“क्या आप जानते हैं कि बीकानेर का भांडासर जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple) पानी से नहीं, बल्कि 40,000 किलो देसी घी (40,000kg Ghee) से बना है? जानें इस 500 साल पुराने अजूबे का रहस्य, जीके फैक्ट्स (GK Facts) और हमारी टीम का व्यक्तिगत अनुभव (Personal Experience)। अभी पढ़ें!”
भांडासर जैन मंदिर’: एक मंदिर की नींव घी से भरने का रहस्य (The Secret of Ghee Foundation)
स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 15वीं शताब्दी में जब व्यवसायी भांडा शाह (Bhanda Shah) इस मंदिर का निर्माण करवा रहे थे, तब इलाके में पानी की भारी किल्लत थी। उन्होंने पानी की जगह नींव में 40,000 किलो शुद्ध घी और नारियल डलवाए।
- आश्चर्य: आज भी भीषण गर्मी (50°C) में इस मंदिर की दीवारों और फर्श से घी की सोंधी महक आती है और पत्थर हल्के चिपचिपे (Oily) हो जाते हैं।
- यह मंदिर जैन धर्म के 5वें तीर्थंकर सुमतिनाथ जी (Lord Sumatinath) को समर्पित है।
भांडासर जैन मंदिर के अद्भुत और एग्जाम फैक्ट्स (Quick Fact Box)
- तीन मंजिला संरचना: यह मंदिर तीन मंजिला (Three-storeyed) है और इसकी ऊपरी मंजिल से पूरे बीकानेर का पैनोरमिक व्यू (Panoramic View) दिखता है।
- लाल बलुआ पत्थर: इसे भी जूनागढ़ की तरह लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) और संगमरमर से बनाया गया है।
- मथैरण और उस्ता कला: मंदिर की दीवारों और छतों पर मथैरण और उस्ता कला (Usta Art) का जो काम है, वह स्वर्ण जड़ित (Gold Embossed) है।
- दर्पण कार्य: मंदिर के भीतर का कांच का काम (Mirror Work) इतना बारीक है कि एक मोमबत्ती जलाने पर पूरा मंदिर जगमगा उठता है।
- ठंडा फर्श: घी की मौजूदगी के कारण यहाँ का फर्श गर्मियों में भी प्राकृतिक रूप से ठंडा (Naturally Cool) रहता है।
क्या वाकई भांडासर जैन मंदिर की दीवारों से घी टपकता है और इसका वैज्ञानिक आधार क्या है?
यह पूरी तरह सच नहीं है कि घी टपकता है, लेकिन भीषण गर्मी में जब तापमान बढ़ता है, तो मंदिर की नींव में मौजूद घी सीलन (Capillary Action) के ज़रिए पत्थरों की सतह तक पहुँचता है। इससे फर्श और दीवारों के निचले हिस्सों में घी की एक बारीक परत या चिकनाई महसूस की जा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि घी ने पत्थरों के साथ मिलकर एक ऐसा मजबूत बॉन्ड (Protective Layer) बना लिया है, जिसने मंदिर को नमी और क्षरण (Erosion) से 500 सालों से बचा कर रखा है। यह प्राचीन भारतीय सिविल इंजीनियरिंग का एक चमत्कार (Wonder) ही है।
भांडासर मंदिर के “अनसुने” फैक्ट्स जो कोई नहीं बताता है
- सिरेमिक टाइल्स का उपयोग: मंदिर के कुछ हिस्सों में पुराने जमाने की इटालियन और सिरेमिक टाइल्स का प्रयोग किया गया है, जो उस दौर के विदेशी व्यापार को दर्शाता है।
- छाया का विज्ञान: मंदिर की बनावट ऐसी है कि मुख्य प्रतिमा पर दिन के अलग-अलग समय में सूर्य की रोशनी (Sunlight) अलग-अलग कोणों से पड़ती है।
- भंड शाह का त्याग: लोककथाओं के अनुसार, घी डालने पर जब लोगों ने आलोचना की, तो भंड शाह ने अपने आत्मसम्मान (Self-respect) के लिए घी के टीन के टीन नींव में पलट दिए थे
- ठंडा पत्थर: मंदिर में इस्तेमाल किया गया संगमरमर पैर रखने पर बहुत ठंडा (Cooling Effect) महसूस होता है, जो गर्मी में राहत देता है।
भांडासर जैन मंदिर की नींव में घी डालने के पीछे का ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तर्क क्या माना जाता है?
ऐतिहासिक रूप से यह माना जाता है कि 15वीं शताब्दी में जब व्यवसायी भांडा शाह (Bhanda Shah) इस मंदिर का निर्माण करवा रहे थे, तब बीकानेर में पानी की भीषण कमी थी। निर्माण के दौरान एक विवाद उठा कि पानी की बर्बादी के बजाय किसी अन्य विकल्प का उपयोग किया जाए। तब भांडा शाह ने अपनी अटूट श्रद्धा और वैभव का परिचय देते हुए नींव में 40,000 किलो शुद्ध देसी घी (40,000kg Pure Ghee) डलवा दिया। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो घी और नारियल के मिश्रण ने नींव के पत्थर और मिट्टी के बीच एक अभेद्य सुरक्षा परत (Protective Layer) बना दी। यह परत नमी को पत्थर के अंदर जाने से रोकती है, जिससे मंदिर का ढांचा 500 सालों से बिना किसी क्षरण (Erosion) के खड़ा है। हमारी टीम ने अनुभव किया कि आज भी भीषण गर्मी में जब पत्थर गर्म होता है, तो वह घी बारीक चिकनाई के रूप में दीवारों की सतह पर महसूस किया जा सकता है।
बीकानेर के सांस्कृतिक पर्यटन (Cultural Tourism) में भांडासर मंदिर का क्या स्थान है और यहाँ से शहर का नजारा कैसा दिखता है?
सांस्कृतिक रूप से यह मंदिर बीकानेर की पहचान ‘पुराने शहर’ (Old City) की आत्मा है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बीकानेर के सेठों और व्यापारियों के समृद्ध इतिहास का गवाह है। मंदिर तीन मंजिला (Three-storeyed) है, जो समतल ज़मीन पर होने के बावजूद काफी ऊँचा है। इसकी सबसे ऊपरी मंजिल से पूरे बीकानेर शहर का विहंगम दृश्य (Panoramic View) दिखाई देता है। यहाँ से आप पुराने शहर की तंग गलियों, हवेलियों और दूर स्थित जूनागढ़ किले को एक साथ देख सकते हैं। हमारी टीम ने पाया कि सूर्यास्त (Sunset) के समय यहाँ से दिखने वाला नजारा बहुत ही शानदार होता है, जब पूरा शहर सुनहरी रोशनी में नहा जाता है। लिमिटेड बजट में घूमने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह इसलिए भी खास है क्योंकि यहाँ कोई एंट्री फीस नहीं है और आप घंटों तक यहाँ की शांति और कला का आनंद ले सकते हैं।
भांडासर जैन मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल हुए ‘दुलमेरा पत्थर’ और संगमरमर का मेल इसे अन्य जैन मंदिरों से कैसे अलग बनाता है?
भांडासर मंदिर की सबसे बड़ी भौतिक विशेषता इसका लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) है, जो बीकानेर के पास ‘दुलमेरा’ की खानों से आता है। यह पत्थर अपनी मजबूती और सुंदर लालिमा के लिए जाना जाता है। मंदिर के मुख्य ढांचे में लाल पत्थर का उपयोग किया गया है, जबकि इसके आंतरिक गर्भगृह और वेदियों में सफेद संगमरमर (White Marble) का प्रयोग हुआ है। हमारी टीम ने जब इन पत्थरों की नक्काशी को करीब से देखा, तो पाया कि लाल पत्थर पर की गई खुदाई संगमरमर की तुलना में अधिक गहरी और स्पष्ट है। यह मेल न केवल मंदिर को देखने में आकर्षक बनाता है, बल्कि यह स्थायित्व (Durability) की दृष्टि से भी श्रेष्ठ है। राजस्थान के अन्य जैन मंदिर, जैसे रणकपुर या दिलवाड़ा, मुख्य रूप से संगमरमर पर आधारित हैं, लेकिन भांडासर का यह ‘रेड एंड व्हाइट’ कॉम्बिनेशन इसे एक अलग पहचान (Identity) देता है।
क्या भांडासर मंदिर के पास अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं जिन्हें एक साथ कवर किया जा सकता है?
जी हाँ, भांडासर मंदिर पुराने बीकानेर शहर (Old City) के एक बहुत ही रणनीतिक स्थान पर स्थित है। इसके बिल्कुल पास ही लक्ष्मीनाथ मंदिर (Laxminath Temple) है, जो बीकानेर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। हमारी टीम ने महसूस किया कि यदि आप सुबह 10 बजे अपनी यात्रा शुरू करते हैं, तो आप भांडासर मंदिर, लक्ष्मीनाथ मंदिर और पास की ऐतिहासिक हवेलियों (जैसे रामपुरिया हवेली) को पैदल ही देख सकते हैं। ₹1500 के बजट में आप एक स्थानीय गाइड (Local Guide) कर सकते हैं, ई-रिक्शा का खर्च उठा सकते हैं और बीकानेर के प्रसिद्ध बड़ा बाजार इलाके में बेहतरीन राजस्थानी भोजन का आनंद ले सकते हैं। यह पूरा क्षेत्र हेरिटेज वॉक (Heritage Walk) के लिए सबसे उपयुक्त है, जहाँ आपको बीकानेर की असली संस्कृति का अहसास होगा।
भण्डासर जैन मंदिर के भीतर ‘सुमतिनाथ जी’ की प्रतिमा और अन्य तीर्थंकरों के चित्रों का क्या धार्मिक महत्व है?
यह मंदिर जैन धर्म के 5वें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ (Lord Sumatinath) को समर्पित है। उनकी मुख्य प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है और अत्यंत शांत मुद्रा में है। मंदिर की दीवारों पर न केवल सुमतिनाथ जी, बल्कि अन्य 24 तीर्थंकरों के जीवन की प्रमुख घटनाओं को भित्ति चित्रों (Fresco Paintings) के माध्यम से दर्शाया गया है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) ने बताया कि इन चित्रों का उद्देश्य केवल सजावट नहीं, बल्कि दर्शनार्थियों को जैन दर्शन और अहिंसा के मार्ग की शिक्षा देना भी था। हमारी टीम ने अनुभव किया कि इन चित्रों के रंगों की चमक आज भी वैसी ही है जैसी 500 साल पहले रही होगी। यह बीकानेर के उन मथैरण कलाकारों (Matheran Artisans) की कुशलता का प्रमाण है जिन्होंने प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के रंगों का उपयोग किया था।
क्या भंडासर जैन मंदिर घी की नींव होने के कारण मंदिर के संरक्षण (Conservation) में कोई चुनौतियाँ आती हैं?
: यह एक बहुत ही तकनीकी सवाल है। घी की नींव मंदिर के लिए एक वरदान (Blessing) साबित हुई है क्योंकि इसने नींव को ‘वाटरप्रूफ’ (Waterproof) बना दिया है, जिससे भूमिगत जल (Groundwater) से दीवारों को नुकसान नहीं पहुँचता। हालांकि, गर्मी के दिनों में जब घी का रिसाव सूक्ष्म रूप से सतह पर आता है, तो धूल के कण दीवारों के निचले हिस्से पर चिपक जाते हैं। इसे साफ करने के लिए पुरातत्व विभाग और मंदिर ट्रस्ट विशेष प्राकृतिक रसायनों (Natural Chemicals) का उपयोग करते हैं। हमारी टीम ने देखा कि मंदिर की देखरेख करने वाले लोग आधुनिक पेंट के बजाय पुराने तरीकों को प्राथमिकता देते हैं ताकि घी और चूने का जो प्राकृतिक संतुलन (Natural Balance) है, वह बना रहे। यही कारण है कि 500 साल बाद भी यह मंदिर उतना ही सुरक्षित है जितना निर्माण के समय था।
मंदिर में प्रयुक्त ‘मथैरण कला’ (Matheran Art) क्या है और यह उस्ता कला से किस प्रकार भिन्न है?
अक्सर लोग बीकानेर की इन दोनों कलाओं में भ्रमित हो जाते हैं, लेकिन इनका अपना अलग महत्व है। मथैरण कला (Matheran Art) एक प्राचीन जैन कला है जिसमें गीले चूने या प्लास्टर (Wet Plaster) पर धार्मिक कथाओं और देवी-देवताओं के चित्र उकेरे जाते हैं। भांडासर मंदिर में यह कला अपने चरम पर है। इसमें रंगों को भरने के लिए प्राकृतिक खनिजों का उपयोग किया जाता है। इसके विपरीत, उस्ता कला (Usta Art) मुख्य रूप से ऊंट की खाल (Camel Hide) या लकड़ी पर सोने की नक्काशी का काम है। हालाँकि, इस मंदिर में दोनों का ही सुंदर समावेश (Fusion) मिलता है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) ने बताया कि मथैरण कला के कलाकार सदियों से मंदिर की दीवारों पर इन चित्रों को पुनर्जीवित (Restore) करते आ रहे हैं ताकि इसकी चमक फीकी न पड़े।
भांडासर मंदिर की तीन मंजिला संरचना का क्या महत्व है और प्रत्येक मंजिल की क्या विशेषता है?
भांडासर मंदिर बीकानेर के उन गिने-चुने मंदिरों में से है जो तीन मंजिला ऊँचाई (Three-storeyed Structure) पर बना है। इसकी पहली मंजिल (Ground Floor) पर मुख्य गर्भगृह है जहाँ तीर्थंकर सुमतिनाथ जी की प्रतिमा विराजित है। यहाँ की दीवारों पर मथैरण कला (Matheran Art) का सबसे बारीक काम देखा जा सकता है। दूसरी मंजिल पर जाने पर आप मंदिर की आंतरिक छत के करीब होते हैं, जहाँ से स्वर्ण नक्काशी और कांच के काम (Mirror Work) का विवरण अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। सबसे ऊपरी यानी तीसरी मंजिल का महत्व इसके नज़ारे (View) के कारण है। यहाँ से पूरे पुराने बीकानेर शहर की ऊबड़-खाबड़ गलियाँ और घरों की छतें एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। हमारी टीम ने अनुभव किया कि यह तीन मंजिला ढांचा न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्राचीन समय में शहर पर नज़र रखने के लिए एक ‘वॉच टावर’ (Watch Tower) की तरह भी उपयोगी रहा होगा।
भांडासर जैन मंदिर के खुलने और बंद होने का सही समय क्या है (Timings of Bhandasar Jain Temple)?
भांडासर जैन मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए दिन में दो मुख्य समय अंतराल (Time Slots) में खुलते हैं। आमतौर पर, मंदिर सुबह 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और फिर शाम 5:30 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहता है। हमारी टीम का सुझाव है कि यदि आप मंदिर की वास्तुकला और बीकानेर का विहंगम दृश्य देखना चाहते हैं, तो सुबह 7:00 से 9:00 बजे के बीच का समय सबसे उत्तम है क्योंकि उस समय रोशनी बहुत सुंदर होती है। वहीं, शाम के समय मंदिर की शांति और आध्यात्मिक माहौल का अनुभव अलग ही सुकून देता है।
: क्या भांडासर जैन मंदिर में प्रवेश के लिए कोई शुल्क देना पड़ता है (Entry Fee Information)?
जी नहीं, भांडासर जैन मंदिर में प्रवेश पूरी तरह से निःशुल्क (Free Entry) है। यहाँ किसी भी भारतीय या विदेशी पर्यटक से कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता। आप बिना किसी टिकट के मंदिर की तीनों मंजिलों का भ्रमण कर सकते हैं और यहाँ की अद्भुत ‘मथैरण कला’ (Matheran Art) का आनंद ले सकते हैं। हालांकि, मंदिर के रखरखाव के लिए यदि आप स्वेच्छा से दान देना चाहें, तो दान-पात्र में दे सकते हैं।
भांडा शाह ओसवाल कौन थे और उन्होंने भंडासर जैन मंदिर का निर्माण क्यों करवाया?
: भांडा शाह ओसवाल (Bhanda Shah Oswal) 15वीं शताब्दी के एक अत्यंत समृद्ध और प्रतिष्ठित जैन व्यापारी (Business Tycoon) थे। वे अपनी धार्मिक निष्ठा और व्यापारिक सूझबूझ के लिए जाने जाते थे। उन्होंने इस मंदिर का निर्माण अपनी आस्था को अमर बनाने के लिए करवाया था। मंदिर के निर्माण के दौरान घी के उपयोग की कहानी उनकी दूरदर्शिता और संपन्नता को दर्शाती है। कहा जाता है कि जब लोगों ने नींव में घी डालने पर उनकी आलोचना की, तो उन्होंने धैर्य के साथ उत्तर दिया कि यह मंदिर सदियों तक अडिग रहेगा। हमारी टीम ने स्थानीय गाइड (Local Guide) से बातचीत में जाना कि भांडा शाह न केवल एक निर्माता थे, बल्कि वे बीकानेर की कला और संस्कृति के महान संरक्षक भी थे, जिन्होंने ‘मथैरण कला’ के कलाकारों को आश्रय दिया।
बीकानेर का सबसे पुराना मंदिर कौन सा है और इसकी ऐतिहासिक महत्ता क्या है?
ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मीनाथ मंदिर (Laxminath Temple) बीकानेर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। इस मंदिर की नींव बीकानेर की स्थापना (1488) के समय ही राव बीकाजी द्वारा रखी गई थी। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर बीकानेर के ‘राजघराने के आराध्य देव’ का स्थान है। रोचक तथ्य यह है कि बीकानेर के शासक स्वयं को भगवान लक्ष्मीनाथ जी का दीवान (प्रतिनिधि) मानकर शासन करते थे। हमारी टीम ने महसूस किया कि इस मंदिर की बनावट में जो प्राचीनता और सादगी है, वह आपको सीधे 15वीं शताब्दी के बीकानेर में ले जाती है। यहाँ के त्योहार, विशेषकर निर्जला एकादशी और जन्माष्टमी, पूरे शहर के लिए उत्सव का केंद्र होते हैं।
भांडासर जैन मंदिर किस तीर्थंकर को समर्पित है और उनका धार्मिक महत्व क्या है?
: बीकानेर का प्रसिद्ध भांडासर जैन मंदिर जैन धर्म के 5वें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी (Lord Sumatinath Ji) को समर्पित है। भगवान सुमतिनाथ जी का प्रतीक चिह्न ‘कोक’ (चकवा पक्षी) है, जो प्रेम और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में उनकी एक भव्य प्रतिमा अष्टधातु से निर्मित है। धार्मिक दृष्टि से सुमतिनाथ जी को ‘बुद्धि और सुमति’ (अच्छी मति) का प्रदाता माना जाता है। हमारी टीम ने जब मंदिर की शांति का अनुभव किया, तो पाया कि यहाँ की वास्तुकला सुमतिनाथ जी के शांत स्वरूप को पूरी तरह प्रतिबिंबित करती है। मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए चित्र उनके जीवन और जैन दर्शन की गहरी सीख देते हैं।
भांडासर मंदिर यात्रा के 5″स्मार्ट” टिप्स (Quick Fact Box)
- फोटोग्राफी: मंदिर के भीतर फोटोग्राफी की अनुमति है, लेकिन ध्यान रखें कि पूजा कर रहे श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।
- शाम का दृश्य: तीसरी मंजिल से सूर्यास्त (Sunset) का नजारा देखने के लिए शाम 6:00 बजे के आसपास पहुँचें।
- सफाई का ध्यान: मंदिर एक पवित्र स्थल है, इसलिए यहाँ कूड़ा न फैलाएं और शांति बनाए रखें।
- मोबाइल साइलेंट: मंदिर के भीतर मोबाइल फोन को साइलेंट मोड (Silent Mode) पर रखना बेहतर रहता है।
- गाइड की सहायता: यदि आप बारीकियों को समझना चाहते हैं, तो एक स्थानीय गाइड (Local Guide) ज़रूर लें जो आपको उस्ता कला (Usta Art) के बारे में विस्तार से बता सके।
भांडासर जैन मंदिर (Bhandasar Jain Temple) केवल पत्थर और चूने (या कहें कि घी!) से बनी एक इमारत नहीं है, बल्कि यह बीकानेर के अटूट विश्वास, असीम वैभव और बेमिसाल कलाकारी का एक जीता-जागता दस्तावेज़ है। हमारी टीम ने अपनी यात्रा के दौरान महसूस किया कि यहाँ की दीवारों की चिकनाहट और हवा में घुली घी की सोंधी महक हमें उस दौर की याद दिलाती है जब आस्था के लिए संसाधनों की कोई सीमा नहीं थी।



