माता मैणादे किसकी बेटी थीं? | “मैणादे रो लाल” कौन है? (रामदेव जी की माता का इतिहास)

माता मैणादे किसकी बेटी थीं और “मैणादे रो लाल” कौन है? जानिए बाबा रामदेव जी की माता का असली इतिहास, उनका मायका (पीहर) और उफनते दूध के पहले पर्चे की पूरी कथा।

माता मैणादे किसकी बेटी थीं

लोकदेवता बाबा रामदेव जी की माता, रानी मैणादे (मीनलदेवी), वारूछांह (छहान बारू) गाँव के जागीरदार पेमजी भाटी की पुत्री थीं। विवाह के बाद वे पोकरण के तंवर राजपूत राजवंश के राजा अजमाल जी की रानी बनीं। (अक्सर लोग भ्रमवश उन्हें अमरकोट के सोढ़ा राजपूत वंश से जोड़ देते हैं, जबकि अमरकोट के दलै सिंह सोढ़ा की पुत्री नेतलदे थीं, जो बाबा रामदेव जी की पत्नी थीं।

अजमाल जी और माता मैणादे की कथा

पोकरण के राजा अजमाल जी और रानी मैणादे सर्वसुख संपन्न थे, लेकिन निःसंतान होने के कारण दुःखी थे। किसानों द्वारा बांझपन का ताना सुनने पर राजा का हृदय व्यथित हो गया। वे न्याय मांगने द्वारकाधीश की शरण में पहुंचे और अपनी हठ व भक्ति के बल पर समुद्र में छलांग लगा दी।राजा की निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें स्वयं पुत्र रूप में अवतार लेने का वचन दिया। इसके बाद रानी मैणादे ने पहले बलराम के अवतार वीरमदेव जी को जन्म दिया। फिर भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को साक्षात प्रभु शिशु रूप में पालने में प्रकट हुए, जिन्हें बाबा रामदेव जी (रामसापीर) कहा गया।

माता मैणादे के कितने बच्चे थे.

लोकदेवता बाबा रामदेव जी के पारिवारिक इतिहास के अनुसार, माता मैणादे की कोख से मुख्य रूप से तीन संतानों ने जन्म लिया था। पुत्री सुगना बाई थीं, जिनका विवाह पूंगलगढ़ के शासक किरोड़ सिंह पड़िहार से हुआ था। बड़े पुत्र वीरमदेव जी है जिन्हें बलराम (शेषनाग) का अवतार माना जाता है। सबसे छोटे पुत्र स्वयं बाबा रामदेव जी थे, जिन्होंने साक्षात कृष्ण रूप में अलौकिक अवतार लेकर कलयुग में लोक कल्याण किया।

सुगना बाई के पुत्र भानु की कथा”

लोककथाओं के अनुसार, बाबा रामदेव जी की बड़ी बहन सुगना बाई का एक पुत्र था, जिसका नाम भानु (भंवर सिंह) था। एक बार जब सुगना बाई अपने पीहर रुणिचा आ रही थीं, तब रास्ते में जंगल में उनके इकलौते पुत्र भानु को एक जहरीले सांप ने डस लिया, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।व्याकुल सुगना बाई अपने मृत बच्चे को लेकर रुणिचा पहुंचीं और भाई रामदेव जी के सामने फूट-फूटकर रोने लगीं। बहन का करुण विलाप सुनकर रामदेव जी का हृदय पसीज गया। उन्होंने अपनी दिव्य अलौकिक शक्तियों से मरे हुए भांजे भानु को दोबारा जीवित कर दिया।

माता मैणादे रो लाल कौन है?”

मैणादे रो लाल” साक्षात भगवान कृष्ण के अवतारी लोकदेवता बाबा रामदेव जी हैं। राजस्थान के लोकभजनों में उन्हें आदर से अपनी माता मैणादे (मीना दे) के नाम से पुकारा जाता है। भाद्रपद मास में रुणिचा धाम (जैसलमेर) में लगने वाले प्रसिद्ध मेले में लाखों श्रद्धालु इसी जयकारे के साथ दर्शन करते हैं।

माता मैणादे की पारिवारिक पृष्ठभूमि

लोकदेवता बाबा रामदेव जी की माता, रानी मैणादे (मीनलदेवी) का मायका भाटी राजपूत राजवंश से था। वे पश्चिमी राजस्थान में जैसलमेर साम्राज्य के अधीन आने वाले वारूछांह (बारू छांयण) गाँव के प्रतिष्ठित जागीरदार पेमजी भाटी (पम्मे बुध भाटी) की पुत्री थीं। उस दौर में जैसलमेर और उसके आसपास के विशाल मरुस्थलीय क्षेत्रों पर भाटी राजपूतों का सुदृढ़ शासन था, जिन्हें उत्तर भड़ किवाड़ भी कहा जाता था।विवाह के पश्चात वे दिल्ली के तोमर राजवंश से ताल्लुक रखने वाले और पोकरण के तंवर राजपूत शासक राजा अजमाल जी की रानी बनीं। ऐतिहासिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं था, बल्कि मारवाड़ और जैसलमेर क्षेत्र के तंवरों और भाटी राजपूतों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण वैवाहिक और रणनीतिक संबंध था।

बाबा रामदेव जी के बड़े भाई वीरमदेव जी

वीरमदेव जी को हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम (शेषनाग) का अवतार माना जाता है, जबकि उनके छोटे भाई बाबा रामदेव जी स्वयं श्री कृष्ण के अवतार थे। स्वभाव से गंभीर, कुशल प्रशासक और वीर योद्धा वीरमदेव जी जीवन के हर मोड़ पर बाबा रामदेव जी के साथ मजबूती से खड़े रहे। जैसलमेर के मुख्य रामदेवरा मंदिर से मात्र 1 किलोमीटर दूर, पंचपिपली मार्ग पर उनका भव्य “वीरमदेवरा मंदिर” स्थित है, जहाँ रामदेवरा मेले में आने वाले श्रद्धालु अपनी यात्रा पूरी करने के लिए उनके दर्शन करने अवश्य आते हैं।

माता मैणादे रो लाल” (Meenade Ro Lal) – सदाबहार पारंपरिक भजन

यह बाबा रामदेव जी का सबसे लोकप्रिय और आधारभूत भजन है। इसमें बाबा रामदेव जी के पूरे परिवार और उनके अवतारी रूप का गुणगान किया जाता है।

  • खम्मा खम्मा हो धणिया, रुणिचे रा धणिया…नेतल रा भरतार, म्हारा हेलो सुणो जी रामापीर।अजमाल जी रा कंवर, मैणादे रा लाल।वीरमदेव रा वीरा, म्हारा हेलो सुणो जी रामापीर।खम्मा खम्मा हो धणिया…

“दड़ीया खेले मैणादे रो लाल” (Dadiya Khele Meenade Ro Lal) – नया ट्रेंडिंग भजन

यह आधुनिक राजस्थानी संगीत (Marwadi DJ Song) के साथ हाल ही में बहुत तेजी से वायरल हुआ है। इसमें बाबा रामदेव जी के बाल रूप (बचपन) का वर्णन है, जब वे अपने मित्रों के साथ ‘दड़ी’ (कपड़े की गेंद या बॉल) खेलते थे।

  • कांधे तो राखड़ी मूंज की रे, हाथ में लीनी दड़।दड़ीया खेले, दड़ीया खेले म्हारा मैणादे रो लाल, रुणिचे रा राजा।भैरव राक्षस ने मारियो रे, सुधारे सगला काज।दड़ीया खेले, दड़ीया खेले म्हारा मैणादे रो लाल, रुणिचे रा राजा।

माता मैणादे के उफनते दूध का भजन (प्रथम पर्चा गाथा)

यह भजन पूरी तरह से माता मैणादे और बाल रामदेव जी के बीच हुए पहले चमत्कार (पर्चे) पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा यह गीत सबसे ज्यादा गाया जाता है।

  • माता मैणादे दूध उफणायो, रसोई में म्हाने लायो जी।छोटा सा कुंवर सा हाथ पसारियो, उफणतो दूध उतारियो जी।धन धन ओ मैणादे रो लाल, थे तो कलयुग का भगवान।अजमाल जी घरे पारणियो पालियो, कुमकुम रा पगलिया मांडिया जी।माता मैणादे अचम्भो कीधो, थे तो साक्षात द्वारकानाथ जी।

प्रकाश माली और सरिता खारवाल की जुगलबंदी (Non-Stop Playlist)

राजस्थान के दिग्गज लोकगायक प्रकाश माली और सरिता खारवाल की जुगलबंदी में बाबा रामदेव जी के भजनों की इंटरनेट पर भारी डिमांड रहती है। इनके लाइव जागरण प्रोग्राम की प्लेलिस्ट में सबसे ज़्यादा सर्च होने वाले प्रसिद्ध भजन निम्नलिखित हैं:सुगना बाई रो हेलो: बहन सुगना द्वारा भाई रामदेव जी को पुकारने का एक अत्यंत भावुक लोकगीत।रुणिचे री धरती पे थारो देवड़ो: बाबा रामदेवरा मंदिर की अलौकिक महिमा और भव्यता का वर्णन करने वाला भजन।थाने खम्मा खम्मा हो रामापीर: प्रकाश माली की बुलंद आवाज़ में गाया गया बाबा रामदेव जी का सबसे हिट और लोकप्रिय वंदना गीत।

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बाबा रामदेव रूणेचा की कृपा आप पर बनी रहे। बोलो बाबा रामदेव जी रूणेचा धाम की जय।

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