क्या आप जानते हैं कि खाटू श्याम जी के निशान पर क्या लिखा होता है? जानिए निशान पर लिखे मंत्रों का रहस्य, रंगों का धार्मिक महत्व और रिंगस से शुरू होने वाली निशान यात्रा के कड़े नियम।
खाटू श्याम जी के निशान पर क्या लिखा होता है? (निशान पर लिखे जाने वाले मुख्य शब्द)
खाटू श्याम जी का निशान मुख्य रूप से केसरिया (Orange), पीला (Yellow), लाल (Red) या नीले (Blue) रंग के सिल्क के कपड़े से बना होता है। इस पर भक्तों की श्रद्धा के अनुसार नीचे लिखे मुख्य मंत्र, जयकारे या वाक्य लिखे होते हैं:
जय श्री श्याम (Jai Shri Shyam): यह सबसे आम और मुख्य जयकारा है, जो लगभग हर निशान पर सुनहरे या चमकीले अक्षरों में लिखा होता है।
हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा: चूंकि भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया था कि वे कलियुग में हारने वाले लोगों का सहारा बनेंगे, इसलिए यह वाक्य निशान पर विशेष रूप से लिखवाया जाता है।
शीश के दानी की जय: खाटू श्याम जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश का दान दिया था, इसलिए उन्हें ‘शीश का दानी’ कहा जाता है।
खाटू नरेश की जय / तीन बाण धारी: उनके तीन अमोघ बाणों की शक्ति और खाटू के राजा होने के सम्मान में यह वाक्य भी निशान पर अंकित होता है।
निशान पर लिखे शब्दों के अलावा कौन से चित्र बने होते हैं?
केवल शब्द ही नहीं, बल्कि बाबा श्याम के निशान पर कुछ बेहद पवित्र धार्मिक प्रतीक और चित्र भी कढ़ाई (Embroidery) या प्रिंट के जरिए बने होते हैं:
बाबा श्याम का मुखड़ा (शीश): निशान के ठीक बीच में खाटू श्याम जी के दिव्य और मुस्कुराते हुए शीश का चित्र बना होता है।
भगवान कृष्ण का चित्र: चूंकि श्याम बाबा को स्वयं श्री कृष्ण का रूप माना जाता है, इसलिए कई निशानों पर कृष्ण जी और राधा जी की आकृति बनी होती है।
मोरपंख (Peacock Feather): मोरपंख बाबा श्याम को अत्यंत प्रिय है। निशान के कोनों पर या बाबा के चित्र के साथ सुंदर मोरपंख बने होते हैं।
स्वास्तिक और ओम (ॐ): सनातन धर्म के ये परम पवित्र प्रतीक निशान के ऊपरी हिस्से पर आशीर्वाद के रूप में छपे होते हैं।
निशान के ऊपर क्या बांधा जाता है? (एक महत्वपूर्ण रस्म)
निशान केवल एक कपड़ा और डंडा नहीं होता, बल्कि उसे पूरी तरह तैयार करने के लिए डंडे के सबसे ऊपरी हिस्से (शीर्ष) पर दो मुख्य चीजें बांधी जाती हैं:
एक सूखा नारियल (Coconut): नारियल को श्रीफल कहा जाता है, जो शुभता का प्रतीक है।
मोरछड़ी या मोरपंख: नारियल के ठीक साथ में मोरपंखों का एक गुच्छा बांधा जाता है, जिसे बाबा श्याम का साक्षात आशीर्वाद माना जाता है।
खाटू श्याम जी के निशान का धार्मिक महत्व
महाभारत काल में जब बर्बरीक ने अपना शीश दान किया था, तब भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें अपना ‘श्याम’ नाम दिया था। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से हाथ में निशान उठाकर खाटू धाम की पैदल यात्रा करता है, बाबा श्याम उसके जीवन के सभी कष्टों, दुखों और ‘हार’ को मिटाकर उसे जीत का आशीर्वाद देते हैं। यह निशान भक्त के अटूट विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
खाटू श्याम जी के निशान पर क्या लिखा होता है? FAQ
खाटू श्याम जी का निशान किस रंग का होता है?
खाटू श्याम जी का निशान मुख्य रूप से पांच रंगों का होता है—केसरिया (नारंगी), लाल, पीला, सफेद और नीला। इसमें केसरिया और नीले रंग के निशान का सबसे अधिक महत्व माना जाता है, क्योंकि नीला रंग बाबा श्याम (श्री कृष्ण) के सांवले रंग को दर्शाता है और केसरिया रंग त्याग व वैराग्य का प्रतीक है।
निशान यात्रा के दौरान क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
निशान को कभी भी सीधे जमीन या फर्श पर नहीं रखा जाता। यदि कहीं रुकना हो, तो इसे किसी ऊंचे स्थान या स्टैंड पर रखें।यात्रा के दौरान पूरी तरह से सात्विक रहें (नशामुक्त और शाकाहारी भोजन)।बिना पैरों में चप्पल या जूते पहने (नंगे पैर) पैदल यात्रा करने की परंपरा है।
रिंगस से खाटू धाम की दूरी कितनी है, जहाँ से निशान यात्रा शुरू होती है?
अधिकांश भक्त अपनी पैदल निशान यात्रा ‘रिंगस’ (Reengus) रेलवे स्टेशन या कस्बे से शुरू करते हैं। रिंगस से खाटू श्याम जी के मुख्य मंदिर की दूरी लगभग 17 से 18 किलोमीटर है।
चढ़ाया हुआ निशान बाद में कहाँ जाता है या उसका क्या होता है?
जब भक्त मंदिर पहुंचकर बाबा श्याम को अपना निशान सौंपते हैं, तो मंदिर समिति उन निशानों को इकट्ठा करती है। इनमें से कुछ मुख्य निशानों को मंदिर के शिखर (गुंबद) पर बदला जाता है। बाकी निशानों के कपड़ों को कुरुक्षेत्र या अन्य पवित्र धार्मिक कार्यों, भंडारों या गरीब असहाय लोगों की मदद के लिए कपड़ों/आसन के रूप में इस्तेमाल कर लिया जाता है। कुछ भक्त मंदिर में छुआकर आशीर्वाद के रूप में निशान वापस अपने घर भी लाते हैं और उसे अपने पूजा घर में स्थापित करते हैं।
क्या घर पर खाटू श्याम जी का निशान रख सकते हैं?
हाँ, आप मंदिर से अभिमंत्रित (छुआया हुआ) छोटा निशान अपने घर के मंदिर या मुख्य द्वार पर रख सकते हैं। घर पर निशान रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है। बस ध्यान रखें कि जहाँ निशान रखा हो, वहाँ साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाए।
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