नाहरगढ़ किला जयपुर: 5 बेस्ट सनसेट पॉइंट और घूमने की संपूर्ण गाइड

जयपुर की अरावली पहाड़ियों (Aravalli Hills) पर स्थित नाहरगढ़ किला (Nahargarh Fort) गुलाबी नगरी का सबसे खूबसूरत मुकुट माना जाता है। हमारी टीम ने जब यहाँ का दौरा किया, तो हमने पाया कि यह किला केवल इतिहास की गवाही नहीं देता, बल्कि यहाँ से दिखने वाला जयपुर का नज़ारा (City View) रूह को सुकून देने वाला है।

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नाहरगढ़ किले के 5 बेस्ट सनसेट पॉइंट (5 Best Sunset Points at Nahargarh)

  • पड़ाव रेस्टोरेंट की छत (Padao Restaurant Terrace): यहाँ से पूरे जयपुर का पैनोरमिक व्यू (Panoramic View) दिखाई देता है।
  • किले की प्राचीर (Fort Ramparts): अरावली की पहाड़ियों के पीछे डूबता सूरज यहाँ से जादुई लगता है।
  • माधवेंद्र भवन का झरोखा (Windows of Madhavendra Bhawan): यहाँ से आप राजसी ठाठ-बाट के साथ फोटोग्राफी (Photography) कर सकते हैं।
  • स्टेप वेल के पास (Near Stepwell): यहाँ की सीढ़ियों पर बैठकर शाम की ठंडी हवा का आनंद लेना एक अलग अनुभव है।
  • सनसेट पॉइंट कैफे (Sunset Point Cafe): चाय की चुस्की के साथ ढलती शाम देखना।

त्वरित जानकारी बॉक्स (Quick Fact Box – Nahargarh Fort)

  • स्थान (Place Name): नाहरगढ़ किला, जयपुर (Nahargarh Fort, Jaipur)।
  • एंट्री फीस (Entry Fee): भारतीयों के लिए ₹50 और छात्रों के लिए ₹20 (Indians & Students)।
  • समय (Timings): सुबह 10:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक (वैसे सनसेट पॉइंट देर तक खुला रहता है)।
  • मुख्य आकर्षण (Main Attraction): माधवेंद्र भवन (Madhavendra Bhawan) और पड़ाव रेस्टोरेंट।
  • कैसे पहुँचें (How to Reach): आप आमेर रोड से होते हुए टैक्सी (Taxi) या अपनी बाइक से यहाँ पहुँच सकते हैं।

हमारी टीम का अनुभव और स्थानीय गाइड की राय (Team Experience & Local Tips)

  • हमारी टीम जब यहाँ पहुँची, तो हमें स्थानीय गाइड (Local Guide) ने बताया कि इस किले का नाम पहले ‘सुदर्शनगढ़’ था, लेकिन ‘नाहर सिंह भोमिया’ की आत्मा के कारण इसका नाम नाहरगढ़ (नाहर का घर) पड़ा।लोकल ढाबा अनुभव: किले के रास्ते में मिलने वाले छोटे-छोटे ठेलों पर मिलने वाली मसाला चाय (Masala Tea) और मैगी (Maggi) का स्वाद हमारी टीम के लिए यादगार रहा। हमने महसूस किया कि शाम के समय यहाँ की शांति (Peace) आपको शहर की भागदौड़ से दूर ले जाती है।

FAQ नाहरगढ़ जो लोग सर्च करते हैं

नाहरगढ़ किले तक पहुँचने का सबसे अच्छा रास्ता कौन सा है और रास्ते में क्या सावधानी बरतें?

नाहरगढ़ किले तक पहुँचने के लिए दो मुख्य रास्ते हैं। एक रास्ता आमेर रोड (Amer Road) से होकर जाता है जो कि थोड़ा लंबा है लेकिन इसकी सड़कें बहुत अच्छी हैं और रास्ते में आपको जल महल (Jal Mahal) का सुंदर नज़ारा मिलता है। दूसरा रास्ता नाहरगढ़ की पहाड़ियों से चढ़ता हुआ है जो थोड़ा घुमावदार है। हमारी टीम का सुझाव (Team experience) है कि आप अपनी निजी कार (Private car) या किराए की टैक्सी (Rental taxi) से ही आएँ, क्योंकि शाम के बाद यहाँ सार्वजनिक परिवहन (Public transport) मिलना थोड़ा कठिन हो जाता है। रास्ते में अरावली के जंगली जानवरों का ध्यान रखें और सूर्यास्त (Sunset) के बाद ड्राइविंग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।

क्या नाहरगढ़ किले में रात के समय रुकना सुरक्षित है और यहाँ का नाइट व्यू कैसा होता है?

नाहरगढ़ किले का मुख्य परिसर शाम 5:30 बजे बंद हो जाता है, लेकिन यहाँ स्थित पड़ाव रेस्टोरेंट (Padao Restaurant) रात 10:00 बजे तक खुला रहता है। यहाँ से जयपुर का नाइट व्यू (Night view of Jaipur) इतना भव्य होता है कि इसे ‘तारे जमीन पर’ जैसा अनुभव कहा जा सकता है। सुरक्षा के लिहाज से यह जगह काफी अच्छी है क्योंकि यहाँ स्थानीय पुलिस (Local police) और सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं। हालांकि, हमारी टीम ने अनुभव किया कि अकेले घूमने के बजाय ग्रुप में आना (Coming in groups) और अपनी व्यवस्था (Arrangements) पहले से करके रखना ज्यादा बेहतर होता है।

नाहरगढ़ किले के पास अन्य कौन से पर्यटक स्थल हैं जिन्हें एक दिन में कवर किया जा सकता है?

: नाहरगढ़ किले के साथ आप आसानी से जयगढ़ किला (Jaigarh Fort) और आमेर किला (Amer Fort) को एक ही दिन में कवर कर सकते हैं। ये तीनों किले अरावली की एक ही श्रृंखला पर स्थित हैं। इसके अलावा, पहाड़ी के नीचे उतरते समय आप कनक वृंदावन (Kanak Vrindavan) और जल महल (Jal Mahal) के दर्शन कर सकते हैं। स्थानीय गाइड (Local guide) के अनुसार, यदि आप सुबह 10 बजे अपनी यात्रा शुरू करते हैं, तो आप शाम तक इन सभी ऐतिहासिक स्थलों (Historical sites) का भ्रमण पूरा कर सकते हैं और अंत में नाहरगढ़ पर सनसेट का आनंद ले सकते हैं।

नाहरगढ़ किले के अंदर स्थित ‘माधवेंद्र भवन’ (Madhavendra Bhawan) की वास्तुकला की क्या खास बात है जो इसे अन्य महलों से अलग बनाती है?

: माधवेंद्र भवन नाहरगढ़ किले का सबसे आकर्षक हिस्सा है और इसकी बनावट दुनिया भर के वास्तुकारों को हैरान करती है। महाराजा सवाई माधव सिंह ने इसे अपनी 9 रानियों के लिए बनवाया था。 इस महल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक जैसे 9 सुइट (9 identical suites) बने हुए हैं, जिन्हें इस तरह से जोड़ा गया है कि राजा जब एक रानी के कमरे में जाते थे, तो दूसरी रानियों को इसका पता नहीं चलता था。 हमारी टीम ने जब यहाँ का भ्रमण किया, तो हमने देखा कि हर सुइट में रसोई, शौचालय और छतरियां बनी हुई हैं, जो उस समय की आधुनिक वास्तुकला का प्रमाण हैं。 यहाँ की दीवारों पर की गई भित्ति चित्रकारी (Fresco paintings) और फूलों के डिजाइन आज भी उतने ही जीवंत लगते हैं。 स्थानीय गाइड (Local guide) ने हमें बताया कि यहाँ की भूलभुलैया जैसी गलियां रानियों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए ही खास तौर पर डिजाइन की गई थीं।

क्या नाहरगढ़ किले का संबंध बॉलीवुड फिल्मों से भी है? यहाँ किन फिल्मों की शूटिंग हुई है?

जी हाँ, नाहरगढ़ किला बॉलीवुड निर्देशकों की पहली पसंद रहा है। हमारी टीम ने पाया कि यहाँ के बावड़ी (Stepwell) वाले हिस्से में आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘रंग दे बसंती’ (Rang De Basanti) का मशहूर सीन फिल्माया गया था, जिसने इस किले को युवाओं के बीच और भी लोकप्रिय बना दिया। इसके अलावा, सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ के भी कई दृश्य इसी किले और यहाँ के रेस्टोरेंट में शूट किए गए हैं。 यहाँ के वैक्स म्यूजियम (Wax Museum) और शीश महल (Sheesh Mahal) ने भी फिल्मकारों को अपनी ओर आकर्षित किया है। यदि आप यहाँ जाते हैं, तो आप उन सटीक लोकेशंस को देख सकते हैं जिन्हें आपने पर्दे पर देखा है। हमारी टीम का अनुभव (Team experience) कहता है कि फिल्म प्रेमियों के लिए यहाँ का ‘स्टेप वेल’ एरिया एक परफेक्ट सेल्फी पॉइंट (Selfie point) है।

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क (Nahargarh Biological Park) क्या है और क्या इसे किले के साथ ही देखा जा सकता है?

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क किले के मुख्य परिसर से थोड़ा पहले स्थित है और यह वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक शानदार जगह है। यहाँ आप एशियाई शेर (Asiatic Lions), बंगाल टाइगर और तेंदुओं को देख सकते हैं。 यह पार्क लगभग 7.2 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यहाँ की सफारी (Safari) बच्चों और परिवारों के बीच बहुत लोकप्रिय है। हमारी टीम का सुझाव है कि यदि आप वन्यजीवों में रुचि रखते हैं, तो सुबह के समय बायोलॉजिकल पार्क का भ्रमण करें और दोपहर बाद किले की ओर बढ़ें। स्थानीय गाइड के अनुसार, शाम के समय यहाँ से वन्यजीवों की आवाज़ें और प्राकृतिक शांति का अनुभव करना बहुत ही रोमांचक होता है। ध्यान रहे कि पार्क और किले के टिकट अलग-अलग होते हैं, इसलिए अपनी योजना उसी अनुसार बनाएँ।

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