चंपा मेथी की सबसे बड़ी त्रासदी !करोड़ों कैसेट बिके, पर खुद दाने-दाने को तरसे

चंपा मेथी‘ का नाम राजस्थान में लोक संगीत में सबसे पहले और पूरे आदर के साथ लिया जाता है। बिना किसी औपचारिक संगीत शिक्षा (Formal education in music) के, सिर्फ अपनी गॉड-गिफ्टेड आवाज और मेहनत के दम पर इस पति-पत्नी की जोड़ी ने राजस्थानी म्यूजिक इंडस्ट्री (Rajasthani music industry) के उच्चतम शिखर को छुआ। इनके गाए गीत जैसे ‘बन्ना लाओ उड़द री दाल’ और ‘उमराव थारी बोली प्यारी लागे’ आज भी राजस्थान के बच्चे-बच्चे की जुबान पर हैं। लेकिन इस चमकीले संगीत सफर के पीछे छिपी थी एक बेहद कड़वी और दुखद सच्चाई। एक ऐसी सच्चाई जहाँ चंपालाल की मौत बीमारी और इलाज के अभाव (Lack of treatment) में हुई, वहीं मेथी देवी को अपने ही परिवार के शख्स के हाथों अपनी जान गंवानी पड़ी।

फैक्ट फाइल: राजस्थानी लोक-गायिकी की अमर जोड़ी ‘चंपा-मेथी’

  • पूरा नाम (Full Names) चंपालाल राव और मेथी देवी (पति-पत्नी की ऐतिहासिक जोड़ी)
  • मूल गाँव (Native Village) आगोलाई गाँव, बालेसर तहसील, जोधपुर जिला (Rajasthan)
  • जाति एवं पैतृक कार्य भईभाट (मूल और पैतृक काम: अपने भील जजमानों की वंशावली गाना)
  • संगीत की शिक्षा कोई औपचारिक शिक्षा नहीं (No Formal Training), विरासत में मिली कच्ची कला को खुद संवारा
  • गॉडफादर / प्रथम मार्गदर्शक जोधपुर के प्रसिद्ध भजन गायक रामनिवास राव (जिन्होंने पहली बार इनका गाना टेप-रिकॉर्डर में रिकॉर्ड किया और मंचों पर प्रमोट किया)
  • पहला रिकॉर्डेड सुपरहिट गाना ‘रामलाल मुंशी जी रे’ (जिसके बाद ये रातों-रात पूरे पश्चिमी राजस्थान में प्रसिद्ध हो गए)
  • प्रमुख कैसेट कंपनियाँ यूकी कैसेट (Uki), श्री कृष्णा कैसेट, और राम-रहीम कैसेट
  • बॉलीवुड कनेक्शन (1997) टी-सीरीज (T-Series) के मालिक गुलशन कुमार ने साल 1997 में मुलाकात की और गाने रिकॉर्ड करने की योजना बनाई, पर गुलशन कुमार की हत्या के कारण प्रोजेक्ट अधूरा रह गया।
  • स्व-लिखित प्रसिद्ध गीत ‘उमराव थारी बोली प्यारी लागे’ (चंपालाल जी द्वारा बाड़मेर के रईस चारण उमराव सिंह बारहठ की प्रशंसा में रचित)
  • पारिवारिक बिखराव का कारण जालौर के मांडवला गाँव की भगवती देवी से चंपालाल द्वारा दूसरी शादी (Second Marriage) कर लेना, जिससे मेथी अलग रहने लगीं।
  • चंपालाल जी का निधन (2000) अत्यधिक आर्थिक तंगी, तपेदिक (टीबी – Tuberculosis) और दमे की बीमारी के कारण इलाज के अभाव में वर्ष 2000 में मृत्यु।
  • मेथी देवी की अकाल मृत्यु (2001) ढोलक वादक (चाचा) मदनलाल ने आपसी रंजिश में मेथी के बेटे राजू पर हमला किया; बेटे को बचाते हुए धारदार हथियार (गुप्ती) सीने में लगने से वर्ष 2001 में मेथी की दर्दनाक हत्या हुई।
  • वर्तमान स्थिति लाखों कैसेट बेचकर कंपनियों ने मुनाफा कमाया, परंतु आज चंपा-मेथी का परिवार बेहद बदहाली और भारी आर्थिक संकट में जी रहा है।
  • प्रसिद्धि का मुख्य दौर (Peak Era) 1990 का दशक (The 90s Decade) – इसी दौर में पूरे मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में इनके कैसेट्स की सबसे ज्यादा मांग थी।
  • गीतों की मुख्य श्रेणियां (Song Categories) विविध लोक शैलियां: मंगल गीत, हालरिया (Sohal/Lullaby), हरजस (Devotional Songs), वीर रस के गीत और मारवाड़ी फाग।
  • गीत ‘ओमपुरी’ का संदर्भ यह लोकगीत मारवाड़ के स्थानीय परिवेश और किरदारों पर बुना गया एक बेहद लोकप्रिय पारंपरिक किस्सा-गीत था।
  • पारिवारिक कलह का केंद्र जालौर जिला (Jalore District) – जहाँ के एक स्टेज प्रोग्राम के बाद चंपालाल की जिंदगी में भगवती देवी आईं और वहीं से मेथी देवी के साथ उनकी जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई।
  • दिलीप राव (बड़ा बेटा) पिता चंपालाल के निधन के बाद माँ मेथी देवी को संबल देने के लिए स्टेज पर मुख्य सह-गायक (Co-singer) की भूमिका निभाने वाले पहले बेटे।
  • राजू (छोटा बेटा) परिवार का वह मासूम लड़का, जिस पर मदनलाल ने हमला किया था और जिसे बचाने की कोशिश में मेथी देवी शहीद हो गईं।
  • मदनलाल (आरोपी) मेथी देवी के पीहर (Mayra/Maternal side) का रिश्तेदार, जो संगीत मंडली में केवल ढोलक वादक (Percussionist) के तौर पर काम करता था।
  • गुलशन कुमार की मुलाकात का स्थान यह ऐतिहासिक मुलाकात दिल्ली/मुंबई के एक बड़े स्टूडियो संपर्क के दौरान हुई थी, जहाँ राजस्थानी संगीत को नेशनल प्लेटफॉर्म पर लाने की बात तय हुई थी।

चंपा-मेथी के 5 सबसे लोकप्रिय और सदाबहार गीत (5 Best Songs)

बन्ना टेशण-टेशण रेडियो लगाई दो सा (Banna Teshan Teshan Radio Logai Do Sa) – यह गीत आज भी हर मारवाड़ वासी की आंखों को नम कर देता है।

बन्ना लाओ उड़द री दाल (Banna Lao Udad Ri Dal) – शादियों और मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला एक बेहद मजेदार पारंपरिक गीत।

धुधलिये धोरां में (Dhudhaliye Dhoran Mein) – रेगिस्तान की मिट्टी की खुशबू समेटे हुए एक खूबसूरत लोकगीत।

केसरियो हजारी गुल रो फूल (Kesariyo Hazari Gul Ro Phool) – राजस्थानी संस्कृति का एक क्लासिक मांड और लोकगीत रूप।

उमराव थारी बोली प्यारी लागे (Umrao Thari Boli Pyari Lage) – चंपालाल जी द्वारा रचित एक ऐतिहासिक और सुरीली प्रस्तुति।

चंपा मेथी के सुपरहिट लोकगीत (Champa Methi Hit Rajasthani Songs)

  • “ऊपर कांच का बंगला, नीचे शरबत की दुकान” (Upar Kaanch Ka Bangla)
  • “गाड़ी मत न ले रे ढोला” (Gadi Mat Na Le Re Dhola)
  • “छोरा निंदरा निज लागे” (Chhora Nindra Nij Lage)

क्या चंपा और मेथी पति-पत्नी थे? (Relationship Between Champa and Methi)

चंपा-मेथी राजस्थान की लोक-गायिकी (Folk music) के इतिहास में पति-पत्नी की पहली सबसे प्रसिद्ध व्यावसायिक जोड़ी (Professional duo) थी। चंपालाल राव जोधपुर के बालेसर के पास स्थित आगोलाई गाँव से थे और मेथी देवी उनकी पत्नी थीं। जाति से ये दोनों ‘भईभाट’ थे और इनका पैतृक काम (Ancestral occupation) अपने भील जजमानों की वंशावली (Genealogy) गाना था। बाद में इन्होंने अपनी कला को विस्तार दिया और पारंपरिक लोक गीत गाना शुरू किया।

चंपा-मेथी की प्रतिभा को सबसे पहले किसने पहचाना और उन्हें मंच दिया?

: चंपा-मेथी की छुपी हुई प्रतिभा को सबसे पहले जोधपुर के प्रसिद्ध भजन गायक (Famous bhajan singer) रामनिवास राव ने पहचाना था। वे आगोलाई गाँव के इस जोड़े की गायिकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इनके कुछ गानों को अपने टेप-रिकॉर्डर (Tape recorder) में रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद रामनिवास राव ने विभिन्न सांस्कृतिक मंचों से चंपा-मेथी के नाम का उल्लेख करते हुए उनकी जमकर प्रशंसा की और उन्हें पहचान दिलाई।

चंपा-मेथी के करियर का पहला सुपरहिट गाना कौन सा था और किन कंपनियों ने उनके कैसेट बेचे?

चंपा-मेथी की आवाज में रिकॉर्ड हुआ पहला गाना ‘रामलाल मुंशी जी रे’ था। यह गाना रिलीज होते ही पूरे राजस्थान में तहलका मचा गया। इसके बाद उस दौर की तमाम बड़ी कैसेट कंपनियों (Cassette companies) जैसे ‘यूकी कैसेट’ (Uki Cassette), ‘श्री कृष्णा कैसेट’ (Shree Krishna Cassette) और ‘राम-रहीम कैसेट’ आदि ने चंपा-मेथी के गानों के ऑडियो कैसेट रिकॉर्ड किए, जिनकी पश्चिमी राजस्थान में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री (Record sales) हुई।

चंपा-मेथी का टी-सीरीज (T-Series) के मालिक गुलशन कुमार के साथ उनका क्या कनेक्शन था?

चंपा-मेथी के गानों की मिठास और लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि इसकी गूंज मुंबई और दिल्ली तक पहुंची। साल 1997 में म्यूजिक इंडस्ट्री के दिग्गज और टी-सीरीज (T-Series) कंपनी के मालिक गुलशन कुमार (Gulhan Kumar) ने चंपा-मेथी से विशेष मुलाकात की थी। वे उनके साथ कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स और गाने रिकॉर्ड करना चाहते थे, लेकिन इस मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद गुलशन कुमार की असमय हत्या हो गई, जिससे चंपा-मेथी का नेशनल लेवल पर छा जाने का सपना अधूरा रह गया।

चंपा-मेथी के अमर गीत ‘उमराव थारी बोली प्यारी लागे’ के पीछे की कहानी क्या है?

चंपा-मेथी केवल गाते ही नहीं थे, बल्कि नए गीतों का सृजन (Songwriting) भी करते थे। उनका बेहद लोकप्रिय गीत “उमराव थारी बोली प्यारी लागे” चंपालाल जी ने खुद लिखा था। यह गीत उन्होंने बाड़मेर जिले (Barmer district) के वाणियाबास के एक रईस चारण उमराव सिंह बारहठ की प्रशंसा और सम्मान में तैयार किया था, जो आज भी राजस्थान के कोने-कोने में गाया जाता है।

चंपा-मेथी की जोड़ी के बिखरने और उनके बीच दरार आने की क्या वजह थी?

इस हंसती-खेलती और सुरीली जोड़ी के जीवन में त्रासदी तब शुरू हुई, जब जालौर (Jalore) में एक म्यूजिकल प्रोग्राम के दौरान चंपालाल की मुलाकात मांडवला गाँव की भगवती नाम की महिला से हुई। दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे और जब इसकी भनक मेथी देवी को लगी, तो घर में आपसी झगड़े बढ़ने लगे। अंततः गुस्से में आकर चंपा ने भगवती देवी से दूसरी शादी (Second marriage) कर ली, जिससे आहत होकर मेथी हमेशा के लिए चंपा से अलग हो गई और इस महान संगीत यात्रा पर पूर्णविराम लग गया।

गायक चंपालाल राव का निधन कब और किस परिस्थिति में हुआ?

मेथी देवी से अलग होने के कुछ समय बाद ही चंपालाल तपेदिक यानी टीबी (Tuberculosis) और दमे (Asthma) जैसी गंभीर सांस की बीमारियों की चपेट में आ गए। आर्थिक तंगी और सही इलाज के अभाव (Lack of medical treatment) के कारण तड़पते हुए साल 2000 में चंपालाल राव ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

मेथी देवी की दर्दनाक और अकाल मृत्यु (Tragic Death) कैसे हुई?

चंपा की मृत्यु के बाद मेथी देवी ने अपने बड़े बेटे दिलीप के साथ स्टेज शो करना शुरू किया। चंपा-मेथी के साथ हमेशा ढोलक बजाने वाला मदनलाल (जो रिश्ते में मेथी का चाचा लगता था) खुद मुख्य गायक बनना चाहता था। जब मेथी ने मदनलाल के बजाय अपने बेटे को आगे बढ़ाया, तो मदनलाल रंजिश रखने लगा। साल 2001 में एक मामूली विवाद में मदनलाल ने मेथी के छोटे बेटे राजू पर ‘गुप्ती’ (धारदार गुप्त हथियार) से हमला किया। बेटे को बचाने के लिए मेथी बीच में आ गईं और वह हथियार उनके सीने के पार हो गया, जिससे मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।

चंपा-मेथी के जाने के बाद उनके परिवार की वर्तमान स्थिति कैसी है?

: चंपा-मेथी का अंत बेहद दुखद रहा। जिन म्यूजिक कंपनियों और प्रकाशकों ने उनके गानों को बेचकर करोड़ों रुपये कमाए, गाड़ियां खरीदीं और ऊंचे बंगले बनाए, वे उनकी मौत के बाद उनके गरीब परिवार की सुध लेने तक नहीं आए। हमारी टीम को स्थानीय सूत्रों से पता चला है कि आज चंपा-मेथी का परिवार बेहद बदहाली और आर्थिक संकट (Financial crisis) में जीवन गुजारने को मजबूर है।

चंपा मेथी मरणोपरांत सम्मान की मांग (Demand for Posthumous Award)

इंटरनेट पर राजस्थान के लोग और संगीत प्रेमी यह भी सर्च और चर्चा कर रहे हैं कि क्या सरकार ने इस महान जोड़ी को कोई सम्मान क्यों नहीं दिया है?लोग सोशल मीडिया पर “चंपा-मेथी को मरणोपरांत सरकारी सम्मान दिलाओ” (Posthumous recognition for Champa Methi) मुहिम के तहत प्रयास कर रहे हैं कि परिवार को उचित सम्मान मिले।

चंपा मेथी के सदा बहार गीत

  • ‘बिणजारी हँस हंस बोल’ (Binjari Hans Hans Bol)
  • ‘आंगणिये खोदाऊ कुआं बावड़ी’ (Aanganiye Khodau Kuan)
  • ‘रानो काचबो’ (Rano Kachbo)
  • ‘रूपलो रेबारी’ (Ruplo Rebari) और ‘बाबा ओमपुरी’ (Baba Ompuri)
  • धुधलिये धोरां में (Dhudhaliye Dhoran Mein) — पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों की खूबसूरती बयां करता गीत।
  • जिनावारिया (Jinawariya) — ग्रामीण जनजीवन और पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम को दर्शाता गीत।
  • केसरियो हजारी गुल रो फूल (Kesariyo Hazari Gul Ro Phool)
  • बीन्टी (Beenti / Angoothi) — अंगूठी के माध्यम से लोक-भावनाओं को व्यक्त करता खूबसूरत गीत।
  • बन्ना रे बागां मै झूला घाल्या (Banna Re Baagan Mein Jhula Ghalya)
  • काजलियो (Kajaliyo) — विवाह के रस्मों-रिवाजों से जुड़ा एक सुरीला ट्रैक।
  • हालारिया गीत (Halariya / Lullaby) — बच्चे के जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले मांगलिक संस्कार गीत।

चंपा-मेथी (Champa-Methi) के सुरीले गीत मारवाड़ की अमूल्य धरोहर (Cultural heritage) हैं। भले ही इस जादुई जोड़ी का अंत दर्दनाक रहा, लेकिन लोक-संगीत (Rajasthani folk music) के इतिहास में वे हमेशा अमर रहेंगे।

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