रामदेवरा पैदल यात्रा जातरू नियम : बाबा रामदेव जी के जातरू संघ इस बार रखें इन बातों का ध्यान!

क्या आप बाबा रामदेवरा की पैदल यात्रा पर जा रहे हैं? जानिए रामदेवरा पैदल यात्रा जातरू नियम, जरूरी सावधानियां, आवश्यक सामान की लिस्ट और सफल यात्रा के 5 गुप्त टिप्स। बाबा की कृपा आप पर बनी रहे! 🚩

बाबा रामदेव जी के जातरू संघ: अटूट आस्था का सैलाब

रामदेवरा मेले के दौरान राजस्थान सहित गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और पंजाब से भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इन बाबा रामदेव जी के जातरू संघों में अमीर-गरीब और जाति-धर्म का भेद मिट जाता है, जो सच्चे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है। पूरी यात्रा के दौरान सजे-धजे वाहनों पर बाबा के प्रसिद्ध भजन (ब्यावले) और डीजे की धूम रहती है, जो पैदल यात्रियों की थकान को पल भर में दूर कर देती है। साथ ही, रास्ते में स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए निःशुल्क भंडारे और सेवा शिविरों में भक्तों के लिए मुफ्त भोजन, ठहरने की उत्तम व्यवस्था और थके पैरों की मालिश की निस्वार्थ सेवा की जाती है।

रामदेवरा पैदल यात्रा जातरू नियम और गाइड

रामदेवरा पैदल यात्रा पर निकलने से पहले रोज कुछ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास करें और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। यात्रा के दौरान सूती कपड़े, आरामदायक जूते, रेनकोट, छाता और जरूरी दवाइयाँ साथ रखें।

हमेशा सड़क के दाहिने किनारे चलें, रात में रिफ्लेक्टर का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें। पर्याप्त पानी और ORS लेते रहें तथा केवल ताजा और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। पूरी यात्रा के दौरान नशे से दूर रहें, सभी से प्रेमपूर्वक व्यवहार करें और “जय बाबे री” का स्मरण करते हुए यात्रा पूरी करें।

बाबा रामदेव की जय

रामदेवरा पैदल यात्रा के नियम क्या हैं?

पैदल यात्रा के मुख्य नियमों में सात्विक जीवन (नशे और मांसाहार से पूरी तरह दूरी), सड़क के दाहिने (Right) तरफ चलना, रात में सुरक्षा के लिए रेडियम पट्टी या रिफ्लेक्टर का उपयोग करना, और मुख से निरंतर “जय बाबे री” का जाप करना शामिल है। मंदिर परिसर में थूकना या कचरा फैलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

रामदेवरा पैदल चलते समय छालों से कैसे बचें?

पैरों को छालों से बचाने के लिए कभी भी नए जूते पहनकर यात्रा शुरू न करें; पुराने व आरामदायक स्पोर्ट शूज़ या मोटे तलवे वाली चप्पलें पहनें। पैर की उंगलियों और तलवों पर वेसलीन या सरसों का तेल लगाकर मोटे सूती (Cotton) मोज़े पहनें। यदि छाला हो जाए, तो उसे खुद न फोड़ें बल्कि रास्ते में लगे मेडिकल कैंप की मदद लें।

रामदेवरा पैदल यात्रा के लिए क्या-क्या सामान साथ रखना चाहिए?

जातरूओं को अपने बैग में नीचे दी गई चीजें जरूर रखनी चाहिए:कपड़े: हल्के सूती (Cotton) कपड़े और एक रेनकोट/छाता (बारिश के लिए)।फर्स्ट एड किट: बैंडेज, दर्द निवारक स्प्रे, ओआरएस (ORS) या ग्लूकोज के पैकेट, और पैरों की मालिश के लिए तेल।सुरक्षा: रात में चलने के लिए एक अच्छी टॉर्च और बैग पर लगाने के लिए रिफ्लेक्टर टेप।दस्तावेज: आधार कार्ड की फोटोकॉपी और जरूरी दवाइयां।

रामदेवरा पैदल यात्रा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 2026 कैसे करें?

सामान्य दिनों में दर्शन के लिए किसी अग्रिम ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, भादवा मेले (जो इस वर्ष 13 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है) के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन या मंदिर ट्रस्ट यदि कोई पास या ई-रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू करता है, तो उसकी आधिकारिक जानकारी राजस्थान टूरिज्म की आधिकारिक वेबसाइट या जिला प्रशासन जैसलमेर के पोर्टल पर जारी की जाती है।

क्या रामदेवरा जाने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट जरूरी है?

आम तौर पर सभी भक्तों के लिए कोई अनिवार्य सरकारी मेडिकल सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि, यदि कोई जातरू संघ (बड़ा जत्था) या डीजे कमेटी प्रशासन से अनुमति लेती है, तो उन्हें सुरक्षा नियमों का पालन करना होता है। इसके अलावा, यदि आपको पहले से बीपी, शुगर या सांस की तकलीफ है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर फिटनेस जांच करवाना आपके अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

बाबा रामदेव जी के सबसे बड़े जातरू संघ कहाँ से निकलते हैं”

: बाबा रामदेव जी के सबसे बड़े और भव्य जातरू संघ मुख्य रूप से जोधपुर (मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर से), पाली, बीकानेर, बाड़मेर (उंडू-काश्मीर) और गुजरात के अहमदाबाद व सूरत शहरों से निकलते हैं। जोधपुर का ‘मसूरिया धाम’ बाबा के गुरु बालिनाथ जी की तपोभूमि है, इसलिए अधिकांश बड़े पैदल संघ यहीं धोक लगाकर अपनी मुख्य यात्रा शुरू करते हैं।

जोधपुर से रामदेवरा पैदल यात्रा का सबसे बेस्ट रूट (रास्ता)”

जोधपुर से रामदेवरा की पैदल यात्रा की दूरी लगभग 155 से 170 किलोमीटर है। इसके लिए सबसे बेस्ट और सुरक्षित रूट निम्नलिखित है:रूट: जोधपुर ➡️ मथानिया ➡️ ओसियां ➡️ तिंवरी ➡️ खींचन ➡️ फलोदी ➡️ लटियल माता मंदिर मार्ग ➡️ रामदेवरा (रूणेचा)।फायदा: इस रूट पर राज्य सरकार और स्थानीय सेवा समितियों द्वारा जातरूओं के लिए सबसे ज्यादा चिकित्सा शिविर, सुरक्षा पुलिस और चौड़ी सड़कों की व्यवस्था की जाती है।

जयपुर/सूरत/अहमदाबाद से रामदेवरा जातरू संघ”

जयपुर से: जयपुर के संघ अजमेर, नागौर और जोधपुर होते हुए रामदेवरा बढ़ते हैं। कई जातरू संघ लीलन एक्सप्रेस या रूणिचा एक्सप्रेस से जोधपुर आकर आगे की यात्रा पैदल शुरू करते हैं।

सूरत और अहमदाबाद (गुजरात) से: गुजरात से बाबा के भक्तों (जिन्हें वहां ‘रामापीर के भक्त’ कहा जाता है) के विशाल संघ साबरकांठा, पालनपुर और राजस्थान के सांचोर या आबू रोड बॉर्डर से प्रवेश करते हैं। ये संघ अपने साथ बेहद भव्य और सजे-धजे रथ लेकर महीनों पहले पैदल यात्रा पर निकलते हैं।

रामदेवरा मार्ग पर निशुल्क भंडारे और ठहरने की जगहें”

रामदेवरा मेले के दौरान पूरे हाईवे पर हर 2 से 3 किलोमीटर पर स्थानीय ग्रामीणों और दानदाताओं द्वारा निशुल्क भंडारे (भोजन शिविर) लगाए जाते हैं। रामदेवरा पहुँचने पर जातरूओं के ठहरने के लिए ट्रस्ट और समाज की कई बड़ी धर्मशालाएं मौजूद हैं, जिनमें नाचना रोड पर बाबा रामदेव सेवा समिति ट्रस्ट धर्मशाला, रेलवे स्टेशन के पास जाट धर्मशाला, स्टेशन रोड पर गुजराती धर्मशाला और नौका चौराहा पर बाबो भली करे धर्मशाला प्रमुख हैं। इन सभी जगहों पर मेले के दौरान भक्तों के लिए ठहरने, शुद्ध पीने के पानी और प्राथमिक चिकित्सा की बिल्कुल मुफ्त या बेहद रियायती दर पर उत्तम व्यवस्था होती है।

“रामदेवरा वीआईपी (VIP) दर्शन टिकट कैसे मिलता है”

सच्चाई और नियम: आधिकारिक तौर पर रामदेवरा मंदिर में आम दिनों में दर्शन बिल्कुल मुफ्त हैं और किसी भी प्रकार का कोई “ऑनलाइन या ऑफलाइन VIP टिकट” नहीं बिकता है। सभी भक्तों को कतार (लाइन) में लगकर ही जाना होता है।

विशेष व्यवस्था: केवल बहुत बुजुर्गों, दिव्यांगों या गंभीर रूप से बीमार लोगों को स्थानीय प्रशासन या मंदिर समिति की देखरेख में सीधे या छोटे रास्ते से दर्शन की अनुमति दी जाती है। कुछ विशेष पर्वों पर मंदिर ट्रस्ट के रसीद काउंटर से ‘विशेष दर्शन सहयोग’ की रसीद कटती है, लेकिन इसके झांसे में किसी अनधिकृत दलाल या एजेंट के पास पैसे न फंसाएं।

रामदेवरा मंदिर में दर्शन का सबसे सही समय (Timing)”

नियमित समय: Shree Baba Ramdev Temple सामान्य दिनों में प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है। गर्मियों में यह सुबह 4:00 बजे ही खुल जाता है।

आरती का समय: मुख्य मंगला (अभिषेक) आरती सुबह 4:30 से 5:00 बजे के बीच और संध्या महाआरती शाम 6:00 से 7:00 बजे के बीच होती है।

सबसे सही समय (Best Time): दर्शन के लिए सबसे उत्तम समय सुबह 5:30 से 7:00 बजे और दुपट्ट दोपहर 1:00 से 3:00 बजे का होता है, जब आम दिनों में भीड़ सबसे कम होती है। भादवा मेले के दौरान मंदिर 24 घंटे खुला रहता है।

डाली बाई का कंगन कहाँ है और कैसे पार करते हैं”

लोकेशन और पार करने का तरीका: डाली बाई का चमत्कारी कंगन मुख्य मंदिर परिसर में ही डाली बाई की समाधि के ठीक पास स्थित है। यह पत्थर का एक गोल वलय (छोटा सा घेरा) है।

नियम: श्रद्धालु दर्शन करने के बाद इस पत्थर के कंगन के एक छोर से रेंगते या झुकते हुए शरीर को सिकोड़कर दूसरे छोर से बाहर निकलते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस कंगन से सुरक्षित पार निकलना पुण्य का काम है और यह पापमुक्ति व मनोकामना पूरी होने का प्रतीक है।

रामसरोवर तालाब में नहाने का नियम क्या है”

नियम और धार्मिक मान्यता: रामसरोवर तालाब बाबा रामदेव जी द्वारा स्वयं खुदवाया गया एक पवित्र सरोवर है। नियम के अनुसार, बाबा की समाधि के मुख्य दर्शन करने से पहले इस सरोवर में स्नान करना या जल का आचमन (छींटे मारना) अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि इसमें स्नान करने से त्वचा रोग ठीक होते हैं और तन-मन शुद्ध हो जाता है। स्नान के बाद पवित्र और साफ कपड़े पहनकर ही मंदिर की कतार में लगना चाहिए।

“रामदेवरा पैदल यात्रा डीजे संघ वीडियो”

यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर “रामदेवरा पैदल यात्रा डीजे संघ” लिखकर सर्च करने पर लाखों वीडियो मिल जाएंगे। इन वीडियो में जातरू संघों के विशाल जत्थे, पचरंगी नेजा लहराते भक्त, और “ट्विंकल वैष्णव”, “छोटू सिंह रावणा” या “श्याम पालीवाल” के नए डीजे भजनों पर झूमते हुए जातरू दिखाई देते हैं। यदि आप खुद का वीडियो कंटेंट बना रहे हैं, तो इन डीजे संघों के रील्स (Shorts) सोशल मीडिया पर बहुत जल्दी वायरल होते हैं।

रामदेवरा पैदल यात्रा पहुँचने के बाद के नियम

रामसरोवर में स्नान: मान्यता है कि समाधि के दर्शन से पहले बाबा द्वारा निर्मित ‘रामसरोवर तालाब’ में स्नान या आचमन करना अनिवार्य है।

डाली बाई की समाधि और कंगन: बाबा की अनन्य भक्त डाली बाई की समाधि पर चादर चढ़ाएं। वहां स्थित पत्थर के ‘चमत्कारी कंगन’ से पार निकलने की परंपरा है।

नेजा और पगलिये चढ़ाना: बाबा के मुख्य मंदिर में पचरंगी ध्वजा (नेजा) और बाबा के चरण चिन्ह (पगलिये) श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।

रामदेवरा मार्ग के प्रमुख भंडारे और सटीक लोकेशन

रामदेवरा पैदल यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए कई बड़े शिविर लगाए जाते हैं। यात्रा की शुरुआत जोधपुर स्थित मसूरिया बाबा रामदेव मंदिर (Masuriya Temple) से होती है, जो जातरूओं का मुख्य शुरुआती पॉइंट है। इसके बाद जोधपुर-फलोदी हाईवे पर तिंवरी-ओसियां मार्ग पर यात्रियों के लिए भोजन और विश्राम की उत्तम व्यवस्था मिलती है। आगे बढ़ने पर फलोदी में स्थित प्रसिद्ध माँ लटियाल मंदिर (Maa Latiyal Temple) मार्ग पर चौबीसों घंटे निशुल्क चिकित्सा और भोजन का विशाल शिविर संचालित होता है। रामदेवरा धाम से ठीक 12 किमी पहले पोकरण मुख्य चौराहे पर ‘बाबो भली करे सेवा समिति’ का कैंप आता है, और अंत में मुख्य धाम के प्रवेश द्वार के पास ‘जय बाबे री भक्त मंडल शिविर’ पहुँचने वाले लाखों यात्रियों के ठहरने और सेवा का सबसे बड़ा केंद्र बनता है।

रामदेवरा पैदल यात्रा भंडारा

रामदेवरा पैदल यात्रा के दौरान हाईवे पर भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के प्रमुख मार्गों पर हर 2 से 3 किलोमीटर पर स्थानीय ग्रामीणों और भामाशाहों द्वारा निशुल्क भंडारे (सेवा शिविर) लगाए जाते हैं।इन भंडारों में पैदल चल रहे जातरूओं के लिए शुद्ध भोजन, चाय-पानी, और ठहरने की उत्तम व्यवस्था होती है। इसके अलावा, थके हुए पैरों की मालिश के लिए मशीनें, गर्म पानी और डॉक्टरों की देखरेख में प्राथमिक चिकित्सा (दवाइयां और पट्टियां) बिल्कुल मुफ्त दी जाती हैं। बिना किसी जाति-पाति के भेद के, यह निस्वार्थ सेवा सच्चे सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करती है।

“राजस्थान और गुजरात से आने वाले बाबा रामदेव जी के जातरू संघ का अनोखा इतिहास।”

राजस्थान और गुजरात से आने वाले बाबा रामदेव जी के जातरू संघ का अनोखा इतिहास सदियों पुराना और सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल है। मारवाड़ और गुजरात (जहाँ बाबा को ‘रामापीर’ कहा जाता है) से हर साल लाखों भक्तों के विशाल पैदल जत्थे (संघ) सजे-धजे रथों और पचरंगी नेजा के साथ निकलते हैं।

इस इतिहास की शुरुआत बाबा के जीवनकाल में ही हो गई थी, जब गुजरात के नवयुवक और राजस्थान के विभिन्न समाजों के लोग बाबा के चमत्कारों (परचों) से प्रभावित होकर संघ बनाकर रूणेचा आने लगे। आज भी यह परंपरा कायम है, जहाँ जाति-पाति का भेद भुलाकर लाखों जातरू ‘खम्मा-खम्मा’ के जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक भक्ति यात्रा का हिस्सा बनते हैं।

रामदेवरा जाने वाले तीर्थयात्रियों को ‘जातरू’ क्यों कहा जाता है?

राजस्थानी भाषा में ‘जात्रा’ का अर्थ यात्रा (Pilgrimage) होता है। प्राचीन काल से ही जो श्रद्धालु सुदूर क्षेत्रों से कष्ट सहकर बाबा की पवित्र ‘जात्रा’ पर आते हैं, उन्हें आदरपूर्वक जातरू नाम से पुकारा जाता है।

रामदेवरा में बाबा की समाधि पर मुख्य रूप से क्या चढ़ाया जाता है?

: बाबा रामदेव जी के दरबार में मुख्य रूप से कपड़े का बना सफेद या पचरंगी घोड़ा, मिश्री-मखाना, नारियल और पिरोई हुई नगद (धोक) चढ़ाई जाती है। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर बाबा को कपड़े का घोड़ा विशेष रूप से अर्पित करते हैं।

रामदेवरा मुख्य मंदिर के कपाट (दरवाजे) दोपहर में किस समय बंद रहते हैं?

आम दिनों में दोपहर की भोग आरती के समय दुपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक मंदिर के कपाट दर्शन के लिए अस्थायी रूप से बंद किए जाते हैं। हालांकि, भादवा मेले के भारी रस (भीड़) के दौरान यात्रियों की सुविधा के लिए कपाट लगातार चौबीसों घंटे खुले रखे जाते हैं।

बाबा रामदेव जी के मंदिर में ‘पगलिये’ की पूजा क्यों की जाती है, मूर्ति की क्यों नहीं?

बाबा रामदेव जी ने जीवित समाधि ली थी। हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार, जिन महापुरुषों या लोक-देवताओं ने जीवित समाधि ली है, उनके चरण चिह्नों (जिन्हें राजस्थानी में ‘पगलिये’ कहा जाता है) की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। यही कारण है कि गर्भगृह में उनके पवित्र पगलिये पूजे जाते हैं।

रामदेवरा में ‘डाली बाई का पेड़’ कहाँ है और इसका क्या इतिहास है?

: डाली बाई का ऐतिहासिक जाल का पेड़ मुख्य मंदिर परिसर के पास ही स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी पेड़ के नीचे बाबा रामदेव जी को नवजात डाली बाई मिली थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी धर्म-बहन बनाया था। जातरू इस पेड़ पर मन्नत का धागा बांधते हैं।

छोटा रामदेवरा’ कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?

छोटा रामदेवरा’ भारत के गुजरात राज्य के जूनागढ़ जिले में स्थित है। small ramdevra gujarat जो जातरू किसी कारणवश राजस्थान के मुख्य रूणेचा धाम नहीं पहुँच पाते, वे गुजरात के इस मंदिर में धोक लगाते हैं। इसे भी मुख्य धाम जितना ही पवित्र माना जाता है।

रामदेवरा पैदल यात्रा शुरू करने का सबसे सही और पवित्र महीना कौन सा माना जाता है?

सबसे पवित्र और पारंपरिक समय भाद्रपद मास (अगस्त-सितंबर) का होता है। अधिकांश जातरू और संघ भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (बाबे री दूज) से ठीक 7 से 10 दिन पहले अपने घरों से निकलते हैं ताकि वे दूज या एकादशी के मुख्य मेले तक रूणेचा धाम पहुँच सकें।

एक औसत जातरू को प्रतिदिन कितने किलोमीटर पैदल चलना चाहिए?

पैरों में छालों और अत्यधिक थकान से बचने के लिए एक स्वस्थ जातरू को प्रतिदिन 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी चाहिए। इसे दो हिस्सों में बांटना सबसे बेस्ट है— सुबह तड़के 4 से 10 बजे तक और फिर शाम को 5 से रात 9 बजे तक। दोपहर की तेज धूप में चलने से पूरी तरह बचें।

रामदेवरा पैदल यात्रा के दौरान भारी सामान ले जाने से कैसे बचें? क्या बैग ट्रांसफर की सुविधा होती है?

जो श्रद्धालु बाबा रामदेव जी के जातरू संघ (जत्थों) के साथ चलते हैं, उनके भारी बैग संघ के साथ चलने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली या पिकअप वाहनों में रख दिए जाते हैं। जातरू अपने पास सिर्फ एक छोटा पिट्ठू बैग रखते हैं जिसमें पानी की बोतल, टॉर्च और जरूरी दवाइयां होती हैं। अकेले जाने वाले यात्रियों को केवल न्यूनतम (Minimum) जरूरी सामान ही ले जाना चाहिए

हाईवे पर चलते समय रात के समय नींद या विश्राम के लिए क्या इंतजाम होते हैं?

जोधपुर-फलोदी-पोकरण हाईवे पर जगह-जगह बने निशुल्क सेवा शिविरों (भंडारों) में बड़े-बड़े वाटरप्रूफ टेंट और शामियाने लगाए जाते हैं। यहाँ गद्दे, तकिए और चादर की पूरी व्यवस्था होती है। जातरू यहाँ रात को आराम से सो सकते हैं। इसके लिए कोई एडवांस बुकिंग या चार्ज नहीं देना होता।

यदि रामदेवरा पैदल यात्रा के दौरान रास्ते में पैर मुड़ जाए या कोई गंभीर तबीयत खराब हो तो क्या करें?

घबराएं नहीं। मेले के दौरान पूरे पैदल मार्ग पर चलते-फिरते मोबाइल मेडिकल कैंप (Ambulances) और हर भंडारे में प्राथमिक चिकित्सा टीम तैनात रहती है। स्थानीय प्रशासन की पुलिस चौकियां भी हर कुछ किलोमीटर पर मौजूद होती हैं। आप किसी भी नजदीकी सेवादार से मदद मांग सकते हैं, वे तुरंत एम्बुलेंस या डॉक्टर की व्यवस्था करवाते हैं।

जातरू के लिए रामदेवरा में रुकने की जगह

धर्मशालाएं: बाबा रामदेव जी मंदिर के पास पोकरण पैलेस, मारवाड़ धर्मशाला और बीकानेर धर्मशाला सबसे सस्ते विकल्प हैं। यहाँ ₹200 से ₹500 में कमरा या ₹50-₹100 में डोरमेट्री बेड मिल जाता है।

सस्ते होटल व लॉज: मंदिर मार्ग पर कई बजट होटल्स हैं, जहाँ नॉन-एसी कमरे ₹500 से ₹800 के बीच मिल जाते हैं।

टैंट और सेवा शिविर: भादवा मेले के दौरान रूणेचा कुआं और मेला ग्राउंड के पास विशाल वाटरप्रूफ टैंट लगाए जाते हैं। कई सेवा शिविरों में जातरुओं के लिए रुकने और भोजन की व्यवस्था बिल्कुल मुफ्त होती है।

रूणेचा मेला जातरू सुरक्षा गाइड

भादवा मेले में जातरुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन अलर्ट रहता है। पैदल यात्री रात में दुर्घटना से बचने के लिए कपड़ों या बैग पर रिफ्लेक्टिव रेडियम टेप जरूर लगाएं। सड़क पर हमेशा दाहिनी (Right) तरफ चलें। मंदिर परिसर, रामसरोवर और मेला मैदान में CCTV व ड्रोन से नजर रखी जाती है। भीड़ में जेबकतरों से सावधान रहें और नकदी-गहने सुरक्षित रखें। किसी भी आपात स्थिति या तबीयत बिगड़ने पर तुरंत नजदीकी पुलिस सहायता केंद्र या मेडिकल कैंप से संपर्क करें। वाहनों को केवल तय पार्किंग में ही खड़ा करें।

जातरू सेवा शिविर रामदेवरा

जातरू सेवा शिविर रामदेवरा भादवा मेले के दौरान भक्तों के लिए जीवनरेखा बनते हैं। राजस्थान और गुजरात के रास्तों पर सैकड़ों सेवाभावी संस्थाएं ये शिविर लगाती हैं।निशुल्क सुविधाएं: इन शिविरों में पैदल जातरुओं के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, चाय-नाश्ता और ठहरने की उत्तम व्यवस्था बिल्कुल मुफ्त होती है।चिकित्सा और विश्राम: थके हुए यात्रियों के लिए पैरों की मालिश, गर्म पानी और प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) की चौबीसों घंटे सुविधा रहती है।भक्तिमय माहौल: रात में बाबा रामदेव जी के भजनों और जोत-आरती से पूरा शिविर गूंज उठता है।निःस्वार्थ भाव से चलने वाले ये शिविर जातरुओं की थकान दूर कर यात्रा को सुगम बनाते हैं।

बाबा रामदेव जी की कृपा आप पर बनी रहे। जय बाबे री। रामदेवरा पैदल यात्रा पर यह आर्टिकल आपको कैसा लगा?

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