जोहड़बीड़ बीकानेर: राजस्थान का अनसुना वन्यजीव स्वर्ग (Joharbeer Bikaner: The Hidden Wildlife Paradise of Rajasthan)

जोहड़बीड़ बीकानेर (Joharbeer Bikaner) और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (National Research Centre on Camel) की पूरी जानकारी यहाँ पाएं। एशिया के सबसे बड़े ऊंट फार्म (Camel Farm) का हमारा अनुभव, टिकट प्राइस, समय और बर्ड सेंचुरी (Bird Sanctuary) की पूरी गाइड ।

Rajasthan Travel Guide Contents

जोहड़बीड़ बीकानेर: सबसे खास आकर्षण (5 Best Things to Experience in Joharbeer)

  • जोहड़बीड़ का सबसे बड़ा आकर्षण राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (National Research Centre on Camel) है। यहाँ 300 से अधिक ऊंटों की विभिन्न नस्लें (Camel Breeds) जैसे बीकानेरी, जैसलमेरी और कच्छी को करीब से देखा जा सकता है।अनुभव: शाम को जब ऊंटों का झुंड चरकर वापस लौटता है, तो वह दृश्य फोटोग्राफी (Photography) के लिए सबसे बेहतरीन होता है। यहां एशिया का सबसे बड़ा ऊंट फार्म (Asia’s Largest Camel Farm) है।
  • गिद्धों का अनोखा संसार (World of Vultures)जोहड़बीड़ कंजर्वेशन रिजर्व (Joharbeer Conservation Reserve) को गिद्धों का ‘रेस्तरां’ भी कहा जाता है। यहाँ यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon) और सिनेरियस वल्चर (Cinereous Vulture) जैसे हजारों शिकारी पक्षी देखने को मिलते हैं।

: सर्दियों के मौसम (Winter Season) में यहाँ यूरोप और मध्य एशिया से हजारों प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) आते हैं।

ऊंट के दूध का स्वाद (Taste of Camel Milk)यहाँ के ‘कैमल मिल्क पार्लर’ (Camel Milk Parlour) में आप ऊंट के दूध से बने उत्पादों का आनंद ले सकते हैं।बजट टिप: मात्र ₹30-50 के बजट में आप यहाँ की प्रसिद्ध ऊंट के दूध की कुल्फी (Camel Milk Kulfi) और कॉफी (Coffee) का स्वाद ले सकते हैं।

उस्ता कला और म्यूजियम (Usta Art and Museum)फार्म के अंदर एक म्यूजियम (Camel Museum) है जहाँ ऊंट की खाल पर की गई बारीक नक्काशी यानी उस्ता कला (Usta Art) के नमूने देखने को मिलते हैं। यहाँ ऊंट के बालों से बने कंबल और अन्य हस्तशिल्प (Handicrafts) भी प्रदर्शित हैं।

वाइल्डलाइफ सफारी (Wildlife Safari in Bikaner)जोहड़बीड़ के खुले मैदानों में आप वन्य जीव को स्वतंत्र रूप से घूमते हुए देख सकते हैं। यह अनुभव किसी बड़ी वाइल्डलाइफ सेंचुरी (Wildlife Sanctuary) से कम नहीं है।

फैक्ट फाइल: जोहड़बीड़, बीकानेर (Fact File: Joharbeer, Bikaner)

  • पूरा नाम (Official Name): राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (National Research Centre on Camel – NRCC).
  • स्थान (Location): जोहड़बीड़, बीकानेर-जोधपुर बाईपास रोड, राजस्थान.
  • दूरी (Distance): बीकानेर रेलवे स्टेशन से लगभग 10 किमी (10 km from Bikaner Railway Station).
  • क्षेत्रफल (Total Area): यह विशाल केंद्र लगभग 2000 एकड़ (2000 Acres) के रेतीले क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit): अक्टूबर से मार्च (October to March) – इस दौरान प्रवासी पक्षी (Migratory Birds) भी देखे जा सकते हैं।
  • खुलने का समय (Opening Hours): दोपहर 12:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक (Daily 12:00 PM to 6:00 PM).
  • प्रवेश शुल्क (Entry Fee):भारतीय पर्यटक (Indian Tourists): ₹50 – ₹100.विदेशी पर्यटक (Foreign Tourists): ₹100 – ₹200.कैमरा शुल्क (Camera Charges): अतिरिक्त (लगभग ₹50-100).
  • ऊंट की नस्लें (Camel Breeds): यहाँ मुख्य रूप से 4 नस्लों—बीकानेरी, जैसलमेरी, कच्छी और मेवाड़ी ऊंटों का संरक्षण किया जाता है।
  • ऊंट म्यूजियम (Camel Museum): यहाँ ऊंट की खाल से बनी वस्तुएं और राजस्थानी हस्तशिल्प (Handicrafts) का संग्रह है।
  • मिल्क पार्लर (Camel Milk Parlour): यहाँ की ऊंट के दूध की कुल्फी और फ्लेवर्ड मिल्क (Flavored Milk) पर्यटकों की पहली पसंद है।
  • स्थापना (Established) 5 जुलाई 1984
  • lप्रबंधित (Managed by) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
  • मुख्य गतिविधि ऊंट प्रजनन (Camel Breeding) और अनुसंधान
  • जरूरी निर्देश शाम 3:00 बजे के बाद ऊंटों की वापसी (Homecoming) जरूर देखें

जोहड़बीड़ बीकानेर और कैमल फार्म का संबंध (Relationship between Joharbeer & Camel Farm)

जोहड़बीड़ (Joharbeer): यह बीकानेर शहर के बाहरी इलाके का नाम है। यह पूरा क्षेत्र एक कंजर्वेशन रिजर्व (Conservation Reserve) है जो अपने वन्य जीवन, खासकर गिद्धों (Vultures) और प्रवासी पक्षियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है।

कैमल फार्म (Camel Farm): इसी जोहड़बीड़ इलाके के अंदर भारत सरकार का संस्थान ‘राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र’ (National Research Centre on Camel) बना हुआ है, जिसे आम बोलचाल में लोग ‘बीकानेर कैमल फार्म’ कहते हैं।

क्या जोहड़बीड़ बीकानेर में वाइल्डलाइफ सफारी या जीप सफारी उपलब्ध है? (Is Wildlife Safari or Jeep Safari available in Joharbeer?)

आधिकारिक तौर पर जोहड़बीड़ में कोई सरकारी जीप सफारी (Official Jeep Safari) संचालित नहीं होती है। हालांकि, पर्यटक अपनी निजी गाड़ियों (Private Vehicles) या टैक्सी (Taxi) से इस संरक्षित क्षेत्र (Conservation Reserve) के अंदर जा सकते हैं। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यदि आपके पास अपनी गाड़ी है, तो आप खुले मैदानों में वन्य जीव को बहुत करीब से देख सकते हैं। कुछ स्थानीय गाइड (Local Guides) अपनी निजी जीप से भी पर्यटकों को यहाँ की ‘बर्ड सफारी’ (Bird Safari) करवाते हैं, जो फोटोग्राफी (Photography) के शौकीनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

FAQ जोहड़बीड़ बीकानेर

बीकानेर रेलवे स्टेशन से जोहड़बीड़ की दूरी कितनी है और वहां कैसे पहुंचें? (What is the distance from Bikaner Railway Station to Joharbeer and how to reach?)

बीकानेर रेलवे स्टेशन से जोहड़बीड़ (Joharbeer) की दूरी लगभग 10 से 12 किलोमीटर (Distance: 10-12 km) है। वहां पहुँचने का सबसे आसान तरीका ऑटो-रिक्शा (Auto Rickshaw) या ई-रिक्शा है। स्टेशन से जोहड़बीड़ तक का ऑटो किराया (Auto Fare) लगभग ₹150 से ₹250 के बीच होता है। यदि आप अपनी सुविधा चाहते हैं, तो आप ओला (Ola) या लोकल टैक्सी (Local Cab) भी बुक कर सकते हैं। यह स्थान मुख्य जोधपुर बाईपास रोड (Jodhpur Bypass Road) पर स्थित है, इसलिए यहाँ पहुँचना काफी सरल है। हमारी टीम का सुझाव है कि वापसी के लिए ऑटो पहले से ही बुक कर लें, क्योंकि वहां से खाली ऑटो मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

क्या जोहड़बीड़ डंपिंग यार्ड के पास होने के कारण परिवार के लिए सुरक्षित है? (Is Joharbeer safe for families given its proximity to the dumping yard?)

हाँ, जोहड़बीड़ परिवारों (Families) के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। चूंकि यहाँ मृत पशुओं का डंपिंग यार्ड (Carcass Dumping Site) है, इसलिए हवा के रुख के अनुसार वहां कभी-कभी तेज गंध (Strong Smell/Odour) आ सकती है। हमारी टीम (Our Team) सलाह देती है कि परिवार के साथ जाते समय मास्क (Face Mask) जरूर पहनें और बच्चों को गाड़ी से बाहर न उतारें, क्योंकि वहां आवारा कुत्तों (Stray Dogs) का झुंड हो सकता है। यदि आप केवल कैमल फार्म (Camel Farm) तक सीमित रहते हैं, तो वहां स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा गया है और गंध की समस्या कम होती है।

जोहड़बीड़ में गिद्धों और पक्षियों को देखने का सबसे अच्छा समय क्या है? (What is the best time for bird watching and vulture sighting in Joharbeer?)

बर्ड वॉचिंग (Bird Watching) के लिए सबसे बेहतरीन समय सर्दियों का मौसम (Winter Season), यानी नवंबर से मार्च के बीच होता है। इस दौरान हज़ारों की संख्या में यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon) और सिनेरियस वल्चर (Cinereous Vulture) जैसे शिकारी पक्षी (Birds of Prey) यहाँ डेरा डालते हैं। दिन के समय की बात करें तो सुबह 8:00 बजे से 11:00 बजे के बीच पक्षी सबसे ज्यादा सक्रिय (Active) होते हैं। शाम को 4:00 बजे के बाद भी आप इन्हें देख सकते हैं, लेकिन तब रोशनी कम होने के कारण फोटोग्राफी (Photography) में थोड़ी दिक्कत आ सकती है। सर्दियों में तापमान कम होने के कारण यह एक सुखद अनुभव (Pleasant Experience) रहता है।

क्या कैमल फार्म में ऊंट के दूध की आइसक्रीम और अन्य उत्पाद आसानी से मिल जाते हैं? (Are Camel Milk Ice Cream and other products easily available at the Camel Farm?)

हाँ, जोहड़बीड़ स्थित ‘राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र’ के अंदर एक समर्पित ‘मिल्क पार्लर’ (Camel Milk Parlour) है। यहाँ पर्यटकों के लिए ऊंट के दूध की कुल्फी (Camel Milk Kulfi), आइसक्रीम, फ्लेवर्ड मिल्क (Flavored Milk), चाय और कॉफी हमेशा उपलब्ध रहती है। इन उत्पादों की कीमत बहुत ही किफायती (Budget Friendly) होती है, जैसे कुल्फी मात्र ₹30-50 में मिल जाती है। स्थानीय लोग और पर्यटक यहाँ के दूध के औषधीय गुणों (Medicinal Benefits) के कारण इसे बहुत पसंद करते हैं। हमारी टीम ने वहां अनुभव किया कि यहाँ की कुल्फी का स्वाद बहुत ही यूनिक (Unique Taste) होता है जिसे आपको एक बार जरूर ट्राई करना चाहिए।

बीकानेर में गिद्ध प्रजनन और संरक्षण केंद्र का मुख्य उद्देश्य क्या है? (What is the main objective of the Vulture Conservation and Breeding Centre in Bikaner?)

बीकानेर के जोहड़बीड़ (Joharbeer) में स्थित गिद्ध संरक्षण केंद्र का मुख्य उद्देश्य विलुप्त हो रही गिद्धों की प्रजातियों का संरक्षण (Conservation of Endangered Species) करना है। भारत में गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट (Massive Decline) को रोकने के लिए यहाँ उन्हें एक सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण प्रदान किया जाता है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यह केंद्र न केवल प्रजनन (Breeding) पर ध्यान देता है, बल्कि बीमार या घायल गिद्धों के उपचार (Rescue and Rehabilitation) के लिए भी समर्पित है। यहाँ के ‘वल्चर रेस्तरां’ (Vulture Restaurant) की अवधारणा पूरी दुनिया में मशहूर है, जहाँ इन्हें सुरक्षित भोजन (Safe Food) उपलब्ध कराया जाता है ताकि ये डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) जैसी दवाओं के जहर से बच सकें।

जोहड़बीड़ केंद्र में गिद्धों की कौन-कौन सी दुर्लभ प्रजातियां देखी जा सकती हैं? (Which rare species of Vultures can be seen at the Joharbeer Centre?)

यह केंद्र दुनिया भर के पक्षी प्रेमियों (Bird Watchers) के लिए एक आकर्षण का केंद्र है क्योंकि यहाँ यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon), सिनेरियस वल्चर (Cinereous Vulture) और इजिप्शियन वल्चर (Egyptian Vulture) जैसी दुर्लभ प्रजातियां भारी संख्या में पाई जाती हैं। सर्दियों के मौसम (Winter Season) में, यहाँ लगभग 2000 से 3000 (2000-3000 birds) तक गिद्ध और शिकारी पक्षी देखे जा सकते हैं। हमारी टीम ने पाया कि यहाँ हिमालयन ग्रिफन (Himalayan Griffon) को देखना एक दुर्लभ और रोमांचक अनुभव (Rare Experience) होता है। इसके अलावा, यहाँ स्टेपी ईगल (Steppe Eagle) और अन्य शिकारी पक्षियों (Raptors) का भी जमावड़ा रहता है।

क्या आम पर्यटक इस गिद्ध प्रजनन केंद्र के अंदर जा सकते हैं? (Can general tourists visit the inside of the Vulture Breeding Centre?)

यहाँ एक महत्वपूर्ण बात यह है कि जोहड़बीड़ का ‘कंजर्वेशन रिजर्व’ (Conservation Reserve) क्षेत्र आम पर्यटकों और फोटोग्राफरों (Photographers) के लिए खुला है, लेकिन मुख्य प्रजनन केंद्र (Core Breeding Area) में प्रवेश प्रतिबंधित (Restricted Entry) हो सकता है ताकि पक्षियों की गोपनीयता और सुरक्षा (Privacy and Safety) बनी रहे। हालांकि, आप संरक्षण क्षेत्र के बाहर से और डंपिंग यार्ड (Dumping Yard) के पास से हजारों गिद्धों को खुले में देख सकते हैं। हमारी टीम का सुझाव है कि यदि आप विशेष शोध (Research) या फोटोग्राफी के लिए जा रहे हैं, तो राजस्थान वन विभाग (Rajasthan Forest Department) से अग्रिम अनुमति (Prior Permission) लेना बेहतर रहता है। ₹50-100 के बजट में आप इस अद्भुत वन्यजीव दुनिया (Wildlife World) का दीदार कर सकते हैं।

गिद्धों के संरक्षण में बीकानेर का क्या योगदान है और यह दुनिया के लिए क्यों जरूरी है? (What is Bikaner’s contribution to Vulture conservation and why is it globally important?)

बीकानेर का जोहड़बीड़ क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े ‘क्रेस्क डंपिंग साइट्स’ (Carcass Dumping Sites) में से एक है, जो गिद्धों को भोजन की निरंतर आपूर्ति (Continuous Food Supply) सुनिश्चित करता है। यह पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को साफ रखने में गिद्धों की भूमिका (Role of Vultures as Scavengers) को समझने के लिए एक वैश्विक प्रयोगशाला (Global Laboratory) की तरह है। यहाँ के संरक्षण प्रयासों के कारण ही गिद्धों की संख्या में स्थिरता (Stability in Population) देखी गई है। स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि यदि गिद्ध न हों, तो मृत पशुओं से बीमारियाँ (Diseases) फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, बीकानेर का यह केंद्र पर्यावरण शुद्धि (Environmental Purification) के लिए रीढ़ की हड्डी (Backbone) माना जाता है।

कैमल फार्म के मिल्क पार्लर में कौन-कौन से उत्पाद मिलते हैं और उनकी कीमत क्या है? (What products are available at Camel Milk Parlour and what is their price?)

बीकानेर के राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC) के अंदर एक आधुनिक मिल्क पार्लर (Camel Milk Parlour) स्थित है। यहाँ ऊंट के दूध से बनी प्रसिद्ध कुल्फी (Camel Milk Kulfi) सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, जिसकी कीमत मात्र ₹30 से ₹50 के बीच होती है। इसके अलावा, यहाँ फ्लेवर्ड मिल्क (Flavored Milk), ऊंट के दूध की चाय (Tea), कॉफी (Coffee), लस्सी (Lassi) और पनीर (Camel Milk Paneer) भी उपलब्ध होते हैं। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यहाँ मिलने वाले घी (Ghee) और मिल्क पाउडर (Milk Powder) को भी लोग काफी मात्रा में खरीदते हैं। यह पार्लर पर्यटकों के लिए सुबह से शाम 6:00 बजे तक खुला रहता है।

ऊंट के दूध के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ क्या हैं और यह किन बीमारियों में सहायक है? (What are the major health benefits of Camel Milk and which diseases does it help with?)

ऊंट का दूध (Camel Milk Benefits) औषधीय गुणों (Medicinal Properties) का खजाना माना जाता है। रिसर्च के अनुसार, यह मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए रामबाण है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से इंसुलिन (Insulin) जैसे गुण होते हैं। इसके साथ ही, यह ऑटिज्म (Autism) से पीड़ित बच्चों के विकास में भी सहायक पाया गया है। इसमें विटामिन सी (Vitamin C) और आयरन (Iron) की मात्रा गाय के दूध से कहीं अधिक होती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने में मदद करती है। जो लोग लैक्टोज इनटॉलेरेंस (Lactose Intolerance) से परेशान हैं, उनके लिए भी ऊंट का दूध एक सुरक्षित विकल्प (Safe Alternative) है। हमारी टीम ने देखा कि लोग यहाँ से ताज़ा दूध (Fresh Milk) केवल इसके स्वास्थ्य लाभों के लिए ही खरीदने आते हैं।

कैमल फार्म बीकानेर के लिए वर्तमान टिकट दरें और अन्य शुल्क क्या हैं? (What are the current ticket rates and other charges for Camel Farm Bikaner?)

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में प्रवेश के लिए टिकट की दरें पर्यटकों की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग होती हैं। वर्तमान में भारतीय पर्यटकों (Indian Tourists) के लिए प्रवेश शुल्क (Entry Fee) ₹50 प्रति व्यक्ति है, जबकि विदेशी पर्यटकों (Foreign Tourists) के लिए यह ₹100 प्रति व्यक्ति निर्धारित है। यदि आप अपने साथ कैमरा (Still Camera) ले जाना चाहते हैं, तो उसका ₹50 से ₹100 तक का अलग शुल्क देना पड़ सकता है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यदि आप छात्र (Student) हैं, तो अपना आईडी कार्ड (ID Card) साथ रखें, क्योंकि कभी-कभी शैक्षणिक भ्रमण के लिए विशेष छूट (Discount) उपलब्ध होती है। यह सारी राशि नकद (Cash) या डिजिटल पेमेंट के माध्यम से गेट पर चुकाई जा सकती है।

कैमल फार्म के खुलने और बंद होने का सही समय क्या है? (What is the exact opening and closing time of the Camel Farm?)

यह फार्म सप्ताह के सभी दिनों में पर्यटकों के लिए खुला रहता है। इसके खुलने का समय दोपहर 12:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक (Timings: 12:00 PM to 6:00 PM) है। हालांकि, हमारी टीम और स्थानीय गाइड (Local Guide) का सुझाव है कि आप यहाँ दोपहर 3:00 बजे के बाद पहुँचें। इसका कारण यह है कि दोपहर के समय अधिकांश ऊंट चरने के लिए बाहर खुले मैदानों में होते हैं और शाम 4:00 से 5:00 बजे के बीच वे अपने बाड़ों में वापस लौटते हैं। सैकड़ों ऊंटों को एक साथ धूल उड़ाते हुए वापस आते देखना एक जादुई दृश्य (Magical View) होता है, जिसे ‘कैमल होमकमिंग’ कहा जाता है।

क्या बीकानेर कैमल फार्म में ऊंट की सवारी उपलब्ध है और इसका शुल्क क्या है? (Is Camel Riding available at Bikaner Camel Farm and what is the fee?)

जी हाँ, बीकानेर कैमल फार्म में पर्यटकों के लिए ऊंट की सवारी (Camel Ride) एक प्रमुख आकर्षण है। यहाँ आप ऊंट की पीठ पर बैठकर फार्म के रेतीले रास्तों का अनुभव ले सकते हैं। वर्तमान में ऊंट की सवारी का शुल्क (Camel Ride Charges) लगभग ₹100 से ₹200 प्रति व्यक्ति (Per Person) के बीच होता है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यह सवारी छोटी दूरी के लिए होती है लेकिन यह आपको एक असली राजस्थानी रेगिस्तान (Desert Experience) का अहसास कराती है। बच्चों के लिए यह गतिविधि (Activity) बहुत ही सुरक्षित और मनोरंजक होती है क्योंकि यहाँ के ऊंट बहुत ही शांत और प्रशिक्षित (Trained) होते हैं।

कैमल फार्म के म्यूजियम में पर्यटकों के लिए क्या खास है? (What is special for tourists in the Camel Museum?)

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का यह संग्रहालय ऊंटों की दुनिया को समर्पित एशिया के सबसे अनूठे केंद्रों में से एक है। यहाँ ऊंटों के विकासक्रम, उनकी शारीरिक संरचना (Anatomy) और रेगिस्तानी जीवन में उनके महत्व को दर्शाया गया है। हमारी टीम के अनुभव (Team Experience) के अनुसार, यहाँ रखा गया ऊंट का विशाल कंकाल (Camel Skeleton) और ऊंट के बालों से बुने गए ऊनी कपड़े, कंबल और बैग आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं। इसके अलावा, यहाँ ऊंटों को सजाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक गहने जैसे ‘गोरबंद’ (Gorbandh) और काठी (Saddle) के विभिन्न प्रकार भी प्रदर्शित हैं, जो राजस्थान की कलात्मकता को दर्शाते हैं।

ऊंट की खाल पर की जाने वाली ‘उस्ता कला’ क्या है और यह यहाँ कैसे देखी जा सकती है? (What is ‘Usta Art’ on camel hide and how can it be seen here?)

‘उस्ता कला’ (Usta Art) बीकानेर की एक विश्व प्रसिद्ध कला शैली है, जिसमें ऊंट की खाल पर सोने की बारीक नक्काशी और मीनाकारी की जाती है। इस संग्रहालय में उस्ता कला के बेहतरीन नमूने जैसे सजावटी कुप्पियां (Oil Containers), फोटो फ्रेम और कलश रखे गए हैं। हमारी टीम ने पाया कि पर्यटक यहाँ इस कला की बारीकियों को देख सकते हैं कि कैसे ऊंट की खाल को साफ करके उस पर सुनहरे रंगों से जटिल डिजाइन उकेरे जाते हैं। स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि यह कला मुगल काल से चली आ रही है और आज भी बीकानेर के उस्ता परिवार इस विरासत को जीवित रखे हुए हैं। संग्रहालय में रखे ये ऐतिहासिक सामान पर्यटकों को राजस्थान के शाही वैभव की याद दिलाते हैं।

कैसा लगा हमारा आर्टिकल आपको? आपको राजस्थान में वन्य जीव संरक्षण हेतु क्या प्रयास जरूरी लगते हैं?

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