्थापित किया गया है। यहाँ भारत की ही तर्ज पर हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर विशेष महाआरती और छप्पन भोग का आयोजन किया जाता है।

यूनाइटेड किंगडम (UK) और यूएई (Dubai)ब्रिटेन के लंदन और संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर में रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRI) ने स्थानीय भव्य हिंदू मंदिरों के भीतर बाबा श्याम के विशेष विग्रह स्थापित किए हैं। यहाँ के बड़े कीर्तन मंडलों द्वारा हर साल फाल्गुन मेले के समय विशाल भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।

ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंडऑस्ट्रेलिया के सिडनी व मेलबर्न और थाईलैंड के बैंकॉक जैसे प्रमुख शहरों में भी श्याम प्रेमियों द्वारा निर्मित छोटे-बड़े मंदिर और नियमित सत्संग भवन मौजूद हैं। इन देशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग एकजुट होकर बाबा श्याम को ‘हरे का सहारा’ मानते हुए अपनी संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं।

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खाटू श्याम जी के 10 चमत्कारी मंदिर:

भारत में खाटू श्याम जी के 10 प्रमुख मंदिर अपनी अटूट आस्था और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। सबसे मुख्य धाम राजस्थान के सीकर जिले के खाटू गाँव में स्थित है, जो बाबा श्याम का मूल प्रकटीकरण स्थल है। हरियाणा के पानीपत स्थित चुलकाना धाम का विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि मान्यता अनुसार यहीं बर्बरीक ने भगवान कृष्ण को अपना शीश दान दिया था। राजधानी में जीटी करनाली रोड और रोहिणी का खाटू श्याम मंदिर दिल्ली-एनसीआर के श्रद्धालुओं का बड़ा केंद्र है, जबकि जयपुर के चाँदपोल बाज़ार में स्थित मंदिर भी काफी ऐतिहासिक है।

उत्तर भारत के बाहर पश्चिम बंगाल के कोलकाता में बड़ाबाज़ार का श्याम मंदिर बेहद प्रसिद्ध है। मध्य भारत में इंदौर का मालवी रोड मंदिर और उत्तर प्रदेश में लखनऊ का बीरबल साहनी मार्ग मंदिर अपने-अपने क्षेत्रों के मुख्य आस्था केंद्र हैं। इसके अलावा मुंबई के मलाड पश्चिम, हैदराबाद के काचीगुड़ा और रांची के अपर बाज़ार स्थित खाटू श्याम मंदिर क्रमशः पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी भारत में बाबा श्याम के भक्तों की आस्था के प्रमुख धाम हैं।

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