“रींगस का पुराना श्याम मंदिर (खाटू का पहला दरबार): इतिहास, पौराणिक कथा और रींगस से खाटू निशान यात्रा के नियम”

क्या आप जानते हैं खाटू श्याम जी का पहला दरबार रींगस में है? जानिए“रींगस का पुराना श्याम मंदिर के 400 साल पुराने श्याम मंदिर का इतिहास, प्राचीन कथा और निशान यात्रा की अनसुनी मान्यताएं।

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रींगस का पुराना श्याम मंदिर कहाँ है और इसका बर्बरीक से क्या संबंध है?

यह प्राचीन मंदिर सीकर जिले के महरौली-रींगस रोड पर बने भव्य ‘श्याम द्वार’ से मात्र 200 मीटर अंदर स्थित है।

इसे खाटू श्याम जी का “पहला दरबार” कहा जाता है। इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मुगल काल में जब मुख्य खाटू धाम मंदिर पर आक्रमण का खतरा मंडरा रहा था, तब बाबा श्याम के पावन शीश को सुरक्षित रखने के लिए दो बार खाटू से लाकर इसी रींगस के पुराने मंदिर में छुपाया गया था। यहाँ गुप्त रूप से बाबा के शीश की सेवा और पूजा की जाती थी, इसलिए इस भूमि का बर्बरीक (श्याम बाबा) से सीधा और गहरा संबंध है।

इस पुराने मंदिर की प्राचीन कथा क्या है?

स्थानीय इतिहास के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना खाटू के मुख्य मंदिर के पुनरुद्धार से भी पहले (लगभग सन् 1565 के आस-पास) हुई थी। कथा यह है कि जब औरंगजेब की सेना मंदिरों को तोड़ रही थी, तब भक्तों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने बाबा के शीश को मुख्य मंदिर से हटाकर रींगस के इस सुरक्षित स्थान पर स्थापित कर दिया।

कहा जाता है कि काफी समय तक बाबा रींगस में ही रहे। बाद में जब हालात ठीक हुए, तो शीश को वापस खाटू ले जाया गया, लेकिन रींगस की इस पावन मिट्टी में बाबा का आशीर्वाद हमेशा के लिए बस गया। तभी से कहा जाता है— “जिसे रींगस ने स्वीकारा, उसे ही मिला खाटू का सहारा!”

निशान यात्रा शुरू करने से पहले रींगस श्याम मंदिर की क्या मान्यता है?

हाजिरी लगाना जरूरी: माना जाता है कि रींगस से पैदल चलने से पहले इस पुराने मंदिर में आकर ढोक (हाजिरी) लगाना और अपने निशान की पहली पूजा यहाँ करना अनिवार्य है, तभी यात्रा सफल होती है।

दो निशान की परंपरा: यात्रा शुरू करते समय यहाँ दो विशेष निशानों की पूजा होती है। पहला निशान इसी पुराने मंदिर के शिखर पर चढ़ाया जाता है, और उसके बाद दूसरा निशान लेकर भक्त खाटू धाम की ओर बढ़ते हैं।

पुजारी परिवार का मुंडन: इस मंदिर की महत्ता इतनी बड़ी है कि खाटू श्याम जी मंदिर के मुख्य पुजारी परिवार के बच्चों के जात-जडूले (मुंडन संस्कार) भी आज भी सबसे पहले इसी रींगस के पुराने मंदिर में आकर करवाए जाते हैं।

रींगस से खाटू पैदल निशान यात्रा के नियम”

निशान की पवित्रता: यात्रा के दौरान पवित्र निशान (ध्वज) को कभी भी जमीन पर नहीं छुआया जाता। यदि भक्त को विश्राम करना हो, तो वह निशान किसी अन्य श्याम प्रेमी को सौंपता है या मार्ग में बने निशान स्टैंड पर ही रखता है।

सात्विकता और मुख शुद्धि: रींगस निशान भवन से पवित्र ध्वज और निशुल्क पूजा थाली लेकर यात्रा का संकल्प लिया जाता है। पूरी 18 किलोमीटर की यात्रा के दौरान मन में केवल “जय श्री श्याम” का जाप होना चाहिए। इस दौरान किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन (जैसे बीड़ी, गुटखा या तंबाकू) और तामसिक भोजन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहता है।

पहला निशान पूजन: यात्रा की शुरुआत रींगस के 400 साल पुराने प्राचीन श्याम मंदिर में हाजिरी लगाकर और वहां पहला निशान चढ़ाकर ही की जाती है, जिसके बाद ही खाटू धाम की ओर प्रस्थान का नियम है।

क्या रींगस का मंदिर खाटू के मुख्य मंदिर से पुराना है?

स्थानीय इतिहास और प्राचीन प्रमाणों पर गौर करें, तो रींगस का यह पुराना श्री श्याम मंदिर खाटू शहर में स्थित मुख्य मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार से भी लगभग 7 महीने पहले ही स्थापित हो गया था ।

ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन शिलालेखों के आधार पर रींगस के इस पावन मंदिर के सबसे पुराने और अकाट्य प्रमाण सन् 1565 से मिलते हैं । इसके बाद, समय के चक्र के साथ लगभग सन् 1670 के आस-पास इस पवित्र परिसर का भव्य जीर्णोद्धार (दोबारा निर्माण) किया गया था ।

इस भूमि पर मुख्य धाम से भी पहले ज्योत जल चुकी थी, इसी वजह से सदियों से इसे खाटू श्याम जी का “पहला दरबार” माना जाता है ।यही कारण है कि आज भी हर श्याम प्रेमी खाटू जाने से पहले यहाँ शीश झुकाता है और सबसे पहले यहीं पर बाबा की मुख्य पूजा संपन्न की जाती है।

रींगस श्याम मंदिर में जात जडूले के नियम

इस दरबार की महत्ता इतनी बड़ी है कि खाटू श्याम जी मंदिर के जो मुख्य पुजारी परिवार हैं, वे भी अपने बच्चों के जात-जडूले (पहला मुंडन संस्कार) खाटू के मुख्य मंदिर में न करवाकर, रींगस के इसी प्राचीन श्री श्याम मंदिर में आकर उतारते हैं। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, यहाँ से निशान यात्रा शुरू करने से पहले दो निशानों की पूजा होती है, जिसमें से पहला निशान इसी प्राचीन मंदिर पर चढ़ता है।

रींगस के चार प्रमुख धार्मिक स्थान (रूट और लोकेशन)Places to visit in Reengus

आप रींगस आ रहे हैं, तो यहाँ स्थित चार प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करना आपके लिए एक परम कल्याणकारी और दिव्य अनुभव साबित होगा। आपकी इस यात्रा की शुरुआत प्राचीन श्याम मंदिर से होनी चाहिए, जिसे बाबा श्याम का पहला दरबार भी कहा जाता है। यह वही ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है जहाँ मुगल काल में बाहरी आक्रमणकारियों से रक्षा के लिए बाबा के पावन शीश को गुप्त रूप से छुपाकर रखा गया था।

इस आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ते ही अगला पावन पड़ाव आता है मसानिया भैरू जी मंदिर रींगस जिसे स्थानीय भाषा में लोग रिंगस श्याम मंदिर भैरूजी मोड़ भी कहते हैं। यह लगभग पांच सौ वर्षों से भी अधिक प्राचीन और जागृत शक्ति स्थल है, जहाँ हर रविवार को अपनी मन्नतें लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

भैरू जी के दर्शन करने के ठीक बाद, आपको इसी परिसर के समीप स्थित मठ महादेव मंदिर की चौखट पर शीश झुकाना चाहिए। यह पवित्र मंदिर प्रसिद्ध दत्त अखाड़ा की एक अत्यंत शांत और प्राचीन शाखा के रूप में संचालित है, जहाँ महादेव की भक्ति में लीन होकर भक्तों को असीम मानसिक शांति और दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है।

श्रद्धालु रींगस निशान भवन को बहुत पसन्द करते हैं।पैदल यात्रा शुरू करने वाले भक्तों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि यहीं से श्याम प्रेमी बहुत ही उचित मूल्य पर सुंदर निशान खरीदते हैं और मंदिर द्वारा मिलने वाली निशुल्क पूजा थाली से पूजन करके अपनी पदयात्रा का मुख्य संकल्प लेते हैं।

रींगस का पुराना श्याम मंदिर कैसे पहुँचें? (Prachin Shyam Mandir Ringas Route)

यह प्राचीन मंदिर महरोली-रींगस रोड पर स्थित है। आप रींगस रेलवे स्टेशन या भव्य ‘श्याम द्वार’ से लगभग 200 मीटर अंदर चलकर ई-रिक्शा या ऑटो की मदद से बेहद आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं ।

खाटू श्याम जी जाने से पहले रींगस श्याम मंदिर में धोक लगाने का क्या महत्व है?”

पहला दरबार और यात्रा की पूर्णता: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रींगस को बाबा श्याम का “पहला दरबार” कहा जाता है। माना जाता है कि जब तक भक्त यहाँ आकर हाजिरी (धोक) नहीं लगाते, तब तक उनकी खाटू यात्रा अधूरी मानी जाती है।

शीश की रक्षा का इतिहास: मुगल काल में आक्रमणकारियों से रक्षा के लिए बाबा श्याम के पावन शीश को दो बार मुख्य मंदिर से हटाकर गुप्त रूप से इसी रींगस के प्राचीन मंदिर में सुरक्षित रखा गया था।

दो निशान की प्राचीन परंपरा: रींगस से शुरू होने वाली निशान यात्रा में हमेशा दो निशानों की पूजा होती है, जिसमें से पहला निशान इसी रक्षक स्थल (रींगस मंदिर) के शिखर पर चढ़ाया जाता है और दूसरा निशान लेकर भक्त खाटू धाम प्रस्थान करते हैं।

“रींगस श्याम मंदिर के पास सबसे अच्छी धर्मशाला और गेस्ट हाउस”Where to stay in Reengus” (रींगस में कहाँ रुकें

श्री श्याम धर्मशाला और माँ प्रधान गेस्ट हाउस: रींगस में स्टेट हाईवे 113 पर स्थित श्री श्याम धर्मशाला भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय है, जो चौबीसों घंटे खुली रहती है. यहाँ श्रद्धालुओं के नहाने-धोने, गर्म पानी और निशान उठाने की सभी आवश्यक सामग्रियां बहुत ही सुंदर ढंग से व्यवस्थित की जाती हैं. इसी के ठीक सामने स्थित माँ प्रधान गेस्ट हाउस भी एक बेहतरीन और किफायती विकल्प है, जहाँ बेहद बजट अनुकूल दामों में अटैच बाथरूम और गर्म पानी जैसी बेहतरीन सुविधाएं मिल जाती हैं.

श्री श्याम गेस्ट हाउस और भव्य गेस्ट हाउस: रींगस बस स्टैंड और निशान भवन से मात्र दो मिनट की पैदल दूरी पर स्थित श्री श्याम गेस्ट हाउस अपने बड़े और हवादार कमरों के लिए जाना जाता है. कम किराया होने के कारण यह बड़े परिवारों और ग्रुप में आने वाले यात्रियों के लिए बहुत आरामदायक है. इसके अलावा, रींगस रेलवे स्टेशन के पास नीम नगर में स्थित भव्य गेस्ट हाउस भी एक नया और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प है, जो स्टेशन से मात्र दो मिनट की दूरी पर साफ-सुथरे एसी कमरे और मददगार स्टाफ की सुविधा देता है

भाई भाई गेस्ट हाउस और श्री कृष्णा गेस्ट हाउस: सीकर रोड पर स्थित भाई भाई गेस्ट हाउस अपनी ए-वन साफ-सफाई, चौबीसों घंटे फ्रंट डेस्क सर्विस और फ्री पार्किंग की सुविधा के कारण यात्रियों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. इसके अलावा, खाटूश्यामजी रोड पर स्थित श्री कृष्णा गेस्ट हाउस एंड निशान भंडार उन पदयात्रियों के लिए सबसे उत्तम माना जाता है जो रात के समय रींगस में विश्राम करना चाहते हैं और सुबह तड़के निशान उठाकर अपनी पैदल यात्रा शुरू करना चाहते हैं.

“श्री श्याम भवन ट्रस्ट धर्मशाला रींगस में रूम बुकिंग की प्रक्रिया

फोन द्वारा एडवांस बुकिंग: इस धर्मशाला की अपनी कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। इसलिए अग्रिम बुकिंग के लिए आपको ट्रस्टी से फोन पर संपर्क करना होता है। आप ट्रस्ट के सेवादारों से बात करके अपनी तारीख और कमरा सुरक्षित करवा सकते हैं।

ऑफलाइन/ऑन-अराइवल बुकिंग: यदि आप बिना बुकिंग के रींगस पहुँच रहे हैं, तो आप सीधे प्राचीन श्याम मंदिर के पास स्थित धर्मशाला के काउंटर पर जाकर ऑफलाइन कमरा ले सकते हैं। यहाँ बड़े समूहों (Groups) के लिए भी रुकने की उत्तम व्यवस्था मिल जाती है।

रींगस के प्राचीन श्याम मंदिर में “कोलकाता और चौमू के फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार कब होता है

प्रतिदिन चौमू के फूलों का नियम: रींगस श्याम मंदिर में बाबा श्याम का दैनिक श्रृंगार प्रत्येक दिन जयपुर जिले के चौमू से मंगवाए गए विशेष और ताजे सुगंधित फूलों से ही किया जाता है।

त्योहारों पर कोलकाता और विदेशी फूल: प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारस), कृष्ण जन्माष्टमी, बसंत पंचमी और देवउठनी एकादशी जैसे बड़े अवसरों पर बाबा का विशेष अलौकिक श्रृंगार होता है。 इन खास दिनों पर विशेष रूप से कोलकाता (पश्चिम बंगाल) से दुर्लभ फूल हवाई मार्ग द्वारा मंगवाए जाते हैं। कई बार निर्जला एकादशी या जन्मदिन जैसे उत्सवों पर थाईलैंड और यूरोप के विदेशी फूलों से भी भव्य दरबार सजाया जाता है।

फाल्गुन लक्खी मेले में महा-श्रृंगार: फरवरी-मार्च में आयोजित होने वाले वार्षिक फाल्गुन लक्खी मेले के दौरान रींगस दरबार में फूलों का महा-उत्सव होता है। इन दिनों दिल्ली और कोलकाता के विशेष फूलों के साथ 108 तरह की अलग-अलग पुष्प प्रजातियों से बाबा को सजाया जाता है, जिसके वीडियो और तस्वीरें श्याम भक्त सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा सर्च और शेयर करते हैं।

“रींगस प्राचीन श्याम मंदिर के दर्शन और आरती का समय

दर्शन का समय: मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से लेकर रात 10:00 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। हर महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी (ग्यारस) और मुख्य फाल्गुन मेले के दिनों में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए यह मंदिर 24 घंटे खुला रखा जाता है।

दैनिक आरती का समय: मंदिर में हर रोज पांच विशेष आरतियां होती हैं। सुबह 5:15 बजे मंगला आरती, सुबह 8:15 बजे श्रृंगार आरती, दोपहर 12:15 बजे भोग आरती, शाम 6:45 बजे संध्या आरती और रात 9:15 बजे शयन आरती की जाती है।

ऋतु परिवर्तन (सर्दियों और गर्मियों) के अनुसार आरती के समय में 15 से 30 मिनट का आंशिक बदलाव हो सकता है।

FAQ:रींगस का पुराना श्याम मंदिर (खाटू का पहला दरबार):

महरौली रींगस रोड श्याम द्वार से पुराने मंदिर का रास्ता क्या है?

रींगस से खाटू जाने वाले मुख्य मार्ग पर महरौली-रींगस रोड स्थित है, जहाँ हाल ही में एक भव्य 90 फीट लंबा और 75 फीट चौड़ा ‘विशाल तोरण द्वार’ (श्याम द्वार) बनाया गया है । इस मुख्य श्याम द्वार पर पहुँचने के बाद आपको मुख्य सड़क छोड़कर अंदर की तरफ मात्र 200 मीटर चलना होता है। जैसे ही आप द्वार से अंदर प्रवेश करेंगे, सामने ही आपको 400 वर्ष पुराना प्राचीन श्री श्याम मंदिर दिखाई दे जाएगा ।

रींगस रेलवे स्टेशन से प्राचीन श्याम मंदिर की दूरी कितनी है?

रींगस जंक्शन रेलवे स्टेशन से प्राचीन श्री श्याम मंदिर की दूरी लगभग 1.5 से 2 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से आपको चौबीसों घंटे बेहद आसानी से लोकल ऑटो या ई-रिक्शा मिल जाते हैं, जो मात्र 5 से 7 मिनट में आपको सीधे मंदिर के मुख्य तोरण द्वार तक पहुँचा देते हैं। पैदल चलने वाले तीर्थयात्री 15 से 20 मिनट की वॉक करके भी यहाँ पहुँच सकते हैं।

रींगस मंदिर में चौहान पुजारी अपने बच्चों का मुंडन (जात-जडूले) क्यों करवाते हैं?

खाटू श्याम जी मंदिर के मुख्य पुजारी परिवार (चौहान वंश) द्वारा अपने बच्चों का जात-जडूले (पहला मुंडन संस्कार) खाटू के मुख्य मंदिर में न करवाकर रींगस के इस प्राचीन श्री श्याम मंदिर में करवाने के पीछे एक बड़ी धार्मिक मान्यता है।पुजारी परिवार इस भूमि को बाबा श्याम का रक्षक स्थल और सर्वोपरि पूजनीय मानता है, क्योंकि इसी चौखट ने संकट के समय बाबा के शीश को अपनी शरण में रखा था । पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा के अनुसार, इस प्राचीन चौखट का आशीर्वाद लिए बिना परिवार के बच्चों का कोई भी मंगल संस्कार पूरा नहीं माना जाता।

मुगल आक्रमण के समय बाबा श्याम का शीश रींगस में कहाँ छुपाया गया था?

चौहान वंश के पुजारियों और परम भक्तों ने उस दिव्य शीश को खाटू से 18 किलोमीटर दूर लाकर रींगस के इसी घने पेड़-पौधों वाले प्राचीन मंदिर परिसर में गुप्त रूप से छुपाया था । इतिहास में इस बात के प्रमाण हैं कि आक्रमण से बचाने के लिए बाबा का शीश दो बार सुरक्षा के लिहाज से इसी रींगस दरबार में सेवा-पूजा के लिए लाया गया था ।

क्या रींगस श्याम मंदिर जाए बिना खाटू यात्रा अधूरी रहती है?

मान्यता है कि भक्त की मनोकामना पूर्ण होने के लिए जो मुख्य अरदास (हाजिरी) लगती है, वह सबसे पहले इसी रींगस दरबार में ही लगती है ।लोग अक्सर सीधे खाटू धाम चले जाते हैं और शिकायत करते हैं कि मन्नत पूरी नहीं हुई, जिसका मुख्य कारण यही है कि वे पहले दरबार में हाजिरी नहीं लगाते । यहाँ धोक लगाने के बाद खाटू जाने से यात्रा का फल और पुण्य दोगुना हो जाता है ऐसी मान्यताएं है।

रींगस से खाटू निशान यात्रा शुरू करने का सही नियम क्या है?

सही नियम यह है कि भक्त रींगस उतरने के बाद सीधे खाटू भागने के बजाय सबसे पहले प्राचीन श्याम मंदिर परिसर में आएँ । यात्रा की शुरुआत करने के लिए पूजा का मुख्य स्थल यही मंदिर है । भक्तों को मंदिर परिसर में आकर अपने निशान की विधिवत पूजा-अर्चना करवानी चाहिए और यहीं से पदयात्रा का मुख्य संकल्प लेकर नंगे पैर खाटू धाम (लगभग 18 किलोमीटर) के लिए प्रस्थान करना चाहिए। बिना पूजा करवाए सीधा निशान लेकर जाना नियमों के विरुद्ध माना जाता है ।

रींगस पुराने मंदिर पर दो निशान की पूजा क्यों होती है?

इस प्राचीन परंपरा के पीछे मुख्य नियम यह है कि जब आप रींगस के प्राचीन श्याम मंदिर में पूजा के लिए आते हैं, तो आपको दो निशान (ध्वज) लेने होते हैं । मंदिर में दोनों निशानों की एक साथ पूजा की जाती है । इसके बाद, नियम के अनुसार पहला निशान इसी रींगस के प्राचीन श्याम मंदिर में बाबा को अर्पित (चढ़ावा) किया जाता है । इसके पश्चात, भक्त दूसरा पूजित निशान अपने हाथ में लेकर खाटू धाम की ओर बढ़ते हैं और उसे मुख्य मंदिर में बाबा श्याम को अर्पित करते हैं। इसी दो निशान की पूजा से यात्रा पूरी मानी जाती है।

Khatu Shyam Ji Ka Pehla Darbar कहाँ है और रींगस को पहला दरबार क्यों कहते हैं।”

खाटू श्याम जी का पहला दरबार रींगस के प्राचीन श्याम मंदिर को कहा जाता है, जिसका इतिहास मुख्य खाटू धाम के आधुनिक पुनरुद्धार से भी लगभग सात महीने पुराना है। इसे पहला दरबार मानने के पीछे एक बड़ा ऐतिहासिक कारण है कि मुगल काल में जब आक्रमणकारियों ने शेखावाटी के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया, तब बाबा श्याम के पावन शीश की रक्षा के लिए चौहान वंश के पुजारियों ने उसे दो बार मुख्य मंदिर से हटाकर गुप्त रूप से इसी रींगस दरबार में सुरक्षित छुपाया था। यही वजह है कि आज भी हर श्याम प्रेमी खाटू जाने से पहले यहाँ श्रद्धा से शीश झुकाता है क्योंकि मान्यता के अनुसार यहाँ धोक लगाए बिना पूरी खाटू यात्रा अधूरी मानी जाती है।

“रींगस का पुराना श्याम मंदिर दर्शन आप कर चुके हैं या बाबा के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। खाटू श्याम बाबा की जय।

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