देशनोक नाम क्यों पड़ा?

1..स्थानीय मान्यताओं (Local Traditions) के अनुसार, जब माँ करणी ने इस नगर की स्थापना की थी, तब उन्होंने इसकी सीमा तय करने के लिए 10 अलग-अलग दिशाओं में निशान (Points) लगाए थे।दस (Ten) + नोक (Points/Corners) मिलकर ‘देसनोक’ बना।यह इस बात का प्रतीक था कि यह स्थान दसों दिशाओं से सुरक्षित और माता के आशीर्वाद से घिरा हुआ है।

2. “देश की ओक” (Dese-ki-Ook)एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, माता करणी ने जब इस जगह को अपने रहने के लिए चुना, तो उन्होंने इसे ‘ओक’ (ओट/शरण) कहा था। राजस्थानी भाषा में इसका अर्थ होता है ‘देश की शरण’ या सुरक्षित स्थान। समय के साथ यह शब्द बदलकर ‘देशनोक’ हो गया।

हमारी टीम का अनुभव

हमारी टीम जब देशनोक के स्थानीय गाइड (Local Guide) के साथ मंदिर के पीछे की गलियों में घूम रही थी, तो हमें वहाँ के एक पुराने ढाबे (Local Dhaba) पर बैठकर यह जानकारी मिली। वहां के बड़े-बुजुर्गों ने बताया कि देशनोक सिर्फ एक कस्बा नहीं, बल्कि भक्तों के लिए ‘आस्था की नोक’ है। वहां की प्रसिद्ध ‘केसरिया चाय’ का अनुभव हमारे लिए यादगार रहा।

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