गलताजी मंदिर जयपुर: बंदरों का अद्भुत साम्राज्य और 7 पवित्र कुंडों का रहस्य (Galta Ji Temple Jaipur Guide 2026)

“गलताजी मंदिर जयपुर (Galta Ji Jaipur) गाइड 2026: क्या आप मंकी टेंपल (Monkey Temple) घूमना चाहते हैं? यहाँ जानें एंट्री फीस (Entry Fee), सूर्य मंदिर (Sun Temple) का रास्ता और सस्ता ट्रांसपोर्ट (Cheap Transport)। हमारी टीम की ग्राउंड रिपोर्ट (Our Team’s Ground Report) और फिगर की बात—मात्र ₹500 में गलताजी का पूरा सफर! अभी पढ़ें और अपनी पिंक सिटी ट्रिप को यादगार बनाएं।”

Rajasthan Travel Guide Contents

गलताजी जयपुर का इतिहास (History of Galta Ji Jaipur) क्या है और इसे ‘मंकी टेंपल’ क्यों कहा जाता है?

गलताजी का इतिहास सदियों पुराना है। माना जाता है कि यहाँ ऋषि गालव (Saint Galav) ने 100 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर देवताओं ने इस स्थान को ‘अक्षय जल’ (Perennial Water) का आशीर्वाद दिया। इसी कारण यहाँ के कुंड कभी नहीं सूखते। 18वीं शताब्दी में सवाई जयसिंह द्वितीय के दरबारी दीवान राव कृपाराम ने इस भव्य मंदिर का निर्माण गुलाबी बलुआ पत्थर (Pink Sandstone) से करवाया था। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि यहाँ की वास्तुकला किसी पारंपरिक मंदिर के बजाय एक ‘हवेली’ (Palace style) जैसी दिखती है। इसे ‘मंकी टेंपल’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ ‘रीसस मैकाक’ (Rhesus Macaque) और ‘लंगूर’ प्रजाति के लगभग 3500 से ज्यादा बंदर रहते हैं। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, ये बंदर यहाँ के रक्षक माने जाते हैं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।

गलताजी के ‘7 पवित्र कुंडों’ (Seven Holy Kunds) का क्या महत्व है और क्या यहाँ स्नान करना सुरक्षित है?

गलताजी परिसर में पहाड़ों से गिरने वाले प्राकृतिक झरनों (Natural Springs) द्वारा भरे जाने वाले 7 कुंड हैं। इनमें सबसे पवित्र ‘गलता कुंड’ (Galta Kund) माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन इन कुंडों में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि कुंडों का पानी बहुत ही साफ़ और पवित्र महसूस होता है, लेकिन यहाँ नहाते समय बंदरों से सावधान रहना चाहिए। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) सलाह देते हैं कि आप अपने कीमती सामान और खाने-पीने की चीज़ों को बैग के अंदर ही रखें, क्योंकि बंदर उन्हें छीनने में माहिर होते हैं। ₹200-300 के छोटे से खर्च में आप यहाँ के आध्यात्मिक और प्राकृतिक वातावरण का भरपूर आनंद ले सकते हैंm

Quick Fact Box: गलताजी की मुख्य जानकारी

  • प्रवेश शुल्क (Entry Fee) निशुल्क (Free)
  • कैमरा शुल्क (Camera Charges) ₹50 – ₹100 (Nominal)
  • दर्शन का समय (Timings) सुबह 5:00 से रात 9:00 बजे तक
  • दर्शन का समय (Timings) सुबह 5:00 से रात 9:00 बजे तक
  • बजट (Stay & Food) ₹1500 के बजट में जयपुर के साथ कवर संभव

गलताजी को ‘मंकी वैली’ (Monkey Valley) क्यों कहा जाता है?

गलताजी मंदिर दो ऊँची पहाड़ियों के बीच एक घाटी (Valley) में स्थित है। यहाँ का वातावरण बंदरों के रहने के लिए प्राकृतिक रूप से इतना अनुकूल है कि सदियों से यहाँ बंदरों का विशाल साम्राज्य बस गया है।

  • बंदरों का विशाल बसेरा (Huge Monkey Population):यहाँ मुख्य रूप से दो प्रजातियों के बंदर पाए जाते हैं— रीसस मैकाक (Rhesus Macaque – लाल मुँह वाले) और लंगूर (Gray Langurs)। इनकी संख्या हज़ारों में है, जिस कारण पूरी घाटी में केवल बंदर ही नज़र आते हैं। इसी वजह से इसे ‘मंकी वैली’ का नाम दिया गया।
  • नेशनल जियोग्राफिक की डॉक्यूमेंट्री (Nat Geo Connection):गलताजी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब मिली जब नेशनल जियोग्राफिक (National Geographic) ने यहाँ के बंदरों पर ‘मंकी थीफ’ (Monkey Thieves) नाम की एक मशहूर डॉक्यूमेंट्री सीरीज बनाई। इसके बाद से ही विदेशी पर्यटकों ने इसे ‘मंकी टेंपल’ और ‘मंकी वैली’ कहना शुरू कर दिया।

गलताजी की ‘मंकी वैली’ (Monkey Valley Galta Ji) में बंदरों का राजा कौन है और यहाँ उनके व्यवहार के पीछे क्या रहस्य है?

गलताजी में बंदरों का अपना एक सामाजिक ढांचा (Social Hierarchy) है। यहाँ बंदर अलग-अलग समूहों में रहते हैं और हर समूह का एक ‘लीडर’ या राजा होता है। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के आधार पर, हमने देखा कि ये बंदर यहाँ के कुंडों और मंदिर की छतों पर अपना अधिकार समझते हैं। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, यहाँ के बंदरों को ‘धार्मिक रक्षक’ माना जाता है, इसलिए स्थानीय लोग उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुँचाते और रोज़ाना फल व चना खिलाते हैं। जब आप जयपुर की इस घाटी में आते हैं, तो आपको महसूस होगा कि यह वाकई में इंसानों और जानवरों के सह-अस्तित्व का एक बेहतरीन उदाहरण है। बस ध्यान रखें कि बंदरों से सीधे आँखें न मिलाएं (No eye contact), क्योंकि वे इसे चुनौती समझते हैं।

क्या ‘मंकी वैली’ (Monkey Valley) के बंदर पर्यटकों के लिए खतरनाक हो सकते हैं और उनसे बचने के ‘स्मार्ट टिप्स’ क्या हैं?

आमतौर पर यहाँ के बंदर हिंसक नहीं होते, लेकिन वे बहुत ही शरारती और चालाक होते हैं। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि बंदर केवल तभी झपट्टा मारते हैं जब उनके सामने प्लास्टिक की थैलियां (Polythene bags) या खाने का सामान खुला हो। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) सलाह देते हैं कि अपने चश्मे, मोबाइल और कैमरा बैग को कसकर पकड़ें। स्कूटी से यहाँ आने वाले पर्यटकों को अपना हेलमेट और चाबी भी संभालकर रखनी चाहिए। यदि आप उन्हें कुछ खिलाना चाहते हैं, तो मंदिर के पास मिलने वाले चने ही खिलाएं। यह ‘मंकी वैली’ एडवेंचर और आध्यात्मिकता का एक अनूठा मिश्रण है, जिसे सावधानी के साथ पूरा किया जा सकता है।

गलताजी से जयपुर का सबसे अच्छा नज़ारा (Best view of Jaipur from Galta Ji) देखने के लिए कौन सा पॉइंट सबसे उत्तम है और वहां पहुँचने का रास्ता क्या है?

यदि आप जयपुर शहर को एक ही फ्रेम में देखना चाहते हैं, तो गलताजी के मुख्य मंदिर से ऊपर की ओर जाने वाली चढ़ाई चढ़कर ‘सूर्य मंदिर’ (Sun Temple) तक जरूर पहुँचें। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि जब आप इस ऊंचाई पर पहुँचते हैं, तो यहाँ से ‘पिंक सिटी’ का 360-डिग्री व्यू दिखाई देता है, जिसमें नाहरगढ़ किला और हवा महल की दूर की झलक भी शामिल होती है। चढ़ाई लगभग 15-20 मिनट की है, लेकिन ऊपर पहुँचने के बाद जो ठंडी हवा और नज़ारा मिलता है, वह आपकी सारी थकान मिटा देगा। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, यह रास्ता पक्का बना हुआ है, लेकिन ढलान थोड़ी खड़ी है, इसलिए आरामदायक जूते (Walking Shoes) पहनना ही समझदारी है। ₹500 के पेट्रोल और थोड़े से नाश्ते के साथ यह आपकी जयपुर यात्रा का सबसे ‘पिक्चर परफेक्ट’ (Picture Perfect) पल होगा।

फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए गलताजी से जयपुर का दृश्य (Photography from Galta Ji viewpoint) कैद करने का सबसे सही समय कौन सा है?

फोटोग्राफी के लिए सबसे जादुई समय सूर्यास्त (Sunset) का होता है। जैसे-जैसे सूरज ढलता है, पूरा जयपुर शहर गुलाबी और नारंगी रोशनी में नहा जाता है, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) कहा जाता है। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के अनुसार, शाम 5:30 से 6:30 के बीच का समय सबसे बेहतरीन फोटोग्राफी के लिए है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि रात के समय जब शहर की लाइटें जलती हैं, तो ऊपर से जयपुर तारों की ज़मीन जैसा लगता है। हालांकि, अंधेरा होने के बाद पहाड़ से नीचे उतरना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए टॉर्च या मोबाइल की लाइट साथ रखें। यह अनुभव किसी भी महंगे ‘रूफटॉप रेस्टोरेंट’ से कहीं ज्यादा खूबसूरत और किफायती (Affordable) है।

गलताजी जयपुर पहुँचने का सबसे सस्ता रास्ता (Cheapest way to reach Galta Ji) क्या है और वहां जाने के लिए कौन सा समय सबसे अच्छा रहता है?

गलताजी पहुँचने के लिए सबसे किफ़ायती तरीका जयपुर के ‘घाट गेट’ (Ghat Gate) से लोकल बस या ऑटो (Local Bus/Auto) लेना है। यदि आप शहर के शोर-शराबे से बचना चाहते हैं, तो ‘गलता गेट’ से पैदल चढ़ाई (Trekking) करके जाना सबसे बेहतरीन अनुभव है। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच यहाँ जाना सबसे सुखद होता है क्योंकि उस समय धूप कम होती है और बंदर भी शांत रहते हैं। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, ₹1500 के बजट में आप जयपुर की अन्य जगहों के साथ गलताजी को बहुत आसानी से कवर कर सकते हैं। सूर्यास्त (Sunset) के समय यहाँ से पूरे जयपुर का नज़ारा ‘पिंक सिटी’ के नाम को सार्थक करता है।

क्या गलताजी के पवित्र कुंडों में स्नान (Bathing in Holy Kunds) करना सुरक्षित है और इसके पीछे की मान्यता क्या है?

गलताजी में 7 पवित्र जल कुंड हैं, जिनमें ‘गलता कुंड’ सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ के गोमुख से निकलने वाला जल कभी सूखता नहीं है। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के आधार पर, हमने पाया कि कई श्रद्धालु यहाँ अपनी मन्नत पूरी करने के लिए स्नान करते हैं, लेकिन पानी की गहराई और बंदरों की मौजूदगी को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के दिन यहाँ स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है। ₹100-200 के छोटे से खर्च में आप यहाँ के आध्यात्मिक वातावरण का आनंद ले सकते हैं। बस ध्यान रखें कि बंदरों के सामने खाने-पीने की चीज़ें न निकालें।

गलताजी मंदिर का समय (Galta Ji Temple Timings) क्या है?

गलताजी मंदिर खुलने का समय सुबह 5:00 बजे है।बंद होने का समय रात 9 बजे है।दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 6 से 8 बजे तक का है और शाम का समय 5 से 7 बजे तक है।

गलताजी मंदिर में प्रवेश शुल्क और कैमरा चार्ज (Monkey Temple Jaipur entry fee 2026) कितना है?

साल 2026 में भी गलताजी मंदिर में प्रवेश पूरी तरह निशुल्क (Free Entry) है। हालांकि, मंदिर के रख-रखाव के लिए कैमरा और फोटोग्राफी पर एक मामूली शुल्क लिया जाता है। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के अनुसार, स्टिल कैमरा (Still Camera) के लिए ₹50 और प्रोफेशनल वीडियो कैमरा के लिए ₹100-200 तक का चार्ज देना पड़ सकता है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि कुछ लोग मंदिर के बाहर ‘एंट्री फीस’ के नाम पर पैसे मांग सकते हैं, उनसे सावधान रहें और केवल अधिकृत काउंटर पर ही भुगतान करें। यदि आप अपने मोबाइल से फोटो ले रहे हैं, तो अक्सर कोई चार्ज नहीं लगता। यह जगह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कम खर्च में राजस्थानी धरोहर (Rajasthani Heritage) को करीब से देखना चाहते हैं।

गलताजी की जयपुर से दूरी (Distance from Jaipur to Galta Ji) कितनी है?

जयपुर सिटी सेंटर (हवा महल) से दूरी 10 किमी है और 25 – 30 मिनट का समय लगता है।जयपुर रेलवे स्टेशन से 14 किमी दूर है गलताजी और 40 – 45 मिनट लगती है। सिंधी कैंप बस स्टैंड से दूरी है 13 किमी और 40 मिनट लगते हैं गलताजी मंदिर जाने में ।जयपुर एयरपोर्ट (सांगानेर) 18 किमी की दूरी है और 50 मिनट का समय लगता है।

राजस्थान में रामानंदी संप्रदाय (Ramanandi Sampradaya Rajasthan) का उदय कैसे हुआ और गलताजी को इसकी प्रधान पीठ क्यों माना जाता है?

राजस्थान में रामानंदी संप्रदाय का व्यवस्थित प्रचार 16वीं शताब्दी के दौरान हुआ। इससे पहले गलताजी का क्षेत्र ‘नाथ संप्रदाय’ के साधुओं का मुख्य केंद्र था। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि गलताजी की भौगोलिक बनावट इसे एक सुरक्षित और शांत तपस्थली बनाती है, जो भक्ति के लिए अनुकूल थी। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, आमेर के कछवाहा शासक पृथ्वीराज और उनकी पत्नी बालाबाई भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उन्होंने संत कृष्णदास पयोहारी को संरक्षण दिया, जिसके बाद गलताजी में इस वैष्णव संप्रदाय की नींव पड़ी। आज यह न केवल राजस्थान बल्कि पूरे उत्तर भारत की प्रधान पीठ है।

संत कृष्णदास पयोहारी का इतिहास (History of Krishnadas Payohari) क्या है और उन्हें ‘पयोहारी’ की उपाधि क्यों मिली?

कृष्णदास पयोहारी रामानंदी संप्रदाय के एक महान चमत्कारी संत और विद्वान थे। उनका इतिहास संघर्ष और अटूट भक्ति का प्रतीक है। उन्हें ‘पयोहारी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अन्न का पूरी तरह त्याग कर दिया था और वे केवल ‘पय’ यानी दूध का आहार (Diet of only milk) लेते थे। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के आधार पर हमने जाना कि उन्होंने आमेर के राजा के दरबार में अपनी विद्वत्ता से सभी को प्रभावित किया था। पयोहारी जी ने गलताजी में उस समय के प्रसिद्ध नाथ पंथी गुरु चतुरनाथ को शास्त्रार्थ में पराजित किया, जिसके बाद गलताजी पूरी तरह वैष्णव संप्रदाय के अधीन हो गया जब आप गलताजी की उन प्राचीन गुफाओं को देखते हैं जहाँ उन्होंने तपस्या की थी, तो वह अहसास शब्दों से परे होता है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि उनके उपदेश आज भी राजस्थान के लोक-जीवन में रचे-बसे हैं।

गलताजी को ‘उत्तर तोताद्रि’ (Uttari Totadri Galtaji) के नाम से क्यों पुकारा जाता है और इसका महत्व क्या है?

दरअसल, दक्षिण भारत में रामानुजाचार्य द्वारा स्थापित भक्ति का मुख्य केंद्र ‘तोताद्रि’ पर्वत पर स्थित है। चूंकि गलताजी में भी उसी रामानुज/रामानंदी परंपरा का पालन किया जाता है और यह उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली केंद्र बना, इसलिए इसे ‘उत्तर तोताद्रि’ (तोताद्रि ऑफ द नॉर्थ) की संज्ञा दी गई। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) यह कहता है कि यहाँ की वास्तुकला में आपको दक्षिण भारतीय मंदिरों की झलक और राजस्थानी हवेलियों का मिश्रण साफ़ दिखाई देगा। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, इसे ‘मंकी टेंपल’ कहना तो केवल एक पर्यटन का हिस्सा है, असल में इसकी पहचान ‘उत्तर तोताद्रि’ के रूप में एक महान आध्यात्मिक विश्वविद्यालय जैसी है।

गलताजी मंदिर (Galtaji Temple) का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्या है और इसका नाम ‘गलताजी’ कैसे पड़ा?

राजस्थान जीके (Rajasthan GK) के दृष्टिकोण से गलताजी एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘वैष्णव तीर्थ’ है। इसका नाम ऋषि गालव (Saint Galav) के नाम पर पड़ा है, जिन्होंने यहाँ 100 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) यह रहा है कि स्टूडेंट्स अक्सर यहाँ के ‘रामानंदी संप्रदाय’ (Ramanandi Sect) के बारे में प्रश्न पूछते हैं। 16वीं शताब्दी में पयोहारी स्वामी कृष्णदास ने यहाँ रामानंदी पीठ की स्थापना की थी, जिससे यह उत्तर भारत का सबसे प्रमुख वैष्णव केंद्र बन गया। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से इस मंदिर का निर्माण सवाई जयसिंह द्वितीय के दरबारी दीवान राव कृपाराम ने करवाया था। यहाँ की यात्रा न केवल रोमांचक है बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर को समझने के लिए एक ‘चलती-फिरती क्लास’ की तरह है।

गलताजी का प्राचीन नाम क्या है और यहाँ से जुड़ी सबसे बड़ी पौराणिक कथा (Galta Ji ancient name and myths) क्या है?

: प्राचीन ग्रंथों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, गलताजी का संबंध सतयुग से माना जाता है। इसका प्राचीन नाम ‘गालव आश्रम’ (Galav Ashram) था। पौराणिक कथा के अनुसार, यहाँ गालव ऋषि (Saint Galav) ने वर्षों तक घोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर देवताओं ने यहाँ ‘गंगा’ की एक धारा प्रकट की, जो आज भी ‘गोमुख’ से निरंतर बहती है। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) रहा है कि यहाँ के कुंडों का पानी औषधीय गुणों से भरपूर महसूस होता है। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) ने एक और रोचक मिथक बताया कि यहाँ का पानी कभी सूखता नहीं है, चाहे कितनी भी भीषण गर्मी क्यों न हो। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि अरावली की सूखी पहाड़ियों के बीच एक ऐसा जल स्रोत मौजूद है जो हज़ारों सालों से अविरल बह रहा है।

गलताजी मंदिर और वहां स्थित सूर्य मंदिर के बीच क्या अंतर (Difference between Galtaji and Sun Temple) है?

कई पर्यटक गलताजी और सूर्य मंदिर को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें भौगोलिक और धार्मिक रूप से बड़ा अंतर है। गलताजी मुख्य मंदिर घाटी (Valley) के नीचे स्थित है और यह मुख्य रूप से भगवान राम और कृष्ण को समर्पित एक वैष्णव पीठ है। इसके विपरीत, सूर्य मंदिर (Sun Temple) पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। हमारी टीम के साझा अनुभवों (Shared Experiences) के आधार पर, गलताजी मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और पवित्र कुंडों के लिए जाना जाता है, जबकि सूर्य मंदिर अपने ‘पैनोरमिक व्यू’ और सूर्यास्त के नज़ारे के लिए प्रसिद्ध है। हमारे स्थानीय गाइड (Local Guide) बताते हैं कि सूर्य मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में सवाई जयसिंह द्वितीय के दरबारी ने करवाया था और यहाँ से पूरा जयपुर शहर ‘ग्रिड पैटर्न’ में दिखाई देता है। स्कूटी लेकर जाने वालों के लिए यह सलाह है कि मुख्य मंदिर दर्शन के बाद सूर्य मंदिर तक की चढ़ाई ज़रूर करें, क्योंकि असली रोमांच उस ऊंचाई पर ही है।

गलताजी (Galta Ji) की यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि प्रकृति, इतिहास और जीव-जंतुओं के साथ बिताया गया एक अनमोल समय है। हमारी टीम का अनुभव (Our Team Experience) यह रहा है कि अरावली की इन पहाड़ियों के बीच जो शांति महसूस होती है, वह जयपुर के शोर-शराबे वाले मुख्य पर्यटन स्थलों से कोसों दूर है। हमारे लोकल गाइड (Local Guide) के साथ पहाड़ियों की पगडंडियों पर घूमते हुए और सूर्य मंदिर (Sun Temple) से जयपुर को ‘गुलाबी’ होते देखना एक ऐसा ‘देसी अहसास’ है जो आपको हमेशा याद रहेगा।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top
Scroll to Top