मारवाड़ का कुंभ: आखिर क्यों कहा जाता है रूणेचा मेले को मरुभूमि का महासंगम? जानिये असली रहस्य!

आखिर क्यों कहा जाता है रूणेचा मेले को मारवाड़ का कुंभ? जानिए बाबा रामदेव जी के इस पावन मेले का इतिहास, अद्भुत चमत्कार और सांप्रदायिक सौहार्द की वो अनसुनी कहानियां। 🚩

मारवाड़ का कुंभ किसे कहते हैं

राजस्थान के जैसलमेर जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध बाबा रामदेव जी के रूणेचा (रामदेवरा) मेले को ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहा जाता है । हर साल भाद्रपद मास (अगस्त-सितंबर) में लगने वाले इस भव्य मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु और पैदल जातरू यहाँ पहुँचते हैं। जिस प्रकार प्रयागराज के कुंभ मेले में आस्था का महासंगम होता है, ठीक उसी तरह रूणेचा में भी विभिन्न जातियों, पंथों और धर्मों के लोग एकत्रित होते हैं। यह मेला पूरे भारत में सांप्रदायिक सौहार्द की सबसे बड़ी मिसाल पेश करता है, जहाँ हिंदू भगवान कृष्ण के रूप में और मुस्लिम ‘रामसा पीर’ के रूप में बाबा को पूजते हैं।

रामदेवरा मेले को मारवाड़ का कुंभ क्यों कहते हैं”

रामदेवरा मेले को ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहे जाने के पीछे तीन मुख्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण हैं:

आस्था का महासंगम: जिस प्रकार उत्तर भारत के मुख्य कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है, ठीक उसी प्रकार पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़) के इस मेले में लाखों-करोड़ों जातरू पैदल चलकर रूणेचा धाम पहुँचते हैं। भीड़ और जन-आस्था के मामले में यह मारवाड़ क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला है।

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: कुंभ की तरह ही यहाँ किसी जाति, धर्म या अमीर-गरीब का भेद नहीं होता। इस मेले में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय समान श्रद्धा से भाग लेते हैं। हिंदू इन्हें भगवान कृष्ण का अवतार मानते हैं, तो मुस्लिम इन्हें ‘रामसा पीर’ के रूप में पूजते हैं।

अनेक राज्यों का जुड़ाव: यह केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। इस मेले में गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी लाखों भक्त सांस्कृतिक एकता प्रदर्शित करने आते हैं।

“मारवाड़ का कुंभ मेला 2026 की तारीख क्या है”

वर्ष 2026 में ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहा जाने वाला बाबा रामदेव जी का सुप्रसिद्ध भादवा मेला आधिकारिक रूप से 13 सितंबर 2026 (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया/बाबे री दूज) से विधिवत शुरू होगा। यह भव्य मेला 21 सितंबर 2026 (भाद्रपद शुक्ल एकादशी) तक मुख्य रूप से रामदेवरा (जैसलमेर) धाम में आयोजित किया जाएगा

मेले का सबसे महत्वपूर्ण दिन यानी बाबा रामदेव जयंती 13 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसमें भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से लाखों जातरू पैदल जत्थों के साथ पहुँचते हैं। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं की तैयारियां अभी से तेज कर दी हैं।

“रूणेचा मेले में इस बार कितनी भीड़ है”

बाबा रामदेव जी का सुप्रसिद्ध भादवा मेला (मारवाड़ का कुंभ) इस वर्ष 13 सितंबर 2026 से आधिकारिक रूप से शुरू होने जा रहा है ।चूंकि अभी मेले की मुख्य तारीखें आना बाकी हैं, इसलिए वर्तमान में रामदेवरा (रूणेचा) में आम दिनों जैसी सामान्य से थोड़ी अधिक भीड़ है, जहाँ रोजाना हजारों नियमित श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।हालाँकि, पिछले वर्षों के रिकॉर्ड और जिला प्रशासन (कलेक्टर की तैयारियों के अनुसार, इस बार मेले के दौरान 60 से 65 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है। मुख्य दिनों (विशेषकर बाबे री दूज और एकादशी) पर एक ही दिन में 4 से 5 लाख भक्तों का जनसैलाब उमड़ने की उम्मीद है।

वागड़ का कुंभ: बेणेश्वर मेला (डूंगरपुर)

महत्व: डूंगरपुर जिले के नवाटापरा नामक स्थान पर सोम, माही और जाखम नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर यह मेला आयोजित होता है। इसे ‘आदिवासियों का महाकुंभ’ या ‘वागड़ का कुंभ’ कहा जाता है। यहाँ माघ पूर्णिमा के दिन भील जनजाति के लोग भारी संख्या में अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करने और पवित्र स्नान के लिए एकत्रित होते हैं।

मेरवाड़ा का कुंभ: पुष्कर मेला (अजमेर)

महत्व: अजमेर के पवित्र पुष्कर कस्बे में कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले इस विश्व प्रसिद्ध मेले को ‘मेरवाड़ा का कुंभ’ या ‘राजस्थान का सबसे रंगीला मेला’ कहा जाता है। यह मारवाड़ और ढूंढाड़ क्षेत्र के मिलन केंद्र ‘मेरवाड़ा’ का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है, जो अपने विशाल ऊंट व्यापार (पशु मेला), विदेशी पर्यटकों के आकर्षण और दीपदान की परंपरा के लिए जाना जाता है।

हाड़ौती का कुंभ: सीताबड़ी मेला (बारां)

महत्व: बारां जिले के केलावाड़ा (सीताबड़ी) नामक स्थान पर ज्येष्ठ अमावस्या को लगने वाले इस धार्मिक मेले को ‘हाड़ौती का कुंभ’ और ‘सहरिया जनजाति का कुंभ’ कहा जाता है। वाल्मीकि आश्रम के पास लगने वाले इस पावन मेले में हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से सहरिया समाज के लोग अपनी लोक-संस्कृति को प्रदर्शित करने आते हैं।

मारवाड़ का कुंभ मेले का इतिहास क्या है?

रूणेचा मेले को ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहा जाता है, जिसका इतिहास बाबा रामदेव जी के समाधि लेने के समय (विक्रम संवत 1442 / 1385 ईस्वी) से जुड़ा है । बाबा रामदेव जी ने समाज में फैले भेदभाव, छुआछूत और कुप्रथाओं को मिटाकर दलितों व पिछड़ों का उद्धार किया था। जब उन्होंने जीवित समाधि ली, तब उनके चमत्कारों और जन-कल्याणकारी कार्यों से प्रभावित होकर लाखों लोग उनके दर्शन के लिए रूणेचा जुटने लगे। समय के साथ यह जन-आस्था इतनी विशाल हो गई कि मारवाड़ क्षेत्र के इस वार्षिक मेले को ‘मारवाड़ का कुंभ’ की उपाधि दे दी गई। वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण 1931 ई. में बीकानेर के महाराजा गंगासिंह जी ने करवाया था।

मारवाड़ के कुंभ में किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य कौन सा है?

मारवाड़ के कुंभ (रामदेवरा मेले) में किया जाने वाला सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रदर्शन ‘तेरह ताली नृत्य’ है। यह अनूठा नृत्य मुख्य रूप से कामड़ जाति की विवाहित महिलाओं द्वारा बाबा रामदेव जी की आराधना में किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकनृत्य है जो बैठकर किया जाता है। इस दौरान महिलाएं अपने शरीर पर 13 मंजीरे (9 दाएं पैर पर, 2 कोहनी के पास और 2 हाथों में) बांधती हैं और मंजीरों की थाप पर मुंह में तलवार दबाकर या सिर पर जलता दीपक रखकर अद्भुत कलाबाजियां व घरेलू कार्यों का सजीव अभिनय प्रस्तुत करती हैं।

मारवाड़ का कुंभ मेला किस महीने में आयोजित होता है”

राजस्थान का सुप्रसिद्ध रामदेवरा (रूणेचा) मेला, जिसे ‘मारवाड़ का कुंभ’ कहा जाता है, मुख्य रूप से हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास में आयोजित होता है। अंग्रेजी कैलेंडर (ईस्वी सन) के अनुसार यह समय हर साल अगस्त या सितंबर महीने में आता है। यह भव्य मेला प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (जिसे ‘बाबे री दूज’ या बाबा रामदेव जयंती कहा जाता है) से विधिवत शुरू होकर भाद्रपद शुक्ल एकादशी (बाबा का समाधि दिवस) तक पूरे 10 दिनों तक चलता है। इस दौरान मरुभूमि में लाखों पैदल यात्रियों और जातरू संघों का अद्भुत सैलाब उमड़ता है।

बाबे री दूज 2026 कब है

साल 2026 में मुख्य भादवा की बाबे री दूज (बाबा रामदेव जयंती) 13 सितंबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इसी पावन दिन (भाद्रपद शुक्ल द्वितीया) को बाबा रामदेव जी का अवतरण दिवस माना जाता है और इसी दिन से रामदेवरा (रूणेचा) में 642वां भव्य अंतराज्यीय भादवा मेला आधिकारिक रूप से शुरू होगा।चूंकि बाबा के भक्त हर हिंदू महीने की शुक्ल पक्ष की द्वितीया को “चांदनी दूज या बीज” के रूप में मनाते हैं,

बाबा रामदेव जयंती शुभकामनाएं

  • खम्मा खम्मा हो रामा, रूणेचा रा धणी ने खम्मा हो रामा! आपको बाबा रामदेव जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। जय बाबे री! 🙏
  • अजमल जी रा कंवर, नेतल रा भरतार, लीले घोड़े रा सवार… बाबा रामसा पीर की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे। बाबा रामदेव जयंती की बधाई! 🐎
  • गूंज रहा है मरुभूमि में जयकारा, बाबा रामसा पीर है सहारा। बाबे री दूज की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई! 🚩
  • बाबो भली करेला! बाबा रामदेव जी का आशीर्वाद आपके परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाए। जय बाबे री!
  • “पीरों के पीर बाबा रामसा पीर की जय!”समाज से छुआछूत और भेदभाव मिटाने वाले, सांप्रदायिक सौहार्द के महाप्रतीक, लोक-देवता बाबा रामदेव जी के अवतरण दिवस ‘बाबे री दूज’ की आप सभी श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं। बाबा आपके जीवन के सभी कष्टों को हरें और खुशियां अपार दें।
  • “थाने खम्मा खम्मा हो रामापीर, ओ जी रे तंवर रा कुंवर… बाबा रामदेव जयंती की आप सभी को राम-राम और बधाई!”

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