राजस्थान (Rajasthan) अपनी संस्कृति और त्योहारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन बीकानेर (Bikaner) की डोलची मार होली (Dolchimar Holi) का अपना ही एक अलग रोमांच है। हमारी टीम ने हाल ही में बीकानेर का दौरा किया और वहां के स्थानीय लोगों के साथ इस उत्सव का जो अनुभव (Team Experience) लिया, वह वाकई में यादगार था। हम अपना वही अनुभव आपके साथ साझा कर रहे हैं।
डोलची मार होली का इतिहास और महत्व (History & Significance)
यह परंपरा लगभग 500 साल पुरानी है। यह उत्सव मुख्य रूप से बीकानेर के हर्षों के चौक (Harshon Ka Chowk) में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत ‘हर्ष’ (Harsh) और ‘व्यास’ (Vyas) समुदाय के बीच एक ऐतिहासिक विवाद को सुलझाने और आपसी प्रेम बढ़ाने के लिए हुई थी। आज यह आपसी भाईचारे का प्रतीक बन चुका है।
डोलची मार होली की 5 मुख्य विशेषताएं (5 Quick Facts)
ऊंट की खाल से बनी डोलची (Camel Hide Vessel): इस होली में रंगों के बजाय पानी का उपयोग होता है। पुरुष ऊंट की खाल से बनी एक विशेष बाल्टी जिसे ‘डोलची’ (Dolchi) कहते हैं, उससे एक-दूसरे की पीठ पर पानी मारते हैं।
पीठ पर प्रहार (Hitting on Back): परंपरा के अनुसार, पानी केवल सामने वाले की पीठ (Back) पर ही मारा जाता है। यह एक कला है जिसमें काफी शक्ति और सटीकता की जरूरत होती है।
हफ्तों की तैयारी (Weeks of Preparation): स्थानीय लोग हफ्तों पहले से इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं। पानी कम न पड़े, इसके लिए बड़े-बड़े कड़ाव (Large Cauldrons) और टैंकर मंगाए जाते हैं।
महिलाएं और दर्शक (Spectators): जहां पुरुष चौक में डोलची से खेलते हैं, वहीं महिलाएं घरों की छतों और बालकनियों से इस अद्भुत नजारे का आनंद लेती हैं।
Happy ending और भाईचारा (Closing Ceremony): खेल के अंत में गुलाल (Gulal) उड़ाकर और एक-दूसरे को गले लगाकर पुरानी शिकायतों को भुला दिया जाता है।
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