जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) में गोडावण (Great Indian Bustard) को देखने की पूरी गाइड। जानें 2026 में इनकी संख्या, सुदाश्री (Sudashri) सफारी का अनुभव और प्रोजेक्ट गोडावण (Project GIB) की सफलता की कहानी।
राजस्थान का राज्य पक्षी: गोडावण (State Bird of Rajasthan)
गोडावण को साल 1981 में राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित किया गया था। इसे स्थानीय लोग प्यार से ‘सोनचिरैया’ या ‘हुकना’ भी कहते हैं।दुनिया का सबसे भारी उड़ने वाला पक्षी (Heaviest flying bird in the world): क्या आप जानते हैं कि एक वयस्क नर गोडावण का वजन 15 से 18 किलो तक हो सकता है? यही कारण है कि यह बहुत ऊंचाई पर नहीं उड़ पाता।
गोडावण को देखने का सबसे अच्छा समय (Best time to spot Great Indian Bustard)
मौसम (Season): गोडावण को देखने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है।समय (Time): दिन में गोडावण झाड़ियों में छिप जाते हैं, इसलिए सुबह 6:00 से 9:00 बजे और शाम 4:00 से 6:30 बजे के बीच का समय सबसे सटीक है।ब्रीडिंग सीजन: मानसून के दौरान (जुलाई-सितंबर) इनका ब्रीडिंग सीजन होता है, जब नर गोडावण अपना खास नृत्य (Display) करते हैं।
जैसलमेर में गोडावण की संख्या 2026 (Number of Godawan in Jaisalmer 2026)
वर्ष 2026 की शुरुआत तक जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों में गोडावण की संख्या में सकारात्मक सुधार देखा गया है।वर्तमान अनुमान: विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) और ब्रीडिंग सेंटर्स को मिलाकर अब इनकी संख्या 160 से 175 के बीच पहुँच गई है।वृद्धि का कारण: अवैध शिकार पर रोक और ‘प्रोजेक्ट गोडावण’ के तहत सुरक्षित प्रजनन।
कृत्रिम गर्भाधान से गोडावण का जन्म (Godawan birth through Artificial Insemination)
यह गोडावण संरक्षण के इतिहास में सबसे बड़ी वैज्ञानिक सफलता है।विश्व में पहली बार: भारतीय वैज्ञानिकों (WII और वन विभाग) ने जैसलमेर में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के जरिए गोडावण के चूजे को जन्म दिलाने में सफलता हासिल की है।महत्व: चूंकि गोडावण साल में केवल एक अंडा देता है, इसलिए यह तकनीक उनकी आबादी को तेजी से बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।
प्रोजेक्ट गोडावण की सफलता (Success of Project GIB)
‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (Project GIB) ने पिछले कुछ वर्षों में कई मोर्चों पर जीत हासिल की है:पावर लाइन्स का समाधान: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, गोडावण क्षेत्रों में बिजली की लाइनों पर ‘बर्ड डायवर्टर’ (Bird Diverters) लगाए गए हैं, जिससे टकराकर होने वाली मौतों में कमी आई है।स्थानीय भागीदारी: अब स्थानीय ग्रामीण गोडावण के अंडों की रक्षा के लिए ‘बस्टर्ड गार्ड’ के रूप में काम कर रहे हैं।
डेजर्ट नेशनल पार्क जैसलमेर टिकट प्राइस (Desert National Park Jaisalmer Ticket Price)
पार्क में प्रवेश के लिए आपको वन विभाग (Forest Department) से अनुमति और टिकट लेनी होती है:
- विदेशी पर्यटक (Foreign Tourists): लगभग ₹300 प्रति व्यक्ति।
- भारतीय पर्यटक (Indian Tourists): लगभग ₹100 प्रति व्यक्ति।
- वाहन शुल्क (Vehicle Entry): जीप या कार के लिए लगभग ₹100 से ₹200 अलग से देने होते हैं।
- कैमरा शुल्क: साधारण कैमरे और वीडियो कैमरे के लिए अलग-अलग शुल्क (₹50 – ₹200) निर्धारित हैं।
(नोट: यह कीमतें समय-समय पर बदल सकती हैं, अतः स्थानीय कार्यालय से पुष्टि करना बेहतर है।)
डेजर्ट नेशनल पार्क में कैमल सफारी (Camel Safari in Desert National Park)
गोडावण जैसे शर्मीले पक्षी को देखने के लिए कैमल सफारी (Camel Safari) को सबसे उत्तम माना जाता है।
शोर मुक्त अनुभव: जीप सफारी के इंजन का शोर गोडावण को डरा देता है, जबकि ऊंट बिना आवाज किए रेत के धोरों पर चलता है।लोकल गाइड की सलाह: हमारी टीम ने जब स्थानीय गाइड के साथ कैमल सफारी की, तो उन्होंने बताया कि ऊंट की ऊंचाई से झाड़ियों के पीछे छिपे पक्षी आसानी से नजर आ जाते हैं।लोकल ढाबा एक्सपीरियंस: सफारी के बाद पार्क के बाहर एक छोटे से स्थानीय ढाबे पर ‘बाजरे की रोटी और लहसुन की चटनी’ खाकर हमारी टीम का दिन बन गया।
गोडावण (Great Indian Bustard): क्विक फैक्ट फाइल
- स्थानीय नाम (Local Names) गोडावण, सोनचिरैया (Sonchiraiya), हुकना (Hukna), गुरायन
- वैज्ञानिक नाम (Scientific Name) अर्डियोटिस निग्रिसेप्स (Ardeotis nigriceps)
- राजकीय दर्जा (State Status) राजस्थान का राज्य पक्षी (1981 से घोषित)
- शारीरिक विशेषता (Physical Fact) दुनिया का सबसे भारी उड़ने वाला पक्षी (Heaviest Flying Bird)
- औसत वजन (Average Weight) 15 से 18 किलोग्राम (वयस्क नर)
- ऊंचाई (Height) लगभग 1 मीटर (3.28 फीट)
- मुख्य आवास (Primary Habitat) सुदाश्री, डेजर्ट नेशनल पार्क (Jaisalmer), राजस्थान
- प्रजनन दर (Breeding Rate) बहुत कम (मादा साल में केवल 1 अंडा देती है)
- संरक्षण स्थिति (IUCN Status) गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered)
- प्रमुख खतरा (Major Threat) हाई-वोल्टेज बिजली लाइनें और हैबिटेट लॉस
- 2026 की ताज़ा खबर कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) से सफल जन्म
- भोजन (Diet) यह सर्वाहारी (Omnivorous) है; टिड्डे, भृंग (Beetles), अनाज और मरुस्थल के ‘बेर’ इसका मुख्य भोजन हैं।
- विशिष्ट आवाज (Unique Sound) प्रजनन काल में नर गोडावण एक गहरी ‘हुंकार’ (Booming Call) निकालता है, जो 500 मीटर दूर तक सुनी जा सकती है।
- प्रजनन काल (Breeding Season) मुख्य रूप से मार्च से अक्टूबर के बीच (मानसून के दौरान सबसे सक्रिय)।
- प्राकृतिक व्यवहार (Behavior) यह शुतुरमुर्ग (Ostrich) की तरह दिखता है और डरने पर उड़ने के बजाय तेज़ दौड़ना पसंद करता है।
- अंडों का संकट (Nesting Threat) ये घोंसला नहीं बनाते, ज़मीन पर ही अंडा देते हैं, जिससे सियार और आवारा कुत्तों से खतरा रहता है।
- सुरक्षा चक्र (Safety Measures) अब इनके क्षेत्रों में बिजली की लाइनों पर ‘बर्ड डायवर्टर’ (Bird Diverters) लगाए गए हैं ताकि वे टकराएँ नहीं।
- वर्तमान संख्या (Current Population 2026) लगभग 160 से 175 (जैसलमेर और ब्रीडिंग सेंटर मिलाकर)
- संरक्षण केंद्र (Conservation Center) रामदेवरा (Ramdevra) और सम (Sam) के पास विशेष ब्रीडिंग सेंटर बनाए गए हैं।
- किसान मित्र (Farmer’s Friend) यह पक्षी खेतों से टिड्डों (Locusts) और हानिकारक कीड़ों को खाकर फसलों की रक्षा करता है।
- देखने की क्षमता (Vision) इनकी ‘साइड विजन’ (Side Vision) बहुत तेज़ होती है, लेकिन सामने (Frontal Vision) की दृष्टि कमजोर होती है, जिससे ये बिजली के तारों को नहीं देख पाते।
- प्रजनन काल (Breeding Season) मुख्य रूप से मानसून (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान, जब नर पक्षी अपनी गर्दन फुलाकर ‘हुंकार’ (Booming Call) भरता है।
- घोंसला बनाने का तरीका (Nesting) ये अपना घोंसला पेड़ों पर नहीं, बल्कि सीधे ज़मीन पर घास के बीच बनाते हैं।
गोडावण विलुप्त क्यों हो रहे हैं और इनके अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा (Major Threats to Godawan) क्या है?
गोडावण के विलुप्त होने के पीछे कई वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण (Environmental Reasons) हैं। सबसे बड़ा खतरा ‘हाई-वोल्टेज बिजली की लाइनें’ (High-tension Power Lines) हैं; भारी वजन और सामने की दृष्टि (Frontal Vision) कमजोर होने के कारण ये पक्षी उड़ते समय तारों से टकरा जाते हैं। इसके अलावा, इनका प्रजनन चक्र (Breeding Cycle) बहुत धीमा है क्योंकि मादा साल में केवल एक अंडा (Single Egg) ही देती है। साथ ही, इनके प्राकृतिक आवास यानी घास के मैदानों (Grasslands) का कम होना और आवारा कुत्तों (Stray Dogs) द्वारा इनके अंडों को नुकसान पहुँचाना भी इनकी घटती संख्या का एक प्रमुख कारण है।
जैसलमेर में गोडावण देखने के लिए सबसे अच्छी जगह (Best Place to Spot Godawan) और सही समय क्या है?
जैसलमेर में गोडावण को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का सबसे प्रमुख स्थान सुदाश्री डेजर्ट नेशनल पार्क (Sudashri Desert National Park) है। यहाँ कैमल सफारी (Camel Safari) के जरिए आप बिना शोर किए इन शर्मीले पक्षियों के करीब जा सकते हैं। इन्हें देखने का सबसे सटीक समय अक्टूबर से मार्च के बीच होता है, विशेष रूप से सुबह 6:00 से 9:00 बजे के दौरान जब ये भोजन की तलाश में घास के मैदानों में निकलते हैं। मानसून के दौरान (जुलाई-सितंबर) इनका प्रजनन काल (Breeding Season) होता है, जिसे देखना एक दुर्लभ अनुभव (Rare Experience) है।
गोडावण का वैज्ञानिक महत्व क्या है और इसे ‘घास के मैदानों का फ्लैगशिप पक्षी’ (Flagship Species of Grasslands) क्यों कहा जाता है?
वैज्ञानिक दृष्टि से गोडावण एक ‘इंडिकेटर प्रजाति’ (Indicator Species) है, जिसका अर्थ है कि इसकी उपस्थिति उस क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के स्वास्थ्य को दर्शाती है। इसे ‘घास के मैदानों का फ्लैगशिप पक्षी’ (Flagship Species of Grasslands) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सूखे घास के मैदानों (Arid Grasslands) के खाद्य चक्र (Food Chain) में शीर्ष पर है। यह पक्षी भारी मात्रा में टिड्डों (Locusts), कीड़ों और छोटे सरीसृपों का शिकार करता है, जिससे खेतों में कीट नियंत्रण (Pest Control) प्राकृतिक रूप से होता है। यदि गोडावण विलुप्त होता है, तो पूरा मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो सकता है। इसीलिए, इसे बचाना केवल एक पक्षी को बचाना नहीं, बल्कि पूरे बायोडायवर्सिटी (Biodiversity) को संरक्षित करना है।
जैसलमेर के ‘गोडावण ब्रीडिंग सेंटर’ (Godawan Breeding Center) में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) की प्रक्रिया क्या है?
जैसलमेर के रामदेवरा (Ramdevra) और सम (Sam) क्षेत्रों में स्थित ‘कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर’ (Captive Breeding Center) में वैज्ञानिक एक जटिल प्रक्रिया का पालन करते हैं। चूंकि गोडावण की प्रजनन दर (Reproduction Rate) बहुत कम है, इसलिए वैज्ञानिक ‘कृत्रिम गर्भाधान’ (Artificial Insemination) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में नर गोडावण से ‘सीमेन’ (Semen) एकत्रित कर उसे मादा के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इसके बाद उत्पन्न हुए अंडों को इनक्यूबेटर (Incubators) में नियंत्रित तापमान पर रखा जाता है। जब चूजे (Chicks) बाहर आते हैं, तो उन्हें इंसानी संपर्क से दूर एक विशेष वातावरण में पाला जाता है ताकि वे भविष्य में जंगली वातावरण (Wild Environment) में जीवित रह सकें। वर्ष 2026 में इस तकनीक से चूजों का जन्म होना वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Conservation) के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
सुदाश्री और सफारी का अनुभव (Sudashri and Safari Experience)
अगर आप गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में देखना चाहते हैं, तो सुदाश्री (Sudashri) सबसे प्रमुख पॉइंट है।कैमल सफारी (Camel Safari): हमारी टीम ने पाया कि जीप के शोर (Engine Noise) से गोडावण डर जाते हैं, इसलिए ऊंट की सवारी सबसे शांत और बेहतर विकल्प है।टिकट और समय (Ticket Price & Best Time): भारतीय पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क (Entry Fee) लगभग ₹100 है। इन्हें देखने का सबसे सटीक समय अक्टूबर से मार्च के बीच, सुबह 6 से 9 बजे का है।
क्या गोडावण इंसानों के लिए खतरनाक है और क्या हम इसे छू सकते हैं या खाना खिला सकते हैं?
यह एक बहुत ही शर्मीला पक्षी (Shy Bird) है और इंसानों से बहुत दूर रहना पसंद करता है। यह बिल्कुल भी खतरनाक (Not Dangerous) नहीं है, बल्कि इंसानों को देखते ही यह झाड़ियों में छिप जाता है या उड़ जाता है। वन्यजीव नियमों (Wildlife Laws) के अनुसार, गोडावण को छूना (Touching) या उसे खाना खिलाना (Feeding) सख्त मना है और ऐसा करना कानूनी अपराध (Legal Offense) माना जाता है। हमारी टीम ने जब सुदाश्री (Sudashri) का दौरा किया, तो हमने पाया कि एक सुरक्षित दूरी (Safe Distance) बनाए रखना ही इसे देखने का सबसे सही तरीका है। पास के एक लोकल ढाबे (Local Dhaba) पर भोजन करते समय स्थानीय लोगों ने बताया कि वे खुद भी इस पक्षी की शांति का पूरा सम्मान करते हैं।
Why is the Great Indian Bustard called ‘Sohan Chidiya’? गोडावण को सोहन चिड़ी क्यों कहते हैं?
सुनहरी चमक (Golden Glare): इसके पंखों का रंग हल्का भूरा और सुनहरा होता है। जैसलमेर की रेत (Golden Sands) पर सूरज की किरणें पड़ने से यह सोने की तरह चमकता है।सुंदर चाल (Majestic Walk): ‘सोहन’ का अर्थ है सुंदर। इसकी लंबी गर्दन और राजसी चाल (Royal Dignity) मन मोह लेती है।दुर्लभता (Rare Status): सोने की तरह ही यह पक्षी भी अत्यंत कीमती (Precious) और दुर्लभ है। इन कारणों से गोडावण को सोहन चिड़ी कहते हैं।
गोडावण को ‘हुकना’ क्यों कहते हैं? (Why is Godawan called Hukna?)
जैसलमेर के ग्रामीण इलाकों में गोडावण का सबसे प्रचलित नाम ‘हुकना’ है। इसके पीछे मुख्य कारण इसकी विशिष्ट आवाज़ (Unique Sound) है:’हुक’ जैसी गहरी गूँज (Deep Booming Call): प्रजनन काल (Breeding Season) के दौरान, विशेष रूप से नर गोडावण अपनी गर्दन के नीचे की थैली (Gular Pouch) को फुलाता है और एक बहुत गहरी आवाज़ निकालता है। यह आवाज़ ‘हूँ-क’ या ‘हुक’ जैसी सुनाई देती है। इसी ‘हुक’ की आवाज़ के कारण स्थानीय लोगों ने इसका नाम ‘हुकना’ रख दिया।दूर तक सुनाई देने वाली गूँज: यह आवाज़ इतनी शक्तिशाली होती है कि शांत मरुस्थल में यह 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी तक सुनी जा सकती है।
गोडावण के अंडे की पहचान: दिखने में कैसे होते हैं? (Appearance of Godawan Eggs)
गोडावण पक्षी की सबसे बड़ी विशेषता और कमजोरी यह है कि यह अपना घोंसला पेड़ों पर नहीं बनाता। मादा गोडावण सीधे जमीन पर (Ground Nesting) घास के बीच या खुले में अंडा देती है।रंग और बनावट (Color and Texture): गोडावण का अंडा हल्के जैतूनी हरे (Olive Green) या भूरे रंग का होता है, जिस पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे (Dark Brown Speckles) होते हैं।प्राकृतिक बचाव (Natural Camouflage): अंडे का रंग मरुस्थल की सूखी घास और मिट्टी से इतना मिलता-जुलता होता है कि इसे दूर से पहचानना लगभग असंभव है। यह प्रकृति का एक सुरक्षा चक्र है ताकि शिकारी जानवरों की नजर उन पर न पड़े।आकार (Size): इसका अंडा काफी बड़ा होता है, जो लगभग एक शुतुरमुर्ग के अंडे से छोटा लेकिन मुर्गी के अंडे से कई गुना बड़ा होता है।
गोडावण के अंडे को छूना क्यों मना है?
: विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इंसान अंडे को छू लेता है, तो मादा गोडावण अपनी गंध (Scent) के कारण उस अंडे को छोड़ सकती है, जिससे चूजा मर सकता है। इसीलिए स्थानीय लोग भी इसे केवल दूर से मॉनिटर करते हैं।
क्या गोडावण ऊंट के साथ सफारी (Camel Safari) में डर जाता है?
जीप के मुकाबले ऊंट की सफारी में गोडावण कम डरता है। ऊंट की धीमी चाल और बिना शोर (No Engine Noise) के कारण आप इसके करीब जा सकते हैं।
सुदाश्री वॉच टॉवर का रोमांच (Sudashri Watchtower Experience)
अगर आप गोडावण को बिना विचलित किए देखना चाहते हैं, तो सुदाश्री (Sudashri) सबसे बेस्ट पॉइंट है। यहाँ का लकड़ी का वॉच टॉवर (Watchtower) आपको ऊंचाई से पक्षियों की अठखेलियाँ देखने का मौका देता है। हमारी टीम ने वहां की चौकी (Forest Post) पर तैनात गार्ड्स से जाना कि कैसे वे 24 घंटे इन पक्षियों की निगरानी करते हैं।
जैसलमेर में गोडावण देखने के लिए सबसे सस्ता तरीका (Cheapest way to see Godawan) क्या है?
सबसे बजट-फ्रेंडली तरीका यह है कि आप अपनी खुद की बाइक या कार से डेजर्ट नेशनल पार्क (Desert National Park) के गेट तक पहुँचें। वहां से आप सरकारी गाइड (Authorized Guide) ले सकते हैं। हमारी टीम ने जैसलमेर (Jaisalmer) के एक लोकल ढाबे (Local Dhaba) पर रुककर जाना कि अगर आप सुबह जल्दी (Early Morning) पहुँचते हैं, तो आपको महंगी सफारी के बिना भी दूरबीन (Binoculars) से इसके दीदार हो सकते हैं।
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