पटवा की हवेली जैसलमेर (Patwa Haveli Jaisalmer) घूमने की पूरी गाइड! जानें 200 साल पुरानी इस हवेली का इतिहास, वास्तुकला (Architecture), टिकट और बेस्ट टाइम टू विजिट।
पटवा की हवेली का इतिहास (History of Patwon Ki Haveli)
इस भव्य हवेली का इतिहास (Haveli History) करीब 200 साल पुराना है। इसका निर्माण कार्य साल 1805 में जैसलमेर के एक अत्यंत धनी व्यापारी गुमान चंद पटवा (Guman Chand Patwa) द्वारा शुरू करवाया गया था। गुमान चंद पटवा सोने-चांदी के धागों (Brocade/Zari) और अफीम के बहुत बड़े व्यापारी थे, जिनका कारोबार विदेशों तक फैला हुआ था।
वे अपने पांच बेटों के लिए एक आलीशान और यादगार घर बनाना चाहते थे। यही कारण है कि यह कोई एक अकेली हवेली नहीं है, बल्कि यह 5 हवेलियों का एक समूह (Cluster of 5 Havelis) है। इस विशाल परिसर को पूरी तरह बनकर तैयार होने में लगभग 50 से 60 वर्ष का समय (Time duration of 50 to 60 years) लगा था। पटवा परिवार द्वारा निर्मित होने के कारण ही इसे ‘पटवा की हवेली’ या ‘पटवों की हवेली’ कहा जाता है।
पटवा हवेली संग्रहालय: अतीत की एक झलक (Patwa Haveli Museum: A Glimpse into the Past)
वर्तमान समय में इस हवेली के पहले हिस्से को, जिसे ‘कोठारी की पटवा हवेली’ (Kothari’s Patwa Haveli) कहा जाता है, एक शानदार संग्रहालय (Museum) में तब्दील कर दिया गया है।
पटवा हवेली का संग्रहालय (Patwa Haveli Museum) इतिहास प्रेमियों के लिए एक अनमोल खजाना है। इसके भीतर प्रदर्शित शाही पोशाकें और वस्त्र (Royal Costumes and Textiles) उस दौर के पटवा व्यापारियों की समृद्धि को दर्शाते हैं, जो रेशमी और सोने के तारों (Zari Work) से बुने जाते थे। यहाँ रखे प्राचीन बर्तन और तिजोरियां (Antique Utensils and Lockers) उस समय के व्यापारिक वैभव की गवाही देते हैं, जिनमें लोहे के बड़े सेफ और कीमती बेल्जियम कांच के बर्तन (Belgium Glassware) शामिल हैं। इसके साथ ही, दीवारों पर सजी पारंपरिक चित्रकारी (Traditional Paintings) और दुर्लभ राजस्थानी वॉल पेंटिंग्स (Rajasthani Wall Paintings) सैलानियों को सीधे 200 साल पुरानी शाही जीवनशैली से रूबरू कराती हैं।
पटवा की हवेली जैसलमेर खुलने का समय और टिकट
पटवा की हवेली जैसलमेर खुलने का समय (Opening Timings): यह हवेली पर्यटकों के लिए रोजाना सुबह 09:00 बजे से शाम 06:30 बजे तक (09:00 AM to 06:30 PM) खुली रहती है। पूरे परिसर को अच्छे से घूमने के लिए आपको कम से कम 1 से 2 घंटे का समय (1 to 2 Hours Space) निकालना चाहिए।
पटवा की हवेली जैसलमेर प्रवेश शुल्क / टिकट (Entry Fee):भारतीय पर्यटक (Indian Tourists): लगभग ₹100 से ₹150 प्रति व्यक्ति।विदेशी पर्यटक (Foreign Tourists): लगभग ₹300 से ₹500 प्रति व्यक्ति।कैमरा शुल्क (Camera Fee): यदि आप अंदर फोटोग्राफी (Photography) या वीडियोग्राफी (Videography) करना चाहते हैं, तो इसका अतिरिक्त टिकट शुल्क देना होता है।
Patwon ki haveli architecture style पटवा की हवेली जैसलमेर की स्थापत्य कला और अनूठी बनावट
पीले पत्थरों का जादू (Magic of Yellow Sandstones): पूरी हवेली का निर्माण जैसलमेर के स्थानीय पीले पत्थरों से हुआ है। जब सूरज की किरणें इन पर पड़ती हैं, तो यह सोने की तरह चमक उठती है, जो देखने में बेहद आकर्षक (Visually Stunning) लगती है।
शानदार झरोखे और बालकनी (Beautiful Jharokhas and Balconies): इस 5 मंजिला हवेली में लगभग 60 से अधिक नक्काशीदार झरोखे (Carved Balconies) हैं। इन झरोखों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बाहर से कोई अंदर नहीं देख सकता, लेकिन अंदर बैठा व्यक्ति पूरी गली का नजारा ले सकता है।
प्राकृतिक शीतलन प्रणाली (Natural Cooling System): उस दौर में भी कारीगरों ने इस हवेली को ‘इंजीनियरिंग का चमत्कार’ (Engineering Marvel) बनाया था। इसकी छतें लकड़ी की और फर्श मिट्टी-चूने के मिश्रण से बने हैं। इसके कारण जैसलमेर की भीषण गर्मी (Extreme Desert Summer) में भी हवेली के अंदर का तापमान बहुत कम और ठंडा रहता है।
पटवा की हवेली कैसे पहुँचें? (How to Reach Patwon Ki Haveli?)
यह ऐतिहासिक हवेली जैसलमेर के मुख्य शहर के केंद्र (City Center) में स्थित है। अमर सागर पोल (Amar Sagar Pol) के पास संकरी और तंग गलियों में होने के कारण यहाँ बड़ी गाड़ियाँ या बसें नहीं जा सकतीं।
स्थानीय परिवहन (Local Transport): जैसलमेर रेलवे स्टेशन (Jaisalmer Railway Station) या मुख्य बस स्टैंड से आप आसानी से एक ऑटो-रिक्शा (Auto Rickshaw) या ई-रिक्शा किराए पर ले सकते हैं।
पैदल यात्रा (Walking Tour): यदि आप जैसलमेर किले (Jaisalmer Fort) के आसपास ठहरे हुए हैं, तो आप मुख्य बाजार की खूबसूरत गलियों का आनंद लेते हुए पैदल (On Foot) भी यहाँ पहुँच सकते हैं।
पटवा की हवेली का मालिक कौन है?
पहली हवेली (कोठारी परिवार): पांच हवेलियों में से जो सबसे पहली और मुख्य हवेली है, उसे साल 1960 के दशक में जैसलमेर के एक अन्य अमीर व्यवसायी जीवन लाल जी कोठारी ने पटवा परिवार से खरीद लिया था। आज इसे ‘कोठारी की पटवा हवेली’ (Kothari’s Patwon Ki Haveli) कहा जाता है। वर्तमान में कोठारी परिवार का एक प्राइवेट ट्रस्ट ही इसका मालिकाना हक रखता है और इसे मैनेज करता है।
बाकी हवेलियां (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण – ASI): इस परिसर की अन्य हवेलियों को भारत सरकार (Government of India) ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। वर्तमान में उनकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य का पुरातत्व विभाग करता है।
पटवों की हवेली क्यों प्रसिद्ध है?
पटवों की हवेली जैसलमेर की सबसे बड़ी और भव्य हवेली है। यह अपने सुनहरे बलुआ पत्थरों (Yellow Sandstones) पर की गई बारीक पत्थर की नक्काशी (Intricate Stone Carvings) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। हवेली की मुख्य खासियत इसमें बने 60 से अधिक नक्काशीदार झरोखे (Carved Jharokhas) हैं, जिन्हें बिना सीमेंट और गारे के जोड़ा गया है। इसकी अद्भुत स्थापत्य कला (Architecture) पर्यटकों को आकर्षित करती है।
नथमल की हवेली, सालिम सिंह की हवेली और पटवा की हवेली में कौन सी बेहतर है?
जैसलमेर की तीनों हवेलियाँ अपनी जगह बेजोड़ हैं, लेकिन पटवा की हवेली (Patwa Haveli) स्थापत्य कला, विशालता और बारीक नक्काशी के मामले में सबसे बेहतरीन मानी जाती है। यह पाँच हवेलियों का भव्य समूह है, जहाँ समृद्ध इतिहास को दर्शाता एक जीवंत संग्रहालय भी है।
दूसरी ओर, नथमल की हवेली (Nathmal Haveli) अपने अनोखे हाथी-शिल्प और दो सगे भाइयों द्वारा बिना किसी नक्शे के बनाई गई सममित (symmetrical) बनावट के लिए जानी जाती है। वहीं, सालिम सिंह की हवेली (Salim Singh Haveli) अपनी जहाज जैसी आकृति और मोर के पंखों जैसे दिखने वाले सुंदर झरोखों (Moti Mahal) के लिए प्रसिद्ध है। यदि समय कम हो, तो पटवा की हवेली देखना सबसे उत्तम विकल्प है।
जैसलमेर में 1 या 2 दिन में घूमने वाली जगहों की लिस्ट.
जैसलमेर की 2-दिवसीय यात्रा में आप इतिहास और रोमांच दोनों का अद्भुत अनुभव ले सकते हैं। पहले दिन (Day 1: City Heritage Tour) सुबह की शुरुआत यूनेस्को विश्व धरोहर जैसलमेर किला (Sonar Qila) से करें, जहाँ आज भी लोग निवास करते हैं। इसके बाद पास ही स्थित पटवा की हवेली और नथमल की हवेली की बारीक नक्काशी देखें, और शाम को गड़ीसर झील (Gadisar Lake) पर सुकून भरी बोटिंग के साथ सनसेट का आनंद लें। दूसरे दिन (Day 2: Desert Adventure) सुबह भाटी शासकों की याद में बने बड़ा बाग (Bada Bagh) की शाही छतरियां देखें, दोपहर में रहस्यमयी कुलधरा गाँव (Kuldhara Village) की सैर करें, और शाम को सैम सैंड ड्यून्स (Sam Sand Dunes) के थार मरुस्थल में रोमांचक जीप सफारी, कैमल राइड और डेजर्ट कैंप में राजस्थानी लोक नृत्य के साथ अपनी यात्रा को यादगार बनाएं।
जैसलमेर घूमने का सबसे अच्छा महीना (Best Time to Visit Jaisalmer)
रेगिस्तानी इलाका होने के कारण जैसलमेर की यात्रा के लिए सर्दियों का सीजन (Winter Season) यानी अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे उत्तम (Best Month to Visit) होता है। इस दौरान यहाँ का मौसम बेहद सुहाना और खुशनुमा हो जाता है, जिससे दिन के समय किलों और हवेलियों को घूमना आसान रहता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में यहाँ का तापमान काफी गिर जाता है, जो थार मरुस्थल में नाइट डेजर्ट कैंपिंग (Night Desert Camping) और अलाव (Bonfire) का मजा लेने के लिए एकदम परफेक्ट है। गर्मियों (अप्रैल से जून) में यहाँ भीषण लू और झुलसाने वाली गर्मी पड़ती है, इसलिए इस समय यात्रा करने से बचना चाहिए।
पटवा हवेली के पास बेस्ट रूफटॉप कैफे (Best Rooftop Cafes Near Patwa Haveli)
हवेली की सैर के बाद अगर आप गोल्डन फोर्ट के खूबसूरत नजारों के साथ लजीज खाने का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आसपास कई बेहतरीन रूफटॉप कैफे मौजूद हैं। फोर्ट पार्किंग के पास स्थित इम्पीरियल स्पाइस रूफटॉप रेस्टोरेंट (Imperial Spice) पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन, जैसे पारंपरिक दाल बाटी चूरमा और शानदार फोर्ट व्यू के लिए जाना जाता है। वहीं मटका पोल के पास स्थित जैसल पैनोरमा कैफे (Jaisal Panorama) से किले और थार रेगिस्तान का 180-डिग्री मनमोहक नजारा दिखता है, जो सनसेट के समय बेहद जादुई लगता है। इसके अलावा, अमर सागर पोल के नजदीक स्थित टोक्यो रूफटॉप रेस्टोरेंट (Tokyo Roof Top Restaurant & café) अपने बेहतरीन एम्बिएंस, रूफटॉप सिटिंग और बजट-फ्रेंडली स्वादिष्ट खाने के लिए पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
सोनार किले से पटवा की हवेली की दूरी (Distance between Jaisalmer Fort and Patwa Haveli)
जैसलमेर किला (Sonar Qila) से पटवा की हवेली की दूरी महज 400 मीटर है। यह दोनों ऐतिहासिक स्थल इतने पास हैं कि सैलानी गूगल मैप्स वॉकिंग रूट (Google Maps Walking Route) के जरिए सिर्फ 5 से 6 मिनट में पैदल (On Foot) यहाँ पहुँच सकते हैं। हवेली की ओर जाने वाला रास्ता संकरी और बेहद खूबसूरत सांस्कृतिक गलियों से होकर गुजरता है, जहाँ स्थानीय राजस्थानी हस्तशिल्प और नक्काशीदार बाजार देखने को मिलते हैं। इसलिए यहाँ गाड़ी ले जाने के बजाय पैदल घूमना ही सबसे बेस्ट ट्रैवल एक्सपीरियंस (Best Travel Experience) माना जाता है।
पटवा की हवेली जैसलमेर जरूर जाना यदि आप जैसलमेर यात्रा पर जा रहे हैं।



